Katyayani Mandir Chattarpur History In Hindi Delhi

Katyayani Mandir Chattarpur History In Hindi | श्री आध्य कात्यायनी मंदिर

Katyayani Mandir Chattarpur भारत की राजधानी दिल्ही में स्थित है इस मंदिर को छतरपुर मंदिर के नाम से भी पहचाना जाता है छतरपुर मंदिर दिल्ही का मुख्य धार्मिक स्थल माना जाता है इस स्थान पर देश और विदेश से पर्यटक इस स्थान पर आते रहते है और कात्यायनी देवी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने श्रद्धालु बहुत भारी संख्या में आते है। 

भारत में delhi ka chattarpur mandir लोक प्रिय मंदिरो में से एक है। कात्यायनी मंदिर गुड़गांव – महरौली मार्ग के नजदीकी छतरपुर में मौजूद है। छतरपुर मंदिर सफ़ेद संगमरमर से बनाया गया है और इस मंदिर की सजावट श्रद्धालु ओ को आकर्षित करता है। katyayani mandir भारतीय शैली में बना हुवा है और यह मंदिर विशाल क्षेत्र में फैला हुवा है कात्यायनी मंदिर छत्तरपुर परिसर में लॉन और सुन्दर गार्डन बनवाये गए है। अगर आप भी इस मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो आप भी हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा। 

मंदिर का नाम कात्यायनी मंदिर 
मंदिर का दूसरा नाम छत्तरपुर मंदिर
स्थान  दिल्ही 
निर्माणकाल ई.स 1974
स्थापनाकर्ता बाबा नागपालजी
मंदिर का क्षेत्र 70 एकड़
वास्तुकला वेसारा वास्तुकला 

Table of Contents

Katyayani Mandir Chattarpur History In Hindi –

chattarpur mandir delhi में स्थित आध्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर का शिलान्यास ई.स 1974 में किया गया था मंदिर की स्थापना कर्णाटक के महान संत बाबा नागपालजी ने किया था। मंदिर की स्थापना के पूर्व इस स्थान पर  कुटिया हुवा करती थी और बाद समय में इस स्थान पर 70 एकड़ में कात्यायनी देवी का भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। 

chattarpur mandir history के बारे में बात करे तो इस मंदिर से सबंधित एक प्राचीन कथा के अनुसार कहा जाता है की एक समय में एक ऋषिमुनिने कठोर तपस्या करके दुर्गा देवी को प्रसन्न किया। ऋषि की तपस्या से माँ दुर्गा प्रसन्न होकर प्रगट हुई देवी ने ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को बोला। 

देवी प्रसन्न होकर कात्यायन ऋषि ने माँ देवी से वरदान में यह माँगा की देवी आप मेरे घर में मेरी पुत्री बनकर जन्म ले यह वरदान सुनकर देवी प्रसन्न होकर कात्यायन ऋषि के इच्छानुसार वरदार दिया। इसके बाद कात्यायन ऋषि के घर में उनकी पुत्री बनकर अवतार लिया उनके जन्म के बाद उनको कात्यायनी देवी के नाम से पहचाना जाता है। 

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Katyayani Mandir Chattarpur की जानकारी  –

इसके बाद दिल्ही में मौजूद इस मंदिर को कात्यायनी देवी मंदिर से यह मंदिर पहचाना जाता है यह कात्यायनी मंदिर दिल्ही के दक्षिण पश्चिम के हिस्से में स्थित है यह मंदिर फ़क्त कुतुबमीनार से करीबन 4 कि.मी की दुरी पर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना बाबा संत नागपाल ने ई.स 1974 में की थी। katyayani mandir chattarpur को साल में दो बार नवरात्रि में खला जाता है इस समय में इस मंदिर में हजारो की संख्या में देवी के भक्त और श्रद्धालु मंदिर में देवी के दर्शन के लिए देश के कई दूर के क्षेत्रो से आते है।

