History of Jaigarh Fort in Hindi – जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में

Jaigarh Fort राजस्थान की राजधानी जयपुर के गुलाबी शहर में ‘चील का तेला’ पहाड़ियों के शीर्ष पर स्थित एक बहुत ही भव्य संरचना है। इस खूबसूरत इमारत को सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 1726 में आमेर किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।

यह किला चट्टान के शीर्ष पर बँधा हुआ हरे भरे और विशाल जंगों से घिरी एक महलनुमा संरचना है। आपको बता दें कि इस शानदार किले से आमेर किले तक एक भूमिगत मार्ग जाता है और इसे “विजय का किला” के रूप में भी जाना जाता है।

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जयगढ़ किले का इतिहास – History of Jaigarh Fort

इस किले की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इस किले में दुनिया की सबसे बड़ी तोप है और यह जयपुर शहर का एक आकर्षक दृश्य भी प्रस्तुत करता है।

विद्याधर नामक एक प्रतिभाशाली वास्तुकार द्वारा निर्मित और डिजाइन किया गया जिसकी वजह से यह किला यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी तरफ बेहद आकर्षित करता ह

 किले का नाम  जयगढ़ किला
 राज्य   राजस्थान
 निर्माणकाल  ई.स 1726
 निर्माता  सवाई जय सिंह द्वितीय
 किले की तोप नाम  जयवाना तोप, जिवान तोप
 तोप का वजन  50 टन
 तोप की लम्बाई  31 फुट
 तोप की मारकक्षमता  35 किमी

Jaigarh Fort को तीनों किलों में से सबसे ज्यादा मजबूत कहा जाता है और इस किले को कभी भी किसी भी बड़े प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। यहाँ जो दुनिया की सबसे बड़ी तोप स्थित है उसका केवल एक बार परीक्षण किया गया।

यह किला शहर के समृद्ध अतीत को बताता है और इसका नाम सवाई जय सिंह I शासक के नाम पर रखा गया है, जिसने इसको बनवाया है। जयगढ़ किला 18 वीं शताब्दी में बना हुआ एक निर्मित एक शानदार वास्तुकला है। आमेर किला के साथ जयगढ़ आमेर शहर में स्थित था,

जिस पर 10 वीं शताब्दी की शुरुआत से कछवाहाओं ने शासन किया था। मुगल शासन के दौरान यह किला मुख्य तोप फाउंड्री बन गया था और युद्ध के लिए आवश्यक गोला बारूद के साथ अन्य धातु को रखने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा।

जयगढ़ किले में तोप चौकी तब तक सुरक्षित रही जब तक कि रक्षक दारा शिकोह अपने ही भाई औरंगजेब द्वारा पराजित और मार डाला गया था।

आमेर के राजप्रासाद के दक्षिणवर्ती पर्वत शिखर पर निर्मित जयगढ़ का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था. मगर इतिहासकार जगदीश सिंह गहलोत और डॉ गोपीनाथ शर्मा के अनुसार जयगढ़ का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह ने करवाया था, उन्ही के नाम पर यह किला जयगढ़ कहलाता हैं.

जयगढ़ राजस्थान का एकमात्र किला है, जिस पर कभी बाह्य आक्रमण नहीं हुआ. श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रतिनिधित्व काल में गुप्त खजाने की खोज में इस किले के भीतर व्यापक खुदाई की घटना ने जयगढ़ को देश विदेश में चर्चित बना दिया.

जयगढ़ उत्कृष्ट गिरि दुर्ग हैं. सुद्रढ़ और उन्नत प्राचीर, घुमावदार विशाल बुर्ज तथा पानी के विशाल टाँके इसके स्थापत्य की प्रमुख विशेषता हैं.

जयगढ़ के भवनों में जलेब चौक, दीवान ए आम, दीवान ए ख़ास ललित मंदिर, विलास मंदिर, लक्ष्मी निवास, सूर्य मंदिर, आराम मंदिर, राणावतजी का चौक आदि मुख्य हैं.

