Bodh Gaya Mandir Ka Itihas In Hindi

Bodh Gaya Mandir Ka Itihas In Hindi | बोधगया दर्शनीय स्थल की जानकारी

नमस्कार दोस्तों Bodh Gaya In Hindi में आपका स्वागत है। आज बोधगया दर्शनीय स्थल का इतिहास और यात्रा की जानकारी बताने वाले है। बोधगया बिहार की राजधानी पटना से 100 किमी दूर गया जिले में एक बौद्ध तीर्थ स्थल है। उसको प्राचीन समय में उरूवेला, समबोधि, वज्रासन या महाबोधि के नाम से जाना जाता था। बोधगया महाबोधि मंदिर के लिए प्रसिद्ध और बोधि वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। Buddha Gaya Temple यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है।  

यह स्थान पूरे साल भर भारत और विदेशों से तीर्थयात्रियों से भरा भरा रहता है। जो मठों, मंदिरों और बोधि वृक्ष के अवशेषों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं। उसके कारन ही जापान और चीन सहित कई विदेशी देशों ने बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं के निर्माण में भारत सरकार की मदद की है। बौद्धों द्वारा बोधगया को दुनिया के सबसे पवित्र शहरों में से एक कहा जाता है। क्योकि भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। गया एक छोटा सा शहर है। बोधगया फाल्गु नदी(Phalgu River) के तट पर स्थित है। तो चलिए बोधगया का इतिहास बताते है। 

Places To Visit In Bodhgaya

  • बोधि वृक्ष Bodhi Tree
  • महाबोधि मंदिर Mahabodhi Temple
  • थाई मठ Thai Monastery 
  • रॉयल भूटानी मठ Royal Bhutanese Monastery 
  • बुद्ध की ऊंची प्रतिमा Great Buddha Statue 
  • जापानी मंदिर Japanese Temple
  • आर्कियोलॉजिक म्यूजियम Archaelogical Museum
  • Magla Gauri Shrine मागला गौरी तीर्थ
  • Dungeshwari Cave Temples डुंगेश्वरी गुफा मंदिर
  • Chinese Temple and Monastery चीनी मंदिर और मठ
  • Bodhgaya Archaeological Museum बोधगया पुरातत्व संग्रहालय

    Bodh Gaya Image
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बोधगया की यात्रा कार्यक्रम

पहला दिन – 

  • यात्रा की शुरुआत में थाई मठ और उसके बाद महाबोधि मंदिर जा सकते हैं। 
  • उस मंदिर के अंदर कंकामना का पवित्र मंदिर भी स्थित है। 
  • यहा आप प्रसिद्ध बोधि वृक्ष को देख सकते हैं। 
  • उसके बाद प्रसिद्ध विष्णु मंदिर में आपका पहला दिन पूरा होता है। 

दूसरे दिन – 

  • दूसरे दिन आप इंडोसन निप्पॉन जापानी मंदिर  यात्रा शुरू करें। 
  • उसमे भगवान बुद्ध की शानदार भव्य प्रतिमा को देख सकते है। 
  • यह विस्तार में यात्रिओ को गाइड भी उपलब्ध हैं। 
  • शाम के समय तक मुचलिंडा झील में एक शांत शाम बिता सकते है।

दीसरे दिन –

  • यहाँ आप एक कठिन ट्रेक डुंगेश्वरी हिल्स की यात्रा भी कर सकते हैं। 
  • यहाँ चीनी मंदिर, मंगला गौरी मंदिर, सुजाता मंदिर सकते हैं।

History of Bodh Gaya 

प्राचीन समय से उरुवेला के नाम से जाना जाता बोधगया नेरजाना नदी पर स्थित था। यहाँ राजा अशोक ने मंदिर बनवाया था। 563 ईसा पूर्व में बुद्ध का जन्म बैसाखी पूर्णिमा की रात को राजा के पुत्र के रूप में हुआ था। राजकुमार सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में सांसारिक संपत्ति को त्याग दिया और शाश्वत सत्य की खोज में दूर-दूर तक यात्रा की थी। गौतम बुद्ध को यहाँ बोधि वृक्ष के नीचे कठिन तपस्या करने के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

