Ganesh Chaturthi Utsav 2021

Ganesh Chaturthi Utsav 2021 | गणेश चतुर्थी की पूजा और उत्सव का इतिहास

नमस्कार दोस्तों Ganesh Chaturthi Utsav 2021 में आपका स्वागत है। आज हम गणेश चतुर्थी की पूजा और उत्सव का इतिहास बताने वाले है। हमारे हिंदी पंचांग के मुताबिक़ गणेश चतुर्थी का महोत्सव हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यानि काल से 10 दिन एव अनंत चतुर्दशी तक यह उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव के पीछे ऐसा इतिहास है। की यही समय पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यानि गणेश चतुर्थी का पर्व उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाते है।

Ganesh Chaturthi Utsav 2021

भगवान गणेश चतुर्थी में भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करके उनकी विधि विधान से पूजा करते हैं। और विध्नहर्ता भगवान के आशीर्वाद प्राप्त करते है। जैसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म मनाया जाता है। वैसे ही गणेश चतुर्थी के दस दिन गणेश उत्सव में भगवान गणेश का जन्मदिन मनाया जाता है। उस दिनों में स्थापित प्रतिमा का नौ दिनों तक पूजन किया जाता है। और नौ दिन पूरा होने के बाद गानों और बाजों के साथ गणेश प्रतिमा को तालाब या कोई भी जल में विसर्जित किया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2021 का समय

गणेश चतुर्थी की शुरुआत – 10 सितंबर 2021

पूजा मुहूर्त – 11:03 से दोपहर 01:32 बजे तक

गणेश महोत्सव समापन – 19 सितंबर, 2021

प्रतिमा का विसर्जन – 19 सितंबर 2021, रविवार

ganesh chaturthi photos
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गणेश उत्सव का इतिहास

प्राचीन समय से गणेशोत्सव होता आया है। लेकिन पेशवाओं के शासन में उसका महत्व ज्यादा बढ़ा है। ऐसा कहा जाता है की पुणे शहर में कस्बा गणपति की स्थापना हमारे हिन्दू राजा शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई ने की थी। मगर उसके बाद में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणोत्सव को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बना दिया था। 1893 में गणेशोत्सव की सार्वजनिक शुरुआत बाल गंगाधर तिलक ने कि थी। उन्होंने गणेशोत्सव का आयोजन सभी जातियो और धर्मो को एक मंच देने का था। क्योकि सब बैठ कर मिल के कोई विचार कर देश के लिए कुछ कर सके। क्योकि स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए यह बहुत जरुरी था। ऐसे ही शुरू हुआ। गणेश महोत्सव आज के समय में भी बहुत धाम धूम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र के साथ आज आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी गणेशोत्सव मनाते है।

गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि

  • हररोज सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
  • स्नान करने के बाद भगवान गणेश जी की मूर्ति लें।
  • उसके बाद एक कलश में जल भरें, कलश को मुख नए वस्त्र से बांध दें। उसके बाद उस पर गणेश की स्थापना करें।
  • भगवान को दूर्वा, घी, सिंदूर और 21 मोदक चढ़ाएंते हुए हिन्दू विधि विधान से पूजा करें।
  • भगवान की आरती उतार के प्रसाद को बांट दें।
  • दस तक त्योहार में भगवान गणेश की मूर्ति को नौ दिनों के लिए घर पर रखते हैं।
  • उसके अलावा गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करनी होती है।

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गणेश चतुर्थी मुहूर्त

  • गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 11.03 AM से दोपहर 01.33 PM
  • चतुर्थी तिथि की शुरुआत – 10 सितंबर को 12.18 AM से हो जाएगी
  • चतुर्थी तिथि की समाप्ति – रात 09.50
  • उस दिन वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – 09:12 AM से 08:53 PM
  • गणेश विसर्जन- 19 सितंबर 2021, रविवार

चन्द्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र

सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

ganesh chaturthi
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108 Names of Lord Ganesha श्री गणेश के 108 नाम 