किले में राम, हरिहर व काल भैरव के प्राचीन मंदिर बने हुए हैं. आराम मंदिर के सामने मुगल उद्यान शैली पर निर्मित एक मंदिर हैं. जयगढ़ के भीतर एक लघु अन्तः दुर्ग भी बना हुआ हैं.

जिसमें महाराजा सवाई जयसिंह ने अपने छोटे भाई विजयसिंह को कैद कर रखा था. विजयसिंह के नाम पर यह विजयगढ़ी कहलाया.विजयगढ़ी के पार्श्व में एक सात मंजिला प्रकाश स्तम्भ हैं जो दिया बुर्ज कहलाता हैं.

जयगढ़ में तोपें ढालने का विशाल कारखाना था जो राजस्थान के किसी अन्य किले में नहीं मिलता हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा बनवाई गई एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण यहीं पहियों पर रखी हुई हैं. जयगढ़ में मध्यकालीन शस्त्राशस्त्रों का विशाल संग्रहालय बना हुआ हैं.

जयगढ़ किले की वस्तुकला – Architecture of Jaigarh Fort

Jaigarh Fort एक विशाल रेंज में फैली हुई आकर्षक संरचना है। यह किला बलुआ पत्थर की मोटी दीवारों द्वारा संरक्षित है जिसमें ललित मंदिर, विलास मंदिर, लक्ष्मी विलास और अराम मंदिर जैसे कुछ खास वास्तुशिल्प हैं।

इसके साथ अलावा 10 वीं शताब्दी में बने राम हरिहर और 12 वीं शताब्दी में बने काल भैरव मंदिर भी इस मंदिर के आकर्षण को बढ़ाते हैं। इस किले का सबसे बड़ा आकर्षण पहियों पर दुनिया की सबसे बड़ी तोप जिसे ‘जयवाना तोप’ और विशाल महल परिसर के रूप में जानते हैं।

इसके अलावा इस किले में साथ एक संग्रहालय के साथ एक उद्यान भी स्थित है। जयगढ़ किले की लाल बलुआ पत्थर की दीवारें 3 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई हैं जिसकी चौड़ाई लगभग एक किलोमीटर है।

इस किले की सीमा के अंदर एक वर्गाकार उधान है और इस किले की इमारत के ऊपरी स्तरों तक पहुँचने के लिए तटबंधों का निर्माण किया गया है। कोर्ट रूम और हॉल को शानदार खिडकियों से सजाया गया है और यहाँ एक केंद्रीय वॉच टॉवर पूरे आसपास के परिदृश्य को देखता है।

यहाँ के अराम मंदिर में प्रवेश अवनी दरवाजा के माध्यम से होता है जो एक बहुत ही शानदार ट्रिपल मेहराबदार प्रवेश द्वार है। अराम मंदिर पास में स्थित सागर झील का आकर्षक दृश्य हर किसी को मोहित कर देता है।

जयगढ़ किले का रहस्य – Secrets of Jaigarh Fort

आपको बता दें कि बहुत से इतिहासकारों का मानना यह है कि जयगढ़ किले में खजाना था जिससे जयसिंह ने जयपुर शहर का विकास किया। लेकिन यह बात आपको हैरान कर देती है कि अगर सरकार को जयगढ़ किले का खजाना नहीं मिला तो वो खजाना कहाँ गया।

जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में - History of Jaigarh Fort in Hindi
जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में – History of Jaigarh Fort in Hindi

जयगढ़ किला और उसके खजाने का रहस्य हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस किले के खजाने का रहस्य कब सुलझ पायेगा।

जयगढ़ किले की महत्वपूर्ण लड़ाई – Important Battle of Jaigarh Fort

जयगढ़ किले को युद्ध में कभी नहीं जीता गया था जबकि जयपुर में तीन किलों में से सबसे मजबूत भी था. मुगल वंश के दौरान किले ने औरंगजेब द्वारा घात लगाकर हमला किया था | 

जिसने किले में तोप चौकी के ओवरसियर रहे अपने ही भाई को हरा दिया और मार दिया था. इसके अलावा किले ने कभी कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं देखा और केवल एक बार दुनिया की सबसे बड़ी तोप का परीक्षण किया.

