Hawa Mahal History in Hindi Jaipur

Hawa Mahal History in Hindi Jaipur | जयपुर के हवा महल का इतिहास

Hawa mahal jaipur- के गुलाबी शहर में बाडी चौपड़ पर स्थित Hawa Mahal राजपूतों की शाही विरासत, वास्तकुला और संस्कृति के अद्भुत मिश्रण का प्रतीक है। हवा महल राज्स्थान के सबसे प्राचीन इमारतों में से एक माना जाता है।

बड़ी ही खूबसूरती के साथ बनाया गया jaipur hawa mahal के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षणों में से एक है। कई झरोखे और खिडकियां होने के कारण हवा महल को “पैलेस ऑफ विंड्स” भी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट जैसी इस पांच मंजिला इमारत में 953 झरोखें हैं, जो मधुमक्खियों के छत्ते से मिलते जुलते हैं, जो राजपूतों की समृद्ध विरासत का अहसास कराते हैं। लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों से बना Hawa Mahal सिटी पैलेस के किनारे बना हुआ है। हवा महल की खास बात यह है कि यह दुनिया में किसी भी नींव के बिना बनी सबसे ऊंची इमारत है।

Hawa Mahal देश-विदेश से आए पयर्टकों के लिए एक शानदार स्थलों में से एक है। बता दें कि महल अब कई भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए भी एक बढिय़ा शूटिंग पॉइंट बन गया है। आज के आर्टिकल में हम आपको यात्रा कराएंगे जयपुर के इसी सुंदर हवा महल की। जिसमें आपको हवा महल का इतिहास, इसकी वास्तुकला, हवा महल में कितनी खिड़किया है। और दिलचस्पों तथ्यों से रूबरू होने का मौका मिलेगा।

Hawa Mahal History in Hindi Jaipur 

  महल का नाम    हवामहल
  निर्मार्ता    महाराजा सवाई प्रताप सिंह
  निर्माण सम्पन्न    सन 1799
  शहर    जयपुर
  राज्य    राजस्थान
  वास्तुकार    लाल चंद उस्ताद
  वास्तुकला शैली    राजस्थानी वास्तुकला एवं मुगल स्थापत्य का मिश्रण
  पथ्थर    लाल एवं गुलाबी बलुआ पत्थर
  हवा महल के झरोखे    953 झरोखें
  हवामहल का  रंग    बदामी रंग 

जयपुर के इस महल को क्यों हवा महल कहते है –

hawa mahal in hindi का अर्थ है हवा का महल। इस महल में 953 छोटे-छोटे झरोखे और खिड़कियां हैं। इन खिड़कियों को महल में ताजी हवा के प्रवेश के लिए बनाया गया था। गर्मी के दिनों में राहत पाने के लिए हवा महल राजपूतों का खास ठिकाना था, क्योंकि झरोखों में से आने वाली ठंडी हवा पूरी इमारत को ठंडा रखती थी। हवा महल का नाम यहां की पांचवी मंजिल से पड़ा है जिसे हवा मंदिर कहा जाता है।

hawa mahal image
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जयपुर के हवा महल का इतिहास –

hawa mahal located राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है hawa mahal built by महाराजा सवाई जय सिंह के पोते सवाई प्रताप सिंह ने सन् 1799 में कराया था। वह राजस्थान के झुंझनू शहर में महाराजा भूपाल सिंह द्वारा निर्मित खेतड़ी महल से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने hawamahal का निर्माण कराया। यह रॉयल सिटी पैलेस के विस्तार के रूप में बनाया गया था।

ललित जाली की खिड़कियों और पर्दे वाली बालकनी से सजे इस खूबसूरत हवा महल के निर्माण का मुख्य उद्देश्य शाही जयपुर की शाही राजपूत महिलाओं को झरोखों में से सड़क पर हो रहे उत्सवों को देखने की अनुमति देना था। उस वक्त महिलाएं पर्दा प्रथा का पालन करती थीं और दैनिक कार्यक्रमों की एक झलक पाने के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आने से बचती थीं।

