History of Moti Masjid in Hindi

History of Moti Masjid in Hindi | मोती मस्जिद का इतिहास और घूमने की जानकारी

moti masjid दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक हैं। यह मस्जिद “पर्ल मस्जिद” के नाम से भी जानी जाती है। मोती मस्जिद दिल्ली के लाल किले में स्थित बहुत ही खूबसूरत सरचना है जोकि पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

इस मस्जिद का निर्माण मुग़ल बादशाह औरंगजेब के शासन काल में करवाया गया था। मोती मस्जिद की वास्तुकला देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से लाल किले में प्रवेश करते हैं। delhi moti masjid हम्माम के पश्चिम में स्थित और दीवान-ए-खास के निकट बनी हुई है।

मोती मस्जिद का इतिहास – History of Moti Masjid in Hindi

औरंगजेब ने अपने विश्राम करने के कमरे से लेकर moti masjid delhi तक जाने का रास्ता बनबाया हैं। औरंगजेब द्वारा निर्मित करवाई गई संरचनाओ में यह मस्जिद सबसे शानदार संरचना हैं।

यदि आप दिल्ली के लाल किले में स्थित इस खूबसूरत मोती मस्जिद के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को पूरा जरूर पढ़े।

  मज्जिद का नाम   मोती मस्जिद
  स्थान   दिल्ही
  निर्माणकर्ता   मुग़ल बादशाह औरंगजेब
  निर्माणकाल   ईस्वी1659 से 1660
  निर्माणखर्च   रु160000

दिल्ली की मोती मस्जिद का निर्माण किसने करवाया – 

दिल्ली के लाल किले में मोती मस्जिद का निर्माण मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने करवाया था।

मोती मस्जिद का निर्माण कब हुआ था –  History of Moti Masjid

मोती मस्जिद का निर्माण 1659 से 1660 ईस्वी में करवाया गया था

masjid ka photo
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नई दिल्ली की मोती मस्जिद का इतिहास – 

moti masjid delhi के इतिहास से पता चलता है की moti masjid delhi के लाल किला में स्थित इस अनौखी मस्जिद का निर्माण मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने अपनी दूसरी पत्नी नवाब बाई के लिए बनबाया था। इस मंदिर के निर्माण में करीब 1 साल का समय लगा था।

moti masjid में जेनाना महिलाओं को प्रवेश की अनुमति भी प्राप्त थी। औरंगजेब ने इस मस्जिद का निर्माण प्रार्थना हॉल के रूप में करवाया था। सन 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद इस मस्जिद को बहुत नुकसान हुआ था। हालाकि मोती मस्जिद का पुनः निर्माण करवाया गया था।

मोती मस्जिद दिल्ली संरचना – 

मोती मस्जिद की संरचना की बात करे तो इस मस्जिद की संरचना को इंडो-इस्लामिक वास्तुकला में बनाया गया है। मोती मस्जिद लाल किला परिसर में छोटे बॉक्स के समान बनी हुई संरचना है।

सफ़ेद संगमरमर के पत्थरों से सजी हुई इस मस्जिद में सोने के गुम्बद बने हुए है। moti masjid delhi के पूर्वी तरफ के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक छोटा सा दरवाजा है जिसमें सजी हुई तांबे की प्लेटें लगी हुई है।

इस मस्जिद में उत्तर में एक दरवाजा है जिसमे महिलाओं को प्रवेश की अनुमति होती थी। moti masjid के आँगन में एक तालाब भी है जोकि एक विशाल अभ्यारण है। इस अभ्यारण का नाम वुजू खान है। मोती मस्जिद के निर्माण में लगभग 160000 की लागत आगई थी।

मोती मस्जिद में लगने वाला प्रवेश शुल्क – 

Entry fee charged in Moti Masjid मोती मस्जिद पर्यटकों के लिए बिल्कुल फ्री हैं।

मोती मस्जिद दिल्ली खुलने और बंद होने का समय – 

delhi moti masjid खुलने का समय सुबह 7 बजे से दोपहर के 12 बजे तक और दोपहर 1:30 से 6:30 बजे का होता हैं।

मोती मस्जिद के आस – पास के पर्यटन स्थल – Entry fee charged in Moti Masjid

मोती मज्जिद के नजदीकी कई सारी प्राचीन इमारते मौजूद है।जो आपको निचे देख सकते है।

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  • हुमायु का मकबरा – दिल्ही :

हुमायु का मकबरा मोती मज्जिद से कुछ ही दुरी पर दिल्ही में मौजूद है। हुमायूँ का मकबरा ताजमहल के 60 वर्षों से पहले निर्मित मुगल सम्राट हुमायूं का अंतिम विश्राम स्थल है

जो moti masjid delhi के निज़ामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में स्थित है और भारतीय उपमहाद्वीप में पहला उद्यान मकबरा है। हुमायूँ का मकबरा दिल्ली का एक प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जो भारी संख्या में इतिहास प्रेमियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

