Trimbakeshwar Temple Nasik History In Hindi

Trimbakeshwar Temple Nasik History In Hindi | त्रयंबकेश्वर मंदिर का इतिहास

नमस्कार दोस्तों Trimbakeshwar Temple Information In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के बारे में जानकारी बताने वाले है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर त्र्यंबक में स्थित है। शैव मंदिर ब्रह्मगिरी पहाड़ियों की तलहटी में 18 वीं शताब्दी में मराठा शासक पेशवा नाना साहब ने स्थापित मंदिर का उल्लेख शक्तिशाली मृत्युंजय मंत्र में किया गया है जो अमरता और दीर्घायु प्रदान करता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर को शास्त्रीय वास्तुकला में डिज़ाइन किया गया है। और मंदिर परिसर में कुसावर्त या कुंड (पवित्र तालाब) भी देखने को मिलता है। उसको गोदावरी नदी का स्रोत कहा जाता है। यहाँ के ज्योतिर्लिंग की आकर्षक विशेषता उसके तीन चेहरे हैं जो भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र के प्रतीक माने जाते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर की मुख्य क्षेत्र या गर्भगृह में सिर्फ पुरुष भक्तों को ही जाने की अनुमति है। यहां प्रवेश के लिए सोवला या रेशम की धोती पहनना जरुरी है। और अभिषेकम में हिस्सा लेने बुक करना होता है।

Best Time To Visit Trimbakeshwar Jyotirlinga Nashik 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नाशिक जाने का सबसे अच्छा समय – श्रद्धालु पूरे साल इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं इसलिए त्र्यंबकेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है। क्योकि उस मौसम में महीनों में सर्दियां हल्की होती हैं। यह यात्रियों के लिए पीक सीजन एव यहां सभी चीजें महंगी होती हैं और भीड़ भी बहुत ज्यादा होती है। आपके पास ज्यादा बजट नहीं है, तो मानसून का मौसम सबसे अच्छा होता है। यानि आप जुलाई से सितंबर के महीने में जा सकते हैं। सुबह 10 बजे से पहले मंदिर में दर्शन की सलाह दी जाती है क्योंकि उस समय यहाँ भीड़ कम होती है। यहाँ सोमवार को शाम 4 से शाम 5 बजे जुलूस निकाला जाता है।

Address – Shrimant Peshwe Path, Trimbak, Maharashtra 422212

Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple in Hindi
Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple in Hindi

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Tips For Visiting Trimbakeshwar Temple

  • त्रयंबकेश्वर मंदिर के समारोहों में मुफ्त में भाग लेना चाहते हैं।
  • तो मंदिर के बाहर उपलब्ध पंडितों से परामर्श कर सकते हैं।
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर में ज्यादातर समय काफी भीड़ रहती है।
  • उसके कारन आपको सामान को सुरक्षित रखना चाहिए।
  • मंदिर में आपको कूड़ा नहीं फेकना चाहिए।
  • त्रयंबकेश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए उसके सभी नियमो का करना चाहिए।

Trimbakeshwar Temple History In Hindi

nashik trimbakeshwar temple
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गौतम ऋषि और भगवान शिव की कथा

त्रयंबकेश्वर मंदिर नासिक का इतिहास देखे तो मंदिर के इतिहास के साथ अलग-अलग किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं। रहस्ययों या ऋषियों की भूमि त्र्यंबक को गौतम ऋषि और ऋषि पत्नी अहिल्या का निवास स्थान है। यहाँ प्राचीन समय में भयंकर सूखा पड़ा तो गौतम ऋषि ने ने जल के देवता से प्रार्थना की थी। भगवान वरुण देव ने उस पर दया की और प्रार्थना का उत्तर देते वरुण ने त्र्यंबक को प्रचुर मात्रा में जल का आशीर्वाद दिया था। उस घटना के बाद दूसरे ऋषिओ को गौतम ऋषि से ईर्ष्या करने के लिए प्रेरित किया था। 

उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की कि वे गौतम ऋषि के खेत को नष्ट करने के लिए एक गाय भेजते है। एक बार गाय उनके खेत में आई और फसल खाने लगी। तो गौतम नाराज हो गये और उन्होंने दरभा (नुकीली घास) को गाय के ऊपर फेंक दिया था। उससे मासूम गाय की मौत होगई थी। उसके बाद गौतम ऋषि ने भगवान शिव से उन्हें क्षमा करने की गुहार लगाई थी।

प्रार्थना से प्रसन्न होकर शिव जी ने गंगा नदी को पृथ्वी पर उतरने का आदेश दिया और वह ब्रह्मगिरी पहाड़ी से नीचे बहती थी। गौतम ऋषि ने कुशावर्त कुंड के नाम से जाने जाने वाले बर्तन में गंगा के कुछ कीमती पानी को बचाया था। और गौतम ऋषि ने भगवान शिव से उनके बीच निवास करने का अनुरोध किया था। उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए शिव जी ने वहां रहने के लिए खुद को एक लिंग के रूप में प्रकट किया था।

प्रकाश के अनंत स्तंभ का अंत खोजने की खोज

एक दूसरी कहानी के मुताबिक भगवान शिव जी ने स्थापित प्रकाश स्तंभ के दूसरे छोर को खोजने के लिए भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के लिए भगवान शिव ने स्थापित एक लंबी खोज करनी थी। ब्रह्मा ने उसे पाने के लिए झूठ बोला था। कि आग का एक अनंत स्तंभ था। जहां शिव दूसरी तरफ इंतजार कर रहे थे। ब्रह्मा के झूठ को समझने पर शिव ने ब्रह्मा को कभी भी पूजा या श्रद्धेय नहीं होने का श्राप दिया था। उसके बाद में भगवान शिव को एक और श्राप दिया था। अपना बचाव करने के लिए शिव जमीन के नीचे छिप गए और त्र्यंबकेश्वर में एक लिंगम पाया गया था।

त्र्यंबकेश्वर फोटो
त्र्यंबकेश्वर फोटो

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Trimbakeshwar Temple Architecture

अठारहवीं शताब्दी में निर्मित नागर शैली के त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण काले पत्थर से किया गया है। एक विशाल प्रांगण में स्थित मंदिर में एक ऊंचा मंच है। उसको शिखर के रूप में जाना जाता है। जिसमें कमल के रूप में खुदी हुई एक पत्थर की प्लेट है। मंदिर की दीवारों के भीतर एक पवित्र खंड है जो मंदिर देवता की रक्षा करता गर्भगृह है।

गर्भगृह के सामने एक हॉल है, जिसे मंडप कहा जाता है। उस हॉल में तीन प्रवेश द्वार हैं। मंदिर के खंभों को फूलों, हिंदू देवताओं, मनुष्यों और जानवरों के डिजाइनों से उकेरा गया है। मगर  त्र्यंबकेश्वर मंदिर की वास्तुकला काफी जटिल और अच्छी तरह से एक साथ रखी गई है।  त्र्यंबकेश्वर मंदिर में एक दर्पण भी ऊंचाई पर रखा गया है, जिसके माध्यम से भक्त देवता के प्रतिबिंब को देख सकते हैं।

Trimbakeshwar Temple Timings And Puja

त्र्यम्बकेश्वर दर्शन और पूजा का समय बताए तो नासिक का त्र्यम्बकेश्वर मंदिर भक्तों के दर्शन करने के लिए सुबह 6 बजे खोला जाता है। और रात 9 बजे बंद होता है। यह मंदिर में पूरे दिन कई तरह की पूजा और आरती होती रहती है।

त्रिम्बकेश्वर शिव मंदिर की प्रसिद्ध महामृत्युंजय पूजा

महामृत्युंजय पूजा को भक्त पुरानी बीमारियों से छुटकारा दिलाने और स्वस्थ जीवन के लिए करते है। पूजा सुबह 7 बजे से 9 बजे होती है।

