Char Dham Yatra

Char Dham Yatra History In Hindi | उत्तराखंड चार धाम का इतिहास और जानकारी

भारत के चार धाम देवभूमि उत्तराखंड की प्रसिद्ध यात्रा मई महीने शुरू होने वाली है। आज हम Char dham Yatra 2021 की जानकारी में बद्रीनाथ धाम ,यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम और केदारनाथ धाम शुरू होने और पहुंचने की बाते बताएँगे।

नमस्कार दोस्तों भारत के चार धाम के नाम इतिहास और जानकारी में आपका स्वागत है।  देवभूमि उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2021 मई महीने से शुरू होने जा रही है। Char Dham in india में बहुत ही महत्त्व है। जिसके चलते सबके मन में यह सवाल होते है की चारधाम यात्रा कब से शुरू होगी ? कैसे पहुंचें और किन बातों का रखें ध्यान जैसे सवालों के जवाब के लिए हमने यह आर्टिकल लिखा है। आज हम Char Dham yatra name क्या क्या है, Char Dham yatra package, किन नियमों का करना होगा पालन और Char Dham project की सम्पूर्ण जानकारी बताने वाले है। तो चलिए Char dham places की माहिती बताना शुरू करते है।

Char Dham Yatra 2021 –

भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल मण्डल में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में स्थित है। यह परिपथ के चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री। उसमे बद्रीनाथ धाम हमारे भारत के चार धामों का सबसे उत्तरी धाम माना जाता है। उसमे पहला पड़ाव यमुनोत्री दूसरा पड़ाव तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है। और लास्ट एव आखरी पड़ाव बद्रीनाथधाम है। सभी मंदिरो के अलग अलग महत्व है।

जिसकी जानकारी हम आज के लेख मे देने वाले है। हमारे हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा को बहुत ही पवित्र माना जाता है। लोग अपने जीवन में यात्रा यात्रा को बहुत महत्व देते क्योकि भक्ति भाव ही यह संसार का मुख्य आधार कहा जाता है। Char Dham name list in hindi की बात करे तो उसमे यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सभी को हम विस्तार से बताने वाले है।

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Yamunotri | यमुनोत्री धाम का इतिहास 

हमारे हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व रहा है। जिसमे पहला नाम Yamunotri temple का लिया जाता है। सूर्य देव की पुत्री और धर्मराज यमराज की छोटी बहन माता यमुना का यह मंदिर में मृत्यु के देवता यमराज अपनी छोटी बहन यमुना के साथ विराजमान हैं। मंदिर हिमालय के पश्चिम क्षेत्र में उपस्थित मंदिर को माता यमुनोत्री का मंदिर कहा जाता है। यमुनोत्री मंदिर का निर्माण महाराजा प्रताप शाह जो टिहरी गढ़वाल के राजा हुआ करते थे उन्होंने करवाया था। लेकिन मंदिर का पुन: निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने अपने शासन काल 19वीं सदी में कराया था ।

Yamunotri
Yamunotri

यह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के कालिंद पर्वत पर बनवाया गया है। जिसमे यमुना देवी की काले संगमरमर की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठित की हुई है। यह Yamunotri dham मुख्य रूप से यमुना के लिए समर्पित मंदिर है। Yamunotri to gangotri distance की बात करे तो तक़रीबन 219 किलोमीटर है। हिन्दु धर्म में चार धाम की यात्रा में यह मंदिर का बहुत महत्व है। मान्यता के अनुसार चारों धामों में से एक धाम यमुनोत्री मंदिर भी और चार धाम की यात्रा कर लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यमुना नदी का उद्भव यमुनोत्री मंदिर से ही हुआ है। यहाँ सूर्य कुंड और गौरी कुंड के दो पवित्र कुंड भी मौजूद है। सूर्य कुंड का जल उच्चतम तापमान के लिए प्रसिद्ध है।

Gangotri dham | गंगोत्री धाम का इतिहास 

उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के किनारे चार धामों में से एक गंगोत्री धाम उपस्थित है। उत्तरकाशी से यह धाम 97 किलोमीटर दूर है। जिसके चलते उन्हें गंगा उत्तरी भी कहा जाता है। Gangotri dham ke darshan करने के लिए कई लोग आते है। और Gangotri dham yatra हमारे हिन्दू धर्म के चार धाम की यात्राओं में से एक कही जाती है। Gangotri dham uttarakhand में भी बहुत पवित्र स्थान कहा जाता है। क्योकि Gangotri char dham में शामिल है। यह गंगा नदी का उद्गम स्थान कहा जाता है।