  1. Baalganapati – बालगणपति – सबसे प्रिय बालक
  2. Bhalchandra – भालचन्द्र  – जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
  3. Buddhinath – बुद्धिनाथ – बुद्धि के भगवान
  4. Dhumravarna – धूम्रवर्ण – धुंए को उड़ाने वाले
  5. Ekakshar – एकाक्षर – एकल अक्षर
  6. Ekdant – एकदन्त – एक दांत वाले
  7. Gajkarn – गजकर्ण – हाथी की तरह आंखों वाले
  8. Gajaanan – गजानन – हाथी के मुख वाले भगवान
  9. Gajvakra – गजवक्र – हाथी की सूंड वाले
  10. Gajvaktra – गजवक्त्र – हाथी की तरह मुंह है
  11. Ganaadhyaksha – गणाध्यक्ष – सभी जनों के मालिक
  12. Ganapati – गणपति – सभी गणों के मालिक
  13. Gaurisut – गौरीसुत – माता गौरी के बेटे
  14. Lambakarn – लम्बकर्ण – बड़े कान वाले देव
  15. Lambodar – लम्बोदर – बड़े पेट वाले
  16. Mahaabal – महाबल – अत्यधिक बलशाली
  17. Mahaaganapati – महागणपति – देवादिदेव
  18. Maheshwar – महेश्वर – सारे ब्रह्मांड के भगवान
  19. Mangalmurti – मंगलमूर्ति  – सभी शुभ कार्यों के देव
  20. Mushakvaahan – मूषकवाहन – जिनका सारथी मूषक है
  21. Nidishwaram – निदीश्वरम – धन और निधि के दाता
  22. Prathameshwar – प्रथमेश्वर – सब के बीच प्रथम आने वाले
  23. Shoopkarna – शूपकर्ण – बड़े कान वाले देव
  24. Shubham – शुभम – सभी शुभ कार्यों के प्रभु
  25. Siddhidata – सिद्धिदाता – इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
  26. Siddhivinaayak – सिद्दिविनायक – सफलता के स्वामी
  27. Sureshvaram – सुरेश्वरम – देवों के देव।
  28. Vakratund – वक्रतुण्ड – घुमावदार सूंड वाले
  29. Akhurath – अखूरथ – जिसका सारथी मूषक है
  30. Alampat – अलम्पता – अनन्त देव।
  31. Amit – अमित – अतुलनीय प्रभु
  32. Anantchidrupam – अनन्तचिदरुपम – अनंत और व्यक्ति चेतना वाले
  33. Avanish – अवनीश – पूरे विश्व के प्रभु
  34. Avighn – अविघ्न – बाधाएं हरने वाले।
  35. Bheem – भीम – विशाल
  36. Bhupati – भूपति – धरती के मालिक
  37. Bhuvanpati – भुवनपति – देवों के देव।
  38. Buddhipriya – बुद्धिप्रिय – ज्ञान के दाता
  39. Buddhividhata – बुद्धिविधाता – बुद्धि के मालिक
  40. Chaturbhuj – चतुर्भुज – चार भुजाओं वाले
  41. Devadev – देवादेव – सभी भगवान में सर्वोपरि
  42. Devantaknaashkari – देवांतकनाशकारी – बुराइयों और असुरों के विनाशक
  43. Devavrat – देवव्रत – सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
  44. Devendrashik – देवेन्द्राशिक – सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
  45. Dharmik – धार्मिक – दान देने वाले
  46. Doorja – दूर्जा – अपराजित देव
  47. Dwemaatur – द्वैमातुर – दो माताओं वाले
  48. Ekdanshtra – एकदंष्ट्र – एक दांत वाले
  49. Ishaanputra – ईशानपुत्र – भगवान शिव के बेटे
  50. Gadaadhar – गदाधर – जिनका हथियार गदा है
  51. Ganaadhyakshina – गणाध्यक्षिण- सभी पिंडों के नेता
  52. Gunin – गुणिन – सभी गुणों के ज्ञानी
  53. Haridra – हरिद्र – स्वर्ण के रंग वाले
  54. Heramb – हेरम्ब – मां का प्रिय पुत्र
  55. Kapil – कपिल – पीले भूरे रंग वाले
  56. Kaveesh – कवीश – कवियों के स्वामी