त्रिम्बकेश्वर शिव मंदिर में रुद्राभिषेक की पूजा 

उसमे अभिषेक करने पंचामृत यानि दूध, घी, शहद, दही और शक्कर का उपयोग किया जाता है। उसमे कई मंत्रों और श्लोकों का पाठ किया जाता है। यह पूजा 7 से 9 बजे होती है।

त्रिम्बकेश्वर मदिर की लघु रुद्राभिषेक पूजा

लघु अभिषेक को स्वास्थ्य और धन की समस्याओं को हल करने करते है। वह कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की मुख्य पूजा महा रुद्राभिषेक पूजा

महा रुद्राभिषेक पूजा में मंदिर में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद का पाठ करते ,है।

कालसर्प पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर

काल सर्प पूजा राहु और केतु की दशा को ठीक करने के लिए करते है। काल सर्प दोष से ग्रसित भक्त उससे मुक्ति पाने अनंत कालसर्प, तक्षक कालसर्प, कुलिक कालसर्प, वासुकी कालसर्प, शंखापान कालसर्प और महा पद्म कालसर्प की पूजा की जाती है।

नारायण नागबली पूजा

यह पूजा पितृ दोष और परिवार पर पूवर्जों के श्राप से बचने के लिए करते है।

Trimbakeshwar Images
Trimbakeshwar Images

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Festivals at the Trimbakeshwar Temple

कुंभ मेला

कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले में से एक है। हर 12 साल में एक बार आयोजित यह त्यौहार ,में लाखों तीर्थयात्रि आते है। उसमे गोदावरी में पवित्र डुबकी लगा आते हैं।

महाशिवरात्रि

फरवरी या मार्च में आयोजित महाशिवरात्रि एक विशेष दिन है। भक्तों कि  मान्यता के मुताबिक उस रात भगवान शिव और देवी पार्वती ने यहाँ वैवाहिक शपथ ली थी। महाशिवरात्रि आज भी भक्तों दिन-रात उपवास और भजन करते है।

त्रिपुरी पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा या त्रिपुरी पूर्णिमा नवंबर या दिसंबर में मनाई जाती है। उस उत्सव के पीछे की कथा राक्षस, त्रिपुरासुर और उसके तीन शहरों पर भगवान शिव की जीत है।

रथ पूर्णिमा

जनवरी-फरवरी में आयोजित रथ पूर्णिमा एक ऐसा त्योहार है। जहां पूरे शहर में रथ में भगवान त्र्यंबकेश्वर की पांच मुखी मूर्ति या पंचमुखी मूर्ति की परेड की जाती है।

trimbakeshwar temple in nashik
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Where To Stay Near Trimbakeshwar

  • होटल सम्राट
  • होटल रॉयल हेरिटेज
  • सिटी प्राइड होटल
  • होटल पंचवटी यात्री
  • होटल मिड टाउन इन
  • रामा हेरिटेज होटल
  • होटल राजमहल
  • होटल शांतिदत्ता

Places To Visit Near Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

  • दूधसागर झरना
  • पांडवलेनी गुफाएं
  • मुक्तिधाम मंदिर
  • कालाराम मंदिर
  • रामकुंड टैंक नासिक
  • माताम्बा मंदिर
  • इगतपुरी
  • भंडारदरा

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trimbakeshwar temple nasik
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How To Reach Trimbakeshwar Temple Maharashtra

ट्रेन से त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुंचें

How To Reach Trimbakeshwar Temple By Train – त्र्यंबकेश्वर शहर में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। मगर उसका निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड रेलवे स्टेशन है। वह लगभग 177 किमी दूर है। पर्यटक मुंबई या भारत के किसी अन्य शहर से नासिक रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं। उसके बाद यहां से टैक्सी की सहायता से त्र्यंबकेश्वर जा सकते हैं। 