हुमायूँ का मकबरा अपने मृत पति के लिए पत्नी के प्यार को प्रदर्शित करता है। फ़ारसी और मुग़ल स्थापत्य तत्वों को शामिल करते हुए इस उद्यान मकबरे का निर्माण 16 वीं शताब्दी के मध्य में मुगल सम्राट हुमायूँ की स्मृति में उनकी पहली पत्नी हाजी बेगम द्वारा बनाया गया था।

हुमायूँ के मकबरे की सबसे खास बात यह है कि यह उस समय की उन संरचनाओं में से एक है जिसमें इतने बड़े पैमाने पर लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया था।

अपने शानदार डिजाइन और शानदार इतिहास के कारण हुमायूँ का मकबरा को साल 1993 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।

हुमायूँ के मकबरे की वास्तुकला इतनी ज्यादा आकर्षित है कि कोई भी इसे देखे बिना नहीं रह पाता। यह शानदार मकबरा एक बड़े अलंकृत मुगल गार्डन के बीच में स्थित है और इसकी सुंदरटा सर्दियों के मौसम में काफी बढ़ जाती है।

हुमायूँ का मकबरा यमुना नदी के तट पर स्थित है और यह अन्य मुगलों के अवशेषों का भी घर है, जिनमें उनकी पत्नियाँ, पुत्र और बाद के सम्राट शाहजहाँ के वंशज, साथ ही कई अन्य मुगल भी शामिल हैं।

  • क़ुतुब मीनार दिल्ही :

कुतुब मीनार भारत में दिल्ली शहर के महरौली में ईंट से बनी, विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। दिल्ली को भारत का दिल कहा जाता है, यहाँ पर कई प्राचीन इमारते और धरोहर स्थित है।

इन पुरानी और खास इमारतों में से एक इमारत दिल्ली में स्थित है जिसका नाम है क़ुतुब मीनार, जो भारत और विश्व की सबसे ऊँची मीनार है।

क़ुतुब मीनार भारत का सबसे खास और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। क़ुतुब मीनार दिल्ली के दक्षिण इलाक़े में महरौली में है। यह इमारत हिंदू-मुग़ल इतिहास का एक बहुत खास हिस्सा है।

कुतुब मीनार को यूनेस्को द्वारा भारत के सबसे पुराने वैश्विक धरोहरों की सूचि में भी शामिल किया गया है। इस आर्टिकल में हम क़ुतुब मीनार की जानकारी और कुछ खास और दिलचस्प बातों पर पर नज़र डालेंगे।

क़ुतुब मीनार दुनिया की सबसे बड़ी ईटों की दीवार है जिसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है। मोहाली की फतह बुर्ज के बाद भारत की सबसे बड़ी मीनार में क़ुतुब मीनार का नाम आता है। क़ुतुब मीनार के आस-पास परिसर क़ुतुब काम्प्लेक्स है जो कि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है।

  • राट्रीय स्मारक इंडिया गेट 

दिल्ली के सभी प्रमुख आकर्षणों में से इंडिया गेट सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। इंडिया गेट के नाम से प्रसिद्ध अखिल भारतीय युद्ध स्मारक की भव्य संरचना विस्मयकारी है

और इसकी तुलना अक्सर फ्रांस में आर्क डी ट्रायम्फ, मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया और रोम में कॉन्सटेंटाइन के आर्क (मेहराब) से की जाती है।

दिल्ली शहर के केंद्र में स्थित, इंडिया गेट देश के राष्ट्रीय स्मारकों में सबसे लंबा यानि 42 मीटर लंबा ऐतिहासिक स्टेकचर सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था और यह देश के सबसे बड़े युद्ध स्मारक में से एक है।

इंडिया गेट हर साल गणतंत्र दिवस परेड की मेजबानी के लिए भी प्रसिद्ध है। आज का हमारा आर्टिकल देश की सबसे ऊंची युद्ध स्मारक इंडिया गेट के बारे में है।

इस आर्टिकल में आपको इंडिया गेट का इतिहास, डिजाइन और इंडिया गेट से जुड़े रोचक तथ्य जानने को मिलेंगे। साथ ही इस पर्यटन स्थल से जुड़े तमाम सवालों के जवाब भी आपको हमारे आर्टिकल के जरिए मिल जाएंगे।

Moti Masjid images
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4.दिल्ही का लाल किला – Red Fort of Delhi 

moti masjid delhi का लाल किला भारत में दिल्ली शहर का एक ऐतिहासिक किला है। लाल किला भारत में पर्यटकों के लिए एक बहुत खास जगह है। दूसरे देशों से आने वाले पर्यटक भी भारत के इस किले को देखना बेहद पसंद करते हैं।

इस किले के बारे में बात करें तो आपको बता दें कि 1856 तक इस किले पर लगभग 200 वर्षों तक मुगल वंश के सम्राटों का राज था। यह दिल्ली के केंद्र में स्थित है इसके साथ ही यहाँ कई संग्रहालय हैं।

यह किला बादशाहों और उनके घर के अलावा यह मुगल राज्य का औपचारिक और राजनीतिक केंद्र था और यह क्षेत्र खास तौर से होने वाली सभा के लिए स्थापित किया गया था।

