Brahma Temple Pushkar History In Hindi - Rajasthan

Brahma Temple Pushkar History In Hindi – Rajasthan

Brahma Temple pushkar भगवान ब्रम्हाजी को समर्पित मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। यह मंदिर भारत में प्रसिद्ध मंदिरो में से एक माना जाता है। ब्रम्हा को ब्रम्हांड का निर्माता के रूप में सारे जगत के लोक उनको पहचानते है। पूरी दुनिया में और भारत में एक ही ब्रम्हाजी को समर्पित मंदिर जो की राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। इसकारण हर साल इस मंदिर मंदिर में लाखो की संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहते है। पुष्कर शहर में ब्रम्हाजी का मंदिर स्थित होने की वजह से यह शहर और स्थान पवित्र माना जाता है।  

आज हम आपको राजस्थान में स्थित ब्रम्हाजी मंदिर पुष्कर का इतिहास , मंदिर से जुडी प्राचीन कथा और मंदिर क्र निर्माण के बारे में बात करेंगे। Brahma Temple story के बारे में बात करेंगे और आप भी ब्रम्हाजी मंदिर पुष्कर राजस्थान के बारे में आप भी जानना चाहते है तो आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा जरूर। 

मंदिर का नाम ब्रम्हाजी मंदिर
राज्य राजस्थान 
स्थान  पुष्कर 
मंदिर की कुल पूजाये तीन पुजाये 
निर्माणकाल   14 वी शताब्दी

Brahma Temple Pushkar History In Hindi –

Brahma Temple Pushkar History In Hindi - Rajasthan
Brahma Temple Pushkar History In Hindi

भगवान Brahma Temple in world के प्रथम 10 पवित्र स्थलों यानि की धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और भारत के 5 धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे की यह मंदिर करीबन 2000 साल पुराना माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण ऋषि विश्वामित्र के द्वारा करवाया गया था। इसके बाद यह मंदिर शंकराचार्य के आधीन हो गया और उन्होंने इस मंदिर का जीणोंद्वार कई बार करवाया था। 

Brahma Temple के बिलकुल सामने एक झील है इसका नाम पुष्कर झील के नाम से पहचाना जाता है। और यह पुष्कर झील मंदिर की तरह पवित्र माना जाता है। ब्रम्हा के मंदिर में दर्शन करने और पुष्कर झील में डुबकी लगाने पर श्रद्धालु और भक्तो को अलौकिक शांति का अनुभव होता है। अगर आप भी इस राजस्थान के पुष्कर में स्थित मंदिर के बारे में और उनकी प्राचीन कथा के  जानना चाहते है तो यह हमारे आर्टिकल को पूरा पढ़िए ताकि आपको इस मंदिर की पूरी जानकारी मिल सके।

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ब्रह्मा मंदिर पुष्कर की कहानी –

Brahma Temple story के बारे में कहा जाता है की एक बार भगवान ब्रम्हा यज्ञ करना चाहते थे लेकिन इस यज्ञ में किसी भी प्रकार की रूकावट न आये और राक्षसों से बचने के लिए वह ऐसी जगह की तलाश कर रहे थे की उनको किसी भी प्रकार की समास्या न हो।

जब भगवान ब्रम्हाजी इस तरह अच्छी जगह की तलाश में गुम रहे थे तब उनके हाथ में से कमल का एक फूल पुष्कर नामके स्थान पर गिर जाता है इस कारण उन्होंने यह फैसला लिया की अब में इस स्थान पर यज्ञ करूँगा। जब ब्रम्हाजी पुष्कर में यज्ञ करने जा रहे थे तब दुर्भाग्यवश उनकी पत्नी सावित्री साथ मे नहीं थी इसकारण ब्रम्हाजी ने गुर्जर समुदाय की गायत्री नामकी एक महिला के साथ विवाह करके यज्ञ की सारि विधिया उनके साथ निभाई।