इन झरोखों की मदद से उनके चेहरे को ठंडी हवा लगती थी और तपती धूप में भी उनका चेहरा एकदम ठंडा रहता था, जो उनकी खूबसूरती का भी एक राज था। वे अपने रिवाजों को बनाए हुए इन झरोखों में से स्वतंत्रता की भावना का आनंद इसी तरह से ले सकती थीं। बता दें कि खासतौर से रानियों के लिए बने इस महल में कुल 953 खिड़कियां और झरोखे हैं। साथ ही ये किसी 5 स्टार होटल से कम नहीं था। जिसमें मेहमानों के लिए नाच गाने के साथ तमाम लग्जरी सुविधाएं थीं।

हवा महल की वास्तुकला –

मंदिर की वास्तु कला -हवा महलहवामहल तैयार हुआ तो इसका बाहरी और भीतरी सुंदरता देखते बनती थी। पांच मंजिला यह इमारत 87 फीट ऊंची है। कभी किसी देवमुकुट की तरह तो चौथी और पांचवी मंजिल के बाद यह जिस तरह सिकुड़ती जाती है उससे पिरामिड जैसे आकार का आभास देती है। हवा महल एक ऐसी अनूठी अद्भुत इमारत है, जिसमें मुगल और राजपूत शैली स्थापित्य है। 15 मीटर ऊंचाई वाले पांच मंजिला पिरामिडनुमा महल के वास्तुकार लाल चंद उस्ताद थे।

5 मंजिला होने के बावजूद आज भी हवा महल सीधा खड़ा है। इमारत का डिजाइन इस्लामिक मुगल वास्तुकला के साथ हिंदू राजपूत वास्तुकला कला का एक उत्कृष्ण मिश्रण को दर्शाता है। बताया जाता है कि महाराज सवाई प्रताप सिंह कृष्ण के बड़े भक्त थे, उनकी भक्ति महल के ढांचे के डिजाइन से ही प्रतीत होती है, जो एकदम भगवान कृष्ण के मुकुट के समान दिखता है। hawa mahal jaipur में 953 नक्काशीदार झरोखे हैं, जिनमें से कुछ तो लकड़ी से बने हैं। इन झरोखों का निर्माण कुछ इस तरह किया गया था कि गर्मियों में ताजी हवा के माध्यम से पूरी इमारत ठंडी रहे।

hawa mahal photo
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हवा महल के बारे में जानकारी  –

jaipur hawa mahal की दीवारों पर बने फूल पत्तियों का काम राजपूत शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। साथ ही पत्थरों पर की गई मुगल शैली की नक्काशी मुगल शिल्प का नायाब उदाहरण हैं। उत्सवों के लिए पहली मंजिल पर शरद मंदिर बना है। जबकि हवा महल की दूसरी मंजिल पर रतन मंदिर बना है। जिसे ग्लास वर्क से सजाया गया है। अन्य तीन मंजिलों पर विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर, हवा मंदिर और गुलाबी शहर जयपुर के विभिन्न रंग देखने को मिलेंगे।

Hava mahala का कोई सामने से दरवाजा नहीं है, बल्कि सिटी पैलेस की ओर से एक शाही दरवाजा हवा महल के प्रवेश द्वार की ओर जाता है। यहां तीन दो मंजिला इमारतें तीन तरफ एक बड़े प्रांगण को घेरे हुए हैं।  जिसके पूर्वी हिस्से में हवा महल स्थित है। आंगन में वर्तमान में एक पुरातत्व संग्रहालय है। महल का आंतरिक भाग भी ऊपर के मंजिल की ओर जाने वाले मार्ग और खंभे से युक्त है।

