Sabrimala Temple History in Hindi Kerala

Sabrimala Temple History in Hindi Kerala | सबरीमाला मंदिर का इतिहास

sabrimala temple अयप्पा भगवान का मंदिर है, और kerala sabarimala की राजधानी तिरुवनंतपुरम से करीबन 175 किलोमीटर की दुरी पर पहाड़ियों में उपस्थित है। 

सबरीमाला के भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्वी भी कहा जाता है। इसी वजह से इस मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली स्त्रीयो के जाने पर प्रतिबंध रखा गया है। sabrimala temple के संचालको का यह मानना है की यह मंदिर में करीबन 1500 साल से महिलाओ के प्रवेश पर प्रतिबंद है। अगर आप भी इस मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा। 

मंदिर का नाम  सबरीमाला मंदिर 
दूसरा नाम पुणकवन मंदिर
राज्य  केरल 
शहर तिरुवनंतपुरम
मंदिर के भगवान  भगवान श्री अयप्पा
मंदिर की प्रतिमाये अयप्पन, मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश,नागराज

Sabrimala Temple History in Hindi –

कम्बन रामायण और महाभागवत के अष्टम स्कंध के साथ साथ स्कंदपुराण के असुर कांड में जिस शिशु शास्ता का भी विवरण है। और अयप्पन भगवान भी उनके रूप जाने जाते है। शास्ता का जन्म मोहिनी रूपधारी विष्णु और भगवान शिव के मिलन के जरिये हुवा था।

और यह भगवान अयप्पन का शानदार मंदिर पुणकवन के नाम से भी प्रख्यात 18 पहाड़ियों के बिच में उपस्थित एक धाम है.जिसको सबरीमला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर से भी जाना जाता है। यह भी उल्लेख है की परशुराम ने भगवान अयप्पन की पूजा आराधना करने के लिए सबरीमला में मूर्ति की स्थापना की थी। और अनेक सारे लोग उसको रामभक्त शबरी के नाम से मिलकर देखते है। 

sabarimala history करीबन 700 -800 साल पहले दक्षिण में शैव के साथ साथ वैष्णवों के अंदर वैमनस्य ज्यादा हो गया था। और तब उस भेद भावो को दूर करने के लिए श्री भगवान अयप्पन के विचारो को रखा गया। दोनों की बराबरी के लिए यह धर्मतीर्थ बनाया गया था। आप भी यह मंदिर मिलन और सद्भाव की निशानी मणि जाती है।  और इस मंदिर में कोय भी कास्ट का और धर्म का पालन करने वाले लोग आ सकते है।

सबरीमाला मंदिर का इतिहास
सबरीमाला मंदिर का इतिहास

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Sabrimala Temple का स्थापत्य –

sabarimalaiq मंदिर स्थापत्य के कायदे के मुताबिक बहुत ही खूबसूरत है ,और आंतरिक शांति का भी अहेसास होता है। जैसे की यहा 18 पहाड़ियों के मध्यम में उपस्थित है। और उसीकी तरह सबरीमला मंदिर के प्रागण में जाने के लिए भी 18 सीढिया पार करनी पड़ती है सबरीमला मंदिर में भगवान अयप्पन के साथ साथ मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराज जैसे महान देवताओ की मुर्तिया भी है। 

sabrimala temple के भगवान अयप्पन के किसी भी उत्सव के जरिये भगवान अयप्पन का घी से अभिषेक किया जाता है। और सभी मंत्रों को भरी आवाज में उच्चारण किया जाता है। सबरीमाला मंदिर के परिसर में एक कोने में बहुत ही सुन्दर और तैयार करके हाथी को खड़ा रखा जाता है। पूजा आराधना के बाद प्रसाद के रूप में सबको चावल गुड़ और घी से बनाया हुवा प्रसाद दिया जाता है। 

मकरसंक्रांति के शिवाय नवंबर की 17 तिथि को भी यह पर सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाता है। मलयालम महीनो के प्रथम पांच दिनों तक मंदिर के कपाट खोले जाते है। और इसके बावजूद भी shabarimala मंदिर के द्वार आम यात्रिको के लिए पुरे साल के लिए बंद रहते है। 

Sabrimala Temple की मान्यता –

sabrimala temple में अधिक मात्रा में पुरुष भक्त देखने को मिलते है। और महिला श्रद्धालु बहुत ही काम देखने को मिलते है। क्योकि sabarimala story मंदिर के भगवान श्री अयप्पन ब्रह्माचारी थे। उसीकी वजह से यहाँ पर छोटी लड़किया आ सकती है और वो रजस्वला न हुई या फिर बूढी औरते जो इससे मुक्त हो गाए हो। 

जाती – धर्म का बंधन न मानने के बावजूद भी यह सारे बंधन भक्तो को मानना होता है। दूसरे धर्म निरपेक्षता का अद्भुत उदाहरण यहां पर देखने को मिलते है की यहाँ से थोडिक दुरी पर एरुमेलि नामक जगह पर  भगवान श्री अयप्पन के मदद गार मुस्लिम धर्मानुयायी बाबर का मकबरा भी स्थित है और वहा अपना सर टेके बिना यात्रा सम्पूर्ण नहीं मानी जाती है। 