जयगढ़ किले के अन्य स्मारक – Other monuments of Jaigarh Fort

चारबाग गार्डन :

फारसी शैली में एक सुंदर बगीचा है. चार भागों में विभाजित, इस उद्यान को कई पौधों से सजाया गया है. रॉयल अपार्टमेंट के बाहर स्थित इस उद्यान में विभिन्न शैली के पत्थरों की एक श्रृंखला है. पर्यटक यहाँ पर कुछ गुणवत्ता समय बिता सकते हैं.

जीवान ( तोप ) :

महाराजा सवाई जय सिंह के क्षेत्र के दौरान, जयगढ़ बंदूक फाउंड्री ने पहियों पर दुनिया की सबसे बड़ी तोप का निर्माण किया, जिसे जीवान नाम दिया गया. 50 टन वजन वाले, जयवन को हर शॉट के लिए 100 किलो बारूद की आवश्यकता होती है.

लक्ष्मी विलास :

जयगढ़ किले की सबसे सुंदर इमारत, लक्ष्मी विलास का कई बार जीर्णोद्धार किया गया था और अंतिम जीर्णोद्धार लोकप्रिय वास्तुकार विद्याधर भट्ट द्वारा शासक सवाई जय सिंह द्वितीय के तहत किया गया था.

इस महल का हॉल विशाल है और 12 संगमरमर के खंभों द्वारा समर्थित है. एक कठपुतली थियेटर भी है जो अभी भी सक्रिय है.

जयगढ़ किले का संग्रहालय :

Jaigarh Fort के अंदर एक सुव्यवस्थित संग्रहालय है जिसमें जयपुर के शासकों के चित्र, पुराने चित्र, टिकट और कई अन्य शाही कलाकृतियाँ शामिल हैं. पर्यटक यहां शाही परिवारों के सोने और चांदी के गहने भी देख सकते हैं.

किले में कितने मंदिर है ? :

किले में दो पुराने मंदिर हैं. 10 वीं शताब्दी में निर्मित राम के लिए राम हरि हर मंदिर और 12 वीं शताब्दी का काल भैरव मंदिर.

पर्यटक ललित मंदिर, विलास मंदिर, अराम मंदिर, विजय गढ़ शस्त्रागार और जल भंडार भी देख सकते हैं.

दीया बुर्ज :

जयगढ़ किले का सर्वोच्च बिंदु दीया बुर्ज है. इस सात मंजिला टॉवर से जयपुर के ध्वज की मेजबानी की जाती है. अभी तक महाराजा के जन्मदिन के अवसर पर अधिकारियों ने यहां एक तेल का दीपक जलाया जाता हैं.

मानसिंह ने कैसे एकठ्ठा किया था खजाना ?-

अकबर के नौ रत्नों के बारे में यदि सुना है, तो राजा मान सिंह को आसानी से पहचाना जा सकता है. ये अपनी बुद्धिमत्ता और सैन्य कुशलता के कारण अकबर के दिल के काफी करीब थे. उन्हें प्यार से ‘राजा मिर्जा’ भी कहा जाता था.

बतौर सेनापति मान सिंह ने अकबर के लिए कई ऐतिहासिक जंग जीती थीं.

मुगलों की आदत रही कि उन्होंने ​देश के जिस भी राज्य या रियासत पर हमला किया और जीत हासिल की उसे लूट लिया. चूंकि जीत में मानसिंह का श्रेय भी कम नहीं था, इसलिए संपत्ति में भी उसका बराबर का अधिकार रहा.

