Khajuraho Temple History in Hindi

Khajuraho Temple History in Hindi | खजुराहो मंदिर का इतिहास मध्यप्रदेश

Khajuraho Temple भारत के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश स्टेट का एक बहुत ही खास शहर और पर्यटक स्थल है जो अपने प्राचीन और मध्यकालीन मंदिरों के लिए देश भर में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 

मध्यप्रदेश में कामसूत्र की रहस्यमई भूमि खजुराहो अनादिकाल से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। छतरपुर जिले का यह छोटा सा गाँव स्मारकों के अनुकरणीय कामुक समूह के कारण विश्व-प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में अपना स्थान बनाया है। khajuraho mandir मूल रूप से मध्य प्रदेश में हिंदू और जैन मंदिरों का एक संग्रह है। ये सभी मंदिर बहुत पुराने और प्राचीन हैं। जिन्हें चंदेल वंश के राजाओं द्वारा 950 और 1050 के बीच कहीं बनवाया गया था।

पुराने समय में खजुराहो को खजूरपुरा और खजूर वाहिका से जाना-जाता था। खजुराहो में कई सारे हिन्दू धर्म और जैन धर्म के प्राचीन मंदिर हैं। इसके साथ ही ये शहर दुनिया भर में मुड़े हुए पत्थरों से बने हुए मंदिरों की वजह से विख्यात है। खजुराहो को खासकर यहाँ बने प्राचीन और आकर्षक मंदिरों के लिए जाना-जाता है। यह जगह पर्यटन प्रेमियों के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। यहाँ आपको हिन्दू संस्कृति और कला का सौन्दर्य देखने को मिलता है। यहाँ निर्मित मंदिरों में संभोग की विभिन्न कलाओं को मूर्ति के रूप में बेहद खूबसूरती के साथ उभारा गया है।

Table of Contents

Khajuraho Temple History in Hindi –

मंदिर का नाम खजुराहो का मंदिर
राज्य मध्यप्रदेश
जिला छतरपुर
निर्माणकर्ता चंदेला वंश के शासक चंद्रवर्मन
निर्माण में कितने साल लगे 100 साल लगे
हयात 25 मंदिर
निर्माणकाल ई.स 950 और 1050
कुल मंदिर  85 मंदिर

खजुराहो मंदिर कहा है – Where is The Khajuraho Temple

khajuraho temple photo
khajuraho temple photo

ऐसे तो खजुराहो एक छोटा सा गाँव है।

जो अपने विश्व प्रसिद्ध कामुक मूर्तिकला मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

भारत के मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत में आता है।

इसके बारेमे भी जानिए – बैंगलोर पैलेस का इतिहास और जानकारी 

खजुराहो मंदिर का निर्माण किसने करवाया था –

Khajuraho Temple को चंदेल वंश के राजपूत शासकों द्वारा बनवाया गया था जिन्होंने 10 वीं से 13 वीं शताब्दी ईस्वी तक मध्य भारत पर शासन किया था। मंदिरों को बनाने में लगभग 100 साल से भी अधिक का समय लगा था और यह माना जाता है कि प्रत्येक चंदेला शासक ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक मंदिर का निर्माण किया था। चन्द्रवर्मन, खजुराहो और चंदेल वंश के संस्थापक थे।

चन्द्रवर्मन भारत के मध्यकाल में बुंदेलखंड में शासन करने वाले एक गुर्जर राजा थे। वो अपने आप को चन्द्रवंशी मानते थे। 10वी से 13वीं शताब्दी तक मध्य भारत में चंदेल राजाओं का राज था। इंही चंदेल राजाओं ने 950 ईसवीं से 1050 ईसवीं बीच खजुराहो के मंदिरों को बनवाया था।  मंदिरों का निर्माण करवाने के बाद चंदेल शासकों ने महोबा को अपनी राजधानी बना लिया। इसके बाद भी खजुराहो आकर्षण का केंद्र बना रहा।

