Kamakhya Devi Temple History In Hindi - कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास

Kamakhya Devi Temple History In Hindi – कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास

भारत के हिन्दू धर्म के 51 शक्ति पीठो में से Kamakhya Devi Temple History In Hindi बताएँगे। असम में गुवाहाटी के पश्चिमी भाग की नीलांचल पहाड़ी पर उपस्थित कामाख्या देवी का इतिहास बताने वाले है। 

चार सबसे महत्वपूर्ण शक्ति पीठों में से एक कामाख्या देवी का मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरो में से एक है। माता के दर्शन करने वाले सभी भक्तो की मनोकामना माता पूरी करती है। क्योकि यह मंदिर भारत के प्रमुख चमत्कारिक मंदिर में एक कहा जाता है। यह स्थान व्यापक के लिए सबसे प्रचलित तांत्रिक शक्तिवाद पंथ का केंद्र बिंदु माना जाता है। आज हम Kamakhya Temple Black Magic, Kamakhya Devi Temple Inside और Kamakhya Devi Temple Images के सिवा उनके चमत्कारों की कथा बताएँगे। 

भारत में हिन्दू धर्मो के असंख्य मंदिर मौजूद है। उसमे कई मंदिर के इतिहास बहुत ही गौरव पूर्ण है। क्योकि हमारी हिन्दू संस्कृति अरबो सालो से भारत में फूली और फली है। ऐसे ही एक मंदिर कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास भी ऐसा ही है। क्योकि देवी के रजस्वला के कारन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध और आकर्षण का केंद्र है। उस मंदिर में सभी मंदिरो से कुछ अलग ही महातम है। तो चलिए कामाख्या मंदिर जाने का रास्ता और कामाख्या मंदिर का रहस्य की सभी जानकारी से ज्ञात करवाते है। 

Table of Contents

Kamakhya Devi Temple History In Hindi –

 आज हम Kamakhya Devi Story के जरिये आपको बतादे की कामाख्या देवी मंदिर मध्यकाल के समय में निर्माण हुआ था। लेकिन 1553-54 की साल में राजा बिस्व सिंघ ने यह मंदिर को पुनर्निर्माण किया था। लेकिन कालापहाड़ नाम के एक मुस्लिम राजा ने आक्रमण करके मंदिर को ध्वस्त करा दिया था। उनके आक्रमण के पश्यात राजा बिस्व सिंघ के पुत्र महान कोच राजा नरनारायण ने कामाख्या मंदिर को 1565 की साल में जीर्णोद्धार किया। 

एव अपने राज्य के सैनिको का रक्षण दिया था। माता के मंदिर को कई राज्यों के सैनिको का रक्षण प्राप्त हुआ है। 17 के दशक में अहोम ने मंदिर का पुनःनिर्माण करवाया उस का जिक्र तांबे की प्लेट एव शिलालेखो में मौजूद है। 1897 की साल में काफी नुकसान हुआ क्योकि भूकंप की वजह से उस मंदिर में स्थित न्य मंदिरों के गुंबद टूट गए। लेकिन कोचबिहार के राजा ने मंदिर को बहुत ही बड़ी रकम दान करके जीर्णोद्धार किया था। 

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कामाख्या देवी मंदिर के नजदीकी पर्यटक स्थल –

  • Pobitora Wildlife Sanctuary
  • Assam State Zoo cum Botanical Garden
  • Umananda Temple
  • Kaziranga National Park
  • Kamakhya Temple
  • Dibru Saikhowa National Park

कामाख्या देवी मंदिर की पौराणिक मान्यताएँ –

Kamakhya Devi Temple History In Hindi - कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास
Kamakhya Devi Temple History In Hindi 

मंदिर में योनि का पूजन होता है। एव उस मंदिर के नील प्रस्तरमय योनि में माँ कामाख्या साक्षात् वास करती है। ऐसा कहा जाता है। श्रद्धालु शिला का दर्शन, पूजन, और स्पर्श करते हैं। वह दैवी कृपा एव मोक्ष प्राप्ती के साथ माता का सान्निध्य प्राप्त होता है। पर्वत तीन विभागों में विभाजित है। एक तरफ भुवनेश्वरी पीठ, बिच में महामाया पीठ जहा पश्चिमी भाग विष्णुपर्वत (वाराह पर्वत) और शिवपर्वत है। विष्णुपर्वत से वाराही कुण्ड दिखता है। आषाढ़ महीने के मृगाशिरा नक्षत्र के चौथे चरण आर्द्रा नक्षत्र के पहले चरण में देवी का दर्शन तीन दिनों के लिए बंद रहता है।