  57. Kirti – कीर्ति – यश के स्वामी
  58. Kripakar – कृपाकर – कृपा करने वाले
  59. Krishnapingaksh – कृष्णपिंगाश – पीली भूरी आंख वाले
  60. Kshemankari – क्षेमंकरी – माफी प्रदान करने वाला
  61. Kshipra – क्षिप्रा – आराधना के योग्य
  62. Manomaya – मनोमय – दिल जीतने वाले
  63. Mrityunjay – मृत्युंजय – मौत को हराने वाले
  64. Mudhakaram – मूढ़ाकरम – जिनमें खुशी का वास होता है
  65. Muktidaayi – मुक्तिदायी- शाश्वत आनंद के दाता
  66. Naadpratishthit – नादप्रतिष्ठित – जिन्हें संगीत से प्यार हो
  67. Namastetu – नमस्थेतु – सभी बुराइयों पर विजय प्राप्त करने वाले
  68. Nandan – नन्दन – भगवान शिव के पुत्र
  69. sidharth – सिद्धांथ – सफलता और उपलब्धियों के गुरु
  70. Pitaamber – पीताम्बर – पीले वस्त्र धारण करने वाले
  71. Pramod – प्रमोद – अद्भुत व्यक्तित्व
  72. Rakta – रक्त – लाल रंग के शरीर वाले
  73. Rudrapriya – रुद्रप्रिय – भगवान शिव के चहेते
  74. Sarvadevatmana – सर्वदेवात्मन – सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकर्ता
  75. Sarvasiddhanta – सर्वसिद्धांत – कौशल और बुद्धि के दाता
  76. Sarvaatmana – सर्वात्मन – ब्रह्मांड की रक्षा करने वाले
  77. Omkara – ओमकार – ओम के आकार वाले
  78. Shashivarnam – शशिवर्णम – जिनका रंग चंद्रमा को भाता हो
  79. Shubhagunakaanan – शुभगुणकानन – जो सभी गुणों के गुरु हैं
  80. Shweta – श्वेता – जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध हैं
  81. Siddhipriya – सिद्धिप्रिय – इच्छापूर्ति वाले
  82. Skandapurvaj – स्कन्दपूर्वज – भगवान कार्तिकेय के भाई
  83. Sumukha – सुमुख – शुभ मुख वाले
  84. Swarup – स्वरूप – सौंदर्य के प्रेमी
  85. Tarun – तरुण – जिनकी कोई आयु न हो
  86. Uddanda – उद्दण्ड – शरारती
  87. Umaputra – उमापुत्र – पार्वती के पुत्र
  88. Varganapati – वरगणपति – अवसरों के स्वामी
  89. Varprada – वरप्रद – इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
  90. Varadvinaayak – वरदविनायक – सफलता के स्वामी
  91. Veerganapati – वीरगणपति – वीर प्रभु
  92. Vidyavaaridhi – विद्यावारिधि – बुद्धि के देव
  93. Vighnahar – विघ्नहर – बाधाओं को दूर करने वाले
  94. Vighnahartta – विघ्नहत्र्ता – विघ्न हरने वाले
  95. Vighnavinashan – विघ्नविनाशन – बाधाओं का अंत करने वाले
  96. Vighnaraaj – विघ्नराज – सभी बाधाओं के मालिक
  97. Vighnaraajendra – विघ्नराजेन्द्र – सभी बाधाओं के भगवान
  98. Vighnavinashay – विघ्नविनाशाय – बाधाओं का नाश करने वाले
  99. Vighneshwar – विघ्नेश्वर : बाधाओं के हरने वाले भगवान
  100. Vikat – विकट – अत्यंत विशाल
  101. Vinayak – विनायक – सब के भगवान
  102. Vshvamukh – विश्वमुख – ब्रह्मांड के गुरु
  103. Yagyakaay – विश्वराजा – संसार के स्वामी
  104. Yashaskar – यज्ञकाय – सभी बलि को स्वीकार करने वाले
  105. yasashakar – यशस्कर – प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
  106. Yashaswin – यशस्विन – सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
  107. Yogadhip – योगाधिप – ध्यान के प्रभु
  108. ganesha – गणेश – भगवन 