खजुराहो मंदिर का निर्माण कब करवाया था –

अपनी अद्भुत कलाकृतियों और कामोत्तक मूर्तियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्द खजुराहों में इन बेहद शानदार मंदिरों का निर्माण चंदेला साम्राज्य के समय 950 और 1050 ईसवी के बीच में राजा चंद्रवर्मन ने करवाया था। यहां हिन्दू और जैन धर्म के मंदिरों का समूह है। खजुराहों के मंदिरों में महादेव जी को समर्पित एक कंदरिया महादेव जी का मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और भव्य मंदिर है।

khajuraho mandir image
khajuraho mandir image

खजुराहो मंदिर का इतिहास – History of Khajuraho Temple

khajuraho temple in hindi में बतादे की खजुराहो में बने मंदिर काफी प्राचीन है। यहाँ का इतिहास लगभग 1000 साल पुराना है। खजुराहो प्राचीन समय में चंदेल साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। पृथ्वीराज रासो में मध्यकाल के दरबारी कवि चंदबरदाई में चंदेल वंश की उत्पत्ति के बारे में बताया है। उन्होंने इसमें यह लिखा है कि काशी के राजपंडित की बेटी हेमवती बेहद खूबसूरत थी। जब एक दिन वो गर्मियों के मौसम में रात के समय कमल-पुष्पों से भरे एक तालाब में नहा रही थी तो उसकी खूबसूरती देख कर भगवान चन्द्र उनकी ओर आकर्षित हो गए।

हेमवती की सुंदरता से मोहित हुए भगवान् चन्द्र ने धरती पर आकर मानव रूप धारण कर और हेमवती का हरण कर लिया। हेमवती एक विधवा थी और एक बच्चे की मां भी थी। उन्होंने चन्द्रदेव पर चरित्र हनन करने और जीवन नष्ट करने का आरोप लगाया। चन्द्रदेव को अपनी गलती का पश्चाताप हुआ और उन्होंने हेमवती को यह वचन दिया कि वो एक वीर पुत्र की मां बनेगी। हेमवती से चन्द्रदेव ने कहा कि वो अपने पुत्र को खजूरपूरा ले जाये। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि उसका पुत्र एक महान राजा बनेगा। उन्होंने कहा कि यह महान राजा बनने के बाद ऐसे मंदिरों का निर्माण करवाएगा जो बाग़ और झीलों से घिरे हुए होंगे।

खजुराहो का राजा –

चन्द्रदेव ने यह भी कहा कि वो राजा बनने के बाद वहां विशाल यज्ञ करेगा जिससे तुम्हारे सारे पाप धुल जायेंगे। चन्द्र की बातों को सुनकर हेमवती ने पुत्र को जन्म देने के लिए अपना घर छोड़ दिया इसके बाद उसने एक छोटे से गांव में पुत्र को जन्म दिया। हेमवती के पुत्र का नाम चन्द्रवर्मन था जो कि अपने पिता की तरह बहुत ही बहादुर, तेजस्वी और ताकतवर था। चन्द्रवर्मन 16 साल की उम्र में ही इतना शक्तिशाली था कि वो बिना किसी हथियार के शेर को मार सकता था।

पुत्र की इस वीरता को देखकर चन्द्रदेव की आरधना की जिन्होंने चन्द्रवर्मन को पारस पत्थर भेंट किया और उसको खजुराहो का राजा बना दिया। पारस पत्थर की खास बात यह थी कि वो लोहे को सोने में बदल सकता था। खजुराहो का राजा बनने के बाद चन्द्रवर्मन ने एक के बाद एक कई युद्ध लड़े जिसमे उसे विजय प्राप्त हुई। चन्द्रवर्मन ने कालिंजर नाम के विशाल किले का निर्माण भी करवाया और अपनी मां के कहने पर उसने खजुराहो में तालाबों और उद्यानों से घिरे हुए 85 अद्वितीय मंदिरों का निर्माण भी करवाया।

बाद में एक विशाल यज्ञ का आयोजन भी किया जिसने हेमवती को पाप से मुक्ति दिलाई।

चन्द्रवर्मन अपने उत्तराधिकारियों के साथ मिलकर खजुराहो में अनेक मंदिर बनवाए।

khajuraho mandir
khajuraho mandir

इसके बारेमे भी जानिए – भेड़ाघाट धुआंधार जबलपुर की जानकारी

खजुराहो मंदिर के निर्माण से जुडी कहानी – 

अपनी अद्भुत कलाकृतियों और कामोत्तक मूर्तियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्द यह खजुराहो के मंदिर के निर्माण से लेकर एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसके मुताबिक काशी के प्रसिद्द ब्राहा्ण की पुत्री हेमावती, जो कि बेहद खूबसूरत थी। एक दिन नदी में स्नान कर रही थी, तभी चन्द्रदेव यानि कि चन्द्रमा की नजर उन पर पड़ी और वे उनकी खूबसूरती को देखकर उन पर मोहित हो गए और हेमावती को अपना बनाने की जिद में वे वेश बदलकर उसके पास गए और उन्होंने हेमावती का अपहरण कर लिया।