कात्यायनी मंदिर में एक कमरे में चांदी की खुरसिया और टेबल है और दूसरा कमरा शयन कक्ष से पहचाना जाता है इसमें बिस्तरे, ड्रेसिंग टेबल और चांदी से नक्काशी किये हुए टेबल देखने को मिलते है। छतरपुर मंदिर में जब कोई बड़ा उत्सव या सत्संग का आयोजन किया जाता है उस समय मंदिर को खोला जाता है इसके अलावा मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम , भजन का आयोजन किया जाता है उस समय मंदिर को खोला जाता है।

Shree Adya Katyayani Shaktipeeth Mandir
Shree Adya Katyayani Shaktipeeth Mandir

छतरपुर मंदिर की वास्तुकला – 

delhi chattarpur mandir की वास्तुकला की बात की जाये तो यह मंदिर अद्भुत और आकर्षक मंदिर है क्योकि यह मंदिर के पथ्थर कविता का वर्णन करती है। साल 2005 में अक्षरधाम मंदिर बनने से पहले यह छतरपुर का मंदिर भारत का सबसे बड़ा मंदिर और विश्व का सबसे बड़ा मंदिर हुवा करता था। छतरपुर के मंदिर को पूरी तरह से संगेमरमर से इसका निर्माण किया गया है। 

इसके अलावा मंदिर के सभी स्थानों पर जाली से कार्य किया गया है इस वास्तुकला को वेसारा वास्तुकला से पहचाना जाता है इस मंदिर को बड़े क्षेत्र में फैला मंदिर की अन्य स्मारकों को कई तरह की वस्तुओसे बनाया गया है। मंदिर के परिसर में अन्य सुन्दर गार्डन और लॉन का निर्माण करवाया गया है जिसको देखकर श्रदालुओको मन की अदभुत शांति मिलती है मंदिर में करवाया गया नक्काशीदार कारीगरी बहोत आकर्षक है

katyayani mandir chattarpur के बड़े आकार के कारण मंदिर का परिसर काफी अच्छा दीखता है। मंदिर में देवी कात्यायिनी की प्रतिमा को एक बड़े भवन में विराजमान किया गया है। इस भवन में प्रार्थना हॉल इ भी अंदर प्रवेश किया जा सकता है सोने से निर्मित देवी कात्यायिनी की प्रतिमा सदाय भव्य कपडे ,सोने ,सुन्दर फूलो के हार से सुशोभित किया जाता है नवरात्रि के दिनों में सुन्दर मंदिर को सजावट की जाती है। 

छतरपुर मंदिर की परंपरा –

मंदिर के ध्वार के नजदीकी एक पेड़ स्थित है इस पेड़ पर पवित्र धागा बांधा जाता है। 

श्रदालु उनकी इछाओ को पूरी करने के लिए भक्तो धागे के साथ चुडिया बांधते है।

मन ही मन अपनी मनोकामना की प्रार्थना करते है।

मंदिर के पेड़ की ऐसी मान्यता है की धागा बांधने से भक्तो की मनोकामना पूरी हो जाती है।

कहा जाये तो भारत की धार्मिक विरासत को दर्शाने वाला छतरपुर का कात्यायनी मंदिर बहोत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्थान है। 

कात्यायनी मंदिर में प्रसिद्ध मंदिर :

कात्यायनी मंदिर में कई प्रसिद्ध और आकर्षक मंदिर भी स्थित है। जैसे की……

  • शिव मंदिर
  • राम मंदिर
  • महिषासुरमर्दिनी मंदिर
  • माँ अष्टभुजी मंदिर
  • झर्पीर मंदिर
  • मार्कंडेय मंदिर
  • बाबा की समाधी
  • नागेश्वर मंदिर
  • त्रिशूल
  • 101 फीट की chattarpur mandir hanuman की मूर्ति