मान सिंह से पहले उनके पिता राजा भगवानदास ने भी अकबर के लिए गुजरात युद्ध में मुख्य भूमिका अदा की थी.

मान सिंह पारिवारिक रूप से पहले ही सक्षम थे. उनका जन्म 1540 में हुआ था और वे अम्बेर रियासत के राजा थे. मुगल बादशाह से दोस्ती के बाद उनका कद समस्त भारत में बढ़ गया.

हल्दीघाटी के युद्ध में तो उन्होंने महाराणा प्रताप की सेना को परस्त कर शानदार विजय हासिल की थी. हालांकि, जब मुगलों ने महाराणा प्रताप के राज्य को लूटने की तैयारी की तो मान सिंह ने इसका विरोध किया.

वैसे बादशाह अकबर से मान सिंह का दूसरा रिश्ता फूफा और भतीजे का भी था. 1594 में मान सिंह को बंगाल, उड़ीसा और बिहार का शासक नियुक्त किया गया.

जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में - History of Jaigarh Fort in Hindi
जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में – History of Jaigarh Fort in Hindi

इस दौरान उन्होंने कई छोटी बडी रियासतों के राजाओं को हराकर उनकी संपत्ति अपने नाम की. सालों तक मान सिंह ने अपने पराक्रम के बल पर अकूत संपत्ति जमा कर ली थी.

जिसे उन्होंने अपने आमेर किले में गुप्त स्थान पर छिपाया था. उन्होंने अपने जीवन काल में भारत में जितनी भी रियासतों से संपत्ति हासिल की थी, उससे कई गुना सिर्फ एक बार में अफगानिस्तान से हासिल कर ली.

एक कहानी के अनुसार अकबर के आदेश पर मानसिंह काबुल गए थे. वहां की आवाम लुटेरे सरदारों से काफी परेशान थी. मान सिंह ने सरदारों से मुकाबला कर उन्हें जंग में हरा दिया.

इसी दौरान मान सिंह ने युसुफजई कबीले के सरदार को मारकर बीरबल की मौत का बदला भी लिया. कहा जाता है कि लुटेरों के पास ​कई टन सोना था, जिसे मानसिंह अपने साथ ले आए थे. यह सम्पत्ति उन्होंने मुगलों को न सौंपकर आमेर किले में छिपाई थी.

सरकार को खजाने की भनक कब लगी ?-

मानसिंह के खजाने के बारे में उस दौर में तो कोई चर्चा नहीं हुई, पर इसका जिक्र अरबी भाषा की एक पुरानी किताब हफ्त तिलिस्मत-ए-अंबेरी (अंबेर के सात खजाने) में मिलता है.

इसमें लिखा है कि मानसिंह ने अफगानिस्तान से इतनी संपत्ति लूटी थी कि उससे कई रियासतों को पेट पल सकता था.किताब में कहा गया है कि जयगढ़ किले के नीचे पानी की सात विशालकाय टंकियां बनी हैं. मान सिंह ने खजाना यहीं छिपाया था.

बातें किताबी थीं, सो किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. अफवाहें जब तब आती और जाती रही, लेकिन यहां बात अकूत संपत्ति की ​थी, तो भला कितने दिन छिपती. इस खजाने की चर्चा पहली बार 1976 में हुई.

उस वक्त जयपुर राजघराने की प्रतिनिधि महारानी गायत्री देवी थीं. गायत्री देवी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सख्त विरोधी थीं और वे स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनावों में तीन बार कांग्रेस प्रतिनिधियों को हरा का मुंह दिखा चुकी थीं.

कहा जाता है कि गायत्री देवी और इंदिरा गांधी में काफी लंबे समय से ठनी थी. 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी. यह सरकार की मनमानी का मौका था. जो केन्द्र सरकार के आदेश पर गायत्री देवी को जेल में डाल दिया गया.