पैलेस के पहले दो मंजिल में आंगन हैं, बाकी तीन मंजिला की चौड़ाई एक कमरे के जितनी बराबर है। खास बात यह है कि इमारत में कोई सीढ़ियां नहीं है और ऊपर जाने के लिए रैंप का ही इस्तेमाल किया जाता है। 50 साल बाद साल 2006 में पूरे हवा महल का रेनोवेशन किया गया। तब इमारत की कीमत 4568 मिलियन बताई गई थी। जयपुर के एक कार्पोरेट सेक्टर ने हवा महल के रिनोवेशन का जिम्मा उठाया था। लेकिन फिर बाद में भारत के यूनिट ट्रस्ट ने हवा महल की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी ली।

हवा महल कैसे बनाया था 

Hawa Mahal बनाने में लगी निर्माण सामग्री की अलग कहानी है गुड़, मेथी और जूट से बनी हवामहल की दीवारें चूने को पीसकर इसकी लुगदी में बजरी, सुर्खी और गुड़ डाला जाता था। और इसके बाद हल्की छिली हुई जूट और मेथी पीसकर पाउडर के रूप में डाला जाता था और इस मसाले से झरोखे-खिड़की बनाई जाती थी। निर्माण सामग्री में अलग-अलग स्थानों पर शंख, नारियल, गोंद और अण्डे का ऊपरी भाग (शेल) का भी उपयोग हुआ। प्रतापसिंह ने जब महल की भरपूर प्रशंसा सुनी तो लालचन्द उस्ता को बुलाकर जयपुर के निकट एक गांव इनाम में दे दिया। 1779 में बने इस हवामहल को लालचन्द उस्ता ने दो सौ कारीगर लगाकर खड़ा किया।

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Jaipur Hawa Mahal की कुछ रोचक बाते 

हवामहल का निर्माण आमेर के महाराजा “सवाई प्रताप सिंह” ने करवाया था। हवामहल के निर्माण का मकसद महिलाओं के लिए था। महिलाएं महल के झरोखों से उत्सवों का आनन्द ले पाती थी। गर्मियों में राजपूत महिलाएं महल में आती थी। महल विशेषत राजसी स्त्रीयों के लिए बनाया गया था। यहां कठपुतली और शतरंज के खेल हुआ करते थे। हवामहल इमारत 5 मंजिल की बनी हुई है। हवामहल में कुल 953 खिड़कियां है जो हवा के झरोखे की तरह है। इसी कारण से इसे हवामहल कहा जाता है।

हवामहल की पांचों मंजिलो पर मंदिर का निर्माण हो रखा है। पाँचवी मंजिल पर स्थित हवा मंदिर के नाम पर ही इस इमारत का नाम पड़ा है। अन्य मंजिलो पर विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर, रतन मंदिर और पहली मंजिल पर शरद मंदिर बना हुआ है। हवामहल की पहली दो मंजिलो पर आंगन बना हुआ है। आंगन में पानी के फव्वारे भी लगे हुए है जो इसके राजसी वैभव को बढ़ाते है। हवामहल का निर्माण 1799 ईस्वी में आर्किटेक्ट “लाल चंद उस्ताद” ने किया था।

महल पूरा “लाल गुलाबी बलुआ पत्थर” और चुने से निर्मित है। यह महल भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट के अनुरूप बना हुआ है। हवामहल मुग़ल और राजपुताना शैली का मिश्रण है। बाहर से यह एक मधुमक्खी छाते के समान दिखाई प्रतीत होता है। हवामहल एक पांच मंजिला इमारत है जो पिरामिड की शेप में बनी हुई है। hawa mahal height की एक मंजिल की ऊंचाई 15 मीटर है। इस महल की ऊपरी मंजिल की चौड़ाई केवल 1.5 फ़ीट है।

महल की बनावट –

यह हवादार महल की  नींव नही है। बिना नींव का दुनिया का सबसे बड़ा महल  बेहतरीन कारीगरी का नमूना है। हवामहल की दीवारों पर फूल पत्तियों की नक्काशी बनी हुई है। खम्बों और झरोखों पर मुग़ल और राजपूत शैली की झलक मिल जाती है। इसमें प्रवेश लेने के लिए दरवाजा आगे की तरफ ना होकर पीछे की तरफ है। अंदर जाने के लिए सिटी पैलेस से होकर जाना पड़ता है।