दो मतों के समन्वय के बावजूद भी धार्मिक सहिष्णुताका एक साधारण रूप यहाँ दिखाए देता है।

अलग अलग धर्म व्यक्ति को व्यापक दिखावा देता है,यह भी बिलकुल सही है।

व्यापक इस लिहाज से की है की अगर हमारे मन में सच्ची भक्ति हो

तो ईश्वर और भक्त में भेद ख़त्म हो जायेगा। 

मनो कामना पूर्ति – 

यह भी कहा जाता है की आप अगर कोय इंसान तुलसी या फिर रुद्राक्ष  माला पहनकर और व्रत रखकर सिर पर नैवेद्य से भरी पोटली लेकर यहाँ आये है तो उनकी सम्पूर्ण मनो कामना अवश्य पूरी होती है। माला पहनने पर भक्त भी स्वामी कहलायेगा। 

तब ईश्वर और भक्त के अंदर कोय फर्क नहीं बचेगा।

ठीक उसी तरह श्री धर्मषष्ठ मंदिर में लोग जत्थो में आ जाते है।

जो भी इंसान इस जत्थे का नेतृत्व करेगा उसके हाथों में इरामुडी रहेगी। 

पहले अनेक सारे लोग अनेक किलोमीटर की यात्रा पैदल करते थे।

साथ अपने खाने पिने की सामग्री भी पोटलियों में साथ लेकर चलते थे।

ठीक ऐसे ही तीर्थोटन का प्रवचन था। लेकिन अभी ऐसा कुछ भी नहीं है।

परन्तु भक्ति भाव बिलकुल वही का वही है। 

sabrimala temple की भक्ति भाव से इस जगह पर करोड़ो की संख्या में भक्त आते है।

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निःशुल्क  दुघटना बिमा –

एक साल पहले नवंबर से जनवरी के दौरान उस सबरीमाला मंदिर में आने वाले लोगो की संख्या करीबन पांच करोड़ से भी ज्यादा थी।

मंदिर की सभी सुविधा की देखरेख करने वाले ट्रावनकोर देवासवम बोर्ड के मुताबिक

इस अवधि में तीर्थस्थल ने केरल की अर्थव्यवस्था को 10 हजार करोड़ रुपये दान में दिये थे। 

यह पर बोर्ड श्रद्धालुओ की रक्षा के लिए पूरी जवाबदारी भी लेते है। यह तीर्थ यात्रिको का बिलकुल निःशुल्क  दुघटना बिमा करता है। इस योजना के अंदर खरोच लगने पर या फिर मुत्यु हो जाने पर श्रद्धालु या तो उसके परिवार को एक लाख रूपया दिया जाता है। इसके बावजूद भी बोर्ड के या फिर सरकारी कर्मचारियों के साथ भी अगर कोय हादसा होतो उनको बोर्ड के जरिये डेढ़ लाख रूपया तक दिया जाता है।

Sabrimala Temple
Sabrimala Temple

Sabrimala Temple का महोत्सव –

मान्यताओ के मुताबिक पंडालम के राजशेखर ने अय्यप्पा को अपने पुत्र के रूप गोद लिया था।

परन्तु भगवान अय्यप्पा को ये सब अच्छा बिलकुल नहीं लगा था। 

फिर उन्होंने अपना महल छोड़कर निकल गये। आज भी यह प्रथा भी प्रचलित है। 

यहाँ पर हर साल मकर संक्रांति के तहेवार पर पंडालम राजमहल से अय्यप्पा के अलंकारों को संदूक में भरकर एक महा शोभायात्रा निकाली जाती है। जो वहा से करीबन 90 किलोमीटर की यात्रा तय करके तीन दिन में sabrimala mandir  पहुंच जाती है। इसी दिन यहा पर एक बहुत ही सुन्दर निराली घटना होती है। और पहाड़ी की कांतमाला चोटी पर असाधारण चमक वाली ज्योति देख ने को मिलती है। 

15 नवंबर का मंडलम और 14 जनवरी की मकरसंक्रांति और यह सब sabrimala मंदिर के उत्तम तहेवार है। मलयालम पंचांग के पहले पांच दिनों तक और अप्रैल में ही इस मंदिर के पट खोले जाते है। सबरीमाला मंदिर में सभी जाती के लोग आ सकते है। सबरीमाला मंदिर के अंदर 10 साल से 50 साल की महिलाओ के प्रवेश पर प्रतिबंद लगाया गया है।  सबरीमाला मंदिर के अंदर स्थित  प्रबंधन का कार्य इस समय त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड देखती है।

