History of Aina Mahal in Hindi

History of Aina Mahal in Hindi | आइना महल का इतिहास

aina mahal गुजरात के भुज जिले में स्थित एक महल है, जिसे 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह महल 1750 के आसपास कच्छ राज्य के राव लखपतजी द्वारा बनवाया गया था।

इसे राम सिंह मालम ने चश्मे, दर्पण और टाइल्स के साथ वास्तुकला की स्थानीय और यूरोपीय शैली के मिश्रण के साथ डिजाइन किया था। आइना महल को 1977 में घड़ियों, माल, यांत्रिक खिलौने, चित्रों और चित्रों सहित यूरोपीय संग्रह का प्रदर्शन करते हुए एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।

Aina Mahal का इतिहास – History of Aina Mahal in Hindi

aina mahal bhuj महल की वास्तुकला 18 वर्षों तक यूरोप में रही, जिसने उन्हें यूरोपीय शिल्प और वास्तुकला के कौशल प्राप्त करने में मदद की। महल के पूरे निर्माण में उस अवधि में तीन साल के लगभग राज्य के राजस्व का खर्च आया।

2001 के गुजरात भूकंप में महल क्षतिग्रस्त हो गया था; बाद में महल का एक हिस्सा बहाल कर दिया गया था और अब इसमें आइना महल ट्रस्ट संचालन करता है।

Aina mahal photos
Aina mahal photos

Aina Mahal की वास्तुकला 

bhuj aina mahal एक दो मंजिला हवेली है जिसे पत्थरों से बनाया गया है और इसे पत्थर की नक्काशी और लकड़ी की जाली से बनाया गया है। महल का डिजाइन भारतीय शैली में है और सजावट यूरोपीय है।

महल के फर्श नीले डेल्फ़्टवेयर टाइलों के साथ बने हैं और महल की संगमरमर की दीवारों को दर्पणों से सजाया गया है जिन्हें गिल्ड फ्रेम द्वारा अलग किया गया है।

इन दीवारों को सज्जित अलमारियों से सजाया गया है, जिस पर कांच और मिट्टी के पात्र प्रदर्शित किए गए थे। विनीशियन ग्लास की छाया के साथ कैंडेलबरा और झूमर लटकाकर कमरों को रोशन किया गया था।

खंभे और छत सोने से अलंकृत थे। खंभे और दीवारों के बीच की जगह त्रिकोणीय दर्पण डिब्बों से भरी हुई है। aina mahal kutch की दो मंजिलों में कई हॉल या दरबार कक्ष शामिल हैं, जिनका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया था। हॉल का विवरण नीचे दिया गया है।

आइना महल का इतिहास
आइना महल का इतिहास

Aina Mahal की पहेली मंजिल 

दो मंजिला इस शीश महल में पहली मंजिल पर हॉल ऑफ़ मिरर्स, ऑडियंस हॉल और प्लेज़र हॉल आये हुवे है। पहली मंजिल में प्रवेशद्वार के पास एक 49 फ़ीट लंबी और 8.7 इंच चौड़ी पेंटिंग है जो महाराजा राव प्रागमलजी द्वितीय की है।

पेंटिंग में 1876 साल लिखी हुई है और इस पेंटिंग के चित्रकार वधा जुमा इब्राहिम के हस्ताक्षर भी मौजूद है। यहाँ के संग्रह में अंग्रेजी, फ्रेंच और डच घड़ियाँ, यांत्रिक खिलौने,आकाशीय दूरबीन,कांच से बनी वस्तुएं, चीनी मिटटी से बने बर्तन,हथियार, पालकी, वेशभूषा और फर्नीचर और एक पेंडुलम घडी भी शामिल है।

यहाँ के संग्रहालय में चित्रों का एक बड़ा कलेक्शन भी है जिसमें कुछ चित्र राम सिंह मालम की यूरोप यात्राओं के है।aina mahal gujarat के प्रथम तल में हीरा महल और फुव्वारा महल नाम के दो महल शामिल हैं।

हीरा Aina Mahal या शाही शयनकक्ष महल की पहली मंजिल के केंद्र में स्थित है। इसके पास महाराव लखपतजी का बिस्तर है। हीरा महल या खुशी हॉल, जो हीरा महल के समीप स्थित है, एक कक्ष है जिसमें एक सुख पूल है; पूल क्षेत्र में पहाड़ हैं