हवामहल में ऊपरी मंजिलो पर जाने के लिए कोई भी सीढ़ी नही है। चढ़ाई के लिए ढलान नुमा रैम्प बना हुआ है। हवामहल जयपुर शहर में बड़ी चौपड़ पर स्थित सिटी पैलेस का एक हिस्सा है। जयपुर आते हो तो हवामहल जरूर देखना । hawamahal rajasthan की खिड़कियों पर गुम्बदनुमा बनावट हो रखी है। महल की खिड़कियों से ठंडी हवा आती है। महल का निर्माण लाल-गुलाबी बलुई पत्थर से किया गया था और इसकी रचना में मुग़लों और राजस्थानी शैलियों की वास्तुकला साफ़ झलकती है।

राजस्थान का यह खूबसूरत वास्तुकला का नमूना जयपुर के बीचोंबीच स्थापित है। हवा महल, सर के ताज के आकर में बना हुआ है, जो भगवन श्रीकृष्ण के सर के ताज की तरह प्रतीत होता है। कहा जाता है कि सवाई प्रताप सिंह भगवान श्री कृष्ण के प्रति अत्यंत श्रद्धा भक्ति भाव रखते थे, जिसकी वजह से उनहोंने इस महल को उनके ताज का आकार दिया।

जयपुर का हवा महल
जयपुर का हवा महल

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महल का मतलब और प्रयोग –

हवा महल का मतलब साफ़ है हवा का महल। इस महल में लगभग 953 छोटे-छोटे झरोखे(खिड़कियां) हैं जिन्हें महल में हवा के हमेशा प्रवेश के लिए बनाया गया था। पुराने ज़माने में राजपूतों के परिवार गर्मी के दिनों में राहत के लिए इसी महल में निवास करते थे। यह जयपुर के मुख्य आकर्षणों में से एक है। हवा महल खास तौर पर राजपुत परिवार की महिलाओं के लिए अलग से बनवाया गया था जिसकी खिड़कियों से वे बिना किसी रोक-टोक या हिचकिचाहट के शहर की रोज़मर्रा ज़िन्दगी को देख सकती थीं।

हवा महल की मरम्मत और नवीनीकरण 

 

hawa mahal jaipur की देख-रेख राजस्थान सरकार का पुरातात्विक विभाग करता है। वर्ष 2005 में, करीब 50 वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर महल की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य किया गया, जिसकी अनुमानित लागत 45679 लाख रुपये आई थी। कुछ कॉर्पोरेट घराने भी अब जयपुर के पुरातात्विक स्मारकों के रखरखाव के लिए आगे आ रहे हैं, जिसका एक उदहारण “यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया” है जिसने हवा महल की सार-संभाल का बीड़ा उठाया है।

हवामहल
jaipur to hawa mahal

hawa mahal jaipur की देख-रेख राजस्थान सरकार का पुरातात्विक विभाग करता है। वर्ष 2005 में, करीब 50 वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर महल की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य किया गया, जिसकी अनुमानित लागत 45679 लाख रुपये आई थी। कुछ कॉर्पोरेट घराने भी अब जयपुर के पुरातात्विक स्मारकों के रखरखाव के लिए आगे आ रहे हैं, जिसका एक उदहारण “यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया” है जिसने हवा महल की सार-संभाल का बीड़ा उठाया है।

चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी? में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास दे

