नमस्कार दोस्तों Rameshwaram Temple History In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित रामेश्वर मंदिर का इतिहास, दर्शन, पूजन और यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी बताने वाले है। यह मंदिर हिंदू धर्म के पवित्र चार धामों में से एक माना जाता है। रामेश्वरम मंदिर को रामनाथ स्वामी मंदिर के दूसरे नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर में स्थापित शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
हमारे भारत में जिस तरह उत्तर भारत में काशी का महत्व उसी तरह दक्षिण भारत में रामेश्वरम मंदिर का भी महत्व है। रामेश्वरम हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा है। और शंख के आकार का द्वीप है। सदियों पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ था। मगर धीरे धीरे सागर की तेज लहरों से कटकर अलग हो गया है। यह टापू चारों तरफ से पानी से घिर है। और उसको एक पुल की सहायता से जोड़ा गया है।
Rameshwaram Temple Information In Hindi
मंदिर का नाम | रामेश्वर मंदिर |
अन्य नाम | रामनाथ स्वामी मंदिर |
राज्य | तमिलनाडु |
शहर | रामनाथपुरम |
निर्माणकाल | ई.स 1450 |
निर्माणकर्ता | राजा उडैयान सेतुपति, नागूर निवासी वैश्य |
लम्बाई | 1000 फुट |
मंदिर की चौड़ाई | 650 फुट |
प्रवेश द्वार की ऊंचाई | 40 फीट |
मंदिर में कितने कुंड है | 24 कुंड |

Rameshwaram Temple History In Hindi
भगवान राम ने श्रीलंका से वापस लौटते महादेव की यह स्थान पर पूजा की थी। उसके कारन उसका नाम रामेश्वर मंदिर और रामेश्वर द्वीप पड़ा है। मान्यता के मुताबिक रावण का वध करने के बाद भगवान राम देवी सीता के साथ रामेश्वरम के तट पर से भारत लौटे थे। ब्राह्मण को मारने के दोष को खत्म करने श्री राम शिव की पूजा करना चाहते थे। वहा कोई मंदिर नहीं था, उसलिए शिव जी की मूर्ति लाने हनुमान जी को कैलाश पर्वत भेजा था।
हनुमान समय पर नहीं पहुंचे तो देवी सीता ने समुद्र की रेत को मुट्ठी में लेकर शिवलिंग बनाया और भगवान राम ने शिवलिंग की पूजा की थी। हनुमान लाए शिवलिंग को भी वहीं स्थापित किया था। 15वीं शताब्दी में राजा उडैयान सेतुपति और नागूर निवासी वैश्य ने 1450 ई. में 78 फीट ऊंचे गोपुरम का निर्माण करवाया था। सोलहवीं शताब्दी में मंदिर के दक्षिणी में दूसरे हिस्से की दीवार का निर्माण तिरुमलय सेतुपति ने कराया था।
मंदिर के द्वार पर तिरुमलय एवं उसके पुत्र की मूर्ति विराजमान है। सोलहवीं शताब्दी में मदुरै के राजा विश्वनाथ नायक के अधीन राजा उडैयन सेतुपति कट्टत्तेश्वर ने नंदी मण्डप का निर्माण करवाया था। माना जाता है। वर्तमान समय के रामेश्वरम मंदिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में हुआ है। जानकारों के अनुसार राजा किजहावन सेठुपति या रघुनाथ किलावन ने मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

Rameshwaram Temple Timings and Entry Fees
रामेश्वरम मंदिर सुबह 5 पूर्वाह्न से दोपहर 1 बजे तक और शाम 3 अपराह्न से 9:00 अपराह्न खुला रहता है।
पूजा और आरती / आराधना समय का नाम
पल्लियारई दीपा अराथाना – सुबह 5 बजे
स्पादिगालिंग दीपा अराथना – सुबह 5 बजे
तिरुवनंतल दीपा अराथना – 5:45 AM
विला पूजा – सुबह 7 बजे
कलासंथी पूजा – सुबह 10 बजे
उचिकाला पूजा – दोपहर 12 बजे
सायरात्चा पूजा – शाम 6 बजे
अर्थजमा पूजा – रात 8:30 बजे
पल्लियाराय पूजा – रात 8:45 बजे
