Mysore Palace History In Hindi karnatak - historyofindia1

Mysore Palace History In Hindi karnatak – historyofindia1

mysore palace भारत के दक्षिण के कर्णाटक राज्य के मैसूर शहर में स्थित है। यह मैसूर का महल खूबसूरत और आकर्षक महल है। इस महल को दूसरे अंबाविलास महल के नाम से पहचाना जाता है। यह महल में आने वाले देश-विदेश के आनेवाले पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुवा है। हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़े ताकि mysore palace information जान सके। 

आज हम इस आर्टिकल में  मैसूर पैलेस के बारे में जानकरी देंगे और इसके साथ – साथ मैसूर का इतिहास और वाडियार वंश का महल के अलावा मैसूर पैलेस का निर्माण किस राजवंश ने कराया थावाडियार राजवंश मैसूर महल के वारसदार कौन है और इसकी जानकरी पाने के लिए हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा। 

पैलेस का नाम मैसूर पैलेस 
महल दूसरा नाम अंबा विलास पैलेस
राज्य कर्नाटक (भारत)
शहर मैसूर 
निर्माणकाल 1897 ई. -1912 ई
निर्माता  वाडियार शासको द्वारा
वास्तुकार हेनरी इरविन
वास्तुकला  इंडो-सारसेनिक
वर्तमान वारसदार  महारानी प्रमोदा देवी वाडियार
वर्तमान संरक्षक कर्नाटक सरकार
नजदीकी हवाई अड्डा मैसूर हवाई अड्डा
नजदीक नदी कबीनी नदी

Mysore Palace History In Hindi –

Mysore Palace History In Hindi karnatak
Mysore Palace History In Hindi karnatak

मैसूर palace history की बात की जाये तो मैसूर महल को दूसरे अंबा विलास के नाम से भी जाना है। mysore , history of mysore palace को कृष्णराजा वाडियार ई. स 1897 में इस महल का निर्माण करवाया गया था। इस महल को चंदन की लकड़ियों से बनवाया गया है। लेकिन इस महल को इस दुर्घटना में यह क्षतिग्रस्त हुवा था। 

पुराने महल के स्थान पर दूसरा महल का निर्माण करवाया गया है। इस स्थान पर कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ और उनकी माँ कम्पानन जमन्नी देवीने ब्रिटिश वास्तुकार हेनरी इर्विन की जिम्मेदारी में दूसरा मैसूर महल का निर्माण करवाया गया था। इस स्थान पर दूसरा महल साल 1912 में निर्माणित करवाया गया था। 

मैसूर महल को बनवाने के लिए करीबन 41.47 लाख रुपए का खर्च हुवा था। मैसूर महल का क्षेत्र करीबन 245 फीट लंबा और 156 फीट चौड़ा है। मैसूर महल के भीतर बनाई हुई सोने की गुंबद जमीन से करीबन 145 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। महल को जगमगाने के लिए इस गुंबद में करीबन 97000 बल्ब लगाए हुए है। 

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mysore palace की वास्तुकला –

मैसूर महल में पूर्वी और रोमन तथा द्रविड़ स्थापत्य कला का मिश्रण देखने को मिलता है। मैसूर महल के ऊपरी हिस्से पर मौजूद गुंबदे गुलाबी रंग के स्लेटी पत्थरों से निर्माणित किया गया है। मैसूर महल के अंदर एक बड़ा दुर्ग है जिसके अंदर गुंबद सोने के पथ्थरो से सजाया गया है। 

महल के सोने की गुंबद पर जब सुबह के समय पर रोशनी जब पड़ती है तो महल के चारो और रोशनी फेल हो जाती है। इस समय महल देखने में अत्यंत खूबसूरत और आकर्षक दीखता है। मैसूर महल में 19वीं और 20 शताब्दी के प्रारंभिक समय की गुड़ियों का संग्रह किया गया है। 

मैसूर महल में राजा-महाराजाओ के लिए दीवान-ए-खास और आम जनता के लिए दीवान-ए-आम के कक्ष का निर्माण करवाया गया था। मैसूर महल के अंदर प्रमुख भवन और बड़े उद्यान का निर्माण किया गया है। मैसूर महल के मध्य हिस्से में जाने के लिए गज द्वार से होकर गुजरना पड़ता है। 