सड़क मार्ग से त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुंचें

How To Reach Trimbakeshwar Temple By Bus – त्र्यंबकेश्वर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से पूणे और मुंबई शहर से जुड़ा हुआ है। आप उस शहरों से राज्य परिवहन की बसों, लक्जरी बसों या फिर टैक्सी से त्रयंबकेश्वर मंदिर तक पहुंच सकते हैं। यह नासिक के मुख्य शहर के केंद्र से सिर्फ 30.3 किमी दूर है। आप रोडवेज के माध्यम से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।

हवाई जहाज से त्रिम्बकेश्वर कैसे पहुंचें

How To Reach Trimbakeshwar Temple By Flight – त्र्यंबकेश्वर में कोई हवाई अड्डा नहीं है। मगर उसका निकटतम हवाई अड्डा नासिक शहर में है। वह हवाई अड्डा यहां से 31 किमी दूर है और मुंबई से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। नासिक हवाई अड्डे से पर्यटक त्रयंबकेश्वर मंदिर तक जाने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। जिसकी सहायता से बहुत आसानी से जा सकते है।

त्रयंबकेश्वर मंदिर का इतिहास
त्रयंबकेश्वर मंदिर का इतिहास

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Trimbakeshwar Temple Map त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का लोकेशन

Trimbakeshwar Temple In Hindi Video

Interesting Facts

  • शिव जी के बारह ज्योतिर्लिगों में श्री त्र्यंबकेश्वर को दसवां स्थान दिया गया है।
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है।
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भगृह के अंदर तीन छोटे-छोटे लिंग है।
  • उस ज्‍योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों विराजित हैं।
  • यहां गाय को हरा चारा खिलाने का बेहद चलन है।
  • श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर में अभिषेक और महाभिषेक के लिए पंडितों की व्यवस्था होती है।
  • त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर हिन्दुओं के पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक हैं।
  • भगवान शिव को समर्पित मंदिर अपनी भव्यता और आर्कषण से पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
  • मंदिर के ज्यर्तिलिंग से गौतम ऋषि और गंगा नदी से प्रसिद्ध कथा जुड़ी हुई है।
  • हिन्दू धर्म के शिवपुराण में त्र्यम्बकेश्वर मंदिर का उल्लेख किया गया है।
  • त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर का पुनः र्निर्माण पेशवा बालाजी ने करवाया था।

FAQ

Q .त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां स्थित है?

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है।

Q .त्रिम्बकेश्वर शिव मंदिर को किसने बनवाया था?

त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर का पुनः र्निर्माण पेशवा बालाजी ने करवाया था।

Q .त्र्यंबक ज्योतिर्लिंग की क्या विशेषता है?

त्र्यंबक ज्योतिर्लिंग की विशेषता है की उसमे में ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश विराजित हैं।

Q .नासिक में कौन कौन से मंदिर हैं?

रामकुंड, सोमेश्‍वर मंदिर, सीता गुफा, सप्‍तश्रृंगी देवी मंदिर

Q .नासिक में कितने ज्योतिर्लिंग है?

शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है नासिक में स्थित है।

Q .त्र्यंबकेश्वर किस लिए प्रसिद्ध है?

त्र्यंबकेश्वर को भारत का सबसे पवित्र शहर और भगवान गणेश का जन्मस्थान है।

Q .क्या है त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पीछे की कहानी?

ज्यर्तिलिंग से गौतम ऋषि और गंगा नदी से प्रसिद्ध कथा जुड़ी हुई है।

Q .क्या त्र्यंबकेश्वर मंदिर अभी खुला है?

हा

Q .क्या महिलाओं को त्र्यंबकेश्वर मंदिर में जाने की अनुमति है?

नहीं

Conclusion

आपको मेरा लेख Information About Trimbakeshwar Temple In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Trimbakeshwar shiva temple, Trimbakeshwar Temple inside

और Architecture of trimbakeshwar temple से सबंधीत सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।  

Note

आपके पास Trimbakeshwar Temple darshan booking की जानकारी हैं। या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिख हमे बताए हम अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद। 

! साइट पर आने के लिए आपका धन्यवाद !

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