पूल में खंभे हैं, जो गलियारे द्वारा पंक्तिबद्ध हैं। इन स्तंभों को चीनी नक्काशी से सजाया गया था। मंच के केंद्र में एक सिंहासन है, जो पानी के छीटों से घिरा हुआ था और ऊपर से फैंक दिया गया था।

फुवारा महल का उपयोग महाराव द्वारा अदालतों और सुखों के लिए किया जाता था। कैंडलबरा लटकाकर कक्ष को रोशन किया गया। महल में चीनी प्रभावों के साथ कुछ ग्लास पेंटिंग हैं; उन्हें व्यापारियों द्वारा 18 वीं शताब्दी में कच्छ लाया गया था।

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Aina Mahal की दूसरी मंजिल 

aina mahal museum की दूसरी मंजिल पर दरबार हॉल,पूर्व कक्ष और मैरिज हॉल बने हुवे है। दूसरी मंजिल पर दरबार आया हुवा है जहाँ पर अदालतें आयोजित की जाती थी। दरबार हॉल में लकड़ी की कुर्सियों के साथ एक चांदी का सिंहासन बना हुवा है।

दूसरे मेल पर एक विवाह हॉल भी आया हुवा है जो महाराव खेंगरजी के लिए बनाया गया था। महल में एक हाथी दांत से सजाया हुवा दरवाजा भी बना हुवा है जो प्रागमलजी प्रथम के शासनकाल के दौरान 1708 में माधो नामक एक बढ़ई द्वारा 400 कोरियों की कीमत पर बनाया गया था।

यहाँ पर शाशक राव प्रागमलजी द्वितीय की चित्र शैली में तैयार की गई कुंडली भी है जिसे दुनिया की सबसे लंबी कुंडली माना जाता है यहाँ के संग्रह में माहि मरातिब नाम की मछली की कलाकृति भी शामिल है

जो एक सुनहरी मछली है जो मुगल सम्राट द्वारा दिल्ली की यात्रा के दौरान महाराव लखपतजी को उपहार में दि गई थी। दूसरी मंजिल में अदालतें आयोजित की गईं। पूर्व कक्ष में, शाहजहाँ, जहाँगीर और दारा शिकोह द्वारा 1617 और 1658 के बीच मुगल फ़ार्म (शाही फरमान) जारी किए गए थे।

वे ज्यादातर राव तमाची को संबोधित करते थेयहाँ पर दी गई इमेज रेफरन्स इमेज है जो सिर्फ आप के नॉलेज के लिए दी हुई है। इस महल में ऐसी ही मछली की कलाकृति रखी हुवी है।

दूसरी मंजिल में दरबार हॉल में दोनों ओर 19 वीं सदी की लकड़ी की कुर्सियों के साथ एक चांदी का सिंहासन है। एक मैरेज हॉल भी है, जिसे 1884 में महाराव खेंगारजी III के लिए बनाया गया था। दीवारों पर विभिन्न हथियारों का प्रदर्शन किया जाता है और हॉल के केंद्र में एक इत्र स्प्रेयर रखा जाता है।

Aina mahal in bhuj
Aina mahal in bhuj

आईना महल का हिरा महल 

हीरा महल (शाही शयनकक्ष) : यह शाही शयन कक्ष आइना महल की पहली मंजिल के केंद्र में हॉल ऑफ मिरर्स के बगल में स्थित है। इस कक्ष में महाराजा राव लखपतजी का बिस्तर है।

स्थानीय लोकवायका के अनुसार लखपतजी एक वर्ष ही अपने बिस्तर का उपयोग करते थे उसके बाद नया बनवालेते थे और पुराने को नीलाम कर दिया करते थे। उनके अंतिम बिस्तर में सुनहरें पैर को एक हिरन और हिरा जड़ित तलवार के साथ रखे गए है।

उनका यह बिस्तर कीमती पत्थरों के साथ करीब सत्ताईस से ज्यादा बड़े दर्पणों से घिरा हुवा है। हिरा महल के बहार की दीवारों को कच्छी रेशम की कढ़ाई वाले कपड़ों से ढका हुवा है। और दरवाजे,खंभे और छतों को दर्पणों से सजाया गया है।

