Khajuraho Matangeshwar Temple History In Hindi

Khajuraho Matangeshwar Temple History In Hindi | मतंगेश्वर मंदिर का इतिहास

khajuraho matangeshwar temple मध्य प्रदेश के खजुराहो में कई तरह के रहस्यमई मंदिर मौजूद है जिसकी वास्तुकला बहोत आकर्षक और सुन्दर दिखाई देते है। इस मंदिरो की वास्तुकला कामकला पर आधारित प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। मध्य्प्रदेश का khajuraho mandir सिर्फ मंदिरो के ही नहीं बल्कि कई सारी मिथिकाओ और प्राचीन कथाओ के लिए पहचाना जाता है। हम आज आपको khajuraho temple history के मतंगेश्वर मंदिर की वास्तुकला और उनका रहस्य और प्राचीन कथाओ के बारे में हम इस आर्टिकल में बताएँगे। 

मंदिर का नाम  मतंगेश्वर मंदिर 
राज्य मध्यप्रदेश 
जिला  छत्तरपुर
स्थान   खजुराहो 
निर्माणकर्ता चंदेल वंश के राजाओं
निर्माणसाल ई.स 900 से 925 
शिवलिंग की ऊंचाई   18 फिट

Table of Contents

Khajuraho Matangeshwar Temple History In Hindi –

मतंगेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश के छत्तरपुर के खजुराहो में स्थित है। matangeshwar temple निर्माण चंदेल वंश के राजाओं ध्वारा 9वी शताब्दी में किया गया है। और खजुराहो मंदिर का इतिहास करीबन 1000 साल पुराना माना जाता है। यह शहर चंदेल राजाओ की राजधानी हुवा करता था। चंदेल वंश और खजुराहो के स्थापना करनार महाराजा चन्द्रवर्मन थे। चंदेल राजा चन्द्रवर्मन मध्यक राजपूत शासनकर्ता राजा थे और वह अपने आपको चंद्रवंशी मानते थे। 

khajuraho matangeshwar temple में मतंगेश्वर महादेव विराजमान है। मान्यता है की खजुराहो में निर्माणित मंदिर फ़क्त आराधना के उद्देश्य के अलावा कई रहस्यों से बनवाये गये थे। मंदिरो में आम लोगो को यौन शिक्षण देने के लिए और इसके साथ-साथ तांत्रिक विध्या और पूजा संपन्न करना था। परन्तु खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर आस्था का सबसे मुख्य केंद्र है।

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Khajuraho Matangeshwar Temple की संरचना

यह khajuraho matangeshwar temple लक्ष्मण मंदिर के नजदीक क्षेत्र में स्थित है। मतंगेश्वर मंदिर 35 फिट के क्षेत्र में फैला हुवा है और इस मंदिर का गर्भगृह भी वर्गाकार में निर्माण किया गया है। मतंगेश्वर मंदिर करीबन ई.स 900 से 925 के समय का माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला खजुराहो के अन्य मंदिरो से अलग है।मतंगेश्वर मंदिरखजुराहो के सब मंदिरो में से यह मंदिर सुन्दर और पवित्र माना जाता है। मतंगेश्वर मंदिर के स्तंभ और दीवारों पर खजुराहो के अन्य मंदिरो की तरह कामुक प्रतिमाये नहीं है। 

मतंगेश्वर मंदिर के स्थान पर हुवा था शिव पार्वती का विवाह

ishwara mahadev को समर्पित यह मतंगेश्वर मंदिर में कई सारे वर्षो से भगवान महादेव की पूजा और आराधना की जाती है। मतंगेश्वर मंदिर से कई सारि चमत्कारिक कथाये और रहस्य जुड़े हुवे है। कई कारणों की वजह से मतंगेश्वर मंदिर में श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद और दर्शन करने के लिए देश-विदेश से यहाँ पर आते रहते है। ऐसा माना जाता है की खजुराहो के यह स्थान पर भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुवा था। 

शिवलिंग के नीचे मणि स्थापित होने की प्राचीन मान्यता

khajuraho mandir में विराजमान शिवलिंग के निचे प्राचीन कथाओ के अनुसार मणि स्थित है। दर्शन करने वाले भक्तो की मनोकामना पूर्ण होती है। प्राचीन कथाओंके अनुसार भगवान शिव के पास मरकत मणि थी जिस मणि को भगवान शिव ने पांडवो में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर को दिया था। इसके बाद युधिष्ठिर ने मरकत मणि मतंगऋषि को समर्पित कर दिया इसके बाद यह मणि मतंगऋषि ने राजा हर्षवर्धन को देदी।