katyayani mandir chattarpur में यह मंदिर भक्तों और श्रदालुओको बहोत आकर्षित करते है। इस अन्य मंदिरो के अलावा इस स्थान पर बहुत बड़ी इमारते भी मनाई गई है जिसमे भंडारा का आयोजन किया जाता है करीबन पुरे 24 घंटे इस स्थान पर धार्मिक प्रार्थना ओका आयोजन किया जाता है। इस मंदिर में जन्मास्टमी के अवसर पर लाखो की संख्या में भक्तो की भीड़ ज्यादा होती है और यह नजारा बहोत सुन्दर देखनेलायक बनता है। chattarpur mandir mata के दर्शन करने के लिए नवरात्रि के दिनों में श्रदालुओको लंगर का प्रसाद बाटा जाता है यह नजारा देखनेवाले लोग उनकी आँखों पर भरोसा नहीं करते और यह दृश्य काफी सुन्दर दीखता है।

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Katyayani Mandir Chattarpur घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –

दर्शन के लिए आप  chattarpur mandir temple timings जन्मास्टमी में जाये क्योकि इस समय मंदिर को बहोत सुशोभित किया जाता है और कई तरह के के उत्सवों को मनाय जाता है।और कई छतरपुर मंदिर वसंत मास और फरवरी का है। दिल्ली में दिसंबर और जनवरी के महीने में तेज ठंड पड़ती है। इसलिए आप फरवरी और मार्च के महीने में छतरपुर मंदिर की यात्रा कर सकते है और इस सुन्दर छतरपुर मंदिर को देखने के लिए जा सकते है। 

Katyayani Mandir Chattarpur के नजदीकी पर्यटन स्थल – 

हुमायु का मकबरा :

हुमायूँ का मकबरा ताजमहल के 60 वर्षों से पहले निर्मित मुगल सम्राट हुमायूं का अंतिम विश्राम स्थल है जो दिल्ली के निज़ामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में स्थित है और भारतीय उपमहाद्वीप में पहला उद्यान मकबरा है। हुमायूँ का मकबरा दिल्ली का एक प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जो भारी संख्या में इतिहास प्रेमियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। हुमायूँ का मकबरा अपने मृत पति के लिए पत्नी के प्यार को प्रदर्शित करता है।

फ़ारसी और मुग़ल स्थापत्य तत्वों को शामिल करते हुए इस उद्यान मकबरे का निर्माण 16 वीं शताब्दी के मध्य में मुगल सम्राट हुमायूँ की स्मृति में उनकी पहली पत्नी हाजी बेगम द्वारा बनाया गया था। हुमायूँ के मकबरे की सबसे खास बात यह है कि यह उस समय की उन संरचनाओं में से एक है जिसमें इतने बड़े पैमाने पर लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया था।अपने शानदार डिजाइन और शानदार इतिहास के कारण हुमायूँ का मकबरा को साल 1993 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।

हुमायूँ के मकबरे की वास्तुकला इतनी ज्यादा आकर्षित है कि कोई भी इसे देखे बिना नहीं रह पाता। यह शानदार मकबरा एक बड़े अलंकृत मुगल गार्डन के बीच में स्थित है और इसकी सुंदरटा सर्दियों के मौसम में काफी बढ़ जाती है।हुमायूँ का मकबरा यमुना नदी के तट पर स्थित है और यह अन्य मुगलों के अवशेषों का भी घर है, जिनमें उनकी पत्नियाँ, पुत्र और बाद के सम्राट शाहजहाँ के वंशज, साथ ही कई अन्य मुगल भी शामिल हैं।

लॉटस टैम्पल :

लॉटस टैम्पल भारत की राजधानी दिल्ही में मौजूद बहुत सारे प्राचीन स्मारक और कई देखने लायक स्थान है। 

यह लोटस टेम्पल भी सुन्दर और दिल्ही का आकर्षक स्थान है।

दिल्ही का लॉटस टैम्पल नहेरु नगर में बहापुर गांव में मौजूद है।

लोट्स टैम्पल एक बहाई उपासना का मंदिर माना जाता है।

यह लोट्स टैम्पल में न कोई भगवान की मूर्ति है न कोई भगवान की पूजा या फिर अर्चना इस मंदिर नहीं होती।

