Jhalawar Fort History In Hindi Rajasthan

Jhalawar Fort History In Hindi Rajasthan | झालावाड़ किले का इतिहास&जानकारी

Jhalawar Fort History  राजस्थान के झालावाड़ शहर में स्थित है। झालावाड़ की गिनती पृथ्वी के स्वर्ग जैसे स्थानों में की जाती है भारत देश के कई स्थान ऐसे है। जिसे देख के मनुष्य स्वर्ग को भी भूल सकता है। आज हम आपको Jhalawar Fort की पूरी जानकी बताने वाले है।झालावाड़ की भूमि पर निमित झालावाड़ किले की जानकारी के बारे में आज हम आपको कुछ ज्यादा जानकारी प्रदान करने वाले है। उस फोर्ट को गढ़ महल भी कहा जाता है। Jhalawar Fort  झालावाड़ नगर के बीचो बिच उस्थित है। तो चलिए हम इस झालावाड़ किला के बारे में जानते है। 

किले का नाम झालावाड़ किला 
राज्य  राजस्थान 
शहर झालावाड़ 
निर्माणकाल  ई.1840 से 1845
निर्मणकर्ता महाराजा राणा मदन सिंह
वास्तुकला राजपुताना वास्तुकला
निर्माण का उद्देश्य राज्य की स्त्रि सभ्यो की रहने की व्यवस्था

Jhalawar Fort History In Hindi – 

उसकी बनावट यहा के महाराजा राणा मदन सिंह ने करवाई थी। उसका निर्माण तक़रीबन 1840 से 1845 की साल में हुआ है ऐसा प्रतीत होता है। वर्तमान समय में इस जगह पर कलेक्टर [जिलाधीश कार्यालय] और दूसरी कई सरकारी ओफिसे हालही में कार्यरत है। झालावाड़ किले की खूबसुरति को बढ़ाने के लिए महाराजा के उत्तराधिकारी पुत्रो ने किले में कई स्केच और नयन रम्य तस्वीरें लगवाई है।यह किला राजस्थान का प्रमुख पर्यटक स्थल है और मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

jhalwar फोर्ट से आकर्षित हो के बहुत भारी संख्या में लोग देखने ने के लिए आते है।  इस किले को देखने के लिए आपको वहा के अधिकारियों रजामंदी लेनी आवश्यक होती है। उनकी स्पेशल अनुमति बगैर आप उस जगह को देख नहीं सकते है। वीमेंस पैलेस और जनाना खास झालावाड़ किले के मुख्य आकर्षण के केंद्र है। उस फोर्ट की दीवारे दर्पण से सजाई गई है और और उनकी यही खूबी  ही लोग उन्हें देखने के लिए उतावले होते है। अगर आपको भी गुमने फिरने का शोख है।

इसके बारेमे भी पढ़िए – Khajuraho Matangeshwar Temple History In Hindi

झालावाड़ किले की संरचना – 

jhalawad फोर्ट की बनावट एक आधुनिक पद्धति से महाराजा ने करवाई है क्योकि उसमे किले की दीवारों पे दर्पण यानि शीशे से सजाई गई है अगर आपकी चाह झालावाड़ की और जाने की है तो आपको ज्ञात करदेते है की आपको भी  इस की किले की मुलाकात जरूर लेनी चाहिए। अगर आप को भी Jhalawar Fort History की यात्रा का विचार है तो हम आपको उनके आस पास के देखने के योग्य पर्यटक स्थ की भी जानकारी देने वाले है। 1840 से 1845 की साल में महाराजा राणा मदन सिंह ने अपने शासन काल के दौरान महाराजा की शानो शौकत की जलक की प्रतीति दिखाई देती है।

झालावाड़ किले का इतिहास
झालावाड़ किले का इतिहास

Jhalawar Fort की बनावट की वजह – 

Jhalawar Fort History और किले की बनावट के पीछे मुख्य उद्देश्य राज्य की स्त्रि सभ्यो की रहने की व्यवस्था के लिए निर्माण करवाया गया था। महाराजा राणा मदन सिंह ने महल की महिला सभ्यो की खातिर यह किला बनवाया था। उस किले  की दीवारे मे शीशे तराशे गए है। क्योकि महिलाओ को शीशे और दर्पण की चाह ज्यादा होती है। इस महल की सारि बनावट सब के नयन रम्य दीखते है लेकिन स्त्रियों को ज्यादा पसंद आता है।