जिसके बाद दोनों को एक-दूसरे से प्रेम हो गया और फिर दोनों को चन्द्रवर्मन नाम का एक बेटा हुआ, जो कि बाद में एक वीर शासक बना और उसने चंदेल वंश की नींव रखी।  हेमावती ने चन्द्रवर्मन का पालन-पोषण जंगलों में किया था, वह अपने पुत्र को एक ऐसे शासक के रुप में देखना चाहती थी, जिसके कामों से उसका सिर गर्व से ऊंचा उठे। वहीं अपनी माता के इच्छानुसार चन्द्रवर्मन एक साहसी और तेजस्वी राजा बना था।

मध्यप्रदेश के छतरपुर के पास स्थित खजुराहो में 85 बेहद खूबसूरत और भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया, जो कि अपने आर्कषण की वजह से आज भी पूरे विश्व भर में जाने जाते हैं। Khajuraho Temple की अद्भुत कलाकृतियां अपने आप में अनूठी और अद्धितीय है। वहीं इन मंदिरों के दीवार पर बनाई गईं कुछ कामोत्तेजक कलाकृतियां काफी शानदार है, जिसकी वजह से खजुराहो के मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल में शामिल किए गया, जिसे देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं।

खजुराहो मंदिर की वास्तुकला और संरचना -Architecture And Structure of Khajuraho Temple

मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित भारत का यह प्रसिद्ध खजुराहो का मंदिर अपनी अद्भुत कलाकृतियों और कामोत्तक मूर्तियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस मंदिर की दीवारों पर बेहद शानदार तरीके से कामोत्तेजक शिल्पकलाएं और मूर्तिकलाएं बनाईं गईं हैं। जिनकी संरचना बेहद जटिल है। कुछ इतिहासकार और विद्धान यहां कामोत्तेजक प्रतिमा बनाए जाने के पीछे यह तर्क देते हैं कि यहां बेहद प्राचीन समय से कामुकता का अभ्यास किया जाता रहा है,

जबकि कुछ इतिहासकारों ने चंदेला साम्राज्य के समय में बनाए गए इस भव्य मंदिर की दीवारों पर बनी कामोत्तेजक कलाकृतियां को हिन्दू परंपरा का एक हिस्सा बताया है, जो कि मानव शरीर के लिए बेहद जरूरी है। आसाधारण प्रतिभा वाले कारीगरों ने चंदेला साम्राज्य के समय इन मूर्तियों को अद्भुत स्वरूप दिया है। वहीं खजुराहों के ज्यादातर मंदिर हिन्दू और जैन धर्म को प्रदर्शित करते हैं। मध्यकाल में खजुराहों के मंदिर भारतीय स्थापत्य और वास्तुकला के नायाब व उत्कृष्ट नमूना है।

वहीं खजुराहों के इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर में कमरें एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और कमरों में इस तरह से कलाकृतियों का निर्माण किया गया है कि कमरों की खिड़की से आने वाली सूर्य देवता की रोश्नी प्रत्येक कलाकृति पर पड़े।  आपको बता दें कि सबसे प्राचीन और भव्य मंदिरों में से एक खजुराहों के मंदिर की दीवारों पर बनी कामुक कलाकृतियां, प्राचीन भारत की अनूठी परंपराओं और अनुपम कलाओं का प्रतिनिधित्व करती हुई प्रतीत होती हैं।