लॉटस टैम्पल की जानकारी –

lotus temple delhi में पर्यटक उनकी मन की शांति पाने के लिए आते है।यह मंदिर का आकर कमल जैसा लगता है इस कारण इस मंदिर को lotus temple या फिर लॉट्स टैम्पल से पहचाना जाता है। लोट्स टैम्पल को 20वी शताब्दी का ताजमहल भी कहा जाता है। यह दिल्ही का लॉट्स टैम्पल ने कई वास्तुकार के कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

और यह टैम्पल को कई न्यूज, अखबारो और लेखो में भी इसकी चित्रित और चर्चित रहता है। यह दिल्ही का लोट्स टैम्पल को विश्व के 7 बहाई मंदिर में से लॉट्स टेम्पेल को कमल टैम्पल से पहचाना जाता है। यह लोटस टेम्पल को 2001 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की सबसे ज्यादा देखने वाले स्मारकों में से देखे जाने वाला स्मारक है।

बाकि के बचे 6 स्मारक ऑस्ट्रेलिया ,सिडनी , पनामा सिटी ,युगीना समोआ ,युगांडा में कंपाला ,जर्मनी में फ्रैंकफर्ट और यु -एस -इ में विलेमेट में स्थित है। साल 2001 का रिपोर्ट कहता है की लॉट्स टैम्पल को 70 मिलियन पर्यटकों द्वारा देखा गया है। जिस यह लॉटस टैम्पल ने पेरिस के एफिल टावर और भारत का ताजमहल का भी रेकॉर्ड भी तोड़ दिया है। लोट्स टैम्पल में आंकड़ों के अनुसार यहाँ हर साल 4 मिलियन से भी ज्यादा पर्यटक यहाँ यात्रा के लिए आते है।

क़ुतुब मीनार दिल्ही :

कुतुब मीनार छतरपुर मंदिर से करीबन 4 किमी की दुरी पर स्थित है। भारत में दिल्ली शहर के महरौली में ईंट से बनी, विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। दिल्ली को भारत का दिल कहा जाता है, यहाँ पर कई प्राचीन इमारते और धरोहर स्थित है। इन पुरानी और खास इमारतों में से एक इमारत में स्थित है जिसका नाम है क़ुतुब मीनार, जो भारत और विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। क़ुतुब मीनार भारत का सबसे खास और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।क़ुतुब मीनार दिल्ली के दक्षिण इलाक़े में महरौली में है।

यह इमारत हिंदू-मुग़ल इतिहास का एक बहुत खास हिस्सा है।कुतुब मीनार को यूनेस्को द्वारा भारत के सबसे पुराने वैश्विक धरोहरों की सूचि में भी शामिल किया गया है। इस आर्टिकल में हम क़ुतुब मीनार की जानकारी और कुछ खास और दिलचस्प बातों पर पर नज़र डालेंगे।क़ुतुब मीनार दुनिया की सबसे बड़ी ईटों की दीवार है जिसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है।मोहाली की फतह बुर्ज के बाद भारत की सबसे बड़ी मीनार में क़ुतुब मीनार का नाम आता है। क़ुतुब मीनार के आस-पास परिसर क़ुतुब काम्प्लेक्स है जो कि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है।

Katyayani Mandir Chattarpur
Katyayani Mandir Chattarpur

राट्रीय स्मारक इंडिया गेट :

दिल्ही के सभी प्रमुख आकर्षणों में से इंडिया गेट सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। इंडिया गेट के नाम से प्रसिद्ध अखिल भारतीय युद्ध स्मारक की भव्य संरचना विस्मयकारी है। और इसकी तुलना अक्सर फ्रांस में आर्क डी ट्रायम्फ, मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया और रोम में कॉन्सटेंटाइन के आर्क (मेहराब) से की जाती है। दिल्ली शहर के केंद्र में स्थित, इंडिया गेट देश के राष्ट्रीय स्मारकों में सबसे लंबा यानि 42 मीटर लंबा ऐतिहासिक स्टेकचर सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था।