मतंगऋषि के नाम से इस मंदिर का नाम मतंगेश्वर से नाम से पहचाना जाता है। मतंगऋषि ने इस मणि भगवान शिव के 18 फिट शिवलिंग के निचे मणि की सुरक्षा की दृस्टि से स्थापित किया गया है जिसकी वजह से भगवान शिव और मणि के प्रताप से भक्तो की मांगी हुई हर मुराद पूर्ण होती है।

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हर साल शिवलिंग बढ़ने का रहस्य

khajuraho matangeshwar temple का रहस्य और खास बात 18 फिट ऊँचा शिवलिंग है। मतंगेश्वर  मंदिर का रहस्य यह है की मंदिर में मौजूद भगवान शिव को समर्पित शिवलिंग हर साल ऊंचाई बढ़ जाती है। मतंगेश्वर मंदिरखजुराहो के सब मंदिरो में से यह मंदिर सुन्दर और पवित्र माना जाता है। मतंगेश्वर मंदिर के स्तंभ और दीवारों पर खजुराहो मंदिरो की तरह कामुक प्रतिमाये नहीं है।

मतंगेश्वर मंदिर की शिवलिंग को मृत्युंजय महादेव के नाम से पहाचाना जाता है। ऐसा माना जाता है की शिवलिंग जितना धरती के ऊपर दिखाई देता है उससे अधिक धरती के निचे स्थापित है। मतंगेश्वर मंदिर स्थित भगवान महादेव की शिवलिंग की ऊंचाई करीबन 18 फिट है और जीतनी धरती के बहार दिखती है उनसे ज्यादा धरती के अंदर स्थित है। 

Khajuraho Matangeshwar Temple जाने का सबसे अच्छा समय – 

khajuraho ka mandir वैसे तो आप यहां किसी भी मौसम में जा सकते हैं, शहर में मानसून का समय खजुराहो जाने के लिए एक सुखद मौसम होता है। इस मौसम में कुछ दिनों तक मध्यम बारिश होती है। लेकिन अगर आप यहां घुमने का पूरा मजा लेना चाहते हैं तो आपके लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा रहेगा। अक्टूबर से फरवरी के महीने दुनिया भर के लोगों की भीड़ के साथ खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय है। हर साल फरवरी में आयोजित खजुराहो नृत्य महोत्सव आपकी खजुराहो यात्रा की योजना बनाने का सबसे अच्छा समय है।

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मतंगेश्वर मंदिर के नजदीकी पर्यटन स्थल

  • महाराजा छत्रसाल संग्रहालय :

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में मौजूद है। महाराजा छत्रसाल संग्रहालय वर्तमान समय में 8 गैलेरिया बनाई गई है। महाराजा छत्रसाल संग्रहालय बुन्देल महाराजाओके सबंधित चित्र , उनके वस्त्र , उनके हथियार उनमे रखे गए है। छत्तरपुर जिले में घूमने आनेवाले पर्यटक महाराजा छत्रसाल संग्रहालय को देखने के लिए अवश्य जाते है। आपको यह भी बता देते है की महाराजा छत्रसाल संग्रहालय में जैन धर्म से जुड़े कई सारे चित्र को बहोत सुन्दर रूप से चित्रित किया गया है। 

  • गंगऊ बांध :

गंगऊ बांध खजुराहो प्राचीन मंदिर के नजदीकी क्षेत्र में और छत्तरपुर जिले से करीबन 18 किमी की दुरी पर स्थित है। गंगऊ बांध सिमरी नदी और केन नदी के संगम पर बनाया गया है। गंगऊ बांध के स्थान पर शानदार और सुन्दर और यादगार पिकनिक मनाने ने के लिए दूर दूर से यह स्थान पर आते रहते है। इस बांध के अंदर दिलचस्प नौका विहार का आनंद लेने के लिए यह स्थान पर आते है। 

  • पांडव जलप्रपात और गुफाएं पन्ना :

छत्तरपुर के मुख्य आकर्षण में पांडव जलप्रपात और गुफाएं पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के अंदर मौजूद एक आकर्षक जगह है।

ऐसा माना जाता है की पांडवो ने निर्वासन के समय दौरान यह जगह पर शरण ली थी।

यह स्थान पर पांडव जलप्रपात और गुफाओ के मुख्य आकर्षण स्थलों में से एक है।

यह स्थान पर बेहद खूबसूरत झरने , ज्यादा गहरी झील और हरेभरे प्राकृतिक वातावरण का सुन्दर दृश्य नजर आता है। 

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  • महामति प्राणनाथजी मंदिर :

छत्तरपुर के पर्यटन स्थलों में मौजूद पन्ना  में महामति प्राणनाथजी मंदिर एक सुन्दर और आकर्षित जगह है। यह प्राचीन स्थान पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है। महामति प्राणनाथजी मंदिर का निर्माण ई.स 1692 में करवाया था। महामति प्राणनाथजी मंदिर की बनावट हिन्दू और मुस्लिम स्थापत्य शैली का उदहारण देता है। 