खजुराहों मंदिर की अद्भुत कलाकृतियां

भारतीय मुगलकालीन स्थापत्य कला की मिसाल माने जाने वाली खजुराहो टेंपल की अद्भुत कलाकृतियां के भाव बेहद सजीव हैं, यहां की मूर्तियां बोलती हुईं प्रतीत होती हैं। वहीं इस प्रसिद्ध मंदिर की मूर्तिकला की सराहना कई बड़े-बड़े कलाकारों ने भी की है।हालांकि, इस मंदिर में बनी हुई कामुक कलाकृतियां को लेकर इतिहासकारों और विद्दानों के अपने अलग-अलग विचार है। कुछ लोगों के मुताबिक यह अद्भुत प्रतिमाएं मध्यकालीन समाज की कमजोर नैतिकता को दर्शाती है,

तो कुछ लोगों का मानना है कि यह कलाकृतियां कामशास्त्र के पौराणिक ग्रंथों के रचनात्मक आसनों का प्रदर्शन करती हैं, वहीं इन मूर्तियों पर बने स्त्री और पुरुष के चेहरे पर अलौकिक आनंदमयी भाव दिखाई देते हैं। इन मूर्तियों के जरिए कामुकता को अध्यात्म से जोड़ने की कोशिश की गई है। यह मूर्तिकला इतनी भव्य और आर्कषक है, जिसकी वजह से खजुराहों के मंदिर को विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है। वहीं इस अप्रतिम सौंदर्य की वजह से दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं।

आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक खजुराहों के मंदिरों में ज्यादातर मूर्तियां लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल कर बनाई गई हैं, जबकि कुछ मूर्तियों के निर्माण में ग्रेनाइट के पत्थरों का भी इस्तेमाल किया गया है। ,जिनमें से ललगुआं महादेव मंदिर, ब्रह्रा मंदिर और चौंसठ योगिनी ग्रेनाइट से बनाए गए हैं। इसके साथ खजुराहों के इस भव्य मंदिरों का निर्माण बिना किसी परकोटे के ऊंचे चबूतरों पर किया गया है, जिसकी खूबसूरती यहां आने वाले आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

खजुराहो में कितने मंदिर है – How many temples are there in Khajuraho Temple

khajuraho temple image
khajuraho temple image

ऐसा माना जाता है कि 12 वीं शताब्दी के अंत तक खजुराहो में

लगभग 85 मंदिर थे और अब केवल 25 ही बचे हैं।

ये मंदिर 20 किमी तक फैले हुए हैं।

इसके बारेमे भी जानिए – कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास

Khajuraho Temple कोनसे देवी – देवताओं को समर्पित है –

लक्ष्मण मंदिर :

लक्षमण मंदिर खजुराहो के मंदिरों में दूसरे नंबर पर आता है। इस मंदिर का निर्माण 930-950ईसवी के मध्य में किया गया था। यह भव्य और आकर्षक मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। इस मंदिर में बनी मूर्तियां बहुत ही आकर्षक और देखने लायक है। इन मंदिरों को बहुत ही अच्छी तरह से बनाया गया है। इस मंदिर की दीवारों पर हिन्दू देवताओं की मूर्तियां और जानवरों की मूर्तियां बनी हुई हैं।  अगर आप इतिहास, रहस्य और कला के प्रेमी हैं तो आपको लक्ष्मण मंदिर एक बार जरुर जाना चाहिए। यहां आपको प्राचीन समय की कलाकृतियों को अद्भुद नज़ारा देखने को मिलेगा।

चित्रगुप्त मंदिर :

Khajuraho Temple में सूर्यदेव को समर्पित चित्रगुप्त मंदिर एक बहुत पुराना मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं में करवाया गया था। इस मंदिर में सात घोड़ों वाले रथ पर खड़े सूर्यदेव की मूर्ति बेहद आकर्षक है। इस मंदिर की दीवार पर बहुत ही सुंदर और बारीक नक्काशी की गई है। इस मंदिर में भगवान् विष्णु का ग्यारह सर वाला रूप और कामुक प्रेम दर्शाते प्रेमी जोड़े बेहद आकर्षक हैं। इस मंदिर की बाहर की दीवारों पर भी देवी-देवताओं, स्त्रियों और बहुत सारी पत्थर की नक्काशी बनी हुई है।

Khajuraho Temple
Khajuraho Temple

नंदी मंदिर :

आर्कषित और मनमोहक कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध खजुराहो का