यह देश के सबसे बड़े युद्ध स्मारक में से एक है।इंडिया गेट हर साल गणतंत्र दिवस परेड की मेजबानी के लिए भी प्रसिद्ध है। आज का हमारा आर्टिकल देश की सबसे ऊंची युद्ध स्मारक इंडिया गेट के बारे में है। इस आर्टिकल में आपको इंडिया गेट का इतिहास, डिजाइन और इंडिया गेट से जुड़े रोचक तथ्य जानने को मिलेंगे। साथ ही इस पर्यटन स्थल से जुड़े तमाम सवालों के जवाब भी आपको हमारे आर्टिकल के जरिए मिल जाएंगे।

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 इस्कॉन मंदिर :

इस्कॉन मंदिर को दूसरे हरे राम हरे कृष्ण के नाम से पहचाना जाता है यह इस्कॉन मंदिर कृष्ण को समर्पित है यह इस्कॉन मंदिर की स्थापना ई.स 1998 में अच्युत कनविंडे ध्वारा निर्माणित किया गया है। यह मंदिर नई दिल्ही के कैलास क्षेत्र के पूर्व दिशा में हरे कृष्णा पर्वत पर स्थित है। यह स्थान सेंटर हॉल हरे राम और हरे कृष्ण की स्वर्गीय धुन का उल्लेख दर्शाता है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर :

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर नई दिल्ही में मौजूद यह मंदिर सुन्दर और आकर्षण का केंद्र बना हुवा है।

यह स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की संस्कृति , आध्यात्मिकता और वास्तुशैली का एक अदभुत नमूना है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ही की यमुना नदी के किनारे पर मौजूद है।

यह स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर हिन्दू धर्म की संस्कृति का एक अत्यंत आकर्षक स्थान है।

दिल्ही का लाल किला :

  • दिल्ली का लाल किला भारत में दिल्ली शहर का एक ऐतिहासिक किला है।
  • लाल किला भारत में पर्यटकों के लिए एक बहुत खास जगह है।
  • दूसरे देशों से आने वाले पर्यटक भी भारत के इस किले को देखना बेहद पसंद करते हैं।
  • किले के बारे में बात करें तो आपको बता दें कि 1856 तक इस किले पर
  • लगभग 200 वर्षों तक मुगल वंश के सम्राटों का राज था।
  • यह के केंद्र में स्थित है इसके साथ ही यहाँ कई संग्रहालय हैं।
  • किला बादशाहों और उनके घर के अलावा यह मुगल राज्य का औपचारिक और राजनीतिक केंद्र था।
  • यह क्षेत्र खास तौर से होने वाली सभा के लिए स्थापित किया गया था।

जंतर मंतर दिल्ही :

  1. जंतर मंतर दिल्ही में संसद मार्ग नई दिल्ही के दक्षिणी कनॉट सर्किल में मौजूद है।
  2. दिल्ही का जंतर मंतर विशाल वेधशाला है।
  3. जंतर मंतर को प्राचीन समय में समय और स्थान के अध्ययन की मदद में
  4. और मुर्हुत देखने के लिए इसका निर्माण करवाया गया था।
  5. यह दिल्ही के जंतर मंतर का निर्माण महाराजा जयसिंह ने करवाया था।
  6. महाराजा जयसिंह ने ई.स 1724 में जंतर मंतर का निर्माण करवाया था।  
  7. यह जंतर मंतर जयपुर ,उज्जैन ,वाराणसी और मथुरा में मौजूद यह पांच ऐसी वेधशालाओ में से एक माना जाता है।

Katyayani Mandir Chattarpur कैसे पहुंचे – 

यह छतरपुर मंदिर जाने के लिए आप फ्लाइट, ट्रेन और बस में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।

