Srirangam Temple History In Hindi

Srirangam Temple History In Hindi | श्रीरंगम मंदिर का इतिहास और जानकारी

नमस्कार दोस्तों Srirangam Temple History In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम श्रीरंगम मंदिर का इतिहास और जानकरी बताने वाले है। श्री रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्‍णु समर्पित एक पवित्र हिंदू धर्म स्‍थल है। श्रीरंगम को पृथ्वी पर का स्वर्ग (भूल वैकुंडम) कहा जाता है। जहां भगवान विष्णु अपने उपासकों को रंगनाथ के रूप में स्वीकार करते हैं। यह मंदिर-नगर समृद्ध संस्कृति, विरासत और इतिहास का स्थल है। जो कावेरी और कोलीदम (कावेरी और कोलिडम) नदियों के बीच स्थित है। 

भगवान विष्‍णु को समर्पित यह मंदिर से कई कहानियां और कथाएं जुड़ी हुई है। यह मंदिर में भगवान विष्‍णु की पूजा की जाती है। और भगवान को रंगनाथन के रूप में पूजा जाता है। द्रविण शैली में बना हुआ टेम्पल संतों द्वारा कई महिमाएं का वर्णन किया गया है जो दिव्‍यप्रबंध को उजागर करते है। जो दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध वैष्‍णव मंदिरों में से एक मानाजाता है। यह मंदिर पर कई आक्रमण हुए है। प्राचीन काल से ही डच, पुर्तगाली और अंग्रेजों ने कई बार आक्रमण किया है। 

Srirangam Temple History In Hindi

श्रीरंगम मंदिर का इतिहास देखे तो टेम्पले के शिलालेख चोला, पंड्या, होयसला और विजयनगर साम्राज्य का उल्लेख बताता है। उस राजाओ ने 10 वी शताब्दी में तिरुचिरापल्ली जिले पर अपना साम्राज्य स्थापित किया था। उसके साथ मंदिर 9 वी से 16 वी शताब्दी के बीच से समय का इतिहास उजागर है। प्राचीन समय में रंगनाथन की प्रतिमा स्थापित थी। वहाँ जंगल बन चूका था। लेकिन एक दिन चोला राजा को यह भगवान की प्रतिमा दिखाई दी थी। उस चोला राजा ने रंगनाथस्वामी मंदिर पुनःनिर्मित करले दुनिया के सबसे विशाल मंदिरों में से एक बनाया था।

Sri ranganathaswamy temple photo 
Sri ranganathaswamy temple photo

इतिहास के मुताबिक चोला, पंड्या, होयसला और नायक राजाओ ने अपने शासन में यह मंदिर को तमिल वास्तुकला में समय समय पर नवीकरण भी किया था। 1310 से 1311 में दिल्ही से मलिक काफूर ने यह मंदिर पर आक्रमण किया था। और बाद में देवताओ की मूर्ति चुरा ली और दिल्ली लेकर चला। श्रीरंगम के सभी भक्त दिल्ली गए और मंदिर का इतिहास बताकर सम्राट को  मनवाकर । उनकी प्रतिभा को देखकर सम्राट काफी खुश हो गए। और उन्होंने उपहार स्वरुप श्रीरंगम की प्रतिमा वापस दे दी।

Sri Ranganathar Temple Address

श्री रंगनाथर स्वामी मंदिर,
श्रीरंगम, तिरुचिरापल्ली,
तमिलनाडु, भारत,

पिनकोड – 6200 006।

Sri ranganathaswamy temple photo 
Sri ranganathaswamy temple photo

Srirangam Temple Timings

दर्शनार्थी और पर्यटकों के लिए मंदिर प्रतिदिन सुबह 6 बजे खुलता है। और रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। लेकिन आपको बतादे की त्योहार के दिनों में समय बदल सकता है।

रंगनाथस्वामी मंदिर श्रीरंगम जाने का सबसे अच्छा समय

भक्तो  बतादे की श्रीरंगम मंदिर में साल भर उत्सव होते हैं। इसी लिए कोई भी समय में पर्यटक जा सकते है। लेकिन यह स्थल घूमने का सबसे अच्छा समय अगस्त और फरवरी के बीच है। क्योकि गर्मीयो में यांनी अप्रैल से जुलाई तक बहुत गर्म होने के कारन यहाँ जाने से बचे रहे। अगर जाना चाहते है। तो गर्मी की कुछ तकलीफ है। नहीं तो कोई भी समय में पर्यटक जा सकते है।