Gangotri dham
Gangotri dham

मगर गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री धाम के गौमुख ग्लेशियर से शुरू होता है। हमारे हिन्दू धर्म में गंगा को गंगोत्री, अलकनंदा और मन्दाकिनी जैसे कई नामो से सम्बोधित किया जाता है। भगीरथ के मंदिर के अलावा गंगा का मंदिर है। और 19 वी सदी में गोरखा शासक अमर सिंह थापा ने पुनः निर्मणा करवाया लेकिन मंदिर का निर्माण जयपुर के राजपूत राजाओं द्वारा करवाया गया था। मंदिर में मां गंगा की भव्य प्रतिमा के साथ जाह्नवी, लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, भागीरथी, सरस्वती तथा आदि शंकराचार्य की मूर्तियाँ भी दिखाई देती है। उसके नजदीक ही भगीरथ शिला के पास विष्णुकुंड, ब्रह्म कुंड और सूर्यकुंड है और वहा श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद अपने पितरों का पिंडदान करते हैं।

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Kedarnath Dham | केदारनाथ धाम का इतिहास

भारत के उत्तराखंड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मन्दिर स्थित है। यह केदारनाथ उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में बना बारह ज्योतिर्लिंग में एक और चार धाम एक और पंच केदार में से भी एक कहा जाता है। यह एक विशाल शिव मंदिर है, जिनकी बनावट विशाल शिलाखंडों को जोड़कर करवाई गई है। भूरे रंग शिलाखंड पर 6 फुट ऊंचे चबूतरे और 80वीं शताब्दी के समय में बनाये गए है। वह मंदिर दिन पहाड़ियों से घिरा एक तरह भरतकुंड, खर्चकुंड और केदारनाथ पहाड़ बना हुआ है। यह मंदिर पांच नदियों का संगम स्थान है। जिसमे मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी नदिया देखने को मिलती थी मगर आज सिर्फ मंदाकिनी ही दिखाई देती  है।

Kedarnath Dham
Kedarnath Dham

यह Kedarnath dham yatra के इतिहास  के बारे में ऐसा कहाजाता है की पांडव वंश के राजा जन्मेजय ने यह मंदिर का निर्माण करवाया था। मगर मंदिर की स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य ने की हुई है। जिसके चलते मंदिर के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही रहा करते है। और पत्थरो से बने कत्य्रुई शैली से बने केदारनाथ मंदिर हमारे हिन्दू धर्म में बारह ज्योर्तिलिंग में से एक माना जाता है। यह मंदिर में भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में पूजा होती है। भगवान शिव का मुख रुद्रनाथ मे, नाभि मदम्देश्वर में, भूजाए तुंगनाथ में , और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए थे। यह चार स्थानों सहित केदारनाथ को “पंचकेदार” के नाम से पहचाना जाता है।

Badrinath Dham | बद्रीनाथ धाम का इतिहास 

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले की अलकनंदा नदी के किनारे बना हुआ एक विष्णु मंदिर है। भगवान बद्रीनारायण से जुड़ा धार्मिक स्थल में दूसरा कोई देवता नहीं मगर भगवान विष्णु खुद ही है। यह मंदिर को छोटा चार धाम और हिन्दुओं के चार धाम में से एक माना जाता है। यह मंदिर बहुत ही पवित्र मंदिर जिसमे वैष्णव के 108 दिव्य देसम में प्रमुख है। यहाँ मुख्य देवता भगवान बद्रीनाथ  में उनकी 3.3 फिट की शालीग्राम की शिला मौजूद है। यह हिन्दुओ की स्वयं-प्रकट मूर्तियों मे से एक कही जाती है। भगवन विष्णु जी यहाँ तपस्या करते थे तब माता लक्ष्मी जी ने अपने पति को छाया देने के लिए पेड़ का रूप लिया था।