अगर आप अभिषेकम, आरती और अनुष्ठानों में हिस्सा लेना चाहते हैं। तो सभी अनुष्ठान के लिए आपको निम्न मूल्य चुकाने होते है।
108 कलासा अभिषेकम – 1000 रुपए
108 संगबीशेगम – 1000 रुपए
रुद्राबीषेगम – 1500 रुपए
पंचामृत अभिषेक – 1000 रुपए
स्वामी सहस्रनाम अर्चना – 200 रुपए
अंबल सहस्रनाम अर्चना – 200 रुपए
स्वामी नागापर्णम – 200 रुपए
अंबाल कवसम – 200 रुपए
रामेश्वर मंदिर से जुडी मान्यताए
रामेश्वर मंदिर का इतिहास और उसकी स्थापना के बारे में कई कथाएं प्रचलित है। बंगाल की खाड़ी एवं अरब के सागर के संगम स्थल पर स्थित पवित्र धाम की स्थापना से भगवान राम की लंका वापसी से कथा जुड़ी हुई है। रामायण के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम और सीता मैया राक्षसो का विनाश कर वापस आए तो उन्हें ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था।
पाप से मुक्त होने के लिए महाज्ञानी और संतों ने शिव जी की आराध्या करने के लिए कहा था। यह द्वीप में कोई शिव मंदिर नहीं था। उसके कारन भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना करने हनुमान जी को शिव जी की मूर्ति लाने के लिए कैलाश पर्वत में भेजा था। लेकिन उन्हें लौटने में देर हो गई थी। तो माता सीता ने समुद्र के किनारे पड़ी रेत से ही शिवलिंग का निर्माण किया था।
और यही शिवलिंग बाद में रामनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ है। प्रभु राम ने रावण के हत्या के पाप से मुक्त होने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग की उपासना की थी। बाद में हनुमान जी द्धारा लाए गए शिविलिंग को भी वहां स्थापित कर दिया था। यह भगवान शंकर के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जिससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।

रामेश्वर मंदिर की पौराणिक शिवलिंग की कथा
पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलते हैं कि श्री राम ने लंका पर चढ़ाई की तो विजय प्राप्त करने के लिये समुद्र के किनारे शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने श्री राम को विजयश्री का आशीर्वाद दिया था। आशीर्वाद मिलने के साथ श्री राम ने जनकल्याण के लिए सदैव ज्योतिर्लिंग रुप में निवास करने प्रार्थना की और शिवजी ने स्वीकार कर लिया था।
ज्योतिर्लिंग के स्थापित होने की एक कहानी और है। श्री राम लंका पर विजय प्राप्त कर लौट रहे थे। तो उन्होंनें गंधमादन पर्वत पर ऋषि मुनियों ने श्री राम को बताया कि उन पर ब्रह्महत्या का दोष है। वह शिवलिंग की पूजा करने से दूर हो सकता है। हनुमान जी को शिव जी की मूर्ति लाने के लिए कैलाश पर्वत में भेजा था। तब तक माता सीता ने रेत से ही शिवलिंग का निर्माण किया था।
हनुमान वहां पहुंचे तो देखा कि शिवलिंग तो पहले ही स्थापित हो चुका है। श्री राम हनुमान की भावनाओं को समझते कहा की स्थापित शिवलिंग को उखाड़ दो मैं शिवलिंग की स्थापना कर देता हूं। लाख कोशिशों के बाद भी हनुमान ऐसा न कर सके और मूर्छित होकर गंधमादन पर्वत पर जा गिरे थे। श्री राम ने वह शिवलिंग को भी नजदीक ही स्थापित किया था।
Architecture of Rameshwaram Temple
रामेश्वरम मंदिर में एक आकर्षक वास्तुकला दिखाई देती है। वह दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। दक्षिण भारत के सभी मंदिरों की तरह उसमे ऊंची दीवार या मडिल चारों तरफ से मंदिर की रखवाली करती है। दीवार पूर्व से पश्चिम तक 865 फीट और उत्तर से दक्षिण तक 675 फीट दूर है। पाँच फीट ऊँचे चबूतरे पर विशाल कॉलोनियों के बीच चलने वाले लंबे गलियारे मंदिर के आंतरिक भाग का हिस्सा हैं। दूसरा गलियारा बलुआ पत्थर के खंभों, बीमों और छत से बनाया गया है। पश्चिम में तीसरा गलियारा है जो सेतुमाधव मंदिर का मार्ग प्रशस्त करता है।
उस गलियारों की लंबाई 3850 फीट है। उसे दुनिया में सबसे लंबा माना जाता है। रामेश्वरम मंदिर के बाहरी गलियारे में 1212 उत्कृष्ट स्तंभ हैं और राजगोपुरम 53 मीटर लंबा प्रमुख टॉवर है। मंदिर के मुख्य हॉल में अनूप्पु मंडपम, सुकरवर मंडपम, सेतुपति मंडपम, कल्याण मंडपम और नंदी मंडपम शामिल है। यह मंदिर के अंदर दो लिंग हैं। पहला मुख्य देवता रामलिंगम है और उसे सीता ने बनवाया था। दूसरा विश्वलिंगम जो कैलाश से हनुमान द्वारा लाया गया था। उसके साथ मंदिर परिसर में बाईस तीर्थ या पवित्र जल निकाय स्थित हैं।

रामेश्वरम मंदिर के कुंड
श्री रामेश्वर मंदिर के अंदर कुल 24 कुँओं का निर्माण कराया गया है। जिन्हे तीर्थ कहा जाता है। मंदिर के बाहर कई कुँए और भी है मगर उनका पानी खारा है। मंदिर के अंदर के कुँओं का जल मीठा है। मान्यता के मुताबिक यह कुँए भगवान राम के अमोघ बाणों से तैयार किए गए थे। उन्होंने अनेक तीर्थो से जल मंगाक्र उसमे छोड़ा था। उसके कारन उन्हे तीर्थ कहा जाता है। उस के नाम गंगा, यमुना, गया, शंख और चक्र रखे हुए है।
Rameshwaram Temple Festivals
रामनाथस्वामी मंदिर में धूमधाम से मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार में महा शिवरात्रि, वसंतोत्सवम, रामलिंग प्रतिष्ठा उत्सव, अरुद्रदर्शनम, थिरुक्कलयनम और नवरात्रि शामिल है।
Maha Shivaratri – यह 10 दिनों तक चलने वाला त्योहार है और फरवरी-मार्च में होता है। इस दिन, भगवान शिव ने पार्वती से विवाह किया और दुनिया को अंधकार और अज्ञान से बचाया था।
Vasanthautsavam – यह मई और जून के बीच मनाया जाने वाला त्यौहार 10 दिनों तक मनाया जाता है। वसंत ऋतु का स्वागत करता यह त्यौहार देवता की पूजा चंदन के लेप, फूल, धूप और गुलाब जल के अभिषेक से करते है।
Ramalinga Prathista Utsavam – यह जून और जुलाई के बीच मनाया जाता 10 दिवसीय उत्सव है। यह त्योहार के दिन सीता माता ने शिवलिंग स्थापित किया गया था।
Thirukkalyanam – जुलाई-अगस्त में मनाया जाने वाला यह 17 दिन का त्योहार है।
Navratri – अगस्त-सितंबर में आयोजित 10 दिनों का त्योहार है उसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों को पूजते है।
ArudhraDarshanam – दिसंबर और जनवरी के बीच मनाया जाता यह 10 दिवसीय उत्सव है।

Places To Visit Near Rameshwaram Temple
- Indira Gandhi Setu
- Adams Bridge
- Pamban Bridge
- Agnitheertham
- Ariyaman beach
How To Reach Rameshwaram Temple
रामेश्वरम मंदिर रामेश्वरम शहर के मध्य बीचो बिच स्थित है और यहाँ परिवहन साधनों द्वारा पहुँचा जा सकते है। ऑटो शहर के भीतर परिवहन का प्रमुख स्रोत हैं। ऑटो से मंदिर तक यात्रा करना आसान है। यदि आप आराम से यात्रा करना चाहते हैं। तो आप किराए पर कैब या कार किराए पर ले सकते हैं। आप लोगों की संख्या के हिसाब से कार का चुनाव कर सकते हैं।
मदुरै रामेश्वरम से 163 किलोमीटर की दूरी पर है जो रामेश्वरम का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। रामेश्वरम शहर चेन्नई, मदुरै, कोयम्बटूर, त्रिचि,तंजावुर और अन्य महत्वपूर्ण शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। उसके अलावा रामेश्वरम शहर मदुरै, कन्याकुमारी, चेन्नई और त्रिचि से सड़क मार्ग से जुड़ा है। आप सड़क मार्ग से भी बहुत आसानी से रामेश्वरम पहुंच सकते हैं।
Rameshwaram Temple Map रामेश्वरम मंदिर का लोकेशन
Rameshwaram Temple History In Hindi Video
Interesting Facts
- हिन्दू धर्मशास्त्रों और पुराणों में रामेश्वम का नाम गंधमादन पर्वत कहा जाता है।
- यहां पर भगवान श्री राम ने नवग्रह की स्थापना की और सेतुबंध यहां से शुरु हुआ था।
- रामेश्ववरम मंदिर के कुंड में डुबकी लगाने से सारी बीमारियां दूरी होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
- यह पवित्र स्थल पर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।
- रामेश्वम तीर्थधाम की यात्रा करने और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
- प्रसिद्ध तीर्थधाम में उत्तराखंड के गंगोत्री से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करने का विशेष महत्व है।
- यात्रियों के पास गंगाजल नहीं होता है, तो तीर्थधाम के पंडित दक्षिणा लेकर गंगाजल उपलब्ध करवाते हैं।
- रामेश्वरम से थोड़ी दूर में स्थित जटा तीर्थ कुंड में श्री राम ने लंका में रावण से युद्ध कर अपने बाल धोए थे।
- रामेश्वरम मंदिर में अन्य कई देवी-देवताओं को समर्पित मंदिर भी बने हुए हैं ।
- यहां से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर धनुष्कोटि नामक जगह है वह पितृ-मिलन एवं श्राद्ध तीर्थ नामक जगह हैं।
- रामेश्वम मंदिर में महाशिवरात्रि का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।
- चार प्रमुख धामों में से एक रामेश्वरम मंदिर से लाखों भक्तों की आस्था जुडी है।
- प्रसिद्ध तीर्थस्थान पर सड़क, रेल और वायु तीनों मार्गों द्धारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- रामेश्वरम मंदिर का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है।
FAQ
Q .रामेश्वर मंदिर कहा स्थित है?
रामेश्वर मंदिर का भव्य मंदिर तमिलनाडु राज्य में स्थित है।
Q .रामेश्वर मंदिर का निर्माण कब और किसने करवाया था?
रामेश्वर मंदिर का निर्माण15वीं शताब्दी में राजा उडैयान सेतुपति एवं नागूर निवासी वैश्य ने करवाया था।
Q .रामेश्वर की स्थापना कैसे हुई?
जामवंत के निर्देशानुसार श्रीराम समुद्र तट पर शिवलिंग की स्थापना करते हैं।
Q .रामेश्वरम में कौन से भगवान हैं?
रामेश्वरम में भगवान शिव को समर्पित मंदिर है।
Q .रामेश्वरम में क्या प्रसिद्ध है?
रामेश्वरम हिन्दुओ के चार धामों में से एक धाम है ।
Q .रामेश्वरम का क्या अर्थ है?
रामेश्वर का मतलब भगवान शिव, राम की पत्नी होता है।
Q .रामेश्वर मंदिर के दर्शनीय स्थल बताए
साक्षी विनायक, एकांतराम मंदिर, सीताकुंड, अमृतवाटिका, विभीषण तीर्थ, नंदिकेश्वर, माधव कुंड, रामतीर्थ
Conclusion
आपको मेरा लेख Rameshwaram Temple History बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा।
लेख के जरिये Rameshwaram Temple god, Rameswaram temple
और Rameshwaram Temple in hindi से सबंधीत सम्पूर्ण जानकारी दी है।
अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है।
हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।
Note
आपके पास Rameshwaram Temple open or not 2022 की जानकारी हैं। या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिख हमे बताए हम अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद।
! साइट पर आने के लिए आपका धन्यवाद !
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