श्रीरंगम मंदिर का फोटो
श्रीरंगम मंदिर का फोटो

श्रीरंगम मंदिर ड्रेस कोड और नियम

भक्तों और पर्यटकों को पश्चिमी पोशाक के साथ मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता है। टैंक टॉप, बिना आस्तीन के कपड़े, शॉर्ट्स, स्कर्ट कुछ ऐसे कपड़े हैं जिनकी इस मंदिर में अनुमति नहीं है। यात्रियों को सलाह दी जाती है। कि वे मंदिर में प्रवेश करने के लिए पारंपरिक भारतीय परिधानों में या स्कार्फ से ढकें बाद में मंदिर में प्रवेश कर सकते है । मंदिर के कुछ क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। यानि गर्भगृह में सिर्फ पुजारी के लिए ही अनुमति है। आम जनता को भगवान की मुख्य मूर्ति को छूने की अनुमति नहीं है।

Srirangam Temple Architecture

भगवान विष्‍णु समर्पित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर कावेरी और कोलिदाम नदियों के बीच 10’52 डिग्री उत्तर और 78’43 डिग्री पूर्व में स्थित है। द्रविड़ शैली में बनाया गया नयनरम्य मंदिर स्थापत्य का एक चमत्कार हैं। यह दुनिया को सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होने का गौरव प्राप्त है। यह मंदिर अंगकोर वाट कंबोडिया के मंदिर को भी पीछे छोड़ देता है। मंदिर 156 एकड़ भूमि पर 4,116 मीटर की परिधि के साथ खड़ा है। अदभुत 7 प्रकरम मंदिर-नगर में 21 गोपुरम हैं, जिनकी ऊंचाई 237 फीट (72 मीटर) है।

मंदिर हर दिन 1000 से भी ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह मंदिर को तिरुवरंगा तिरुपति, पेरियाकोइल, भूलोगा वैकुंडम और भोगमंडबम के नाम से भी जाना जाता है। सभी वैष्णवों के लिए महत्वपूर्ण यह मंदिर में पारंपरिक रूप से पूजा के थेंकलाई पैटर्न का पालन करता है। नदियों और प्राकृतिक नजरो में वैदिक काल में गोदावरी नदी के तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था।

श्रीरंगम मंदिर का इतिहास और जानकारी
श्रीरंगम मंदिर का इतिहास और जानकारी

Srirangam Temple Festival

श्रीरंगम मंदिर ब्रह्मोत्सव

श्रीरंगम मंदिर में मार्च-अप्रैल यानि तमिल माह पंगुनी में ब्रह्मोत्सव का आयोजन होता है। भेरीराथान, ध्रजरोहन, यागसला, रक्षाबंधन और अंकुरपुराण  त्यौहार के पहले की जाती है। त्यौहार के दूसरे दिन देवता की प्रतिमा को मंदिर के गार्डन ले जाया जाता है। और कावेरी नदी से होते हुए देवताओ को तीसरे दिन जियार्पुरम ले जाया जाता है।

स्वर्ण आभूषण उत्सव

यह उत्सव में देवता की प्रतिमाओ को सोने और चाँदी के भगोनो में पानी लेकर डुबोया जाता है। श्रीरंगम मंदिर में मनाये जाने वाले वार्षिक स्वर्ण आभूषण उत्सव को ज्येष्ठाभिषेक के नाम से पहचानते है। उसको जून-जुलाई यानि तमिल माह आनी के समय में मनाया जाता है।

Srirangam temple images
Srirangam temple images

वैकुण्ठ एकादशी

यह उत्सव दिसम्बर-जनवरी यानि तमिल मर्गाज्ही माह में पागल पथु (10 दिन) और रा पथु (10 दिन) नाम का 20 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव है। पहले 10 दिन पागल-पथु उत्सव मनाया जाता है। 10 दिनों तक रा पथु नाम का उत्सव मनाया जाता है। और रा पथु के पहले दिन वैकुण्ठ एकादशी मनायी जाती है। यह मंदिर का सबसे पवित्र एकादशी वैकुण्ठ एकादशी को ही माना जाता है।

श्रीरंगम मंदिर के दुसरे मुख्य उत्सव

मंदिर में मनाये जाने वाले अन्य त्योहारों में रथोत्सव का आयोजन जनवरी-फरवरी होता है। उसमे मंदिर के मुख्य देवता को रथ पर बिठाकर मंदिर की प्रतिमा करते है। पौराणिक गज-गृह घटनाओ के आधार पर चैत्र पूर्णिमा का होता है। उसके अलावा मंदिर में वसंतोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह महोत्सव को 1444 AD के समय से मनाया जाता है। उसके साथ यहाँ श्री जयंती, पवित्रोत्सवव्था और ईपुसम प्रमुख त्यौहारो में से एक है।