यह प्रसिद्ध मंदिर शिव वाहक नंदी को समर्पित है।

जिसकी लंबाई कुल 2.20 मीटर है, और इसमें 12 खंभे बने हुए हैं।

यह प्रसिद्ध मंदिर विश्वनाथ मंदिर के आकृति के सामान है।

पार्वती मंदिर :

वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल खजुराहो के मंदिर के अंदर

माता पार्वती को समर्पित खूबसूरत मंदिर बना हुआ है। 

इस मंदिर में देवी गंगा भी विराजमान है।

सूर्य मंदिर :

विशेष कलाकृति के लिए मशहूर इस प्रसिद्द खजुराहो के मंदिर के

अंदर भगवान सूर्य को समर्पित चित्रगुप्त का मंदिर बना हुआ है।

जिसमें भगवान सूर्य की एक बेहद आर्कषक करीब 7 फीट ऊंची मूर्ती रखी गई है।

जो कि 7 घोड़े वाले रथ को चलाती हुई प्रतीत होती है।

खजुराहो मंदिर image
खजुराहो मंदिर image

इसके बारेमे भी जानिए – डुमस बीच सूरत का इतिहास

विश्वनाथ मंदिर :

छतरपुर के पास स्थित मध्यप्रदेश राज्य के प्रसिद्ध और भव्य मंदिर के

अंदर भगवान शंकर जी को समर्पित विश्वनाथ जी का मंदिर बना हुआ है।

जो कि यहां बने सर्वश्रेष्ठ मंदिरों में से एक हैं।

कंदरिया महादेव मंदिर :

कंदरिया महादेव मंदिर खजुराहो का सबसे विशाल मंदिर है।

यह मूलतः शिव मंदिर है जिसका निर्माण में 999 सन् ई. में हुआ था।

इस मंदिर का नाम कंदरिया भगवन शिव के एक नाम कंदर्पी से हुआ है।

कंदर्पी से कंडर्पी शब्द बना है जो बाद में कालांतर में कंदरिया में बदल गया।

चतुर्भुज मंदिर :

खजुराहो में स्थित चतुर्भुज मंदिर के दक्षिणी ग्रुप में आता है। इस मंदिर निर्माण 1100 ई. में किया गया था। यह मंदिर एक चैकोर मंच पर स्थित है। यहाँ पर आपको जाने के लिए दस सीढि़याँ चढ़नी पड़ती है। इस मंदिर के प्रवेशद्वार में भगवान् ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चित्रों की नक्काशी दिखाई देती है। इस मंदिर की सबसे खास चीज़ भगवान विष्णु की चार भुजा वाली 9 फीट ऊँची मूर्ति है। इस मंदिर में नरसिंह भगवान और शिव के अर्धनारीश्वर की मूर्ति भी है।

खजुराहो मंदिर का इतिहास मध्यप्रदेश
खजुराहो मंदिर का इतिहास मध्यप्रदेश

जगदम्बा मंदिर :

देवी जगदंबिका मंदिर या जगदंबिका मंदिर, खजुराहो, मध्य प्रदेश में लगभग 25 मंदिरों के समूह में से एक है। खजुराहो एक विश्व धरोहर स्थल है। देवी जगदंबिका मंदिर, उत्तर में एक समूह में, जो कई कामुक नक्काशी के साथ खजुराहो में सबसे अधिक सजाए गए मंदिरों में से एक है। नक्काशी के तीन बैंड मंदिर के शरीर को घेरते हैं। गर्भगृह में देवी की एक विशाल प्रतिमा है।

चौंसठ योगिनी मंदिर :

यह मंदिर 64 योगिनियों को समर्पित सबसे प्राचीन मंदिर है।

जिसका निर्माण ग्रेनाइट के सुंदर पत्थरों से किया गया है।

मंतगेश्वर मंदिर :

मंतगेश्वर मंदिर, खजुराहों का सबसे प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण राजा हर्षवर्मन द्धारा करीब 920 ईसवी में करवाया गया था, इसके बाद इस मंदिर में 2.5 मीटर का शिवलिंग भी मौजूद है, जहां अभी भी पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिरों के अलावा यहां वराह एवं लक्ष्मी का मंदिर भी बना हुआ है। वहीं पूर्वी समूह के मंदिरों में वामन, विष्णु के वामन अवतार को समर्पित वामन, जैन, जावरी मंदिर स्थित हैं, जबकि दक्षिण समूह के मंदिरों में चतुर्भुज, दूल्हादेव आदि प्रसिद्ध हैं। इसके साथ ही यहां लाइट एवं साउंड शो भी होता है।