उन पर मीसा के तहत नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन का आरोप लगाया गया था. इस आरोप के बाद इंदिरा गांधी के आदेश पर जयगढ़ किले में आयकर अधिकारियों ने छापा मारा. इस काम में सेना और पुलिस की भी मदद ली गई.

तीन महीने तक जयगढ़ किले में खजाने की खोज जारी रही. हालांकि गायत्री देवी बार-बार यही दावा करती रहीं कि किले में कोई संपत्ति नहीं है पर सरकार ने संपत्ति के लिए किले को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया.

यह बात और है कि खुदाई खत्म होने के बाद सरकार ने दावा किया कि महल में कोई खजाना नहीं है.

किस शहर के विकास में लगाया गया खजाना ?-

कुछ इतिहासकारों का मानना ये भी है कि जयगढ़ किले का खजाना था, लेकिन राजा जयसिंह ने उसी खजाने से जयपुर शहर का विकास किया। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि यदि सरकार को जयगढ़ किला का खजाना नहीं मिला तो आखिर वो खजान गया तो.. गया कहां गया? सवाल तो कई हैं लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है।

जयगढ़ किला और उसका खजाना – अब देखते है कि इस खजाने का रहस्य कब तक पहेली बन इन किलों की दीवारों से टकराता रहेगा। या कभी कोई इस रहस्य की गूंथी को सुलझा पाएगा।

जयगढ़ किले में जिवान तोप वह एशिया की सबसे बड़ी तोप है – The Jivan Cannon at Jaigad Fort is Asia’s largest cannon.

जयपुर में जयगढ़ किले पर रखी यह तोप एशिया की सबसे बड़ी तोप मानी जाती है। इस तोप का जब पहेली बार परीक्षण किया तो इसके गोले से शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गांव में तालाब बन गया । आज भी यह तालाब मौजूद है | और गांव के लोगों की प्यास बुझा रहा है।

इस टॉप की लम्बाई और वजन कितना है ?-

विश्व की सबसे बड़ी यह तोप जयगढ़ किले के दरवाजे पर रखी है। तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है। जब जयबाण तोप को पहली बार परिक्षण के लिए चलाया गया था तो जयपुर से करीब 35 किमी दूर स्थित चाकसू नामक स्थल पर गोला गिरने से एक तालाब बन गया था।

इस तोप का वजन 50 टन है। इस तोप में 8 मीटर लंबे बैरल रखने की सुविधा है। यह दुनिया भर में पाई जाने वाली तोपों के बीच सबसे ज्‍यादा प्रसिद्ध तोप है।

यह तोप कितने गन पाउडर से चलती थी ?-

यह तोप 35 किलोमीटर तक मार करने वाले इस तोप को एक बार फायर करने के लिए 100 किलो गन पाउडर की जरूरत होती थी। अधिक वजन के कारण इसे किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही कभी युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया था।

जयगढ़ किला की कुछ रोचक बाते – Some interesting things about Jaigad Fort

जयगढ़ किले को विजय किले के रूप में भी जाना जाता है। यह जयपुर के विख्यात पर्यटन स्थलों में से एक है जो शहर से 15 किमी. की दुरी पर स्थित है।

यह इगल्स के हील पर आमेर किले से 400 फूट की ऊंचाई पर स्थित है। इस किले के दो प्रवेश द्वार है जिन्हें दंगुर दरवाजा और अवानी दरवाजा कहा जाता है जो क्रमशः दक्षिण और पूर्व दिशाओ पर बने हुए है।

जयगढ़ किला महाराजा जय सिंह ने 18वीं सदी में बनवाया था और यह शानदार किला जयपुर में अरावली की पहाडि़यों पर चील का टीला पर स्थित है।

विद्याधर नाम के वास्तुकार ने इसका डिज़ाइन बनाया था और इस किले को जयपुर शहर की समृद्ध संस्कृति को दर्शाने के लिए बनवाया गया था।