मैसूर महल के भीतर का विशाल कक्ष –

Mysore Palace History In Hindi
Mysore Palace History In Hindi 

मैसूर महल के अंदर एक विशाल कक्ष बना हुवा है जिस कक्ष को देखने के बाद ऐसा लगता है की यह स्थान पर बड़ी मात्रा में लोग एकठ्ठा होते होंगे। इस बड़े से कक्ष में कई सारे स्तंभ थोड़े-थोड़े अंतर पर बनवाये गए है। महल के छत और स्तंभों पर सुन्दर और आकर्षित नक्काशी की गई है। 

मैसूर महल का यह बड़ा सा कक्ष देखने में अत्यंत भव्य दीखता है महल के इस कक्ष की दीवारों पर अनेक चित्र विवरण के साथ लगाए गए है। इन चित्रों को प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा ने बनवाया गया है। इस चित्रों के निचे राजा वर्मा का नाम भी अंकित किया हुवा है। 

इस महल के कक्ष की दीवारों पर जनता की फरियाद सुनते हुवे राजा राज तिलक, विभिन्न अवसरों के चित्र, राजा चतुर्थ के यज्ञोपवीत संस्कार, कृष्णराजा वाडियार परिवार के चित्र इस कक्ष में लगाए गए है। 

मैसूर महल का पहला तल –

कर्नाटक मैसूर महल के प्रथम तल पर पूजा का स्थान है। इस प्रथम तल के पूजा के स्थान पर कई सारे देवी -देवताओ के कई सरे चित्र लगाए गए है। इस पूजा स्थान पर राजा और रानी द्वारा पूजा और यज्ञ करते हुवे कई सारे चित्र लगाए गए है। महल के दूसरे तल पर राजा और रानी और युवराज के सोने के लिए 3 सिंहासन बनवाये गए है। 

मैसूर महल के आकर्षण के केंद्र –

  • मुख्य प्रवेश द्वार और पुराना मैसूर महल
  • दशहरा पर्व के दौरान गुड़ियों के संग्रह की प्रदर्शनी
  • गज द्वार
  • देवी चामुंडी
  • राज सिंहासन
  • दशहरा के पर्व पर मैसूर महल में आयोजित होने वाले दशहरा परेड, जुलूस और तोपों द्वारा दी जाने वाली सलामी
  • दशहरा परेड में स्थित चित्र (जिसमें प्राचीन काल में दशहरे के त्यौहार का चित्रण किया गया है)
  • कल्याण मंडप (विवाह मंडप)
  • दशहरा पर्व में दुर्गा पूजा को दर्शाती हुई पेंटिंग
  • दशहरा के पर्व में महाराजा द्वारा जुलूस में हिस्सा लेने वाली पेंटिंग
  • कुश्ती का मैदान
  • महल के भीतर का आकर्षक फर्नीचर
  • वाडियार वंश
  • मैसूर महल के भीतर स्थित बड़ा कक्ष
  • अंबा विलास (जहां पर महाराजा अपना दरबार चलाया करते थे और कामकाज किया करते थे)
  • मैसूर महल के भीतर स्थित दुर्ग में बना हुआ मंदिर

मैसूर महल के ध्वनि और लाइट शो –

Mysore Palace
Mysore Palace History

मैसूर महल के भीतर 45 मिनट का एक ध्वनि और लाइट शो का आयोजन किया जाता है। मैसूर महल के गौरवशाली इतिहास पिछले 400 सालों से प्रस्तुत किया जाता है। mysore palace lighting timings सोमवार से बुधवार तक शाम 7:00 से से 8:00 बजे तक और शनिवार को 8:15 से 9:15 कन्नड़ कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 

मैसूर महल गुरुवार से शनिवार तक शाम के समय :00 से 8:00 बजे अंग्रेजी में ध्वनि और लाइट शो का कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वयस्क पर्यटकों के लिए 90 रू और बच्चो के लिए 40 रू का भुगतान करना पड़ता है। हरदिन मैसूर महल शाम के समय में करीबन 15 मिनिट के लिए हजारो लाइट्स से जगमगाया जाता है। 

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मैसूर महल में दशहरे की विशेष सजावट –

