Jawala Ji Temple Shaktipeeth History In Hindi

Jawala Ji Temple Shaktipeeth History In Hindi | ज्वालादेवी मंदिर का इतिहास और जानकारी

नमस्कार दोस्तों Jawala Ji Temple Kangra In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम ज्वालामुखी मंदिर का इतिहास और जानकारी बताने वाले है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला देवी मंदिर ज्वालामुखी या ज्वाला देवी को समर्पित है। यह एक हिंदू देवी जिसे अनन्त ज्वालाओं के एक सेट द्वारा दर्शाया गया है। भारत और हिन्दुओ के कुल 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता के मुताबिक देवी सती की जीभ यह स्थल पर गिरी थी। उसके कारन वर्तमान समय में अब ज्वाला देवी मंदिर स्थित है। मंदिर में मूर्ति नहीं है एव ज्वाला देवी मंदिर में आयोजित पांच आरती यहाँ मुख्य आकर्षण हैं।

Jwala Devi Mandir History In Hindi

ज्वाला देवी मंदिर का इतिहास देखे तो कहानी एव मान्यता के अनुसार ज्वाला देवी मंदिर वह स्थान पर बना है जहां देवी सती की कटी हुई धधकती जीभ गिरी थी। माता सती ने खुद का बलिदान दिया था। यहाँ मंदिर का निर्माण राजा भूमि चंद कटोच ने पवित्र स्थल को खूबसूरत करने के लिए किया था। ज्वालादेवी मंदिर के निर्माण कार्य में पांडवों ने भी राजा की मदद की थी। मगर मंदिर का निर्माण वास्तव में 19 वीं शताब्दी में बनकर पूरा हुआ था।

मुगल काल के समय अकबर ने कई बार समय मंदिर की आग को बुझाने की कोशिश की थी। मगर सभी दिव्य महिमा में जलते रहे। ऐसा कहा जाता है कि जब एक विनम्र अकबर आग की लपटों के बीच श्रद्धांजलि अर्पित करने गया और देवी को एक स्वर्ण “छत्र” चढ़ाया तो सोना एक अज्ञात धातु में बदल गया था। और देवी ने उसकी भेंट को अस्वीकार कर दिया है। यह पवित्र हिन्दू मंदिर 51 शक्तीपीठों में से एक और हिंदुओं के लिए बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व रखता है।

Jwala Devi Temple Images

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Best Time To Visit Jwala Devi Kangra ज्वाला देवी मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

ज्वाला देवी मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय बताए तो यह पवित्र तीर्थ की यात्रा के लिए नवरात्रि महोत्सव एक लोकप्रिय समय होता है। आगंतुक यह भी ध्यान में रख सकते हैं कि मंदिर में मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर के महीनों में रंगीन मेले लगते हैं। उसमे आप हिस्सा भी ले सकते है।

Jawala Ji Temple Darshan And Aarti Timings

ज्वाला देवी मंदिर में वहाँ होने वाली आरती मंदिर का मुख्य आकर्षण है। मंदिर में दिन के समय पांच आरती और एक हवन होता है। सुबह 4:30 बजे श्रृंगार आरती की जाती है। उस समय माता जी को मालपुआ, मावा और मिश्री का भोग चढ़ाते है। आधे घंटे बाद मंगल आरती में मां को पीले चावल और दही का भोग देते है। दोपहर में मध्यानकाल आरती में चावल और छह तरह की दाल और मिठाई चढ़ाते है। शाम को शयन आरती होती है। यहाँ भक्त देवी को रबड़ी, मिश्री, चुनरी, दूध, फूल और फल चढ़ाते हैं।

अगर आप ज्वालाजी मंदिर में दर्शन करना चाहते है। तो आपको बतादे की मंदिर खुलने और यहां होने वाले दर्शन का समय मौसम के अनुसार खुलने और बंद होने के समय में बदलाव होता है। गर्मियों के मौसम में मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुलता है। और सर्दीयो के मौसम में सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन कर सकते है। गर्भगृह के साथ साथ मंदिर परिसर में पर्यटक चतुर्भुज मंदिर और गोरख डिब्बी जैसे छोटे मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

मंगल आरती – गर्मी: 5 से 6 सर्दी में 6 से 7

पंजुपचार पूजन – मंगल आरती के बाद

भोग आरती – 11 से 12 

शाम की आरती –  7 से 8 

शयन आरती – 9 से 10 

Jwala Devi Temple latest pics

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Architecture of Jwala Devi Temple