Badrinath Dham
Badrinath Dham

यह मंदिर को 16वी सदी के गढ़वाल के राजा ने बद्रीनाथ मंदिर की स्थापना करवा दी थी। तो दूसरी और ऐसा भी कहाजाता है की 8 वी सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने मंदिर का निर्माण करवाया था। आदिगुरु की व्यवस्था से यह मंदिर के पुजारी केरल राज्य से हुआ करते है। बद्रीनाथ धाम का विशाल मंदिर प्रकर्ति की गोद में स्थित है। बद्रीनाथ मंदिर में 15 मुर्तिया स्थापित और एक मीटर ऊँची काले पत्थर की भगवान विष्णु की प्रतिमा दिखाई देती है। यह हमारे हिन्दू धर्म का धरती का वैकुण्ठ के रूप में भी जाना जाता है। Badrinath dham uttarakhand मंदिर में मिश्री, गिरी का गोला, चने की कच्ची दाल और वनतुलसी की माला भी चढ़ाया जाता है।

Char Dham Yatra के नजदीकी पर्यटक स्थल और खूबसूरत मंदिर –

अगर आप चार धाम की यात्रा के लिए उत्तराखंड जाते है तो आपको वहा के बहुत ही करीबी पर्यटक स्थान की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है। जिसमे नारायण मंदिर, तुंगनाथ मंदिर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, मदमहेश्वर मंदिर, भविष्यबद्री मंदिर, नृसिंह मंदिर, बासुदेव मंदिर, जोशीमठ और महाकाली मंदिर कालीमठ मौजूद है। उसके अलावा देवप्रयाग, रूद्रप्रयाग, केदार मार्ग पर और कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग जैसे कई देखने योग्य खूबसूरत मंदिर भी शामिल है। वहा दर्शन करके आप भी पुण्य कमा सकते है।

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Char Dham यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य चीज –

  • यह चारधाम यात्रा करने के लिए गर्म और ऊनी कपड़े साथ रखना बहुत ही जरुरी है।
  • क्योकि चारधाम यात्रा करने के समय यहाँ मौसम हमेशा ठंडा रहता है, ऊंचाई पर ठंड ज्यादा होने से बचने के लिए आवश्यक है।
  • यात्रा के वक़्त आपको अपनी जरूरी दवाइयां साथ रखने से बहुत ही लाभ मिलता है।
  • कोई भी परेशानी जैसे की सिरदर्द, पेट दर्द, उल्टी, लिए बुखार की दवा, क्रीम और पेनरिलीफ स्प्रे साथ रखनी चहिये।
  • अपने साथ एक टॉर्च रखने से बहुत ही अच्छा रहता है।
  • चारधाम की यात्रा अपने रिश्तेदार और दोस्तों के साथ करे।
  • उसका कारन यह भी है की मार्ग चुनौतीपूर्ण पूर्ण होने से बहुत मुस्किलो का सामना करना पड़ता है।

चार धाम यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय –

अगर आपको किसी भी जगह जाना है तो उसका दर्शन के लिए उसका सबसे अच्छा समय भी जानना जरुरी है। अप्रैल या मई के महीने में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा अक्टूबर-नवंबर महीने में खत्म हो जाती है। सितंबर महीना चारधाम यात्रा का सबसे अच्छा समय है। जून से अगस्त के बिच में अगर यहाँ आप आते है तो भारी बारिश होने के कारन यहाँ की यात्रा करना बहुत ही कठिनाईओ का सामना करना पड़ता है। लेकिन भारी बारिश पूर्ण होते ही घाटी बहुत ही नयनरम्य और खूबसूरत दिखाई देती है।

Char Dham Yatra के लिए कैसे पहुंचे –

यमुनोत्री कैसे पहुंचे –

माता यमुना का पहाड़ी शैली में बना मनमोहक मंदिर तीर्थ यात्रियों के मुख्य आकर्षण है।

यमुनोत्री जाने के लिए आपको दिल्ली से देहरादून और ऋषिकेश तक रेल मार्ग या यात्रा हवाई मार्ग से भी पहुंच सकते हैं।

अगर आप सड़क मार्ग से जाने के बाद आप को कुछ मार्ग को पैदल चलकर यमुनोत्री मंदिर पहुंच सकते हैं।

यह हमारे हिन्दुओ के चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है।

गंगोत्री कैसे पहुंचे –

माता गंगा के मंदिर पहुंचने के लिए आपको यमुनोत्री के दर्शन करके

भक्त गंगोत्री में माता गंगा की पूजा के जाते हैं। यहाँ से गोमुख ग्लेश्यिर तक़रीबन 18 किलोमीटर दूर स्थित है।