इस किले के उंचाई पर स्थित होने के कारण इससे पूरे जयपुर शहर को देखा जा सकता है। यह मुख्य रुप से राजाओं की आवासीय इमारत था लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल शस्त्रागार के तौर किया जाने लगा। इतिहास और वास्तुकला जयगढ़ किले के पीछे एक समृद्ध इतिहास है।

मुगल काल में जयगढ़ किला राजधानी से 150 मील दूर था और सामान की बहुतायत के कारण मुख्य तोप ढुलाई बन गया। यह हथियारों, गोला बारुद और युद्ध की अन्य जरुरी सामग्रियों के भंडार करने की जगह भी बन गया।

इसकी देखरेख दारा शिकोह करते थे, लेकिन औरंगज़ेब से हारने के बाद यह किला जय सिंह के शासन में आ गया और उन्होंने इसका पुनर्निमाण करवाया। इस किले के इतिहास से जुड़ी एक और रोचक कहानी है।

लोककथाओं के अनुसार, शासकों ने इस किले की मिट्टी में एक बड़ा खजाना छुपाया था। हालांकि एैसे खजाने को कभी बरामद नहीं किया जा सका। पहाड़ की चोटी पर स्थित होने के कारण इस किले से जयपुर का मनोरम नज़ारा देखा जा सकता है।

बनावट के हिसाब से यह किला बिलकुल अपने पड़ोसी किले आमेर किले के जैसा दिखता है जो कि इससे 400 मीटर नीचे स्थित है।विक्ट्री फोर्ट के नाम से भी प्रसिद्ध यह किला 3 किलोमीटर लंबा और 1 किलोमीटर चौड़ा है।

इस किले की बाहरी दीवारें लाल बलुआ पत्थरों से बनी हैं और भीतरी लेआउट भी बहुत रोचक है। इसके केंद्र में एक खूबसूरत वर्गाकार बाग मौजूद है। इसमें बड़े बड़े दरबार और हॉल हैं जिनमें पर्देदार खिड़कियां हैं। इस किले में दुनिया की सबसे बड़ी तोप भी है।

इस विशाल महल में लक्ष्मी विलास, विलास मंदिर, ललित मंदिर और अराम मंदिर हैं जो शासन के दौरान शाही परिवार रहने पर इस्तेमाल करते थे। दो पुराने मंदिरों के कारण इस किले का आकर्षण और बढ़ जाता है, जिसमें से एक 10वीं सदी का राम हरिहर मंदिर और 12वीं सदी का काल भैरव मंदिर है।

बड़ी-बड़ी दीवारों के कारण यह किला हर ओर से अच्छी तरह सुरक्षित है। यहां एक शस्त्रागार और योद्धाओं के लिए एक हॉल के साथ एक संग्रहालय है जिसमें पुराने कपड़े, पांडुलिपियां, हथियार और राजपूतों की कलाकृतियां हैं।

इसके मध्य में एक वाच टावर है जिससे आसपास का खूबसूरत नज़ारा दिखता है पास ही में स्थित आमेर किला जयगढ़ किले से एक गुप्त मार्ग के ज़रिए जुड़ा है।

इसे आपातकाल में महिलाओं और बच्चों को निकालने के लिए बनाया गया था। आमेर किले में पानी की आपूर्ति के लिए इसके केंद्र में एक जलाशय भी है।

जयगढ़ किले के आस-पास के पर्यटक आकर्षण – Tourist Attractions Near Jaigad Fort

आमेर का किला

विजय गढ़

अरावली की पहाड़ियाँ

Jaigarh Fort एक महलनुमा संरचना है, जो ‘चील की टीला’ पहाड़ियों पर स्थित है. जो मुकुट पर एक आभूषण के समान है. विद्याधर नामक एक प्रतिभाशाली वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया किला शहर के समृद्ध इतिहास का एक रीगल अनुस्मारक है और इसका नाम जय सिंह द्वितीय के नाम पर रखा गया है.