हवा महल गुमने जाने का सबसे अच्छा समय

hawa mahal timings सर्दियों के मौसम में आप जयपुर घूमने जा सकते हैं। नवंबर की शुरूआत से फरवरी के बीच तक का समय पर्यटकों का पीक सीजन होता है। सुहावने मौसम के साथ आप यहां एक नहीं बल्कि कई प्राचीन इमारतों की यात्रा सुकून से कर पाएंगे। हवा महल को देखने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक है। हालांकि इस इमारत को निहारने का सबसे सही समय सुबह का है जब सूर्य की सुनहरी किरणें इस शाही इमारत पर पड़ती हैं। ये नजारा हवा महल को और भी सुरूचिपूर्ण और भव्य रूप देता है। हवा महल म्यूजियम शुक्रवार को बंद रहता है, इसलिए बेहतर है कि हवा महल को अन्य दिनों में देखने जाएं।

जयपुर के हवा महल का इतिहास
जयपुर के हवा महल का इतिहास

Hawa Mahal टिकट प्राइस 

हवा mahal jaipur की एंट्री फीस भारतीयों के लिए 50 रूपए और विदेशियों के लिए 200 रूपए है। यहां आप कंपोजिट टिकट भी खरीद सकते हैं, जो दो दिनों के लिए वैलिड रहेगी। इस टिकट की कीमत भारतीयों के लिए 300 रूपए और विदेशियों के लिए 1000 रूपए रखी गई है। इस कंपोजिट टिकट की मदद से आप दो दिन तक हवा महल और इसके आसपास मौजूद दर्शनीय स्थल घूम सकते हैं।

अगर आप हवा महल के अंदर की तस्वीरों को क्लिक करने के लिए कैमरा साथ ले जाना चाहते हैं तो आपको एंट्री फीस के अलावा 10 रूपए अलग से चार्ज देना होगा जो विदेशियों के लिए 30 रूपए है। hawa mahal jaipur के बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए लोकल गाइड उपलब्ध होते हैं, लेकिन इनसे चार्ज पहले तय कर लें। बता दें कि हवा महल को घूमने के लिए एक या दो घंटे का समय ही दिया जाता है।

हवा महल की जानकारी
हवा महल की जानकारी

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Hawa Mahal की यात्रा के दौरान किस बात का ध्यान रखे 

  • हवा महल को शांतिपूर्ण और बिना किसी भीड़-भाड़ के घूमना चाहते हैं। 
  • तो सुबह जल्दी चले जाएं क्योकि उस समय भीड़ नहीं होती है ।
  • अगर दोपहर बाद hawa mahal jaipur पहुंचेंगे तो आपको भीड़ मिल सकती है।
  • तब ज्यादा देर हवा महल को रूककर देखने का मौका भी नहीं मिलता।
  • इसलिए बेहतर है सुबह जल्दी हवा महल देखने पहुंचें।
  • हवा महल में सीढिय़ां नहीं है, ऊपर की मंजिलों पर पहुंचने लिए चढ़ान है।
  • आरामदायक फुटवियर ही पहनें।
  • हवा महल जाते वक्त अपने साथ पानी की बोतल लेकर जरूर जाएं।
  • यहां दीवारों बहुत छोटी हैं, इसलिए सावधानी बरतें और सभी नियमों का पालन करें।
  • हवा महल के आसपास आप सिटी पैलेस, जंतर-मंतर,
  • रामनिवास गार्डन, चांदपोल और गोविंद जी मंदिर देख सकते हैं।

Hawa Mahal Palace Jaipur Map –

hawa mahal in jaipur कैसे पहुंचे 

जयपुर शहर के दक्षिण में स्थित हवा महल अंतर्राष्ट्रीय पयर्टकों को भी आकर्षित करता है।

महल के संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन कलाकृतियां एक समृद्ध अतीत और सांस्कृतिक विरासत है।

राजपूतों के शानदार जीवनशैली की झलक दिखाई देती है।

ट्रेन से हवा महल तक पहुंचने के लिए पहले आपको जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा।