परन्तु सावित्री ने उनके पति को यानि की ब्रम्हाजी को दूसरी स्त्री के साथ विवाह करते हुवे देखा तो वह बहोत क्रोधित हो जाती है और अपने पति को शाप देती है की उनकी पूजा उनके भक्तो द्वारा नहीं की जाएँगी। इसकारण शाप की वजह से सिर्फ पुष्कर के मंदिर के अलावा दूसरे किसी भी स्थान पर भगवान ब्रम्हाजी का कोई दूसरा मंदिर भी नहीं है और उनकी पूजा भी नहीं की जाती। 

Brahma Temple Pushkar की वास्तुकला –

Brahma Temple in rajasthan में स्थित ब्रम्हाजी का मंदिर 14 वि शताब्दी में निर्माण करवाया गया था। राजस्थान में स्थित यह मंदिर पुष्कर नदी के तट पर स्थित है। ब्रम्हाजी का यह मंदिर उभरे हुवे स्थान पर स्थित होने के कारण वहा तक पहुँचने के लिए सुन्दर और आकर्षक संगेमरमर की सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है और इसके इस्तेमाल से श्रद्धालु मंदिर तक पहुँच सकते है।

भगवान Brahma Temple pushkar के मुख्य द्वार पर भगवान ब्रम्हा के वाहन हंस की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर का मुख्य द्वार श्रद्धालुओ को हॉल तक ले जाता है। इस मंदिर में एक गर्भगृह है इसमें माना जाता है की ब्रम्हा निवास करते थे। मंदिर में एक सुन्दर और आकर्षक संगेमरमर का कछुये की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में काले और सफ़ेद फर्श का संगेमरमर से श्रद्धालु के माध्यम से भगवान ब्रम्हा को अर्पित कईसारे चांदी के सिक्को से भरा हुवा है। पुष्कर के यह मंदिर में ब्रम्हा की मूर्ति स्थित है जिसको चौमुर्ती के रूप में पहचाना जाता है। 

क्योकि इस मूर्ति को चार मुख और चार हाथ-पैर के साथ नक्काशी की गई है। और इस ब्रम्हा की चारो दिशाओ में अलग अलग सर देख रहे हो इस तरह स्थापित किया गया है। ब्रम्हा के इस मंदिर की दीवारों पर मोर और देवी सरस्वती की सुन्दर और आकर्षक चित्रों को बहोत बारीकीसे से सजाया गया है। इस मंदिर में भगवान ब्रम्हाजी की प्रतिमा के साथ -साथ उनकी बाई और गायत्री और दाई और सावित्री उनकी पत्निया बैठी हुई नजर आती है। 

पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में पूजा और अनुष्ठान –

Brahma Temple Pushkar History In Hindi - Rajasthan
Brahma Temple Pushkar

राजस्थान के पुष्कर के ब्रम्हा मंदिर में तीन तरह की पुजाये की जाती है। इस तीन पुजाओ में प्रथम पूजा संध्याति जो सूर्योदय के पश्च्यात की जाती है। मंदिर की दूसरी पूजा रात्रि शयनारती सूर्योदय के करीबन 5 घंटे बाद की जाती है और मंदिर की आखरी पूजा मंगला आरती है यह पूजा सूर्योदय से 2 घंटे पहले सुबह के समय में की जाती है।

यह तीन पुजाओ के समय दौरान पुजारी बहोत सख्त धार्मिक नियमो का पालन करना पड़ता है। मंदिर की मुख्य और मान्यता यह है की इस मंदिर में विवाहित पुरुषो को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलता। मंदिर में फ़क्त पुजारी को ही प्रवेश मिलता है और वो भी बहोत तपस्वी होना चाहिए और वह पूजा कर सकता है। मंदिर में आनेवाले सभी श्रद्धालुओ को प्रसाद मुख्य हॉल से मंदिर के एक मुख्य पुजारी के हाथो से लिया जाता है।