झालावाड़ किले की वास्तुकला – 

zalawad भारत देश की स्वर्ग भूमि में से एक है इसका इतिहास बहुत ही पुरानी है। झालावाड़ फोर्ट Jhalawar नगर के बीचो बिच उपस्थित है और यह फोर्ट राजपुताना वास्तुकला का एक नयन रम्य और सुंदर उदाहरण कहा जाता है। Jhalawar Fort 19 वीं दशक की शताब्दी के मध्य में यहाँ के राजा मदन सिंह के शासन साम्राज्य में बना झालावाड़ राजपूतो की शान की निशानी है। सबको मालूम और ज्ञात की खातिर बताते है की झालावाड़ फोर्ट अपने नगर का मुख्य गौरव और पर्यटक स्थल है। यह किला जितना बहार से खूब सूरत दीखता है इसा ही अंदर से भी सुन्दर है क्योकि महल की दीवारे दर्पण से चमकाई गई है।

Jhalawar Fort जाने का सही समय

अगर आप  jhalawar city की और जाते है और आपको भी शहर में गुमने की खाइश है तो आपको गर्म मौसम में नहीं जाना चाहिए क्योकि उस जगह पर शुष्क वातावरण है। Best Time To Visit Jhalawar Fort History In Hindi की जानकारी के अनुसार आपको सर्दियों के मौसम में जाना चाहिए। यानि आपको अक्टूबर,नवंबर ,दिसम्बर ,जनवरी और फरवरी माह में visit करने की सलाह दी जाती है। झालावाड़ क्षेत्र गर्म होने के कारन ही यहाँ बहुत गर्मी का अनुभव होता है इस लिए आपको गर्मियों के मौसम  वहा जाने की सोचना नहीं चाही ये।

झालावाड़ किले की नजदीकी पर्यटन स्थल

गागरोन किला :

Gagron Fort In Hindi की जानकारी के अनुसार  jhalawar rajasthan राज्य के झालावाड़ शहर में गागरोन किला राजपूत वास्तुकला की एक अदभुद  और उत्कृष्ट उदाहरण की निशानी  है इस जगह पर  पानी और पहाड़ किले को और भी खूबसूतर बनाने में सहयोग देता है। गागरोन किले पर देश भरसे और विदेश से भी यात्रलु आते है।  गागरोन फोर्ट का निर्माण एक पहाड़ी की चोटी पर करवाया गया है।

वहा जाकरके अगर आप निचे की और नजर डालते  है तो आपको एक नयन रम्य 360 डिग्री चित्र की अनुमति होती है। इस फोर्ट के दरवाजे के बाहरी और मीठे शाह जो इक सूफी संत का मकबरा बना हुआ है। और उसके आलावा एक संग्रहालय भी है 2013 के जून माह में गागरोन फोर्ट  को यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल किया गया है।

इसके बारेमे भी पढ़िए – Maharaja Chhatrasal Museum History In Hind

मीठे शाह का मकबरा :

झालावाड़ शहर के गागरोन फोर्ट के थोड़ी दुरी पर ही किले के गेट के बाहर  मीठे शाह जो की एक सूफी संत का एक मकबरा बना हुआ है।झालावाड़ शहर के लोगों से बहुत ही ज्यादा सम्मान प्राप्त है। मीठे शाह का मकबरा पर वर्ष में एक वक्त मुहर्रम के समय पर  एक मेला लगाया जाता है। Tomb Of Meethe Shah इस जगह के खुदा माने जाते है। 

Jhalawar Fort History In Hindi
Jhalawar Fort History In Hindi

झालरापाटन :