खजुराहो मंदिर की मूर्तियां
खजुराहो मंदिर की मूर्तियां

इसके बारेमे भी जानिए – साबरमती आश्रम का इतिहास

खजुराहो मंदिर की कुछ रोचक बाते –

  • मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो खजूर के जंगलों के लिए मशहूर था। 
  • जिसके कारन उसका नाम खजुराहो पड़ा था।
  • खजुराहों का मंदिर का प्राचीन नाम ”खर्जुरवाहक” है।
  • यूनेस्कों की लिस्ट में शामिल मंदिर में कलाकृतियों के माध्यम से मध्यकालीन
  • महिलाओं  की जीवनशैली को बेहद शानदार ढंग से प्रर्दशित किया गया है।
  • चंदेला साम्राज्य के विश्व विरासत में कामुकता की अलग-अलग कलाओं और
  • आसनों को बेहद रचनात्मक, सृजनात्मक ढंग से मूर्तिकला के से प्रदर्शित किया गया है। 
  • खजुराहों के इस प्राचीन मंदिर को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया है।
  • जिसमें पूर्वी समूह, पश्चिमी समूह एवं दक्षिणी समूह आदि हैं।
  • प्राचीन समय में खजुराहों में मंदिरों की संख्या करीब 85 थी।
  • लेकिन फिर धीमे-धीमे इन मंदिरों को कुछ शासकों के द्धारा नष्ट कर दिया गया।
  • कुछ मंदिर प्राकृतिक आपदाओं के चलते ध्वस्त हो गए।
  • जिसकी वजह से आज सिर्फ 22 मंदिर ही बचे हैं।
  • मध्यकाल में बने खजुराहो के मंदिर में हिन्दू धर्म के कई देवी-देवताओं की
  • प्रतिमाओं को शानदार ढंग से बनाया गया है।
  • उसमे ब्रम्हा, विष्णु और महेश भगवान की उत्कृष्ट कलाकृतियां बनाई गई हैं।

खजुराहो जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Khajuraho Temple

यह Khajuraho Temple वैसे तो आप यहां किसी भी मौसम में जा सकते हैं, शहर में मानसून का समय खजुराहो जाने के लिए एक सुखद मौसम होता है।  इस मौसम में कुछ दिनों तक मध्यम बारिश होती है। लेकिन अगर आप यहां घुमने का पूरा मजा लेना चाहते हैं तो आपके लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा रहेगा। अक्टूबर से फरवरी के महीने दुनिया भर के लोगों की भीड़ के साथ खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय है। हर साल फरवरी में आयोजित खजुराहो नृत्य महोत्सव आपकी खजुराहो यात्रा की योजना बनाने का सबसे अच्छा समय है।

Khajuraho Temple Madhya Pradesh Map –

khajuraho mandir history in hindi

खजुराहो कैसे पहोचे – How to Reach Khajuraho Temple

लोकप्रिय पर्यटक स्थल होने से खजुराहो पहुंचना काफी आसान है।

खजुराहो का अपना घरेलू हवाई अड्डा है।

जिसे खजुराहो हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन के रूप में जाना जाता है।

जो इसे भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ता है।

आइये जानते हैं विभिन्न माध्यम से खजुराहो कैसे पंहुचा जा सकता है।

खजुराहो हवाई जहाज द्वारा :

दिल्ली से खजुराहो कैसे पहुंचे यह एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है। हालाँकि, यात्रियों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि खजुराहो हवाई अड्डा, जिसे सिविल एरोड्रम खजुराहो भी कहा जाता है, शहर के केंद्र से केवल छह किमी दूर है। दिल्ली से खजुराहो के लिए कम उड़ानें हैं क्योंकि यह छोटा घरेलू हवाई अड्डा भारत के कई शहरों से जुड़ा नहीं है, इसमें दिल्ली और वाराणसी से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे के बाहर खजुराहो के लिए टैक्सी और ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा आप मुंबई, भोपाल और वाराणसी से भी यहां पहुंच सकते हैं।