छतरपुर मंदिर फ्लाइट से कैसे पहुंचे :

आपने छतरपुर मंदिर घूमने के लिए आपने हवाई मार्ग का चुनाव किया है।

तो हम आपको बता दे कि दिल्ली का इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे अच्छा विकल्प हैं।

हवाई अड्डे से आप स्थानीय साधनो की मदद से लाल किला और छतरपुर मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

छतरपुर मंदिर ट्रेन मार्ग से कैसे पहुंचे :

Chattarpur mandir metro route का चुनाव किया हैं तो हम आपको बता दें कि दिल्ली रेलवे जंक्शन पुरानी दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा हज़रत निज़ामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशन दिल्ली के अन्य रेलवे स्टेशन हैं। आप इनमे से किसी भी स्टेशन का चुनाव कर सकते हैं और दिल्ली में चलने वाले स्थानीय साधनों की मदद से छतरपुर मंदिर तक का सफ़र तय कर सकते हैं। 

छतरपुर मंदिर सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे :

chattarpur mandir road मार्ग की योजना बनाई हैं तो बता दें कि दिल्ली अपने आसपास के सभी शहरो से सड़क मार्ग के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ। आप बस या अन्य किसी साधन से छतरपुर मंदिर तक आसानी से पहुँच जाएंगे। 

Katyayani Mandir Chattarpur Delhi Map –

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Shree Adya Katyayani Shaktipeeth Mandir Video –

छत्तरपुर मंदिर के अन्य प्रश्न –

1 . कात्यायनी मंदिर कहा स्थित है ?

katyayani mandir chattarpur राजधानी दिल्ही में गुड़गांव – महरौली मार्ग के नजदीकी छतरपुर में मौजूद है। 

2 . कात्यायनी मंदिर को दूसरे कौनसे नाम से पहचाना जाता है ?

कात्यायनी मंदिर को दूसरे छत्तरपुर मंदिर से भी पहचाना जाता है। 

3 . छत्तरपुर मंदिर का शिलान्यास कब रखा गया था ?

कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर का शिलान्यास ई.स 1974 में किया गया था। 

4 . कात्यायनी मंदिर की स्थापना किसने की थी ?

छत्तरपुर मंदिर की स्थापना कर्णाटक के महान संत बाबा नागपालजी ने किया था। 

5 . छत्तरपुर मंदिर कितने क्षेत्र में फैला हुवा है ?

कात्यायनी मंदिर का निर्माण 70 एकड़ में किया गया है। 

6 . छत्तरपुर मंदिर से कुतुबमीनार की दुरी कितनी है ?

छत्तरपुर मंदिर फ़क्त कुतुबमीनार से करीबन 4 कि.मी की दुरी पर स्थित है। 

7 .katyayani mandir chattarpur के निर्माण के पूर्व क्या हुवा करता था ?

कात्यायनी मंदिर की स्थापना के पूर्व इस स्थान पर कुटियाहुआ करती थी। 

8 . कात्यायनी मंदिर के कक्ष में क्या रखा गया है ?

कात्यायनी मंदिर में एक कमरे में चांदी की खुरसिया और टेबल है।

दूसरा कमरा शयन कक्ष से पहचाना जाता है इसमें बिस्तरे,

ड्रेसिंग टेबल और चांदी से नक्काशी किये हुए टेबल देखने को मिलते है।

9 . कात्यायनी मंदिर की मान्यता क्या है ?

मंदिर के ध्वार के नजदीकी एक पेड़ है, पेड़ पर पवित्र धागा बांधा जाता है। 

श्रदालु उनकी इछाओ को पूरी करने के लिए धागे के साथ चुडिया बांधते है।

और मन ही मन अपनी मनोकामना की प्रार्थना करते है।

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख delhi chattarpur mandir के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने chattarpur mandir history के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

2 thoughts on “Katyayani Mandir Chattarpur History In Hindi | श्री आध्य कात्यायनी मंदिर”

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