Jhalrapatan  झालावाड़ नगर से तक़रीबन 7 किमी की दूर पर यह जगह उपस्थित है। और यह जगह इस नगर की मुख्य पर्यटन स्थल माना जाता है उसला दूसरा नाम  टेम्पल बेल्स का शहर’ के नाम सभी जाना जाता है। यहाँ कुछ अद्भुत और आकर्षित मंदिरो का निर्माण करवाया गया है। उसकी बनावट मध्ययुग में करवाई गई है। इस जगह के मंदिरो का निर्माण कार्य उस क्षेत्र के राजपूताना महाराजाओ की शासन प्रणाली में करवाया गया है। यहाँ के मंदिर ही दर्शको को अपनी और यात्रीओ को आकर्षित करते हैं।

भीमसागर बांध :

झालावाड़ से लगभग  24 किमी दूर भीमसागर बंध का निर्माण है। अगर आप इस स्थान पर जाते है और इस जगह नहीं जाते तो आपकी सफर अधूरी कही जाते है। इस जगह पर आप अपने पुरे परिवार के सतह जा सकते है। Bhimsagar Dam  के आस पास की  चारो और हरियाली और बाँध में उफनते पानी देखना एक अच्छे  भाग्य की निशानी मानी जाती है।

सरकारी संग्रहालय झालावाड़ :

अगर आपको भारत Jhalawar Fort History की जानकारी लेने का शोख है तो इस स्थान पर जरूर जाना चाहिए।  पुरे झालावाड़ प्रान्त के आस पास की जगह की नन्ही से नन्ही चीजों को जिसने संभालके रखा है। उस को Government Museum Jhalawar है। और इस म्यूजियम में तक़रीबन पुरे 100 साल से इतिहासिक चीजों को संरक्षित किया है।

इसका निर्माण लगभग 1915 की साल में सरकार की और से बनवाया गया है। इस सरकारी Museum में कई पांडुलिपियाँ , कलाकृतियाँ , देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और चित्र जैसी कलाकृतियों  जो आजके जमाने मे नहीं मिलती ऐसी मिलती है।  सबको हम jhala rajput history in hindi की जानकारी देने वाले है। 

Jhalawar Fort कैसे पहुंचे – 

  • झालावाड़ किला हवाई मार्ग से कैसे पहुंचे :

आप झालावाड़ किला फ्लाइट से कैसे पहुंचे ?

तो आपको बतादे की झालावाड़ नगर का नजदी की हवाई मथक कोटा कहा जाता है।

झालावाड़ शहर से तक़रीबन 82 किमी की दूरी पर है।

इस हवाई मथक से झालावाड़ शहर में जाने के लिए आपको कैब या टेक्सी किराए पर ले जा सकते है। 

इसके बारेमे भी पढ़िए – Bhimkund History In Hindi Madhya Pradesh

  • झालावाड़ किला रेलवे मार्ग से कैसे पहुंचे :

झालावाड़ जिले के लिए कोईभी रेल संपर्क या हवाई उड़ान की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।  झालावाड़ का नजदी की रेलवे स्टेशन रामगंजमंडी है जो यह ऐतिहासिक नगर से 25 किमी की दूरी पे उपस्थित है। यहाँ उदार के आपको टेक्सी या किसी भी साधन के जरिये यहाँ पहुंचना पड़ेगा।

Jhalawar Fort
Jhalawar Fort
  • Jhalawar Fort सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे :

राजस्थान राज्य  का झालावाड़  एक प्रमुख  और प्राचीन ऐतिहासिक नगर होने के बाद भी भारत के मुख्य शहरों सिर्फ  सिर्फ रोड मार्ग के जरिये से ही जुड़ा हुआ है। झालावाड़ फोर्ट में जाने के आपको भी जोधपुर और जयपुर जैसे मुख्य नगरों से आपको  टेक्सी ,बस और कैब की सेवाएं प्रदान की जाती है। और NH 12 झालावाड़ शहर को भारत देश के मुख्य नगरों से जोड़ता है।

झालावाड़ में खाने के लिए उपलब्ध भोजन

झालावाड़ शहर में आपको राजस्थान का स्वादिष्ट भोजन की मिजबानि  ले सकते है यहाँ सभी भारतीय भोजन मिलते है। इस शहर में स्वादिस्ट और मसालेदार भोजन भी उपलब्ध है। जैसे से की सेव टमाटर की सब्जी , दाल बाटी चूरमा और मक्की की राब जो की pahchan rajasthan की ख्यात नाम सब्जी है।