खजुराहो ट्रेन द्वारा :

Khajuraho Temple का प्रसिद्ध मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर में है। खजुराहो का अपना रेलवे स्टेशन है, हालाँकि खजुराहो रेलवे स्टेशन भारत के कई शहरों से जुड़ा नहीं है। खजुराहो-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस नामक खजुराहो के लिए नई दिल्ली से एक नियमित ट्रेन है, जो खजुराहो पहुंचने के लिए लगभग 10 से 11 घंटे का समय लेती है।

इसके बारेमे भी जानिए – बठिंडा का किला मुबारक की जानकारी

खजुराहो सड़क मार्ग द्वारा :

Khajuraho Temple में मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के साथ अच्छा सड़क संपर्क है। मध्य प्रदेश के आसपास और सतना (116 किमी), महोबा (70 किमी), झांसी (230 किमी), ग्वालियर (280 किमी), भोपाल (375 किमी) और इंदौर (565 किमी) जैसे शहरों से एमपी पर्यटन की कई सीधी बसें उपलब्ध हैं। एनएच 75 खजुराहो को इन सभी प्रमुख स्थलों से जोड़ता है। अगर आप रोड से खजुराहो जाना चाहते हैं तो, यह बिल्कुल भी समस्या वाला नहीं है क्योंकि खजुराहो तक पहुंचना काफी आसान है। 

Khajuraho Temple History in Hindi Video –

Interesting Facts of Khajuraho Temple –

  • दुनिया भर में यह प्रसिद्ध मंदिर की प्रतिमाये मशहूर है। 
  • यह प्रसिद्ध मंदिर शानदार कलाकृतियां और विशाल छतों के लिए मशहूर है।
  • हिन्दू और जैन धर्म के मंदिरों के समूह में धार्मिक मूर्तियां मौजूद है।
  • उसमे परिवार, सुंदरियां और अप्सराओं की प्रतिमाएं भी अंकित हैं।
  • खजुराहों के इस विशाल मंदिर को जटिल कुंडलीदार रचना के आकार में बनाया गया है।
  • प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर मध्य प्रदेश में पहले सिर्फ साधुओं का ही बसेरा रहता था।
  • खजुराहों मंदिरों को मध्यकाल के दौरान सबसे बेहतरीन नमूना माना जाता था।
  • सबसे प्राचीन मंदिर दूर से चंदन की लकड़ी से बना हुआ प्रतीत होता है।
  • लेकिन उसकी बनावट सैंड स्टोन से हुई है।

    खजुराहो मंदिर
    खजुराहो मंदिर

FAQ –

Q : खजुराहो मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

Ans : चंदेला वंश के शासक चंद्रवर्मन ने खजुराहो टेम्पल को बनाया था।

Q : खजुराहो का मंदिर कहा है ?

Ans : मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो का मंदिर स्थित है।

Q : खजुराहो में कितने मंदिर हैं ?

Ans : चंदेला वंश के शासन के समय 85 मंदिर थे मगर अब सिर्फ 25 मंदिर है।

Q : खजुराहो का मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

Ans : यह प्रसिद्ध मंदिर शानदार कलाकृतियां और विशाल छतों के लिए मशहूर है।

Q : खजुराहो मंदिर में पूर्णिमा की रात को क्या होता है?

Ans : अप्सराएं मंदिर की दीवारों से निकलकर नर्तकियों की तरह नाचने लगती है ऐसा लगता है ।

Q : खजुराहो में कौन से मंदिर है?

Ans : रिकॉर्ड के अनुसार 85 थे लेकिन वर्तमान में 25 मन्दिर ही बचे हैं।

Q : खजुराहो का मतलब क्या होता है? 

Ans : यह एक स्थान है जो मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में है।

इसके बारेमे भी जानिए – बेलूर मठ का इतिहास और गुमने की जानकारी

Conclusion –

आपको मेरा Khajuraho Temple History in Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये khajuraho history in hindi और

khajuraho ka mandir से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कहै मेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास खजुराहो टेम्पल हिस्ट्री या

Khajuraho mandir in hindi की कोई जानकारी हैं।

हमारी जानकारी मैं कुछ गलत लगे या दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

Leave a Comment

Your email address will not be published.