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ब्रह्माजी मंदिर के उत्सव –

राजस्थान पुष्कर के ब्रम्हाजी मंदिर के उत्सवों की बात की जाये तो मंदिर में ऐसी मान्यता है की कार्तिक पूर्णिमा के दिन को साल का सबसे अच्छा यानि की शुभ दिन माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन हिन्दू चंद्र मास की पूर्णिमा की रात पुष्कर में भारत के प्रसिद्ध उत्सवों में एक पुष्कर मेले का आयोजन किया जाता है। इस समय यानि की पुष्कर मेले में देश के पर्यटक और श्रद्धालु बहोत भारी संख्या में आते है। इस समय पुष्कर शहर बड़ी रोमांचक गतिविधियों के साथ रोमांचक हो जाता है। यह पुष्कर का मेला पांच दिवस का रहता है इस उत्सव में आनेवाले भक्त पुष्कर झील में डुबकी लगाकर शांति का अनुभव करते है इसके अलावा मंदिर में कई सारे अनुष्ठान किये जाते है। 

Brahma Temple Pushkar का प्रवेश शुल्क –

राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर में जाने के लिए किसी भी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता।

भक्त और श्रद्धालु बिना किसी एंट्री फीस के भगवान ब्रम्हा के दर्शन कर सकते हैं।

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर के खुलने और बंद होने का समय –

सर्दियों के दौरान Pushkar Brahma Temple timings – सुबह 6:30 से रात 8:30 बजे तक दर्शन कर सकते है। गर्मियों के दौरान मंदिर खुलने का समय- सुबह 6:00 से रात 9:00 बजे तक दर्शन कर सकते है। पुष्कर ब्रम्हाजी का मंदिर दोपहर 1:30 से 3:00 बजे के बीच मंदिर बंद कर दिया जाता है।

ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –

राजस्थान में स्थित Brahma Temple pushkar की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के दिनों में अक्टूबर – मार्च के महीने में अच्छा रहता है। इस दौरान राजस्थान राज्य में तापमान 22 डिग्री सेल्सियस का रहता है। यह अधिक ठंडा रहता है और राजस्थान में गर्मियों के समय में 45 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। सर्दियों के समय में पर्यटक कार्तिक पूर्णिमा के समय में ज्यादा श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहते है। अगर आप भी इस कार्तिक पूर्णिमा के मेले में जाना चाहते है तो आपको नवम्बर में आयोजित कार्तिक पूर्णिमा में आयोजित मेले में जा सकते है।

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पुष्कर के ब्रह्माजी मंदिर के नजदीकी पर्यटन स्थल –

Brahma Temple Pushkar History In Hindi - Rajasthan
Brahma Temple
  • पुष्कर झील 
  • वराह मंदिर
  • पशु मेला पुष्कर
  • सावित्री मंदिर
  • पाप मोचनी मंदिर 
  • नाग पहाड़
  • आत्मेश्वर मंदिर
  • रोज गार्डन
  • मोती महल
  • रंगजी मंदिर 
  • सिंह सभा गुरुद्वारा
  • दिगंबर जैन मंदिर पुष्करजी

Brahma Temple Pushkar राजस्थान कैसे पहुंचे –

राजस्थान में स्थित ब्रम्हा मंदिर पुष्कर के गनेहरा में रोड पर स्थित है। इस कारण आप मंदिर जाने के लिए टैक्सी या कैब के इस्तेमाल से आप मंदिर तक पहुँच सकते है। मंदिर तक पहुँच ने के लिए स्थानीय बसे भी उपलब्ध है परन्तु इन बसों में ज्यादातर अधिक भीड़ होती है। और मंदिर  दर्शन  योजना बनाई है तो आप इस पुष्कर के ब्रम्हाजी मंदिर जाने के लिए आप तीन विकल्पों का चुनाव कर सकते है इसमें हवाई मार्ग ,ट्रेन मार्ग और सड़क मार्ग से आप ब्रम्हाजी मंदिर तक पहुँच सकते है। 

हवाई मार्ग से ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर कैसे पहुंचे :

