Chanderi Fort History In Hindi Madhya Pradesh

Chanderi Fort History In Hindi Madhya Pradesh | चंदेरी का किला मध्यप्रदेश

Chanderi Fort मध्य प्रदेश राज्य के गुना के अशोक नगर जिले के नजदीक उपस्थित है। इन किले। में आज भी राजपूत महाराजा के शौर्य मान सन्मान और राजपूत महा रानियों के जौहर की गाथा गाती हुआ स्थित है। 

चंदेरी किला (chanderi ka kila) बेतवा नदी के दक्षिण पश्चिम में पहाड़ी पर ईसागढ़ से 45 मुंगौली से 38 शिवपुरी से 127 और ललितपुर से 37 किमी की दूरी पर उपस्थित है। आज हम इस लेख में चंदेरी के इतिहास में बहोत प्रसिद्ध चंदेरी की लड़ाई ईस 1528 को मुग़ल सम्राट बाबर और राजपूतों महाराजाओ के बिच हुआ था। इन वक्त यह मेदनीराय raja ka kila के कब्जे में था इन पर बहोत वक़्त से बादशाह बाबर की नजर पड़ी हुई थी। अगर आप भी चंदेरी किला के बारे में जानना चाहते है तो हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा।

चंदेरी का इतिहास (Chanderi ka itihaas) महाभारत से मिलता है। क्योकि शिशुपाल महाभारत काल का राजा हुआ करता था। यह किला बुंदेला राजपूतों द्वारा बनावाया गया। यह किला चंदेरी चंदेरी का प्रमुख आकर्षण है। किले के मुख्य द्वार को खूनी दरवाजे के नाम से जाना जाता है। यह महल को महमूद खिलजी ने बनवाया था। चार हिस्सों में बंटे इस महल का निर्माण 1445 ईस्वी में किया गया था। 

Table of Contents

Chanderi Fort History In Hindi –

  किले का नाम   चंदेरी किला
  स्थल   राजघाट बांध के क्षेत में स्थित 
  राज्य   मध्यप्रदेश 
  शहर   चंदेरी नगर
  निर्माणकाल   11 वीं सदी 
  चंदेरी का किला किसने बनवाया था    कीर्तिपाल महाराज
  किले के द्वार   तीन द्वार
  द्वारो के नाम   लोहिया द्वार ,हवा पौड़ी द्वार ,खड़ी गेट 
  किला कितने साल पानी में रहा    36 साल 

चंदेरी का किला मध्यप्रदेश –

Chanderi Madhya Pradesh
Chanderi Madhya Pradesh

Chanderi history in hindi देखे तो खानवा युद्ध की लड़ाई के बाद बाबर भी चंदेरी कीले की और चढाई करने की सौच.रखने लगा था । मानाजाता है की यह किला। बाबर के लिए बहोत महत्व पूर्ण था। उसी लिए इसने चंदेरी किले के महाराजा के पास किला माँगा था उसके बदले में बाबर ने जीते हुए दूसरे किलों में से किसी और किले को दे ने की भी शर्त रखी थी। 

लेकिन chanderi fort देने के महाराजा नहीं राजी हुआ तभी बादशाह बाबर ने किले को लड़ाई से जीत लेने की धमकी देदी बाबर के दिए असंख्य प्रस्तावों पश्यात भी मेदनीराय राजा ने देने के लिए राज़ी नहीं हुए। खानवा युद्ध में बाबर और उनके सेनिको का सामना कर चुका raja medini rai और उसकी सेना ने मुगलों बादशाह की पराधीनता स्वीकार नहीं कि थी। मुघलो के प्रस्तावों को अस्वीकार कर मेदनीराय ने बादशाह बाबर से लड़ाई करने का मन बनालिया था।

chanderi kila के तीन प्रवेशद्वार बनवाये गए हैं।

पहले और ऊपरी द्वार को हवापुर द्वार कहा जाता है नीचले द्वार को खूनी द्वार कहा जाता है।

चंदेरी दुर्ग के दक्षिण और पूर्व की और एक रोचक द्वार बनवाया गया है। 

जिसे घट्टी कट्टी के नाम से जाता है।

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Chanderi Fort कितने साल पानी में डूबा रहा –