फोटो श्री रंगनाथस्वामी मंदिर
फोटो श्री रंगनाथस्वामी मंदिर

श्री रंगनाथर मंदिर रहस्य

श्रीरंगम में एशिया का सबसे बड़ा गोपुरम है उसकी ऊंचाई 72 मीटर है। श्री रंगनाथ मंदिर का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। गरुड़ की मूर्ति सभी रंगनाथस्वामी मंदिरों में सबसे बड़ी है। श्रीरंगम रामानुजर, बुट्टर वडाकुथिरुवीथी पिल्लई, पिल्लई लोकाचार्य का जन्मस्थान है। 12 अलवरों में से 11 ने श्रीरंगम का गुणगान किया है। धर्मवर्मन, रवींद्रवर्मन, चंद्रन और विभीषण ने यहां भगवान से प्रत्याक्षम प्राप्त किया था। भगवान ने स्वयं स्वामी देसिकर को कवितारकिथा सिंहन की उपाधि दी थी। स्वामी देसिकर ने भगवान के चरणों में एक गीत समर्पित किया जिसे पादुकासहस्राम कहा जाता है।

Srirangam Temple के आसपास घूमने लायक पर्यटक स्थल

  • श्रीरंगम मेलूर अय्यर मंदिर
  • जंबुकेश्वर मंदिर
  • भारतीय पैनोरमा
  • रॉकफोर्ट यूसीची पिल्लार मंदिर
  • श्री रंगम रंग नाथर मंदिर

श्रीरंगम मंदिर कैसे पहुंचे 

Srirangam temple photo 
Srirangam temple photo

ट्रेन से श्रीरंगम मंदिर कैसे पहुंचे

पर्यटक अगर ट्रेन से सफर करते हुए श्रीरंगम तक जाना चाहते हैं।

तो बता दें कि  ट्रेन के रास्ते, मंदिर त्रिची रेलवे स्टेशन से 6 किमी दूर है।

स्टेशन और मंदिर के बीच बस सेवा का लाभ उठाया जा सकता है।

श्रीरंगम के रेलवे स्टेशन तक चेन्नई से चेन्नई-कन्याकुमारी रेलवे ट्रैक पर यात्रा करने

वाली किसी भी प्रमुख ट्रेन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग से श्रीरंगम मंदिर कैसे पहुंचे

पर्यटक अगर सड़क मार्ग से श्रीरंगम जाना चाहते है। तो त्रिची सेंट्रल बस स्टैंड, तमिलनाडु के अधिकांश भागों के लिए सीधी सेवाएं उपलब्ध कराता हैं। बस के माध्यम से, मंदिर त्रिची बस स्टैंड से 10 किमी दूर है। श्रीरंगम तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को बस स्टैंड से स्थानीय बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा मिल सकता है। 

फ्लाइट से श्रीरंगम मंदिर कैसे पहुंचे

पर्यटक अगर हवाई जहाज से श्रीरंगम जाना चाहता हैं। तो बता दें कि हवाई अड्डा: उड़ान के माध्यम से, निकटतम हवाई अड्डा त्रिची हवाई अड्डा है। त्रिची / तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से श्रीरंगम 15 किमी दूर स्थित है। त्रिची हवाई अड्डा, चेन्नई, बैंगलोर, तिरुवनंतपुरम, सिंगापुर, दुबई, शारजाह, कुवैत, कोलम्बो और मलेशिया से जुड़ा हुआ है।

Srirangam Temple Map श्रीरंगम मंदिर का नक्शा

Srirangam Temple History In Hindi Video

Interesting Facts

  • श्रीरंगम मंदिर को धरती का वैकुण्ठ कहते हैं।
  • 156 एकड़ में फैला यह मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव मंदिर माना जाता है।
  • दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली शहर त्रिची या तिरुची के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्राचीन काल में गोदावरी नदी के तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था।
  • श्री रंगनाथ स्वामी स्वयं श्री विष्णु भगवान् श्री हरि विष्णु शेषनाग शैय्या पर विराजे हुए हैं।

FAQ

Q : श्री रंगनाथस्वामी मंदिर किस देवता को समर्पित है?

Ans : श्री रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्‍णु समर्पित एक पवित्र हिंदू धर्म स्‍थल है।

Q : सबसे ज्यादा मंदिर किस देश में है?

Ans : सबसे ज्यादा मंदिर भारत देश में है।

Q : रंगनाथ मंदिर कहा स्थित है?

Ans : रंगनाथ मंदिर श्रीरंगम, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु में स्थित है।

Q : तिरुचिरापल्ली किस राज्य में है?

Ans : तमिलनाडु राज्य में तिरुचिरापल्ली स्थित है।

Q : रंगनाथस्वामी मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?

Ans : रंगनाथस्वामी मंदिर को धर्म वर्मा चोल ने और पुनः निर्माण चोल राजा किलिवलवन ने किया।

Conclusion

आपको मेरा Srirangam Temple History बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Ranganathaswamy Temple और

srirangam temple dress code से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कहै मेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note

आपके पास sri ranganathaswamy temple srirangam या srirangam temple height की कोई जानकारी हैं। 

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे / तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद। 

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10 thoughts on “Srirangam Temple History In Hindi | श्रीरंगम मंदिर का इतिहास और जानकारी”

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