अगर आप brahma temple pushkar की यात्रा के लिए हवाई मार्ग का चुनाव किया।

तो आपको बता दे की पुष्कर में कोई स्थानीय हवाई अड्डा नहीं है।

लेकिन पुष्कर के नजदीकी हवाई अड्डा सांगानेर हवाई अड्डा है।

जो पुष्कर के करीबन 150 कि.मी की दुरी पर स्थित है।

यह हवाई अड्डा भारत और विदेश के कई हवाई माथको से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है।

आप इस हवाई अड्डे से स्थानीय बसों ,टैक्सी या कैब के इस्तेमाल से ब्रम्हाजी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। 

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर ट्रेन से कैसे पहुंचे :

अगर आपने brahma temple pushkar जाने के लिए ट्रेन मार्ग का चुनाव किया है तो आपको बता दे की राजस्थान का अजमेर रेल्वे स्टेशन पुष्कर का सबसे नजदीकी रेल्वे जंक्शन है और इसकी दुरी करीबन पुष्कर से 14 कि.मी है। यह रेल्वे स्टेशन बड़े शहरो से बहोत अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। और वहा से आप पर्सनल और टैक्सी या कैब के इस्तेमाल से ब्रम्हाजी मंदिर तक पहुँच सकते है।

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ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर बस से कैसे पहुंचे :

  • आपने अगर ब्रम्हाजी मंदिर जाने के लिए बस का चुनाव किया है।
  • आपको बता दे की अजमेर का बस स्टेंड देश के मुख्य शहरो से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है।
  • अजमेर से पुष्कर की दुरी पर करीबन 16 कि.मी की दुरी पर स्थित है।
  • वहा से आप आसानी से पुष्कर शहर तक पहुँच सकते है।

Brahma Temple Pushkar video –

ब्रह्माजी मंदिर के अन्य प्रश्न –

1 . ब्रह्माजी मंदिर कहा स्थित है ?

ब्रम्हाजी का मंदिर राजस्थान के पुष्कर के गनेहरा के रोड पर स्थित है।

2 . ब्रम्हाजी मंदिर कितने साल पुराना माना जाता है ?

पुष्कर में ब्रम्हाजी का मंदिर करीबन दो हजार साल पुराना माना जाता है। 

3 . ब्रम्हाजी मंदिर का निर्माण कब करवाया गया था ?

ब्रम्हाजी मंदिर का निर्माण 14 वि शताब्दी में करवाया था। 

4 . पुष्कर में स्थित मंदिर में ब्रम्हाजी की प्रतिमा को दूसरे कोनसे नाम से पहचाना जाता है। 

पुष्कर के ब्रम्हाजी मंदिर में स्थित भगवान ब्रम्हा की प्रतिमा को दूसरे चौमूर्ति के नाम से भी पहचाना जाता है। 

5 . ब्रम्हाजी मंदिर के नजदीकी कोनसा पवित्र झील है ?

ब्रम्हाजी मंदिर के नजदीकी पुष्कर झील स्थित है जो श्रदालुओ के लिए पवित्र झील माना जाता है। 

6 . ब्रम्हाजी की प्रतिमा के दोनों और किसकी मुर्तिया स्थापित है ?

भगवान ब्रम्हाजी की प्रतिमा के साथ-साथ उनकी बाई और गायत्री दाई और

सावित्री उनकी पत्निया बैठी हुई नजर आती है।

7 . पुष्कर में स्थित ब्रम्हाजी मंदिर में कितनी बार पूजा की जाती है ?

राजस्थान के पुष्कर के ब्रम्हा मंदिर में तीन तरह की पुजाये की जाती है।

इस तीन पुजाओ में प्रथम पूजा संध्याति जो सूर्योदय के पश्च्यात की जाती है।

मंदिर की दूसरी पूजा रात्रि शयनारती सूर्योदय के करीबन 5 घंटे बाद की जाती है।

और मंदिर की आखरी पूजा मंगला आरती है।

यह पूजा सूर्योदय से 2 घंटे पहले सुबह के समय में की जाती है।

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख Brahma Temple pushkar के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने ब्रम्हाजी मंदिर पुष्कर के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

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