जयगढ़ किला जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Jaigarh Fort

राजस्थान भारत का एक रेगिस्तानी राज्य है और यहाँ गर्मियों के मौसम में तापमान काफी ज्यादा होता है। यहां गर्मी का मौसम अप्रैल से जून तक पड़ती है।

जयगढ़ किला जाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु या फिर सर्दियों के महीनों के दौरान यानी सितंबर से मार्च तक होगा क्योंकि यह समय जयपुर शहर में छुट्टियों का आनंद लेने और यहाँ के विभिन्न स्थलों की सैर करने के लिए एक आदर्श जगह है।

इन महीनों में दिन काफी अच्छे होते हैं लेकिन रातें 4° C से कम ठंडी होती हैं। अगर आप इस समय जयपुर जा रहे हैं तो अपने साथ ऊनी कपड़े ले जाना ना भूलें। मानसून का मौसम यहाँ जुलाई से सितंबर तक होता है लेकिन जयपुर में मध्यम से कम बारिश होती है।

जयगढ़ किले के पास रुकने की जगह – Place to stay near Jaigad Fort

अगर आप जयगढ़ फोर्ट को देखने के लिए जा रहे हैं तो इसके आसपास ठहरने की अच्छी जगह देख रहे हैं तो बता दें कि जयपुर आपके लिए बहुत से विकल्प हैं। यहाँ के प्रमुख होटलों में अलसीसर हवेली, होटल महादेव विला, होटल ब्लू हेवन और फोर्ट चनाद्रगुप्त के नाम शामिल हैं।

जयगढ़ किले राजस्थान तक कैसे पहुंचे – How to reach Jaigarh Fort Rajasthan

Jaigarh Fort जयपुर शहर के केंद्र से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। जहाँ आप शहर से ऑटो और टैक्सियों की मदद से आसानी से पहुँच सकते हैं। जयपुर शहर रेलवे, वायुमार्ग और रोडवेज से भारत के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह कनेक्टेड है।

हवाई मार्ग से जयगढ़ किला कैसे पहुंचे –

अगर जयगढ़ फोर्ट देखने के लिए जयपुर जा रहे हैं तो आपको बता दें कि हवाई जहाज द्वारा जयपुर की यात्रा करने के लिए अच्छा विकल्प है। सांगानेर हवाई अड्डा भारत के प्रमुख शहरों से नियमित रूप से चलने वाली कई एयरलाइनों से जुड़ा हुआ है।

सांगानेर एयरपोर्ट से जयगढ़ फोर्ट की दूरी करीब 25 किलोमीटर है जहाँ पहुंचने के लिए आप टैक्सी या कैब की मदद ले सकते हैं।

ट्रेन मार्ग से जयगढ़ किला कैसे पहुंचे –

अगर आप जयगढ़ फोर्ट की यात्रा ट्रेन से करना चाहते हैं तो बता दें कि जयपुर रेलवे स्टेशन भारत के अन्य प्रमुख शहरों से एक्सप्रेस ट्रेनों के द्वारा जुड़ा हुआ है। जयपुर रेलवे स्टेशन से आप कैब या टैक्सी की मदद से जयगढ़ फोर्ट तक पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग से जयगढ़ किला कैसे पहुंचे –

जयगढ़ फोर्ट के लिए आप सड़क मार्ग या बस से भी यात्रा कर सकते हैं क्योंकि राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम राजस्थान राज्य के भीतर जयपुर और प्रमुख शहरों के बीच कई लक्जरी और डीलक्स बसें चलाता है। आप जयपुर के लिए नई दिल्ली अहमदाबाद, उदयपुर, वडोदरा, कोटा और मुंबई जैसे शहरों से बस पकड़ सकते हैं।

 

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13 thoughts on “History of Jaigarh Fort in Hindi – जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी में”

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