Chanderi mp राजघाट बांध के क्षेत में स्थित है। और वह पानी आजाने के कारण chanderi fort madhya pradesh 36 सालो तक पानी में डूबा रहा। caderi किले में मौजूद किले में बांध का पानी जब कम हुवा था तब पहेली बार यह किला दिखाई दिया था। यह raja ka kila है जिसके मुआवजो की किम्मत से chandari शहर का विकास किया जाता है।

यह किआ 36 सालो तक पानी में दुबे होने के कारण भी इस किले की सुंदरता आज भी वैसा का वैसा आकर्षण का नमूना है। यह chanderi durg उतना सुन्दर है की देश और विदेश के पर्यटक यहाँ भारी संख्या में आते रहते है।

Chanderi Fort के अन्य स्मारक – 

बूढ़ी chanderi puran चन्देरी शहर को बूढ़ी चंदेरी के नाम से प्रसिद्ध है।

9वीं और 10वीं दशक में बनाये गये जैन मंदिर यहाँ महत्वपूर्ण आकर्षण केंद्र हैं।

जिसको देखने लिए सभी साल ज्यादा संख्या में जैन धर्म के भक्त आते जाते रहते हैं।

Chanderi Fort In Hindi
Chanderi Fort In Hindi

चंदेरी किले के मुख्य द्वार  – 

  • लोहिया द्वार :

चंदेरी किले के प्रमुख तीन द्वार है।

इन तीन दरवाजो के अंदर एक मुख्य दरवाजा है।

यह दरवाजे का नाम लोहिया द्वार है।

  •  हवा पौड़ी :

हवा पौड़ी चंदेरी किले का तीसरा और किले का सबसे ऊँचा द्वार है।

  • खड़ी गेट :

chandari किले के दक्षिण -पश्चिमी विभाग में एक और तीसरा द्वार है।

इसे खड़ी गेट के नाम से पहचाना जाता है।

खड़ी गेट की लम्बाई 59 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर और ऊंचाई 26.6 मीटर है।

चंदेरी किले का पुरातात्विक संग्रहालय –

chandari किले में स्थित पुरातात्विक संग्रहालय की बनावट के संस्कृति और इतिहास को हमेशा के लिए जिन्दा रखने के लिए करवाया गया था। उस संग्रहालय के दरवाजे आम जनता के लिए 3 अप्रैल,1999 के दिन खोले गए है। इन संग्रहालय में देखे जाने वाले स्थापत्य स्मारक एव देवो की मूर्तियाँ चंदेरी और इसके नजदीकी स्थानों से पाए गए हैं और स्थानीय लोगों के द्वारा लाये गए चीज़ो एव मूर्तियों से एकत्रित संग्रह किये गए हैं।

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Chanderi Fort के महल –

चंदेरी किले के स्मारको में हवा महल और नौ खंडा महल मौजूद है।

कोशक महल :

कोशक महल को ई 1445. में मालवा राज्य के महमूद खिलजी ने निर्माण करवाया था। इस महल चार सह भागो में विभाजित हुआ है। माना जाता है के सुल्तान उस महल को सात भागो में निर्माण करवाना चाहते थे, परन्तु सिर्फ तीन भाग ही बनवा सके थे । महल के हर भाग में खिड़कियाँ छत और बालकनी पर की बनवाई गई बेनुम और लाजवाब नक्काशियाँ बनाई गई हैं। 

ईसागढ़ :

चन्देरी किले से तक़रीबन 45 किमी दूरी पर ईसागढ़ के कडवाया गांव में कई सारे खूबसूरत मंदिर और मस्जिद बने हुए हैं। उन मंदिरों मेंसे एक मंदिर दसवीं दशक में कच्चापगहटा शैली द्वारा निर्माण करवाया गया है। मंदिर के अंदर का अंतराल गर्भगृह और मंडप सबसे ज्यादा आकर्शित करता है। चंदल मठ इसी जगज के अन्य बहोतप्रिय प्रसिद्ध और पुरातन और प्राचीन मंदिर है। इन गांव में एक और क्षतिग्रस्त बौद्ध मठ देख ने को मिलता है।

Chanderi History In Hindi
Chanderi History In Hindi

परमेश्वर ताल :

खूबसूरत और नयनरम्य ताल को बुन्देला राजपूत राजाओं द्वारा निर्मित्त करवाया गया था।

ताल के नजदीक ही एक दूसरा मंदिर निर्माण हुआ है।

राजपूत महाराजाओं के तीन और स्माक भी इस जगह पर देखने को मिलते हैं।

चंदेरी नगर के पश्चिम उत्तर में तक़रीबन आधा किमि नजदीक ही यह ताल उपस्थित है। 

शहजादी का रोजा :