गणेश चतुर्थी पूजन सामग्री लिस्ट Ganesh Chaturthi

पूजा के लिए लकड़ी की चौकी

गणेश भगवान की प्रतिमा

जनेऊ

लाल कपड़ा

बतासा

पान

धूप

दीपक

पुष्प

भोग का समान

लाल कपड़ा

नारियल

जल का कलश

पंचमेवा

पंचामृत

रोली

गंगाजल

अक्षत्

मौली लाल

चंदन

कलावा

दूर्वा

सुपारी

घी

लौंग

इलाइची

चांदी का वर्क

मोदक

Ganesh Chaturthi में गणेश की पूजा विधि

गणपति को स्थापना के बाद फूल की मदद से जल अर्पित करे। उसके पश्यात रोली, अक्षत और चांदी की वर्क लगाए। इसके बाद लाल रंग का पुष्प, पान में सुपारी, जनेऊ, दूब, इलायची, लौंग और मिठाई रखकर अर्पित कर दें। उसके बाद नारियल और भोग में मोदक अर्पित करें। षोडशोपचार के साथ भगवान का पूजन करें। भगवान गणेश जी को दक्षिणा भी अर्पित कर 21 लड्डूओं का भोग लगाएं।  भोग चढ़ाने के बाद धूप, दीप और अगरबत्‍ती से भगवान की आरती करके मंत्र का जाप करें।

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गणेश जी के जन्म से जुड़ी कथा

प्राचीन ग्रन्थ, पुराण और पौराणिक मान्यताओं में मुताबिक एक समय माता पार्वती स्नान करते थे। तो उन्होंने अपने शरीर की मैल से एक पुतले का निर्माण किया एव उस पुतले में प्राण फूंक दिए। उस बालक को माता पार्वती ने अपने घर के द्वार पाल के रूप में रखा था । उस समय गणेश जी कुछ नहीं जानते थे। और माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए। शिव जी भगवान को भी घर में आने से रोक दिया। महादेव जी ने क्रोध में आकर गणेश जी का मस्तक काट दिया था ।  पार्वती जी ने अपने पुत्र को देखा तो वह बहुत दुखी हो गईं थी। बाद में शिवजी ने उपाय के लिए गणेश जी के धड़ पर हाथी यानी गज का सिर जोड़ दिया था । तब से उनका एक नाम गजानन पड़ा था ।

Ganpati Sthapana Puja Vidhi Video

Interesting Facts Ganesh Chaturthi

  • गणोत्सव को बाल गंगाधर तिलक ने  बड़ा स्वरूप दिया था। 
  • 1893 में पुणे में पहली बार सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाया था।
  • गणेशोत्सव आयोजन के प्रमाण सातवाहन, राष्ट्रकूट और चालुक्य वंश के काल में मिलते हैं।
  • गणेश जी का जन्म भादो माह में चतुर्थी को हुआ था। 
  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। 

FAQ

Q : गणेश चतुर्थी 2021 कब है?

Ans : 10 सितंबर 2021, शुक्रवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा। 

Q : गणेश चतुर्थी किसने और कब शुरू की?

Ans : गणपति उत्सव की शुरुआत 1893 में महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक ने की थी ।

Q : गणेश चतुर्थी क्यों मानते हैं?

Ans : श्री गणेश जी का जन्म गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है।

Q : गणेश स्थापना कब है?

Ans : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश स्थापना होती है। 

Q : गणेश महोत्सव 2021 कब से आरंभ होगा?

Ans : गणेश चतुर्थी की तिथि से ही गणेश महोत्सव का आरंभ माना जाता है। 

Conclusion

आपको मेरा Ganesh Chaturthi Utsav बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये ganesh chaturthi quotes और

ganesh chaturthi muhurat 2021 से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कहै मेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note

आपके पास ganesh chaturthi wishes या ganesh chaturthi invitation card की कोई जानकारी हैं। 

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे / तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद। 

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13 thoughts on “Ganesh Chaturthi Utsav 2021 | गणेश चतुर्थी की पूजा और उत्सव का इतिहास”

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