गंगोत्री और यमुनोत्री की दुरी सड़क मार्ग से दूरी 219 किलोमीटर है।

ऋषिकेश शहर से गंगोत्री 265 किलोमीटर की दुरी पर उपस्थित है।

वह जाने के बाद आप बहुत आसानी से पहुंच सकते है।

यह हमारे हिन्दुओ के चार धाम यात्रा का दूसरा पड़ाव कहा जाता है।

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केदारनाथ कैसे पहुंचे –

त्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम जाने के लिए।

आपको गौरीकुण्ड से ऋषिकेश की 76 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।

वहा से आपको 18 किलोमीटर का मार्ग को तय करके केदारनाथ पहुंच सकते हैं।

लिंचैली और केदारनाथ में मध्य मे 4 मीटर चौड़ी सीमेंट सड़क बनी हुई है।

जिस के माध्यम से श्रद्धालु बहुत ही आसानी से केदारनाथ धाम पहुंच सकते हैं।

यह हमारे हिन्दुओ के चार धाम यात्रा का तीसरा पड़ाव कहा जाता है।

बद्रीनाथ कैसे पहुंचे

यह स्थान पर मौसम अनुकूल होने के समय पैदल चलकर नहीं जाना पड़ता है।

हमारे हिन्दू धर्म का बैकुण्ठ धाम के नाम से प्रचलित बद्रीनाथ धाम है।

यह स्थान जाने के लिए आपको ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग,

कर्णप्रयाग, चमोली और गोविन्दघाट होते हुए पहुंचा जा सकता है।

यह हमारे हिन्दुओ के चार धाम यात्रा का चौथा आखरी पड़ाव कहा जाता है।

Char Dham Yatra Map –

Char Dham Yatra Video –

Interesting Facts – 

  • 2013 की बाढ़ में भगवान केदारनाथ का मंदिर ही बचा था उसके अलावा सब कुछ तहस-नहस हो गया था।
  • पौराणिक कथाएं दावा करती हैं कि केदारनाथ की रक्षा करने के लिए भैरोनाथ मौजूद रहते हैं।
  •  13-14वीं सदी के समय में छोटा हिमयुग आया था।
  • उसमें पूरी तरह से केदारनाथ का मंदिर बर्फ में दबा रहा था।
  • यमुना के मंदिर में मृत्यु के देवता यमराज अपनी छोटी बहन यमुना के साथ विराजमान हैं।
  • मां गंगा मंदिर में जाह्नवी, लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, भागीरथी, सरस्वती तथा आदि शंकराचार्य की मूर्तियाँ भी दिखाई देती है।
  • केदारनाथ उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में बना बारह ज्योतिर्लिंग में एक है।
  • यह विशाल शिव मंदिर की बनावट विशाल शिलाखंडों को जोड़कर करवाई गई है।

FAQ –

चार धाम कौन से ?

दक्षिण मे रामेश्वरम धाम, पूर्व मे जगन्नाथ पुरी, उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ और

पश्चिम में द्वारका का मंदिर हिन्दुओ के चार धाम कहे जाते है।

हिंदुओं के पवित्र चार धाम कौन से राज्य में है ?

हिंदुओं के पवित्र चार धाम उत्तराखंड राज्य में स्थित है।

चार धाम के कपाट कब खुलेंगे ?

कोरोना महामारी के चलते सभी मंदिर बंध किये थे जिसको 17 मई और 18 मई को खोले जाएंगे

केदारनाथ पट कब खुलेंगे 2021 ?

17 मई को सुबह पांच बजे के समय विधि-विधान से पूजा करने के पश्यात मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे

केदारनाथ यात्रा कब चालू होगी ?

 केदारनाथ के कपाट 17 मई से, बदरीनाथ के कपाट 18 मई से खुलने वाले हैं।

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Conclusion –

आपको मेरा Char dham Yatra 2021 बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Char Dham ke naam और Char Dham of india से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो कहै मेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास Char Dham yatra package price, चार धाम का इतिहास या Char Dham yatra registration 2021 की कोई जानकारी हैं।

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

1 .भारत के चार धाम कौन कौन से हैं ?

2 .हिंदुओं के चार धाम किस राज्य में है ?

9 thoughts on “Char Dham Yatra History In Hindi | उत्तराखंड चार धाम का इतिहास और जानकारी”

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