इस निर्माणमे मुघलो की जो सहजादिया थी उनकी कुछ यादगिरीया संग्रहित की हुई हे जिसमे किसी की पुरी जानकारी नही मिलती हे क लेकिन उसके साशकी राजकुमारिया की गाथाये की याद दिलाती है ये स्मारक अनजान राजकुमारियों को समर्पित किया हुआ कहकया जाता है। स्मारक के अंदरि भाग में रोचक सजावट बनाई गई है। स्मारक की बनावट ज्योमिती से प्रभावित की गई है।

चंदेरी का किला मध्यप्रदेश
चंदेरी का किला मध्यप्रदेश

जामा मस्जिद :

चंदेरी गॉव की जामा मस्जिद मध्य प्रदेश राज्य की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक मानी जाती है। वह मस्ज़द बहोत ही सुंदर Chanderi madhya pradesh स्मारकों मै से इक बताई जाती है। वह मस्जिद के वीथिका और गुम्बद बहोत अद्भुत अतिसुंदर हैं। जो मुसलमान संप्रदाय के लोगो के आस्था का विषय रहा करता था

देवगढ़ किला :

chandariसे तक़रीबन 71 किलोमीटर की दूर पर दक्षिण-पूर्व में देवगढ़ किला निर्मित है। किले के अंदर 9वीं एव 10वीं दशक में बनवाये गए जैन मंदिरों का बड़ा समूह स्थित है। जिसमें प्राचीन स्थापत्य काल की कई मूर्तियाँ दिखाई देतीहै देव गढ़ किले के नजदीक ही लगभग 5वीं शताब्दी का एक भगवान विष्णु दशावतार का मंदिर भी स्थित है, जो मंदिर अपनी अतिसुंदर मूर्तिया और नयनरम्य कलाकारिगरी जो की पुरे मंदिर को सुशोभित करती है। ऐसे नक्काशीदार स्तंभों की वजह से सु प्रसिद्ध जाना जाता है।

चंदेरी का किला
चंदेरी का किला

बत्तीसी बावड़ी जो की यहाँ का स्वर्ग माना जाता है –

सटकोण और गोल, चौकोर बावड़ियों से लदे इनहीं शहर में वास्तुकला जो अफगानी वास्तु कला का उपयोग किया हुआ है और चम् चामती निशाने पर चार मंजिल के घाटों से सजी ये बावड़ी मौजूद है। उसकी अति सुंदर सीढ़ियों पर, बीच में फैले हुए स्वागत दरवाजो ने इसे अति भव्य रूप मै निर्मित करदिया है।

किले में 60-60 फीटमीटर लंबी-चौड़ी वह बावड़ी आजतक भी नयनारम्य है जो देख ने वालो के दिलो को छूकर चलीजाति है। इन्ही जगह पर फारसी भाषा में लिखा है जिस लिखे का अर्थ जोभी। इन्सान यहाँ आकर विश्राम करेगा उन्हें इस जगह पर स्वर्ग की एक अनुभूति मिलेंगी जोकी स्वर्ग भी इन जगज की तरह है। 

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थूबोनजी और राक कट –

चंदेरी नगर के पश्चिम भाग में तक़रीबन 10 किमी के घेरे में प्राकृतिक नदी के किनारे जंगल के पास हीमें एक तपोवन हुआ करता था। समयातर में इसी जगह को थूबोनजी कहलाने लगा। इन्ही पर 25 जैन मंदिरों जिनके ऊँचे शिखर आकाश की भी शोभा को बढावा देते रहते हैं जो जैन संप्रदाय के लोगो की शान माना जाता था।

Chanderi Fort Photos
Chanderi Fort Photos

चंदेरी का युद्ध – 

यह चंदेरी किले पर ई.स 1528 में मुगलो और राजपूतो के बिच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में एक तरफ बाबर की सेना थी और दूसरी तरफ राजपूत राजा मेदनीराय की सेना थी। खानवा के युद्ध राणा सांगा घायल होकर युद्ध के मैदान मेसे भागे इसमें कई इनके सहायक थे। इनमेसे एक राजपूत राजा मेदनीराय था। और वह लौटकर अपने किले में वापस चले आये।