हर साल दशहरे का त्यौहार के दिन मैसूर महल में विशेष mysore palace lighting की जाती है। मैसूर महल को देखने के लिए देश और विदेश से कई सारे पर्यटक बहोत भारी संख्या में आते है। इस महल में दशहरे के दिन 97,000 बल्ब जलते ही यह महल बहोत सुन्दर और अत्यंत भव्य दीखता है। मैसूर महल में गोम्बे थोट्टी के सामने 7 तोपे रखी गई है।

इन मैसूर महल की तोपों को दशहरे के दिन दागा जाता है। प्राचीन समय से ही दशहरे के अवसर पर मैसूर महल को सजाया जाता था। मैसूर महल की दीवारों पर अनेक चित्र लगाए हुवे है। दशहरे के अवसर पर निकलनेवाली झांकियों का सुंदर चित्रण किया गया है। मैसूर महल में पर्यटकों के लिए दशहरे में महल के भीतर 200 किलो शुद्ध सोने के बने राज सिंहासन का प्रदर्शन किया गया है। 

Mysore Palace में पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाएं –

  • साफ-सुथरा वातावरण
  • फर्स्ट एड बॉक्स
  • क्लीनिक और बेबी केयर सेंटर
  • हिंदी, अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में गाइड बुक
  • मैसूर महल के पोस्ट कार्ड फोटोग्राफ पर्यटक खरीद सकते हैं
  • सभी पर्यटकों के लिए अंबा विलास और वारहा द्वार पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है
  • पीने का साफ पानी
  • टॉयलेट
  • विकलांग व्यक्तियों के लिए व्हील चेयर उपलब्ध है
  • छाता
  • साइकिल
  • BSNL कंपनी द्वारा सभी पर्यटकों के लिए फ्री वाईफाई उपलब्ध है
  • सभी पर्यटक बिना फ्लैश के फोटो खींच सकते हैं

मैसूर महल को देखने का समय –

mysore palace timings सुबह 10:00 से शाम 5:30 बजे तक का रहता है। मैसूर महल में पर्यटक तीन द्वारो से प्रवेश कर सकते हैं।  महल का वारहा और अंबा विलास दरवाजा जो महल के दक्षिणी हिस्से में स्थित है। जयराम बालाराम दरवाजा जो महल के उत्तरी हिस्से में स्थित है जोकि किसी भी दरवाजे से पर्यटक प्रवेश कर सकते है।

मैसूर महल का प्रवेश शुल्क –

mysore palace entry fee पर्यटकों को 70 रूपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से टिकट खरीदना पड़ता है। मैसूर महल में 7 से 12 साल के बच्चों के लिए टिकट का मूल्य 30 रूपये प्रतिव्यक्ति है। मैसूर महल में रविवार और अवकाश के दिन सुबह 7:00 से शाम 8:00 बजे तक इसे देख सकते है। 

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मैसूर पैलेस घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –

अगर आपको मैसूर पैलेस घूमने जाना है, और सबसे अच्छा समय की बात की जाये तो मैसूर पैलेस की यात्रा दशहरे के समय में अच्छी रहती है। दशहरे के अवसर पर पुरे पैलेस के परिसर को बहोत अच्छी तरह से सजाया जाता है। और एक सुन्दर ,सुनहरा और आकर्षक लगता है। इस समय में मैसूर पैलेस को सुनहरा रंग से पूरा पैलेस प्रकाशित किया जाता है। मैसूर पैलेस को हर रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों के दिनों में लाइट्स से सजाया जाता है। 

Mysore Palace के नजदीकी पर्यटन स्थल –

Mysore Palace karnatak
Mysore Palace 
  • चामुंडेश्वरी मंदिर 
  • रंगनाथस्वामी मंदिर 
  • ललिता महल 
  • जय लक्ष्मी विलास हवेली
  • जगनमोहन पैलेस 
  • सेंट फिलोमेना चर्च 
  • तालकाड़ मंदिर 
  • मेलुकोटे मंदिर 
  • बाइलाकुप्पे 
  • नंजनगुड मंदिर
  • शिवानासमुद्र फॉल्स 
  • कृष्णा राजा सागर डैम 
  • बृंदावन गार्डन
  • रेल संग्रहालय मैसूर
  • चामुंडी हिल्स नंदी
  • कार्य सिद्धि हनुमान मंदिर 
  • करणजी झील 
  • चिड़ियाघर 
  • रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य कर्नाटक 
  • बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान 