फुवारा महल 

फुवारा महल हिरा महल के पास में ही प्लेज़र हॉल आया हुवा है। जिसमे एक पूल बना हुवा है जिसमे पम्प का उपयोग करके पानी भरा जाता था। महल के स्तम्भों को चीनी शैली की नक्काशी से सजाया गया था। यहाँ केंद्र में एक सिंहासन बना हुवा है जो पानी से घिरा हुवा था।

आइना महल के बारे में
आइना महल के बारे में

आइना महल ट्रस्ट संग्रहालय की मूल्यवान कलाकृतियाँ 

यह आइना महल ट्रस्ट संग्रहालय में कई मूल्यवान कलाकृतियाँ हैं जो कच्छ के शासकों की कहानी का अनुमान लगाती हैं। कई लेखों में, कुछ का विशेष महत्व है।

उदाहरण के लिए, महल के दरवाजों में से एक, हाथी दांत और सोने से सजाया गया था, प्रागमलजी प्रथम के शासनकाल के दौरान 1798 में माधो नाम के एक बढ़ई द्वारा बनाया गया था।

संग्रहालय के संग्रह में माही मरातिब (एक सुनहरी मछली) भी शामिल है, जो मुगल सम्राट द्वारा दिल्ली की यात्रा के दौरान महाराव लखपतजी को उपहार दिया गया था। शासकों की कलात्मक कुंडली हैं, जो प्रत्येक शासक के ज्योतिषियों द्वारा स्थानीय कामनगरी चित्रकला शैली में खींची गई हैं।

Aina mahal images
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आईना महल कैसे पहुंचे 

आईना महल भुज में आया हुवा है इस लिए आप को यह महल देखने के लिए भुज आना होगा। aina mahal bhuj timings तक पहुँचने के लिए शहर के भीतर बसों, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा का लाभ उठाया जा सकता है।

ऐना भुज कैसे पहुंचे उसके बारे में मैंने एक पूरा आर्टिकल अलग से लिखा हुवा है जिसे आप पढ़ के कच्छ घूमने के लिए भुज कैसे पहुंचे उसके बारे में विस्तार से जानकारी पा सकते हो।

भुज में कहाँ पर रुकें

Aina Mahal – भुज में कई निजी होटल्स आयी हुवी है जहाँ पर आप अपनी जरूरियात के मुताबिक एक अच्छा होटल ढूंढ़ सकते हो। अगर आप हेरिटेज होम्स में रहना चाहते हो तो पास के कुछ गांव जैसे की भिरंडियारा, होड़का, गोरेवाली में आप को मिल जायेंगे।

Kutch aina mahal
Kutch aina mahal

Questions of Aina Mahal

  1. आईना महल का निर्माण किसने करवाया था ?

       आईना महल का निर्माण कच्छ राज्य के महाराजा राव लखपतजी द्वारा बनवाया गया था। 

     2. आईना महल का निर्माण किस साल में किया गया था ?

         आईना महल का निर्माण साल 1750 में यानि की 18 शताब्दी में महाराजा लखपतजी ध्वारा करवाया गया था। 

    3 . आईना महल किस वास्तुशैली में निर्माण करवाया गया है ?

       आईना महल की वास्तुकला की बात करे तो राम सिंह मालम ने चश्मे, दर्पण और टाइल्स के साथ वास्तुकला की स्थानीय और यूरोपीय शैली के मिश्रण के साथ डिजाइन किया था।

    4 . आईना महल को कब संग्रहालय में तब्दील कर दिया ?

      आइना महल को साल1977 में घड़ियों, माल, यांत्रिक खिलौने, चित्रों और चित्रों सहित यूरोपीय संग्रह का प्रदर्शन करते हुए एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।

    5. आईना महल में किसकी सुंदर पेंटिंग है ?

       पहली मंजिल में प्रवेशद्वार के पास एक 49 फ़ीट लंबी और 8.7 इंच चौड़ी पेंटिंग है जो महाराजा राव प्रागमलजी द्वितीय की है।

   6. आईना महल में कितनी मंजिले है ?

       आईना महल में करीबन 2 मंजिले हयात है और बाकि के स्मारकों को भूकंप के समय काफी नुकशान हुवा था। 

Aina Mahal Video

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