बाबर ने देखा की चंदेरी फोर्ट में राजपूतो की शक्ति पूरी तरह से नस्ट नहीं हुई है तो बाबर ने चंदेरी के राजा मेदनी राय और अन्य राजपूत विरो के खिलाफ लड़ने लगा। यह युद्ध में राजपूतो की सेना का नेतृत्व raja medini rai ने संभाला था। मेदनीराय मालवा का शासक था। चंदेरी के युद्ध के दौरान बाबर की सेना लड़ते हुवे किले के अंदर पहुंचे तो उनके हाथो में कुछ नहीं लगा। तब किले की रानियों ने और दसियो ने जौहर कर लिया था। यह जौहर मध्यकालिन इतिहास में चंदेरी का जौहर सबसे भयानक और विशाल माना जाता है।

इस तरह बाबर की सेना किले के अंदर गई तब उनके हाथ कुछभी नहीं लगा। राजपूतो का पराक्रम और राजपूत क्षत्राणियों के जौहर से बौखलाया और खुदके लिए यह किला महत्व का मानता था परन्तु इसने यह किले को पूरी तरह से खंडित कर दिया। और यह किले का इस्तेमाल नहीं किया। यह चंदेरी किले युद्ध राजपूतो की हार हुई। बादमे राजा मेदनीराय ने बाबर से संधि कर ली और उनकी दो पुत्रीयो का विवाह बाबर के दो पुत्रो कामरान और हुमायु से करवा दिया।

Chanderi Fort का महाभारत का सम्बंध – 

चन्देर नगर ऐतिहासिक नगर का संबध महाभारत के साथ भी मिलता है ऐसा इतिहासकारो का मानना हैं। 11वीं दशक में शहर एक महत्व पूर्ण सैन्य का केंद्र था और मुख्या व्यापारिक रास्ता भी यहीं से मिलकर गुजरते थे। भगवान श्री कृष्ण के बुआ के बेटे [शीशुपाल]ने चंदेरी फैब्रिक की खोज शिशुपालने की थी। चंदेरी किला मुग़ल बादशाह बाबर के लिए काफी महत्वपुर्ण था। इसलिए बाबर ने मेदिनीराय से यह किला माँगा था ।

उसी के बदले में बाबर ने जीते किलों में से कोई भी किला महाराजा को देदेने की गुजारिश भी की लेकन राजा ने Chanderi Fort नहीं दिया असल में चंदेरी नगर के पास में ही 230 फ़ीट मीटर की ऊंचाई पर चंदेरी का दुर्ग बना हुआ है । उपस्थान बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर निर्मित होने की वजह से महत्वपूर्ण रहा करता था। raja ka kila आस – पास के पहाड़ो से बिच घेरा हुआ था। वजह से ये बहोत सुरक्षित माना गया था। बादशाहज के ऑफरों को मना करके मेदनी महाराज ने बादशाह से लड़ाई करना का फैसला कर दिया

गुस्से में लाल बादशाह बाबर ने चंदेरी को घेर कर लड़ाई का फरमान किया मोघलसैन्य में भारी हथियार और हाथी बड़ी तोपें थी जिनको साथ में लेकर पहाड़ौ के पार जाना बहोत मुश्किल था और पहाड़ से नीचे उतरते ही चंदेरी महाराजा के सैन्य का त्वरित सामना हो जाता था।

Chanderi Fort
Chanderi Fort

मुग़ल बादशाह बाबर का आक्रमण – 

बाबर ने एक ही रात्रि में अपने सैन्य को पहाड को काट कर दरार बना दे ने को कहा रात में पहाड़ी को नीचे से उपर तक काट कर एक दरार बना डाली जिसमें से बादशाह ने हाथी तोपें और पूरी सेना किले के बीचो बीच पहुँच गयी। महाराजा मेदनीराय ने सवेरे किले के सामने सेना को देखा तो पागल सा रह गया। फिरभी राजपूत राजा ने बिना डरते अपने सैनिको के साथ मोघल बादशाह बाबर की विशाल सैन्य का सामन किया बोखलाए मोघल बादशाह बाबर ने चन्देर किले पर सभी ओर से जोर शोर का हमला बोल दिया कि राजपुतानियों ने अपनी आन बान और शान बाचने के लिए जौहर करना पड़ा था