मैसूर पैलेस कैसे पहुंचे –

अगर आप मैसूर महल जाना चाहते है तो आपको बता दे की आप के सामने तीन विकल्प मौजूद है इसमें से आप हवाई मार्ग , ट्रेन मार्ग और सड़क मार्ग के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। मैसूर महल बेंगलुरु से करीबन 140 कि.मी की दुरी पर मौजूद है। बेंगलुरु का न्यू बेंगलुरु इंटरनेशनल हवाई अड्डा देश के सभी बड़े प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

इसके साथ ही बेंगलुरु देश के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग और सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। इसलिए आप किसी एक मार्ग के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। आपको मैसूर महल जाने के लिए करीबन 3 घंटे का समय लगता है। अगर आप चाहे तो टैक्सी , कार या स्थानीय बसों के इस्तेमाल से सरलता से पहुँच सकते है। 

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मैसूर पैलेस फ्लाइट से कैसे पहुंचे :

यात्रा के लिए मैसूर महल जाने अगर आपने हवाई मार्ग का चुनाव किया है तो आपको बता दे की मैसूर महल के नजदीकी हावी मथक गलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई मथक है। और यह हवाई मथक मैसूर शहर से करीबन 170 कि.मी की दुरी पर स्थित है। बेंगलुरु हवाई मथक से मैसूर जाने के लिए आप ट्रेन , बस या फिट स्थानीय वाहनों की मदद से मैसूर महल तक पहुँच सकते है। यह हवाई मथक देश के कई बड़े हवाई माथको से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। 

मैसूर पैलेस ट्रेन मार्ग से कैसे पहुंचे :

मैसूर महल की यात्रा करने के लिए अगर अपने ट्रेन मार्ग का चुनाव किया है तो आपको बता दे की मैसूर शहर का अपना रेलवे जंक्शन है। और यह रेल्वे जंक्शन देश के बड़े शहरो के साथ बहोत अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। मैसूर का रेलवे स्टेशन शहर के केंद्र में स्थित है और करीबन 2 कि.मी की दुरी पर स्थित है। 

सड़क मार्ग से मैसूर पैलेस कैसे पहुंचे :

पैलेस यात्रा के लिए अगर अपने सड़क मार्ग का चुनाव किया है तो आपको बता दे की मैसूर शहर का सड़क मार्ग देश के कई बड़े शहरो से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। इसलिए आप किसी भी परेशानी के बिना मैसूर पैलेस तक पहुँच सकते है। सड़क मार्ग से जाने के लिए आप स्थानीय बसे और टेक्सी या कैब , अपना प्राइवेट कार का इस्तेमाल करके आप मैसूर पैलेस तक पहुँच सकते है। 

Mysore Palace Light Show Video –

Mysore Palace के अन्य प्रश्न –

1 . मैसूर पैलेस कहां स्थित है ? 

मैसूर पैलेस दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में स्थित है।

2 . मैसूर पैलेस का निर्माण किसने बनवाया था ? 

मैसूर पैलेस का निर्माण महाराज राजर्षि महामहिम कृष्णराजेंद्र वाडियार चतुर्थ ने करवाया था।

3 . मैसूर पैलेस को कब बनवाया था और इसे बनने में कितना समय लगा था ? 

मैसूर पैलेस का निर्माण ई.स 1897 में शुरू हुआ था और यह महल 1912 में बनकर तैयार हुआ था। इस मैसूर पैलेस को बनवाने में करीबन 15 साल का समय लगा था। 

4 . मैसूर पैलेस का नक्शा किसने और कब बनाया था ?

मैसूर पैलेस का नक्शा ई.स 1912 में ब्रिटिश के हेनरी इर्विन ने बनाया था।

5 .मैसूर पैलेस की सबसे बड़ी खासियत क्या है ? 

मैसूर पैलेस भारत के सबसे बड़े पैलेसों में से एक है।

इस पैलेस की संरचना में कल्याण मंडप की काँच से बनी छत, दीवारों पर लगी अद्भुत तस्वीरें और सोने का राजसिंहासन इस पैलेस की सबसे बड़ी खासियत है।

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख mysore palace के बारे में पूरी जानकरी समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने मैसूर पैलेस के बारे में और  वाडियार राजवंश के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

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