ज्वाला देवी मंदिर की वास्तुकला की और नजर डाले तो ज्वाला देवी मंदिर वास्तुकला इंडो-सिख शैली में देखने को मिलती है। यह एक लकड़ी के चबूतरे पर बनाया मंदिर है और शीर्ष पर एक छोटे से गुंबद के साथ चार कोनों वाला दिखाई देता है। मंदिर में एक केंद्रीय वर्गाकार गड्ढा है जहाँ अनन्त लपटें जलती हैं। आग की लपटों के सामने गड्ढे हैं जहां फूल और दूसरे प्रसाद रखे जाते हैं। मंदिर का गुंबद और शिखर सोने से ढका हुआ देखने को मिलता है। उसको महाराजा रणजीत सिंह ने उपहार में भेट दिया था। उसके निर्माण में महाराजा खड़क सिंह या रणजीत सिंह के पुत्र ने चांदी का उपहार दिया था।

उसका उपयोग मंदिर के मुख्य द्वार को ढकने किया गया था। मंदिर के सामने बनी पीतल की घंटी नेपाल के राजा ने भेंट चढ़ाई थी। मंदिर सुनहरे गुंबद और हरियाली में चमकते चांदी के दरवाजों से और भी सुंदर दिखता है। मुख्य हॉल के केंद्र में संगमरमर से बना बिस्तर है वह चांदी से सजाया गया है। रात देवी की आरती के बाद कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन कमरे में  रखे जाते हैं। कमरे के बाहर महादेवी, महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी की मूर्तियाँ बनी हैं। गुरु गोविंद सिंह द्वारा दी गई गुरु ग्रंथ साहिब की पांडुलिपि भी कमरे में सुरक्षित है।

Jwala Devi Temple Photos

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Legend of Jwala Devi Temple ज्वाला देवी मंदिर की कहानी

किंवदंती और कथा के मुताबिक कांगड़ा का ज्वाला देवी मंदिर बना है। वहाँ पर प्राचीन समय में पवित्र स्थल पर देवी सती की अग्निमय जीभ गिरी थी। मंदिर का निर्माण राजा भूमि चंद कटोच ने किया था। निर्मणा कार्य में पांडवों ने राजा को मंदिर बनाने में मदद की थी। मगर वास्तव में 19 वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ था। कहानी है कि हजार साल पहले चरवाहे ने यहाँ देखा कि एक गाय हमेशा दूध के बिना रहती थी। उसने गाय का पीछा किया था।

उसने देखा तो गाय एक छोटी लड़की जंगल से बाहर आ रही है और सारा दूध पी रही है। उन्होंने राजा भूमि चंद को कहा तो उन्होंने सैनिकों को जंगल में स्थान को खोजने भेजा था। कुछ वर्षों के बाद पहाड़ में आग की लपटें पाई गईं और राजा ने मंदिर बनवाया और उसका नाम ज्वाला देवी मंदिर रखा था। उसके बाद पांडवों ने मंदिर का दौरा किया और जीर्णोद्धार किया था। लोकगीत “पंजन पंजन पांडवन तेरा भवन बनाया” में उसका प्रमाण मिलता है।

मुगल बादशाह अकबर ने कई बार आग की लपटों को बुझाने की कोशिश की थी। मगर वह सारी दिव्य महिमा में जलते रहे थे । अकबर आग की लपटों को श्रद्धांजलि देने गया तो देवी ने सोना एक अज्ञात धातु में बदल दिया था। और देवी ने उसकी भेंट को अस्वीकार किया था। ज्वाला देवी मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक और हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व का है।

Importance Of Nine Jwala Of Jawala Ji Temple

  • ज्वाला देवी मंदिर में पवित्र ज्योति को नौ अलग-अलग महत्व देखा जा सकता है। 
  • मान्यता के मुताबिक वह नवदुर्गा 14 भुवन की रचयिता हैं उसके सेवक सतवा, रजस और तमस हैं।
  • चांदी के गलियारे में दरवाजे के सामने जलती हुई मुख्य लौ महाकाली का रूप है। 
  • यह ज्योति ब्रह्म ज्योति है और भक्ति और मुक्ति की शक्ति है।
  • मुख्य ज्योति के आगे महामाया अन्नपूर्णा की लौ जलती भक्तों की इच्छा पूर्ण करती है।
  • दूसरी तरफ देवी चंडी की ज्वाला दुश्मनों की संहारक है।
  • भक्तो के सभी दुखों को नष्ट करने वाली ज्वाला हिंगलाजा भवानी की है।
  • पांचवीं ज्योत विदवाशनी वह दुखों से छुटकारा दिलाती है।
  • महालक्ष्मी की ज्योति, धन और समृद्धि का सबसे अच्छा ज्योति है।
  • ज्ञान की सर्वश्रेष्ठ देवी सरस्वती भी कुंड में मौजूद हैं।
  • बच्चों की सबसे बड़ी देवी देवी अंबिका यहाँ देखा विराजमान है।
  • सभी सुख और लंबी आयु देने वाली देवी अंजना भी कुंड में मौजूद हैं।
ज्वालादेवी मंदिर का इतिहास और जानकारी