और राजपूत सैनिक केसरिया पहन युद्ध में टूट पड़े फिरभी वीरो की बी भाती हिमत पूर्वक लड़कर सभी के सभी वीरगति प्राप्त हु फिर चन्देर किले पर मुग़ल बादशाह बाबर का अधिकार हो गया। प्राचीन इतिहास में चंदेरी किले का रानियों का जौहर आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा जौहर बतलाया जाता है। मोघल बादशाह बाबर की इस विजय के प्रभाव बहोत खराब हुए कई राजपूत महाराजाओने बादशाह के सामने हथियार निचे रख दिए मोघल बादशाह बाबर का ध्वज उतरी भारत के बड़े हिस्सो में लहराने लगा था

Chanderi Fort से सम्बंधित रोचक बाते – 

यह चंदेरी शहर का इतिहास करीबन 11 वी सदी से मिलता है। चंदेरी शहर मद्य भारत के व्यापार रास्तो को बहुत प्रभावित करता था। और मालवा ,गुजरात ,मेवाड़ ,मध्य भारत और दक्षिण के प्राचीन में बंदरगाहो बहुत अच्छी तरह से शहर से सम्बंध से जुड़ा हुवा था। चंदेरी शहर में मुगलो , बुंदेलों ,मालवा ,सुल्तानों और सिंधीयो और भी अनेक कई राजाओ और कई राजवंशो ने यह शहर पर उनका शासन किया था।

चंदेरी शहर को माना जाता है की आर्थिक और सांस्कृतिक का एक समृद्ध और मुख्य केंद्र माना जाता है। चंदेरी शहर खूबसूरत और आकर्षक जगह है। क्योकि वहा पर आकर्षित पहाड़िया , आकर्षित तालाब और झीलो , और हरियाली से पूरा शहर घिरा हुवा है।

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चंदेरी शहर का बाजार  –

नगर चंदेरी में बनाई जाने वाली साडिया सिल्क और कॉटन में सुन्दर साड़ियों को बॉर्डर लगाया जाता है। चंदेरी शहर प्राचीन और chanderi puran खंडहरों और प्रसिद्ध जैन मंदिरो की संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। चंदेरी शहर परवन जैन कम्युनिटी का एक महत्व पूर्ण कार्य का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

यहाँ चंदेरी शहर में प्राचीन स्मारकों की बात की जाय तो Chanderi mein करीबन 375 प्राचीन इमारते अभीभी मौजूद है। चंदेरी का युद्ध 6 मई ई.स 1529 में राजपूतो और मुगलो के बिच चंदेरी शहर हुवा था। इस युद्ध को Chanderi ka yudh के नाम से जाना जाता है। जिस चंदेरी का युद्ध हुवा था तब चंदेरी का राजा राजपूत शासक मेदनीराय का यह चंदेरी शहर पर शासन हुवा था।

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चंदेरी का किला

चंदेरी शहर के आस- पास के पर्यटक स्थल – 

पर्यटकों के लिए चंदेरी शहर घूमने वाली जगहों से भरा पड़ा हैं।

यदि आप चंदेरी शहर घूमने आएं है तो इ प्रमुख जगहों पर घूमने जरूर जाए

जिनकी जानकारी हम आपको नीचे देने जा रहे हैं।

  • भीमसेन गुफा
  • चंदेरी का किला
  • शहजादी का रोजा
  • खंडगिरि मंदिर
  • जामा मस्जिद
  • chanderi badal mahal चंदेरी
  • कौशक महाल
  • श्री जगेश्वरी मंदिर
  • रानी महल
  • पुरातत्व संग्रहालय
  • राजघाट डैम
  • श्री चौबीसी जैन मंदिर
  • जौहर स्मारक
  • खुनी दरवाजा
  • रामनगर पैलेस
  • कटि घटि गेटवे

चंदेरी में क्या-क्या कर सकते है – 

Chanderi in hindi बताये तो भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख पर्यटन स्थल हैं और यहां आने वाले पर्यटकों को चंदेरी में देखने वाली कई जगह और चंदेरी में करने के लिए बहुत कुछ मिल जायेगा तो आइए हम आपको चंदेरी की कुछ ओर खास बातों से रूबरू कराते हैं। चंदेरी शहर के सुन्दर और खूबसूरत प्राचीन इतिहास को जानने में दिलचस्पी हैं तो आपको चंदेरी शहर की आकर्षित और लौको का प्रिय स्थलों में मौजूद ईमारत में