यहां के लिए ट्रेन हर बड़े और प्रमुख स्टेशनों से मिल जाएगी।

जयपुर स्टेशन से हवा महल तक पहुंचने के लिए आप टैक्सी या कैब की मदद ले सकते हैं।

यहां पहुंचने में आपको 18 मिनट का समय लगेगा।

अगर आप सड़क मार्ग से हवा महल पहुंचना चाह रहे हैं।

तो राजस्थान भारत के सभी प्रुमुख हिस्सों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

भारत के कई प्रमुख शहरों से जयपुर के लिए बसें उपलब्ध हैं।

मुंबई, उदयपुर, दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों से जयपुर के लिए फ्लाइट उपलब्ध हैं।

एयरपोर्ट से हवा महल तक पहुंचने में आपको लगभग 30 मिनट लगेंगे।

जयपुर हवा महल का इतिहास
जयपुर हवा महल का इतिहास

History of Hawa Mahal in Hindi Video

Hawa Mahal Palace Jaipur Interesting Facts –

  • महल के सामने का दृश्य मधुमक्खी के छत्ते की तरह नज़र आता है।
  • ईमारत की खिड़कियों से महल की औरतों को बाहर देखने की अनुमति थी।
  • यह पैलेस के लिए कोई भी सीधा प्रवेश द्वार नहीं है।
  • आपको शहर के मुख्य महल, सिटी महल के किनारे से जाना होगा।
  • हवा महल को सिटी महल के ही एक हिस्से के तौर पर बनवाया गया था।
  • इसलिए इस महल में जाने के लिए बाहर से कोई सीधा प्रवेश द्वार नहीं है।
  • हवा महल 5 मंज़िला ईमारत एव मंज़िलों में जाने के लिए सीढियाँ नही हैं।
  • इन ऊँचे मंज़िलों तक पहुँचने के लिए आपको ढलान रास्तों पर चलना होगा।
  • हवा महल का यह नाम यहाँ के पांचवे मंज़िल से पड़ा, जिसे हवा मंदिर कहते हैं।
  • सुन्दरता और आकर्षक रचना का महल जयपुर शहर के बीच में खड़ा है।
  • आकर्षक शैलियाँ तब की वास्तुकला की अद्भुत प्रतिभा को बखूबी दर्शाती हैं।
हवा महल का इतिहास
हवा महल का इतिहास

FAQ –

Q : जयपुर का हवा महल किसने बनवाया था ?

1799 में हवा महल को महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था। 

Q : हवा महल में कितनी खिड़किया है ?

जयपुर के हवा महल में 953 खिड़कियां और छोटे-छोटे झरोखे हैं।

Q : हवा महल का निर्माण किस वास्तुकार ने करवाया था ?

खूबसूरत हवा महल का निर्माण कार्य लाल चंद उस्ताद ने किया था। 

Q : हवा महल कितनी मंजिला ईमारत है ?

पिरामिड की शेप में बनी एव मधुमक्खी छाते के समान दिखाई देता हवामहल पांच मंजिला है। 

Q : हवा महल कैसे बनाया गया था ?

हवा महल को गुड़, मेथी और जूट में चूने को पीसकरउसकी लुगदी में बजरी,

सुर्खी और गुड़ डालके बाद में हल्की छिली हुई जूट और

मेथी पीसकर पाउडर से झरोखे-खिड़की बनाई जाती थी।

Q : हवा महल की खासियत क्या है?

जयपुर हवा महल पैलेस मे नींव नहीं है। 

Q : हवा महल के अंदर कितनी खिड़कियां है?

रानियों के लिए खास बना यह महल में 953 खिड़किया बनी है। 

Q : हवा महल कहां है ?

Hawa Mahal Rd, Badi Choupad, J.D.A. Market, Pink City, Jaipur, Rajasthan 302002

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Conclusion –

आपको मेरा Hawa Mahal History in Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Hawa mahal kisne banaya और

हवा महल के बारे में विवरण से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कहै मेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास Information about hawa mahal in hindi या

हवा महल की मंजिलों के नाम की कोई जानकारी हैं।

हमारी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

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