क्योकि माँ कामाख्या ऋतुमती होने के कारन बंध कर दिया जाता है। 4 दिन ब्राह्म मुहूर्त में माँ का श्रृंगार, स्नानोपरांत दर्शन शुरू होता है। पहले समय में चारो और चार मार्ग हुआ करते थे। जिसके नाम स्वर्गद्वार, सिंहद्वार, हनुमंत द्वार और व्याघ्र द्वार के नाम से प्रसिद्ध थे। लेकिन वक्त के साथ वह लुप्त हो चूका है। और वर्तमान समय में चारों ओर पहाड़ी सीढ़ियाँ बनी हुई है। उस सीढ़ियों से चढ़कर माता के दर्शन करते है। ज्यादातर श्रद्धालु टेक्सी से दर्शन के लिए पहुंचते है। जिस पहाड़ी मार्ग माँ कामाख्या का पीठ है। उन्हें नरकासुर पथ कहते हैं।

कामाख्या देवी मंदिर में पूजा का समय – Kamakhya Devi Temple Timings

Kamakhya Devi Temple Pooja Timing की बात करे तो हररोज सुबह 5 बजे माता कामाख्या देवी को स्नान कराते है। स्नान करने के पश्यात 6 बजे नित्य पूजा की जाती है। बाद में सवेरे 8 से मंदिर के द्वार हमारे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते है। लेकिन दोपहर को एक बजे से द्वार बंध करके माता भोग चढ़ाये जाते है वह प्रसाद यात्रलुओ में बांट दिया जाता है। भोग लगाकर ढाई बजे से  मंदिर के द्वार फिर से दर्शा के हेतु खोल दिए जाते है। एव शाम को साढ़े सात बजे से माता की आरती की जाती है। बाद में द्वार फिर से बंद कर दिए जाते है। 

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कामाख्या देवी मंदिर से जुड़ी कहानी –

कई किंवदंतियों और पौराणिक कथाओं के से‍ घिरा कामाख्या देवी मंदिर की कहानी बताये तो सती माता ने अपना विवाह भगवान शंकर के साथ रचाया था। लेकिन माता के विवाह से उनके पिताजी दक्ष प्रजापति खुश नहीं हुए। और उनके पिताजी ने एक यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में उन्होने उनके पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया। फिरभी माता सती बिना बुलाये ही अपने पिता के घर पहुंचे। लेकिन वहा भगवान शंकर का अपमान हुआ। 

उस से नाराज हो करके सती हवन कुंड में कूद गए। दूसरी और शिवजी को उस का पता चला तो वह सती का शव लेकर तांडव करने लगे। उन्हें रोकने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया जिनके कारन माता सती के शव 51 भागों में कटकर अलग अलग स्थानों पर जा गिरा। उसमे सती माता का गर्भ और योनि जिस स्थान पर गिरा उस स्थान एक मंदिर बना जिन्हे कामाख्या देवी के मंदिर के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त हुई हैं।

कामाख्या देवी की कुछ माहिती – Secrets of Kamakhya Devi Temple

  • माता के मंदिर का यह एक रोचक जानकारी है। कामाख्या रजस्वला होती हैं।
  • तो जलकुंड में पानी नहीं खून बहता है।
  • ऐसा कहा जाता है की आषाढ़ महीने के 7 दिन माता कामाख्या को माहवारी शुरू होती है।
  • एव यह माहवारी बंध होते ही मंदिर में भव्य मेला  लगता है।
  • मंदिर की यह खासियत है की माँ के  रजस्वला का समय होता है। मंदिर के द्वार बंद रहता है।
  • मंदिर के कपाट बंद करने से पहले यहां एक सफेद कपड़ा बिछाया जाता है। 
  • जब भी द्वार (कपाट) खुलता है यह सफ़ेद कपड़ा बिल्कुल लाल हो जाता है।
  • यह लाला कपडे को अंबुबाची मेले के भक्तो को प्रसाद के स्वरूप दिया जाता है।
  • यह मंदिर सभी देवी मंदिरो से सबसे अलग है।
  • माता के रजस्वला बंद होते ही यहाँ लोग दर्शन के लिए जाते है। 