बाबर की मस्जिद, सिंगपुर महल, जागेश्वरी मंदिर, खुनी दरवाजा, बादल महल, कटिघाटी गेट, परमेश्वर टैंक, शहजादी का रौजा आदि प्रसिद्ध और बहोत आकर्षक इमारते चंदेरी शहर में दिखाई देता है। चंदेरी शहर में प्राचीन और प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने में पहाड़िया , झीलों और जंगलों देखने को ज्यादा मिलते है यहाँ सुन्दर झीले ,पहाड़िया और प्राचीन ईमारतो देखने का और गुमने का पूरा आनंद ले सकते है।

यदि आप चंदेरी की यात्रा करे तो यहाँ पर रेशम और कपास के इस्तेमाल से यहाँ के प्रसिद्ध हाथो से साडिया बनाई जाती है। यह साडिया बनते वक्त हथकरघा कारखानो का जिक्र हुवा है आप यह सुन्दर और आकर्षित हस्त कला का नमूना देखना है तो आप चंदेरी की यात्रा के समय में देख सकते है।

Chanderi Fort
Chanderi Fort

Chanderi Fort के आकर्षक स्मारक –

यहाँ Chanderi Fort के कई गुमने के आकर्षक स्मारको में जैन मंदिर का जिक्र किया किया गया है। क्योकि चंदेरी शहर में आनेवाले यात्रिको के लिये यह स्थल बहोत ही प्रसिद्ध और खास स्थल है। यह चंदेरी शहर में जैन मंदिरोमे श्री चोबीस जैन मंदिर ,श्री खंडगिरि जैन मंदिर और श्री थोबोनजी जैन मंदिर जैसे कई मंदिर प्राचीन और आकर्षित मंदिरो का निर्माण करवाया गया था

चंदेरी में जैन धर्म से जुड़े हुवे कुछ मुख्य स्थल है जैसे की बिथला, भामों, गुरिलगिरी, आमांचर, खंडगिरि, थुवणजी और भियादंत यह सुन्दर और आकर्षित प्राचीन स्थलों पर भी आप गुमने जा सकते है। चंदेरी शहर में यात्रिको के लिए यहाँ खाने में बहोत स्वादिस्ट उत्तर भारतीय ,दक्षिण भारतीय ,पंजाबी और चाइनीज जैसे स्वादिस्ट भोजन खाने का अवसर पा सकते है।

इस खाने के अलावा आपको भी मावा-बाटी, खोपरापाक, कबाब, भुट्टे के कीस और मालपुआ जैसे कई अन्य स्वादिस्ट व्यंजन आपको कहने के लिए मिल सकते है। चंदेरी शहर के सर्राफ बाजार में आप सुन्दर साडिया और सलवार सूट कई अन्य सुन्दर कपडे और चीजे वहा से खरीद सकते है। चंदेरी शहर में स्थित बना हुवा तिघरा डेम में आप बोटिंग का भी आप आनंद ले सकते है।

चंदेरी में गुमने जाने का सबसे अच्छा समय – 

आपको चंदेरी गुमने जाने की योजना अगर आप बना रहे है।

तो आपको बता दे की चंदेरी मध्यप्रदेश राज्य का आकर्षक सुन्दर स्थान है।

चंदेरी शहर में यात्रा करने के लिए यहाँ यात्रिको की संख्या अक्टूबर से

अप्रैल के महीने में ज्यादा यात्रिक चंदेरी मध्य प्रदेश में आते रहते है।

चंदेरी शहर गुमने जाने का सबसे अच्छा समय यही माना जाता है।

चंदेरी के बाज़ार से क्या ख़रीदे सकते है –

यह चंदेरी शहर में कई शॉपिंग के लिए कई शॉपिंग सेंटर बने हुवे है।

इस चंदेरी शहर शॉपिंग सेंटर में प्रसिद्ध सिल्क साडिया ,ब्रोकेस ,सलवार कुर्तियां

और सूट और मलमल के कई कपडे आप यहाँ के शहर से खरीद सकते है।

शहर में chanderi sarees के कई व्यापारी और डिजाइनर है।

चंदेरी रेशम प्रेमी शहर से कई लोग और व्यापारी यहाँ से

सुन्दर और आकर्षित चीजे chanderi silk saree को यहाँ से ख़रीदा जा सकता है।

Chanderi Fort Images, Stock Photos
Chanderi Fort Images, Stock Photos

चन्देरी के प्रसिद्ध त्यौहार –

chandari शहर को एक प्राचीन नगर के रूप में देश और विदेश में पहचाना जाता है। यह चंदेरी शहर में लगाने वाल चंदेरी महोत्सव कपड़ो का त्यौहार बहोत प्रसिद्ध माना जाता है। यदि कोई सुन्दर और कपडे शौखिन है तो चंदेरी यह मेले में जाके खरीद सकते है। चंदेरी की साडिया देश – विदेश में प्रसिद्ध है। यह त्यौहार हर साल लगता है और चंदेरी की सिल्क फेस्टिवल में से आप अनेक डिजाइन वाले कपडे मिल जायेंगे।