  • इस्कॉन मंदिर :

इस्कॉन मंदिर को दूसरे हरे राम हरे कृष्ण के नाम से पहचाना जाता है। यह इस्कॉन मंदिर कृष्ण को समर्पित है। यह इस्कॉन मंदिर की स्थापना ई.स 1998 में अच्युत कनविंडे ध्वारा निर्माणित किया गया है।

यह मंदिर नई दिल्ही के कैलास क्षेत्र के पूर्व दिशा में हरे कृष्णा पर्वत पर स्थित है। यह स्थान सेंटर हॉल हरे राम और हरे कृष्ण की स्वर्गीय धुन का उल्लेख दर्शाता है।

  • लोटस टेम्पल :

मोती मज्जिद की यात्रा के समय में यह लोटस टेम्पल पर्यटकों के लिए यह मंदिर आकर्षित है। यह लोटस टेम्पल नई दिल्ही में यह मौजूद है। यह मंदिर सुन्दर और आकर्षित सफ़ेद पंखुड़ी वाले कमल के रूप में इसकी रचना की गई है।

और दुनिया के सुन्दर स्थानों में से ज्यादा देखे जाने वाला स्थान है और काफी प्रतिष्ठित है यह लोटस टेम्पल की बनावट ई.स 1986 में पूर्ण हुवा था। लोटस टेम्पल की डिजाइन वास्तुकार फारिबोरज साहब ने कनाडाई वास्तुशैली में बनवाया गया था।

  • स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर :

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर नई दिल्ही में मौजूद यह मंदिर सुन्दर और आकर्षण का केंद्र बना हुवा है। यह स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की संस्कृति , आध्यात्मिकता और वास्तुशैली का एक अदभुत नमूना है। स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ही की यमुना नदी के किनारे पर मौजूद है और यह स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर हिन्दू धर्म की संस्कृति का एक अत्यंत आकर्षक स्थान है।

  • जंतर मंतर दिल्ही :

जंतर मंतर दिल्ही में संसद मार्ग नई दिल्ही के दक्षिणी कनॉट सर्किल में मौजूद है। दिल्ही का जंतर मंतर विशाल वेधशाला है। यह स्थान जंतर मंतर को प्राचीन समय में समय और स्थान के अध्ययन की मदद में और मुर्हुत देखने के लिए इसका निर्माण करवाया गया था।

यह दिल्ही के जंतर मंतर का निर्माण महाराजा जयसिंह ने करवाया था। महाराजा जयसिंह ने ई.स 1724 में जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। और यह जंतर मंतर जयपुर ,उज्जैन ,वाराणसी और मथुरा में मौजूद यह पांच ऐसी वेधशालाओ में से एक माना जाता है।

Moti Masjid photo
Moti Masjid photo
मोती मज्जिद जाने का समय अच्छा समय – 

दिल्ली में मोती मस्जिद घूमने जाने का सबसे अच्छा समय फ़रवरी से अप्रैल और अगस्त से नवम्बर का माना जाता है।

मोती मस्जिद के आस – पास कहाँ रुके – 

moti masjid delhi के निकट रुखने के लिए आपको कई होटल और रिसोर्ट मिल जाएंगे जहां आप सुविधापूर्वक रुक सकते हैं।

  • शुक्ला होटल और लॉज
  • द ताज महल होटल न्यू दिल्ली
  • होटल ज्वेल्स पैलेस
मोती मस्जिद दिल्ली कैसे पहुंचे – 

moti masjid delhi जाने के लिए आप फ्लाइट, ट्रेन और बस में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।

  • फ्लाइट से मोती मस्जिद कैसे पहुंचे :

moti masjid घूमने के लिए आपने हवाई मार्ग का चुनाव किया है तो हम आपको बता दे कि दिल्ली का इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे अच्छा विकल्प हैं। हवाई अड्डे से आप स्थानीय साधनो की मदद से लाल किला और मोती मस्जिद तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

  • ट्रेन से मोती मस्जिद कैसे पहुंचे :

delhi moti masjid जाने के लिए यदि आपने रेलवे मार्ग का चुनाव किया हैं तो हम आपको बता दें कि दिल्ली रेलवे जंक्शन पुरानी दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा हज़रत निज़ामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशन दिल्ली के अन्य रेलवे स्टेशन हैं।

आप इनमे से किसी भी स्टेशन का चुनाव कर सकते हैं और दिल्ली में चलने वाले स्थानीय साधनों की मदद से moti masjid in delhi तक का सफ़र तय कर सकते हैं

  • बस से मोती मस्जिद दिल्ली कैसे पहुंचे :

moti masjid जाने के लिए यदि आपने सड़क मार्ग की योजना बनाई हैं तो बता दें कि moti masjid delhi अपने आसपास के सभी शहरो से सड़क मार्ग के

माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ। आप बस या अन्य किसी साधन से moti masjid delhi तक आसानी से पहुँच जाएंगे।

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