कामाख्या देवी मंदिर पहुंचने के रास्ते –

रेलवे मार्ग से कामाख्या देवी मंदिर पहुंचें –

(How to Reach Kamakhya Devi Temple) अगर आप कामाख्या शक्तिपीठ जाना चाहते है। और अपने रेलवे मार्ग की पसंदगी की है। तो आपको ज्ञात करदे की कामाख्या देवालय के सबसे नजदीक कामाख्या रेलवे स्टेशन शहर का सबसे बड़ा स्टेशन है। वैसे तो (Nearest Station to Kamakhya Devi Temple) गुवाहाटी स्टेशन बड़ा रेलवे स्टेशन देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। और वह से कई ट्रेने दौड़ाई जाती है। वह उतर जे आप स्थानीय बस या सिटी सेंटर टैक्सी से कामाख्या देवी मंदिर बहुत ही आसानी से पहुंच सकते है।

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फ्लाइट से कामाख्या देवी मंदिर पहुंचें –

अगर आप Assam Kamakhya Devi Temple जाना चाहते है। और अपने हवाई मार्ग की पसंदगी की है। तो गुवाहाटी अंतर्राष्ट्रीय हवाई (गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा) उसका नजदीकी हवाई मथक है। यह हवाई अड्डा भारत के कई अंतरराष्ट्रीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह हवाई मथक कामाख्या शक्तिपीठ से तक़रीबन 20 किलोमीटर पश्चिम दिशा में उपस्थित है। यहाँ उतरके अपने होटल या सिटी सेंटर पहुंचने के लिए कैब या टेक्सी बुक कर सकते हैं।

सड़क मार्ग से कामाख्या देवी मंदिर पहुंचें –

Kamakhya Devi Temple Guwahati जाने के लिए गुवाहाटी से आसपास के शहरों और राज्यों के लये बस सेवा अच्छी तरह से चलाई जाती है। और सड़क मार्ग से बहुत ही अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आईएसबीटी, पल्टन बाजार और अदबारी तीन ट्रांसपोर्ट आसपास के राज्यों एव असम के कस्बों और शहरों के लिए बस सेवाएं प्रदान करता है। और उसके माध्यम से यात्रलुओ को कामाख्या शक्तिपीठ जाना और जाना बहुत ही आसान है। और आप भी जाना चाहते है। तो कोई भी तकलीफ का सामना करना नहीं पड़ेगा। 

कामाख्या देवी मंदिर का मुख्य आकर्षण –

माता के मंदिर के अंदर की बात करे तो उस के जनजदीक ही उतर में सौभाग्य कुण्ड ( क्रीड़ा पुष्करिणी) तालाब है। ऐसा कहा जाता है। की उस तालाब की परिक्रमा करने से पुण्य मिलता है। श्रद्धालु उस कुंड में स्नान करने के पश्यात श्री गणेशजी मंदिर में दर्शन के लिए प्रवेश करते है। Temple के सामने ही 12 स्तंभों के मध्य-स्थल में चलमूर्ति-उत्सव मूर्ति दिखाई देती है। उन्हें भोग मूर्ति या हरिगौरी मूर्ति के नाम से भी जानते है। 

मंदिर के उत्तर में दशभुज कामेश्वर महादेव,वृषवाहन और पंच-वक्त्र मौजूद हैं। मंदिर के दक्षिण भाग में 18 लोचना कमलासना देवी कामेश्वरी और 12 भुजी सिंहवाहिनी का स्थान हैं। श्रद्धालु पहले कामेश्वरी देवी और बाद में कामेश्वर शिव का दर्शन करते हैं। माता कामाख्या का योनिमुद्रा पीठ दस सीढ़ी के नीचे अंधकारपूर्ण गुफा में उपस्थित है। उस स्थान पर अखंड ज्योत जलती है उस स्थान पर जाने और आने का मार्ग अलग है। 

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कामाख्या देवी मंदिर की नजदीकी होटल और गेस्ट हाउस –