यह चंदेरी मेला महोत्सव साल में एक बार डिजाइनर चंदेरी साडिया ,सूट ,फैंसी साडिया ,दुपट्टे ,और कई सुन्दर कपडे आपको यह त्यौहार में मिल जायेंगे। यह त्यौहार में कपडे के अलावा और भी चीजे मिलती है जैसे की कलमकारी ,रेपित ,बैगर जैसे सुन्दर पेंटिंग आप खरीद सकते है। यह सब चीजे चंदेरी की सुन्दर विशेषताओ और मशहूर चीजों को बया करता है।

चंदेरी का कल्चर –

चंदेरी प्राचीन शहर में कई धर्म के लोग रहते है।

जैसे की हिन्दू, मुस्लिम और आदिवासियों यह शहर में स्थान हैं।

ज्यादातर लोगो की संस्कृति एकदूसरे कई अलग है।

परन्तु कुछ बातो में यहां के लोगो की समानता भी देखने को मिलती हैं।

चंदेरी शहर करीबन 18 वर्ग की कि.मी के विस्तार में फैला हुवा है।

यह क्षेत्र को कई अलग खंडो में विभाजित करदिया गया है।

चंदेरी में बने हुवे स्मारको में बने मंदिर ,मज्जिद ,और हवेलिया और

सुन्दर कलाकृतिया और वास्तुकला देखने को मिलती है।

चंदेरी शहर बेतवा नदी के दक्षिण-पश्चिम विस्तार की पहाड़ियों से गिरा हुआ है।

इसके बारेमे भी पढ़िए – जय विलास पैलेस का इतिहास

चंदेरी शहर में स्थानीय रेस्टोरेंट –

यहाँ चंदेरी शहर के रेस्टोरेंटो में आपको खाने के लिये शाकाहारी और मांसाहारी दोनों का स्वादिस्ट भोजन मिल जायेगा। यहाँ का ख़ास और प्रचलित भोजन दाल -चावल ,सब्जी -रोटी ,बिरयानी ,सेवइयां, गोश्त – रोटी, मटन स्टू, दाल हलवा और जर्दा पुलाव यहाँ की रेस्टोरेंटो का मुख्य और सवादिस्ट भोजन माना जाता है।

चंदेरी शहर में यात्रिको के लिए यहाँ खाने में बहोत स्वादिस्ट उत्तर भारतीय ,दक्षिण भारतीय ,पंजाबी और चाइनीज जैसे स्वादिस्ट भोजन खाने का अवसर पा सकते है। इस खाने के अलावा आपको भी मावा-बाटी, खोपरापाक, कबाब, भुट्टे के कीस और मालपुआ जैसे कई अन्य स्वादिस्ट व्यंजन आपको कहने के लिए मिल सकते है।

Chanderi Photos
Chanderi Photos

Chanderi Fort में स्थानीय रुकने की होटल्स –

यह चंदेरी शहर में आने वाले यात्रिको को रहने के लिये कोई समस्या नहीं रहती। क्योकि इस प्राचीन शहर में कई यात्रिको को रहने के लिए सुन्दर और पूर्ण सुविधाये वाले होटलो का निर्माण करवाया गया है। और यह होटलो में अच्छी और सब सुविधाये उपलब्ध है। चंदेरी में कई होटल और गेस्टहाऊस ,लॉज यात्रिको को रुकने के लिये मिल जायेंगे। आपको निचे चंदेरी के होटल और गेस्टहाउस के नाम दिये गए है।

  • ताना बाना-एमपीटीडीसी
  • होटल श्री कुंज
  • अमराई गेस्ट हाउस
  • पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस
  • सर्किट हाउस के कमरे

Chanderi Fort तक कैसे पहोचे – 

चंदेरी की यात्रा पर जाने के लिए पर्यटक फ्लाइट, ट्रेन

और बस में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।

फ्लाइट से चंदेरी के किले तक कैसे पहोचे :