सबरीमाला मंदिर की 18 पावन सीढ़ियां –

sabrimala temple चारो तरफ से पहाड़ियों से धेरा हुवा है। यह मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से करीबन 175 किलोमीटर की दुरी पर पहाड़ियों में उपस्थित है। sabarimala mandir तक जाने के लिए करीबन 18 पावन सीढ़िया को पार करना पड़ता है,और उसके अलग अलग मतलब होते है। जैसे की पहली पांच सीढ़ियों को मनुष्य कि पांच इंद्रियों से मिला या गया है। 

उसके बाद बाकी 8 सीढ़ियों को मानवीय भावनाओ से जोड़ा गया है। अलग अलग तीन सीढ़ियों को मानवीय गुण और आखिर दो सीढियो को ज्ञान और अज्ञान का प्रतिक भी कहा जाता है। यहाँ पर आने वाले श्रद्धालु अपने सिर पर पोटली रखकर सबरीमाला मंदिर आते है।

वह पोटली नैवेद्य से भरी होती है। यह भी कहा जाता है की यहाँ की मान्यता है  की तुलसी और रुद्राक्ष की माला पहनकर आप व्रत रखकर और सर सिर पर नैवेद्य रखकर जो भी व्यक्ति यहाँ पर आता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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सबरीमाला मंदिर का विवाद –

केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर का विवाद महिलाओ से जुड़ा हुआ था।

उस मंदिर में 10 साल से 50 साल की महिलाओ के प्रवेश पर प्रतिबंद था। 

Sabrimala Temple कैसे पहुंचें –

सबरीमाला मंदिर
सबरीमाला मंदिर

सबरीमाला मंदिर हवाई मार्ग से कैसे पहुंचे : 

sabarimala yatra करने  के लिए तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के जरिये

आप उस मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हो।

वहा से सबरीमाला मंदिर एयरपोर्ट से कुछ ही किलोमीटर दूर है। 

सबरीमाला मंदिर बस से कैसे पहुंचे :

आप सबरीमाला मंदिर जाने के लिए तिरुअनंतपुरम से

पंपा तक आप बस की मुसाफ़री द्वारा जा सकते है 

सबरीमाला मंदिर पेदल कैसे पहुंचे :

आप सबरीमाला मंदिर जाने के लिए पंपा से पैदल जंगल के रास्ते से

करीबन पांच किलोमीटर पैदल चलकर 1535 फीट ऊंची पहाड़ियों पर

चढ़कर सबरिमला मंदिर में अय्यप्प के दर्शन हासिल कर सकते हैं।

सबरीमाला मंदिर में रुकने की जगह –

आप अगर sabarimala में अनेक दिनों तक ठहरान चाहते हो।

तो आप को पंपा और सन्निधानम में के कक्ष उपस्थित है।

उसके लिए आपको बोर्ड को पहले से बताना पड़ता है।

इसके बावजूद भी अनेक गेस्ट हाउस भी मौजूत है। 

सबरीमाला मंदिर खुलने और बंद होने का समय –

सबरीमाला मंदिर का गर्भगृह के खुलने का समय सुबह 4.00 बजे  का है।

और गर्भगृह काबंद होने का समय 11.00 बजे का है।

sabarimala darshanam सुबह 4.00 बजे से लेकर 11.00 बजे तक दर्शन कर सकते है।

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सबरीमाला मंदिर पूजा का समय –

  • उषा पूजा 7.30 बजे।
  • कालाभिषेकम 12.30 बजे।
  • उचा पूजा 1.00 बजे।
  • दीपराधना 6.30 बजे।
  • पुष्पभिषेकम शाम 7.00 बजे।
  • अथाह पूजा 10.30 बजे।

Sabrimala Temple Kerala Map –

Sabarimala Temple Video –

सबरीमाला मंदिर के प्रश्न –

1 . सबरीमाला मंदिर में कौन से भगवान है ?

सबरीमाला मंदिर में भगवान श्री अयप्पा विराज मान है। 

2 . सबरीवाला मंदिर कहाँ है ?

सबरीवाला मंदिर केरल में स्थित है और वहा भगवान श्री अयप्पा विराज मान है। 

3 . सबरीमाला मंदिर किस राज्य में है ?

सबरीमाला मंदिर केरल राज्य में राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित है। 

4 . सबरीमाला मंदिर का विवाद क्या है ?

केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर का विवाद महिलाओ से जुड़ा हुवा था।

उस मंदिर में 10 साल से 50 साल की महिलाओ के प्रवेश पर प्रतिबंद था। 

5 .सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित क्यों है ?

sabarimala में महिलाओं का प्रवेश वर्जित क्योकि उस मंदिर के

भगवान श्री अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्वी भी कहा जाता है।

इसी वजह से इस मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली स्त्रीयो के जाने पर प्रतिबंध रखा गया है। 

6 . सबरीमाला मंदिर में किस किस प्रतिमाये स्थापित है ?

sabrimala temple में भगवान अयप्पन के साथ साथ मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराज जैसे महान देवताओ की मुर्तिया भी है।

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख sabrimala mandir के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने sabarimala story के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

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