मतंगेश्वर मंदिर का इतिहास
मतंगेश्वर मंदिर का इतिहास

मतंगेश्वर खजुराहो कैसे पहुंचे – 

एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल होने के नाते, खजुराहो तक पहुंचना काफी आसान है।

खजुराहो का अपना घरेलू हवाई अड्डा है।

जिसे खजुराहो हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन के रूप में जाना जाता है।

जो इसे भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। आइये जानते हैं।

विभिन्न माध्यम से खजुराहो कैसे पंहुचा जा सकता है।

  • मतंगेश्वर खजुराहो हवाई जहाज द्वारा कैसे पहुंचे:

khajuraho भारत की दिल्ली से खजुराहो कैसे पहुंचे यह एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है। हालाँकि, यात्रियों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि खजुराहो हवाई अड्डा, जिसे सिविल एरोड्रम खजुराहो भी कहा जाता है, शहर के केंद्र से केवल छह किमी दूर है। दिल्ली से खजुराहो के लिए कम उड़ानें हैं क्योंकि यह छोटा घरेलू हवाई अड्डा भारत के कई शहरों से जुड़ा नहीं है। इसमें दिल्ली और वाराणसी से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे के बाहर खजुराहो का मंदिर के लिए टैक्सी और ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा आप मुंबई, भोपाल और वाराणसी से भी यहां पहुंच सकते हैं।

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  • Matangeshwar Temple ट्रेन द्वारा कैसे पहुंचे :

यह khajuraho ke mandir  प्रसिद्ध मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर में है। खजुराहो का अपना रेलवे स्टेशन है, हालाँकि खजुराहो रेलवे स्टेशन भारत के कई शहरों से जुड़ा नहीं है। खजुराहो-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस नामक खजुराहो के लिए नई दिल्ली से एक नियमित ट्रेन है, जो खजुराहो पहुंचने के लिए लगभग 10 से 11 घंटे का समय लेती है।

  • मतंगेश्वर खजुराहो सड़क मार्ग द्वारा कैसे पहुंचे :

khajuraho mandir mp के अन्य शहरों के साथ अच्छा सड़क संपर्क है।

मध्य प्रदेश के आसपास और सतना (116 किमी), महोबा (70 किमी),

झांसी (230 किमी), ग्वालियर (280 किमी),

भोपाल (375 किमी) और इंदौर (565 किमी) जैसे शहरों से एमपी पर्यटन की कई सीधी बसें उपलब्ध हैं। 

एनएच 75 खजुराहो को इन सभी प्रमुख स्थलों से जोड़ता है।

अगर आप रोड से खजुराहो जाना चाहते हैं तो, यह बिल्कुल भी समस्या वाला नहीं है

क्योंकि खजुराहो तक पहुंचना काफी आसान है।

Khajuraho Matangeshwar Temple Madhya Pradesh Map –


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Khajuraho Matangeshwar Temple Video –

मतंगेश्वर मंदिर के अन्य प्रश्न

1 . मतंगेश्वर मंदिर में कोनसे भगवान विराजमान है ?

matangeshwar temple में मतंगेश्वर महादेव विराजमान है।

मान्यता है की खजुराहो में निर्माणित मंदिर फ़क्त आराधना के उद्देश्य के अलावा कई रहस्यों से बनवाये गये थे। 

2 . मतंगेश्वर मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

matangeshwar temple निर्माण चंदेल वंश के राजाओं ध्वारा करवाया गया था। 

3 . मतंगेश्वर मंदिर का निर्माण कब करवाया गया था ?

मतंगेश्वर मंदिर का निर्माण 9वी शताब्दी में करवाया गया था। 

4 . खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर कितने साल पुराना माना जाता है ?

मतंगेश्वर मंदिर करीबन ई.स 900 से 925 के समय का माना जाता है।

5 . मान्यताओं के अनुसार मतंगेश्वर मंदिर की शिवलिंग के निचे क्या है ?

प्राचीन कथाओके अनुसार मतंगेश्वर मंदिर के शिवलिंग के निचे मणि स्थित है ऐसा माना जाता है। 

6 . मतंगेश्वर मंदिर के शिवलिंग की ऊंचाई कितनी है ?

मतंगेश्वर मंदिर स्थित भगवान महादेव की शिवलिंग की ऊंचाई करीबन 18 फिट है।

और जीतनी धरती के बहार दिखती है उनसे ज्यादा धरती के अंदर स्थित है। 

7 . मतंगेश्वर मंदिर कहा स्थित है ?

मतंगेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश राज्य के छत्तरपुर जिले के खजुराहो में स्थित है। 

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख  khajuraho mandir के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने khajuraho matangeshwar temple history के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

14 thoughts on “Khajuraho Matangeshwar Temple History In Hindi | मतंगेश्वर मंदिर का इतिहास”

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