Chanderi Fort तक पहुँच ने के लिए हवाई मार्ग से भी जा सकते है।

आपको बता दे की चंदेरी से निकटतम हवाई एयरपोर्ट भोपाल का है।

वह करीबन 220 कि.मि दुरी पर मौजूद है।

ग्वालियर का एयरपोर्ट करीबन चंदेरी से 250 कि.मी की दुरी पर मौजूद है।

आप यह दो एयरपोर्ट का इस्तेमाल करके आप हवाई मार्ग

द्वारा आप चंदेरी तक पहुँच सकते है।

चंदेरी के लिए बस या फिर टैक्सी या कैब ध्वारा चंदेरी के किले तक पहुँच सकते है।

Chanderi fort images
Chanderi fort images

ट्रेन मार्ग से चंदेरी के किले तक कैसे पहोचे :

ट्रेन मार्ग से चंदेरी आप जाना चाहते है।

तो आपको बता दे की चंदेरी का सबसे निकटतम रेल्वे जंक्शन ललितपुर में स्थित है।

क्योकि भोपाल रेल मार्ग से चंदेरी करीबन 40 कि.मी की दुरी पर मौजूद है।

रेल्वे स्टेशन से आप टेक्सी या कैब का इस्तेमाल से चंदेरी किले तक पहुँच सकते है।

इसके बारेमे भी पढ़िए – रायगढ़ किले की जानकारी

सड़क मार्ग से Chanderi Fort तक कैसे पहोचे :

Chanderi Fort तक जाने के लिये आप सड़क मार्ग को पसंद करते है।

तो बता दे की चंदेरी गांव भोपाल , खजुराहो, ग्वालियर और दिल्ली जैसे

बड़े शहर से यह सड़क मार्ग प्रमुख शहरों से बहोत अच्छे से जुड़ा हुवा है।

वहा से टेक्सी की मदद से सड़क मार्ग के माध्यम से चंदेरी किले तक पहुँच सकते है।

Chanderi Fort Video –

FAQ –

1. चंदेरी का किला कहां है ?

chanderi fort badlapur और मालवा नगरों की समतल भूमि में चंदेरी किला स्थित है 

2. चंदेरी किले का निर्माण किसने करवाया था ?

11 वीं शतक में कीर्तिपाल महाराज द्वारा निर्माण करवाया चंदेरी किला पहाड़ पर उपस्थित है। 

3. Chanderi Fort कितने साल पानी में डूबा रहा ?

36 सालो तक पानी में डूबा रहा। बांध का पानी जब कम हुआ तब पहेली बार दिखाई दिया था।

4. चन्देरी के प्रसिद्ध त्यौहार कोन से है ?

चंदेरी शहर में लगाने वाल त्यौहार कपड़ो का त्यौहार बहोत प्रसिद्ध माना जाता है।

5. चंदेरी किले का तापमान कितना रहता है ?

चंदेरी शहर में ग्रीष्म ऋतु चंदेरी का तापमान 30° सेन्टीग्रेट से 45° सेन्टीग्रेट तक होता है।

चंदेरी शहर में सर्दियों के समय में चंदेरी का तापमान 5° सेन्टीग्रेट से 20° सेन्टीग्रेट तक रहता हैं।

6 .चंदेरी का राजा कौन था ? 

कीर्तिपाल महाराज चंदेरी किले के राजा थे। 

7 .चंदेरी किस जिले में है ?

मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित चंदेरी एक ऐतिहासिक नगर है। 

8 .चंदेरी क्यों प्रसिद्ध है ?

चंदेरी अपने चंदेरी किले के और उनके चंदेरी महोत्सव के लिए प्रसिद्ध है। 

9 .चंदेरी का युद्ध कब हुआ था ?

ई.स 1528 में मुगलो और राजपूतो के बिच भयंकर युद्ध हुआ।

Conclusion –

आपको मेरा Chanderi Fort History बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये चंदेरी युद्ध में  raja medini rai औरऐतिहासिक स्थल से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी प्राचीन स्मारकों के बारे में जानना है। तो कहै कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास History of chanderi किले की जानकरी या kila kothi chanderi की कोई जानकारी हैं।

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

4 thoughts on “Chanderi Fort History In Hindi Madhya Pradesh | चंदेरी का किला मध्यप्रदेश”

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