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Visiting Places Near Jawala Ji Temple

अंबकेश्वर महादेव धाम

प्राचीन लाल शिवालय मंदिर

रघुनाथजी मंदिर व टेढ़ा मंदिर

मां तारिणी मंदिर

भैरव बाबा मंदिर

अष्टभुजा मंदिर

चौमुख मंदिर

बगलमुखी माता मंदिर

How To Reach Jwala Devi Temple Himachal Pradesh

आप सड़क मार्ग से ज्वाला देवी मंदिर कांगड़ा जाना चाहते है। तो नई दिल्ली से कांगड़ा जाने वाली बसें ले सकते हैं। आप मंदिर तक पहुँचने के लिए ज्वालामुखी बस स्टैंड तक पहुँच सकते हैं। मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। पंजाब और हरियाणा के शहरों से राज्य परिवहन की बसें कांगड़ा तक चलती हैं। हवाई मार्ग से ज्वाला देवी मंदिर जाने के लिए कांगड़ा में हवाई अड्डे की सेवा नहीं है। कांगड़ा घाटी से 14 किमी की दूरी पर गग्गल हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। आप दिल्ली से धर्मशाला के लिए फ्लाइट ले सकते हैं।

उसके साथ रेल मार्ग से ज्वाला देवी मंदिर जाना चाहते है। तो कांगड़ा के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं हैं। अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली से जालंधर तक चलती है। उसके बाद जालंधर से कैब ले सकते हैं और घाटी तक पहुँच सकते हैं। यहाँ से टैक्सियाँ और बसें आसानी से उपलब्ध हैं।

ज्वालादेवी मंदिर फोटो

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Jwala Devi Temple Map ज्वाला देवी मंदिर का लोकेशन

Jwala Devi Mandir Kangra In Hindi Video

Interesting Facts

  • ज्वालाजी देवी मंदिर को ज्वालामुखी या ज्वाला देवी के नाम से भी जाना जाता है।
  • माँ ज्वालाजी देवी मंदिर की पवित्र ज्वाला में निवास करती हैं। 
  • पवित्र मंदिर में प्रज्जवलित ज्वाला की लपटें देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 
  • हिन्दुओ का पवित्र ज्वालाजी मंदिर देवी ज्वालामुखी को समर्पित है।
  • यहाँ बाहर से बिना ईंधन के दिन-रात चमत्कारिक रूप से ज्वाला जलती हैं।
  • विज्ञान के मुताबिक चट्टानों के फफूंद से दहनशील गैस के कुछ प्राकृतिक जेट से आग जलती है।
  • माता ज्वालाजी देवी को राबड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
  • ज्वाला देवी मंदिरके स्थान पर देवी सती की धधकती जीभ गिरी थी। 
  • ज्वाला देवी मंदिर के रहस्य के पीछे की कहानी कि पवित्र देवी नीली लॉ के रूप में खुद प्रकट हुईं थीं। 

FAQ

Q .ज्वाला देवी मंदिर कहा है?

ज्वालाजी मंदिर हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी दूर स्थित है।

Q .ज्वाला देवी अकबर की कहानी?

इतिहास ज्वाला देवी मंदिर के संबंध में एक कथा काफी प्रचलित है। की अकबर देवी के दर्शन के लिए मंदिर आया था। 

Q .ज्वाला जी कौन से स्टेट में है?

हिमाचल प्रदेश

Q .ज्वाला देवी कैसे प्रकट हुई?

ज्वाला देवी मंदिर के स्थान पर देवी सती की धधकती जीभ गिरी और 
ज्वाला देवी प्रकट हुई थी। 

Q .ज्वाला देवी किसकी कुलदेवी है?

Jawala Ji Temple हिन्दुओ की माँ ज्वालामुखी को समर्पित है।

Q .ज्वाला देवी मंदिर का रहस्य क्या है?

यहां कोई मूर्ति नहीं है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रहीं 9 ज्वालों की पूजा की जाती है।

Q .क्या ज्वाला जी शक्तिपीठ हैं?

हाँ ज्वाला देवी मंदिर भारत और हिन्दुओ के कुल 52 शक्तिपीठों में से एक है।

Q .ज्वालामुखी मंदिर किसने बनवाया था?

ज्वालामुखी मंदिर को कांगड़ा के राजा भूमि चंद कटोच ने बनाया था।

Conclusion

आपको मेरा लेख Jawala Ji Temple History In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

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Note

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