अगर आपको कोई भी जगह जाना है। और आपको उस जगह की रहने और रुकने की जगह आपको पता नहीं है। तो असुविधा और तकलीफ का सामना करना पड़ता है। लेकिन आपको कोई भी तकलीफ न साहनी पड़े उसके लिए हम आपको सहाय के लिए बताते है। की यहाँ कामाख्या देवालय का गेस्ट हाउस अपनी यात्रालु एव भक्तों के लिए खुला रहता है। एव यहाँ कोई भी व्यक्ति बहुत ही आसानी से रह सकता है उसके आलावा भी कई होटल ओर गेस्टहॉउस मौजूद है। आपको वहा  रहने के लिए एक रूम के लिए 400 से 600 रुपये खर्चने पड़ेंगे। (Hotels Near Kamakhya Devi Temple Guwahati)

  • Shreemoyee Inn
  • MB girls hostel
  • Greenland house
  • Radisson Blu Hotel Guwahati 
  • Hotel Atithi
  • D.D Lodge
  • Kamakhya Dham,
  • Chakreshwar Bhavan,
  • Kamakhya Debter Guest House
  • Rani Bhavan,

Kamakhya Devi Temple Map & Location –

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Kamakhya Devi Temple Story in Hindi Video – 

कामाख्या देवी मंदिर के रोचक तथ्य – Kamakhya Devi Temple Interesting Facts

  • माता कामाख्या देवी का मंदिर में पशुओं की बलि चढाई जाती थी। वह उस बलि के कारन बहुत प्रसिद्ध् है।
  • मगर उसमे कोई भी मादा पशु की बलि नहीं चढ़ाते थे। 
  • कामाख्या देवी का मंदिर के परिसर में एक समतल चट्टान है। जिसका आकार योनि के जैसा है। उसकी पूजा की जाती है।
  • देवी के मंदिर में भगवान शंकर के पांच मंदिर अघोरा, अमरत्सोस्वरा, कामेश्वर, सिद्धेश्वरा और केदारेश्वर उपस्थित हैं।
  • माता का मंदिर देवताओं के दस अवतार भैरवी, त्रिपुरा सुंदरी, काली, मातंगी,तारा,
  • कमला, बगलामुखी, भुवनेश्वरी, धूमावती और छिन्नमस्ता को समर्पित हैं।
  • यही मंदिर एक पहाड़ी पर तक़रीबन मील ऊंचे स्थान पर स्थित है। भक्त वहा माता के जयकारे लगाते हुए जाते हैं।
  • मां कामाख्या के शक्तिपीठ मंदिर में प्रसिद्ध अंबुबाची मेला चार दिनों के लिए लगता है। यह अंबुबाची मेला बहुत ही प्रसिद्ध है। 
  • मंदिर में जब मेला लगता है। तो उसमे देशभर के तांत्रिक भाग लेते हैं।

FAQ –

1 .क्या कामाख्या देवी मंदिर में एसी हाल है ? 

हा

2 .कामाख्या मंदिर दर्शन समय क्या है ? Kamakhya Devi Temple Opening Time

सुबह 8 से दोपहर 1:00 बजे तक और फिर दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे

3 .कामाख्या मंदिर कहां है ?

असम राज्य में गुवाहाटी के पश्चिमी भाग की नीलांचल पहाड़ी पर

4 .Kya Kamakhya Devi ka Mandir Navratri mein khulega ?

Yes

5 .April 2021 which day closed Kamakhya Devi temple ?

Yes 

6 .कामाख्या मंदिर का इतिहास क्या है ?

हमारी पोस्ट में माहिती दी गयी है। 

7 . गुवाहाटी से कामाख्या देवी मंदिर कितनी दूर ?

8 किलो मिटर 

8 .कामाख्या मंदिर की लिए प्रसिद्ध है ?

वह तंत्र विद्या और सिद्धि का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। 

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Conclusion –

आपको मेरा Kamakhya Devi Temple History बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Kamakhya Devi Temple Video और Kamakhya Temple Mystery से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास Kamakhya Devi Bleeding या Kamakhya Devi Bleeding Story in Hindi की कोई जानकारी हैं।

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

1 .Kamakhya Temple Official Website क्या है ?

2 .कामाख्या देवी मंदिर के पुजारी का मोबाइल नंबर

3 .कामाख्या मंदिर कब बंद रहता है ?

58 thoughts on “Kamakhya Devi Temple History In Hindi – कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास”

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