आपको झालावाड़ शहर  की होटल और रेस्टोरंट में आपको नॉन-वेज और वेज सभी प्रकार के भोजन की सुविधाएं मिलती है। अगर आप इस स्थल की शेर करने जाते है तो आपको उस का ख्यात नाम खाना दाल बाटी का स्वाद जरुर चखना चाहिए। इसा कहा जाता है की अगर आप राजस्थान जाते है और दाल बाटी नहीं खाते तो आपकी आपकी यात्रा आधूरी  कहलाती है। 

झालावाड़ की नजदीकी होटल

  1. Hotel Heritage
  • Bhilwadiwale, Khandiya, Rajasthan 
  1. Hotel Indraprastha Residency
  • NH 12, opp. RSEB, Kapil Vastu Colony, Khandiya, Rajasthan 
  1. Hotel Jhamku Palace
  • Jhalrapatan Road, N.H. 12, Near Sanjeevani Hospital, Jhalawar, Rajasthan  06250
  1. Hotel Krishna Palace
  • N.H.12, PATAN ROAD, Jhalawar, Rajasthan 
  1. Dwarika Hotel
  • NH52, Gayatri Nagar, Jhalawar, Rajasthan

Jhalawar Fort Rajasthan Map –

इसके बारेमे भी पढ़िए – Haldighati Ka YudhHistory In Hindi Rajasthan

Jhalawar Fort video –

झालावाड़ किले के प्रश्न

1 . झालावाड़ किला कहा स्थित है ?

झालावाड़ किला भारत के राजस्थान राज्य के झालावाड़ शहर में स्थित है। 

2 . झालावाड़ किले का निर्माण कब करवाया गया था ?

झालावाड़ किले का निर्माण करीबन ई.1840 से 1845 की साल में करवाया गया था। 

3 . झालावाड़ किले का निर्माण किसने करवाया था ?

झालावाड़ किले का निर्माण महाराजा राणा मदन सिंह ने

अपने शासन काल के दौरान महाराजा की शानो शौकत की जलक की प्रतीति करवाने के लिए करवाया था। 

4 . झालावाड़ किले के निर्माण का उद्देश्य क्या था ?

किले की बनावट का मुख्य उद्देश्य स्त्रि सभ्यो की रहने की व्यवस्था था।

महाराजा राणा मदन सिंह ने महल की महिला सभ्यो की खातिर यह किला बनवाया था।

5 . झालावाड़ किले का निर्माण किस शैली में किया गया है ?

झालावाड़ किले का निर्माण राजपुताना वास्तुकला का एक नयन रम्य और सुंदर उदाहरण कहा जाता है।

6 . झालावाड़ किला घूमने के लिए किस समय जाना अच्छा रहता है ?

राजस्थान में स्थित यह किला मौसम की जानकारी के

अनुसार आपको सर्दियों के मौसम में जाना सबसे बेहतर रहता है। 

7 . राजस्थान के झालावाड़ किले के नजदीकी पर्यटन स्थल कौनसे है ?

झालावाड़ किले के सबसे नजदीकी और सुन्दर पर्यटन स्थलों

गागरोन किला

मीठे शाह का मकबरा

झालरापाटन

भीमसागर बांध

सरकारी संग्रहालय झालावाड़

इसके बारेमे भी पढ़िए – Saputara Hill Station Information In Hindi Gujarat

Conclusion –

आपको मेरा ये लेख Jhalawar Fort History In Hindi पूरी तरह से समज आ गया होगा।

लेख के द्वारा हमने Jhalawar Fort के बारे में जानकारी दी है।

अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है।

तो आप हमें कमेंट करे और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

2 thoughts on “Jhalawar Fort History In Hindi Rajasthan | झालावाड़ किले का इतिहास&जानकारी”

  1. Pingback: Lakshmana Temple History In Hindi Madhya Pradesh | लक्ष्मण मंदिर खजुराहो

  2. Pingback: Sindhudurg Fort History In Hindi Maharashtra | सिंधुदुर्ग किले का इतिहास

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *