History of Padmanabhapuram Palace in Hindi – पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास

Padmanabhapuram Palace कन्याकुमारी जिले के पद्मनाभपुरम गाँव में, ठाकले के पास, नागरकोइल से लगभग 15 किमी और तिरुवनंतपुरम से 55 किमी की दूरी पर स्थित है।

पद्मनाभपुरम पैलेस दुनिया के शीर्ष दस महलों भारत के सबसे शानदार महलों में से एक है जो देश की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है जो कई शताब्दियों से उपयुक्त है।

पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास – History of Padmanabhapuram Palace

पद्मनाभपुरम पैलेस 6 एकड़ में फैला है और पश्चिमी घाट के वेलि हिल्स की तलहटी में स्थित है। इस पैलेस को 17 वीं शताब्दी में इराविपिल्लई इराविवर्मा कुलशेखर पेरुमलने बनवाया था। इस महल के बारे में ध्यान देने योग्य बात यह है कि पद्मनाभपुरम पैलेस पूरी तरह से लकड़ी और किसी अन्य सामग्री से बना है।

उत्तम लकड़ी की नक्काशी और डिजाइनों से सुसज्जित, पैलेस की सादगी ही इसे वास्तव में आकर्षक गंतव्य बनाती है। पद्मनाभपुरम पैलेस केरल की पारंपरिक वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करता है।

 पैलेस का नाम  पद्मनाभपुरम पैलेस
 स्थान  पद्मनाभपुरम गाँव
 राज्य  तमिलनाडु
 निर्माता  इराविपिल्लई इराविवर्मा कुलशेखर पेरुमल
 निर्माणकाल   ई.स 1550
 पुनःनिर्माणकाल   निर्माणकाल
 पुनःनिर्माणकर्ता  त्रावणकोर, अनीज़म थिरुनाल, मार्थान्द वर्मा
 पद्मनाभपुरम पैलेस क्षेत्र   6 एकड़

Padmanabhapuram Palace – यह तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में स्थित है पद्मनाभपुरम पैलेस भारत के सबसे प्राचीन महलों में से एक है। पद्मनाभपुरम पैलेस का निर्माण 1550 -1750 ईस्वी में इराविपिल्लई इराविवर्मा कुलशेखर पेरुमलन द्वारा करबाया गया था।

1750 के आसपास, त्रावणकोर के शासक राजा मार्तंड वर्मा ने अपने राज्य को भगवान विष्णु के एक अलग स्वरूप श्री पद्मनाभ को समर्पित कर दिया था उसके बाद से इस महल को भी पद्मनाभपुरम महल के नाम से जाना जाने लगा।

लेकिन 1795 में, त्रावणकोर ने राजवंश की राजधानी को पद्मनाभपुरम से तिरुवनंतपुरम स्थानांतरित कर दिया गया और उसके बाद सुंदर महल और शहर ने अपनी चमक और महिमा खो दी।

यह नागरकोइल, तमिलनाडु और केरल के तिरुवनंतपुरम के करीब है। यह निश्चित है कि पद्मनाभापुरम किले में स्थित वेली हिल्स का निचला हिस्सा एक प्रचलित स्थान है।

इसका आधुनिकीकरण त्रावणकोर, अनीज़म थिरुनाल, मार्थान्द वर्मा द्वारा 1750 ई. के आसपास इस महल का पुनर्निर्माण करवाया गया था। यहाँ के राजा मार्थान्द वर्मा थे जिन्होंने अपने परिवार के देवता को राज्य समर्पित किया था।

यह माना जाता है कि श्री पद्मनाभ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्होंने दास या “भगवान पद्मनाभ के सेवक” के रूप में राज्य पर शासन किया। इसलिए, इसका नाम पद्मनाभापुरम या शाब्दिक रूप से “भगवान पद्मनाभ का शहर” हुआ।

महल की महिमा केरल की वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। मैंने आंतरिक भाग मे जो कुछ सुना है उनमें गहन विस्तृत शीशम की नक्काशी हुई बेहद अच्छी मूर्तियाँ शामिल हैं। 17 वीं और 18 वीं सदी के भित्ति चित्रों के साथ ही महोगनी में एक म्यूजिकल धनुष मौजूद है।

यह स्थान ऐतिहासिक जिज्ञासुओं के लिए एक स्वर्ग है, जिसके पूरे कमरे चीनी व्यापारियों द्वारा प्रस्तुत चीनी जार, वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल हथियार, पीतल के लैंप, प्राचीन पॉलिश किए हुए फर्नीचर और यहाँ तक कि एक पुरानी शैली के शौचालय इत्यादि तुच्छ चीजों से भरे हुए हैं।

इसके अलावा, त्रावणकोर के शाही परिवार के बारे में ऐतिहासिक घटनाओं और तथ्यों को चित्रों की एक श्रृंखला द्वारा दर्शाया गया है। शाही परिवार के लिए महल में बनाए गए, एक गुप्त मार्ग के बारे में अफवाहें भी थीं जो कि महल से छुप कर निकलने के मार्ग के रूप में मौजूद थीं।

पद्मनाभपुरम पैलेस की वास्तुकला – Architecture of Padmanabhapuram Palace

पैलेस केरल वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। महल में पुराने समय की नक्काशी, भित्ति चित्र और छत की दीवारों पर सुंदर मूर्तियां बनी है।

पद्मनाभपुरम पैलेस में अभ्रक से रंगी हुई खिड़कियां, शाही कुर्सियों पर चीनी नक्काशी और मेहंदी की तरह उत्तम लकड़ी से बनी कलाकृतियाँ देखी जा सकती है।

इसके अलावा इस महल की छत को पूरी तरह से चित्रित किया है, जिसमें शीशम और टीकवुड के साथ नक्काशी की गई है, जिसमें 90 विभिन्न पुष्प डिजाइन हैं।

पद्मनाभपुरम महल की संरचनाए – Padmanabhapuram Palace Structures

पद्मनाभपुरम पैलेस परिसर को कई भागों में विभाजित किया गया है जिन्हें आप अपनी यात्रा के दौरान देखे सकते है

मंत्रशाला या किंग्स काउंसिल मीटिंग चैंबर:

मंत्रशाला पद्मनाभपुरम पैलेस का सबसे खुबसूरत हिस्सा है। किंग्स काउंसिल का कक्ष जटिल जालीदार है, दीवारों को प्रतिबिंबित करते हुए, मंत्रसाला के फर्श को कई सामग्रियों जैसे कि जला हुआ नारियल के गोले और अंडे की सफेदी के साथ खूबसूरती से डिजाइन किया गया है।

पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास - History of Padmanabhapuram Palace in Hindi
पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास – History of Padmanabhapuram Palace in Hindi

इसकी खिड़कियाँ रंगीन अभ्रक से ढँकी हुई थीं जो गर्मी और धूल को दूर रखने के लिए और परिषद कक्ष के आंतरिक भाग को ठंडा और अंधेरा रखने के लिए बनाई गयी थी।

रानी मदर पैलेस :

रानी मदर पैलेस Padmanabhapuram Palace का सबसे पुराना परिसर है। जिसे ठेठ केरल शैली में बनाया गया है और इसमें एक आंतरिक आंगन है, जिसे ‘नलुकुट्टू’ कहा जाता है, जिसमें चार स्तंभों द्वारा समर्थित एक छत है।

महल के दक्षिण-पश्चिम कोने की ओर ‘एकंता मंडपम’ या चैंबर ऑफ सॉलिट्यूड स्थित है। इस कमरे की सुंदरता इसकी जटिल लकड़ी की नक्काशी में निहित है, जिसमें से सबसे उल्लेखनीय एक कटहल की लकड़ी पर है जिसमें सूक्ष्म पुष्प डिजाइन हैं।

नाटकशाला या कोर्ट या परफॉर्मेंस हॉल :

यह खंड महाराजा स्वाति थिरुनल के शासनकाल के दौरान बनाया गया था, जिन्होंने 1829 से 1846 तक शासन किया था। वे प्रदर्शन कला के महान प्रशंसक थे, विशेष रूप से संगीत और नृत्य और खुद एक संगीत संगीतकार थे।

यह नाटकशाला ग्रेनाइट के खंभों पर खड़ी है और इसमें एक शानदार काला फर्श है। इसके अलावा नाटकशाला के चारो ओर लकड़ी का बाड़ा या झाँकियाँ बनाई गयी है जिनका उपयोग शाही घराने की महिलाओं द्वारा प्रदर्शनों को देखने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

नाटकशाला को ग्रेनाइट के स्तंभ थे और चमचमाती काली फर्श थी। वहा पर एक लकड़ी का बाड़ा था जहापर शाही घर की महिलाये बैठा करती थी और प्रदर्शन देखा करती थी।

चार मंजिली इमारत महल परिसर के मध्य में थी। जमीन के ताल में शाही खजाना रहता था।

पहली मंजिल पर राजा का शयनकक्ष होता था। अलंकृत चारपाई 64 तरह के वनौषधि के लकड़ी से बनी होती थी और ये सब डच व्यापारियों से भेट के रूप में मिलता था।

यहाँ के कमरे और महल परिसर के अन्य भाग में ज्यादातर अन्तर्निहित रिक्त स्थान थे जहा पर तलवार और खंजर जैसे हतियार रखे जाते थे। दुसरे मंजिल पर राजा की आराम करने का और अध्ययन करने का कमरा रहता था।

इनकी दीवारों पर 18 वे शताब्दी के चित्र रहते थे जो पुरानो के कुछ दृश्य होते थे और उस समय के त्रवनकोर के सामाजिक जीवन के कुछ दृश भी रहते थे।

सबसे उपरी मंजिल पद्मनाभ स्वामी के लिए रहती थी। ये इमारत मार्थंद वर्मा के समय बनाई गयी। वो पद्मनाभ दास नाम से जाने जाते थे और त्रवनकोर का राज्य श्री पद्मनाभ स्वामी के दास के रूप में चलाते थे।

केंद्रीय हवेली :

केंद्रीय हवेली एक चार मंजिला इमारत है जो महल परिसर के केंद्र में स्थित है। हवेली के भूतल में शाही खजाना है, पहली मंजिल में राजा के बेडरूम हैं जबकि दूसरी मंजिल में राजा के विश्राम और अध्ययन कक्ष हैं।

शीर्ष मंजिल जिसे ‘उप्पेरिका मलिका’ कहा जाता है, शाही घराने के पूजा कक्ष के रूप में कार्य करती है। इसकी दीवारें 18 वीं शताब्दी के उत्कृष्ट भित्ति चित्रों से ढकी हैं जो पुराणों और त्रावणकोर साम्राज्य के दृश्यों का वर्णन करते हैं।

दक्षिणी महल :

दक्षिणी महल “थाई कोत्तराम” के इतना ही 400 साल पुराना है। अभी ये एक विरासत संग्रहालय के रूप में सभी एंटीक घरेलु लेख करिओस को दर्शाता है। इन सब का संग्रह उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक लोकाचार के बारे में जानकारी देता है।

पद्मनाभपुरम पैलेस खुलने का समय –

सुबह 9.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक

पैलेस की यात्रा के लिए आवश्यक समय: 1-2 घंटे

पद्मनाभपुरम पैलेस की एंट्री फीस –

पर्यटकों के लिए : 10 रूपये प्रति व्यक्ति

बच्चो के लिए : 2 रूपये

जबकि फोटोग्राफी के लिए : 25 रूपये फीस है।

पद्मनाभपुरम पैलेस के आसपास घूमने लायक पर्यटक स्थल –

यदि आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ कन्याकुमारी के प्रमुख पर्यटक स्थल पद्मनाभपुरम महल घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो क्या आप जानते है?

कन्याकुमारी में पद्मनाभपुरम महल के अलावा भी एक से बढ़कर एक पर्यटक स्थल मौजूद है जिन्हें आप अपनी पद्मनाभपुरम पैलेस की यात्रा में घूमने जा सकते है

कन्याकुमारी में अन्य स्मारक –

कन्याकुमारी बीच

थिरपरप्पु जलप्रपात

विवेकानन्द स्मारक शिला

अवर लेडी ऑफ रैनसम चर्च

कामराजार मणिमंडपम

तिरुचेंदुर मंदिर

ओलाकरुवी झरना

सूनामी स्मारक

तिरुवल्लुवर स्टेचू

गांधी मेमोरियल

कुमारी अम्मान मंदिर

सुब्रमण्यम मंदिर

सनसेट पॉइंट

सोथाविलई बीच

पद्मनाभपुरम महल घूमने जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Padmanabhapuram Palace

Padmanabhapuram Palace महल की यात्रा बर्ष के किसी भी समय कर सकते है लेकिन यदि पद्मनाभपुरम महल के साथ- साथ कन्याकुमारी के अन्य प्रसिद्ध पर्यटक स्थल भी घूमने जाना चाहते है तो उसके लिए अक्टूबर से फरवरी के मध्य का समय कन्याकुमारी घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास - History of Padmanabhapuram Palace in Hindi
पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास – History of Padmanabhapuram Palace in Hindi

इस समय कन्याकुमारी का मौसम शांत और सुखद रहता है, यह समय कन्याकुमारी दर्शनीय स्थलों की यात्रा, समुद्र तट की गतिविधियों को पूरा करने और शानदार सूर्यास्त के सुंदर दृश्य देखने का सबसे अच्छा समय होता है।

कन्याकुमारी की यात्रा में कहाँ रुके –

अक्सर हम किसी भी पर्यटक स्थल की यात्रा पर जाने से पहले अपनी यात्रा में रुकने के लिए सबसे अच्छी और अपने बजट के अनुसार होटलों की तलाश करने लगते है।

यदि आप भी कन्याकुमारी के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल घूमने जाने का प्लान बना रहे है और अपनी यात्रा में रुकने के लिए होटल की तलाश में हैं।

तो हम आपको बता दे कन्याकुमारी में रुकने के लिए लो बजट से हाई बजट तक सभी प्रकार की होटल्स मिल जायेगी जिनकी आप अपनी सुविधानुसार चुनाव कर सकते हैं।

  • गोल्डन नेस्ट होमस्टे
  • फीनिक्स हॉलिडे होम
  • होटल टेम्पल सिटी
  • होटल संगम
  • स्पार्सा रिज़ॉर्ट कन्याकुमारी
  • होटल स्काईर्क

पद्मनाभपुरम पैलेस केसे पहुंचे –

Padmanabhapuram Palace कन्याकुमारी की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों को हम बता दें कि आप फ्लाइट, ट्रेन और बस में से किसी का भी अपनी सुविधानुसार चुनाव कर सकते हैं। तो आइये नीचे विस्तार से जानते है की हम फ्लाइट, ट्रेन और सड़क मार्ग से पद्मनाभपुरम पैलेस केसे जा सकते हैं।

फ्लाइट से पद्मनाभपुरम पैलेस केसे पहुंचे –

त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पद्मनाभपुरम पैलेस का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो पद्मनाभपुरम पैलेस से केवल 62 किमी दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डे भारत और दुनिया के प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

आप भारत के किसी भी प्रमुख शहरों से त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के लिए उड़ान भर सकते है और एयरपोर्ट पहुचने के बाद बस, टेक्सी या केब बुक करके पद्मनाभपुरम पैलेस कन्याकुमारी पहुच सकते हैं।

ट्रेन से पद्मनाभपुरम पैलेस केसे जाएँ – How to reach Padmanabhapuram Palace by train

पद्मनाभपुरम पैलेस कन्याकुमारी की यात्रा के लिए रेल मार्ग का चुनाव किया है तो ट्रेन से यात्रा करना आपके लिए एक आरामदायक और सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि कन्याकुमारी का अपना नागरकोइल रेलवे स्टेशन है।

इस रेलवे स्टेशन का रूट भारत के सबसे लम्बे रूटों में से एक है जो भारत के सभी प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा है। ट्रेन से यात्रा करके कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पहुचने के बाद आप स्थानीय वाहनों की मदद से आसानी से पद्मनाभपुरम पैलेस जा सकते है।

सड़क मार्ग से पद्मनाभपुरम पैलेस केसे जाएँ –

Padmanabhapuram Palace कन्याकुमारी के माध्यम से सड़क मार्ग द्वारा दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पद्मनाभपुरम पैलेस जाने के लिए तमिलनाडु और कन्याकुमारी सड़क परिवहन बसें कन्याकुमारी के लिए उपलब्ध हैं।

महल तिरुवनंतपुरम से सिर्फ 3 घंटे की सीधी ड्राइव पर स्थित है इसीलिए आप सेल्फ-ड्राइव का भी विकल्प चुन सकते हैं।

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4 thoughts on “History of Padmanabhapuram Palace in Hindi – पद्मनाभपुरम पैलेस का इतिहास”

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