गौतम बुद्ध को वासना, घृणा और भ्रम से मुक्त किया और उस प्रकार ज्ञान या “बुद्धत्व” प्राप्त किया था। जिस वृक्ष के नीचे उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया वह प्रसिद्ध बोधि वृक्ष है। आने वाले दिनों में उनके कई अनुयायी हो गए और गांव एक तीर्थस्थल में बदल गया है। सम्राट अशोक स्वयं उनके सबसे बड़े शिष्यों में से एक थे और उन्होंने प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर का निर्माण कराया था। 13 वीं शताब्दी के आसपास पवित्र गांव ने गति पकड़ी और बहुत सारे मंदिरों और मंदिरों का निर्माण किया गया।

लेकिन राजनीतिक उथल पुथल के कारण शहर कई सदियों के समय तक अविकसित रहा है। यह विस्तार क्रूर तुर्की सम्राटों के हाथों में चला गया और उन्होंने आक्रमण करके शहर में तोड़फोड़ करदी थी। ब्रिटिश शासन ने बाद में शहर को उसके शुद्ध पवित्र रूप में बहाल कर दिया था। वर्तमान समय में शहर सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक एव यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।

Best Time To Visit Bodh Gaya

बोधगया घूमने का सबसे अच्छा समय – अक्टूबर से मार्च महीने का मौसम यात्रा के लिए आदर्श होता है। मगर यहां साल भर पर्यटक की भीड़ रहती है। अक्टूबर के पश्यात कई सारे भिक्षु धर्मशाला से buddhagaya तक यात्रा करने आते हैं। बुद्ध जयंती के समय में शहर मैरून वस्त्रों से रंगा हुआ है। दलाई लामा दिसंबर और जनवरी के दौरान यहां अपना कुछ समय बिताते थे। बौद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) को मनाने के लिए वैशाख (अप्रैल-मई) के महीने में भी आगंतुक आते रहते हैं। क्योकि उसी शुभ दिन सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

बोधगया में घूमने की जगह

Mahabodhi Temple

महाबोधि मंदिर को महान जागृति मंदिर भी कहा जाता है। यह एक बौद्ध मंदिर और भगवान बुद्ध को यहाँ ज्ञान प्राप्त हुआ था। भगवान बुद्ध भगवान विष्णु के 9वें और सबसे हाल के अवतार के रूप में माना जाता है। Bodhgaya mandir 4.8 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला और 55 मीटर लंबा है। बोधि वृक्ष मंदिर के बाईं ओर स्थित है। यहा मूल मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने युद्ध और विजय से शांति और एकांत की तलाश के लिए किया था। महान सम्राट अशोक ने 260 ईसा पूर्व में बोधगया का दौरा किया था।

यात्रा के दौरान उन्होंने एक पेड़ से एक छोटे से मंदिर का निर्माण किया वह बोधि वृक्ष था। वह पहली शताब्दी और दूसरी शताब्दी के बीच के एक शिलालेख में लिखा हुआ है कि सम्राट अशोक से निर्मित मंदिर को एक नए से बदल दिया गया था। यहाँ भिक्षुओं और भक्तों को पेड़ को अनगिनत साष्टांग प्रणाम करते हुए देख सकते है। यह मंदिर की वास्तुकला और इसकी समग्र चुप्पी और शांति निश्चित रूप से पर्यटकों को को मंत्रमुग्ध कर देती है।

Bodh image
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Great Buddha Statue

भगवान बुद्ध की यह प्रतिमा भारत में सबसे ऊंची मानी जाती है। उस आकर्षक प्रतिमा को 1989 में XIV दलाई लामा से स्थापित किया गया था। यह एक विशाल कमल पर विश्राम करने वाला एक ध्यानी भगवान बुद्ध है। उसको जटिल नक्काशीदार बलुआ पत्थर और लाल ग्रेनाइट का उपयोग करके बनाया गया है। आपको भी यह प्रतिमा देखनी चाहिए। क्योकि यह बहुत नयनरम्य दिखाई देती है। 

Bodhi Tree

Bodh gaya bihar में पटना के दक्षिण में 100 कि.मी दूर बोधि वृक्ष बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख और सम्मानित पवित्र स्थान है। यहाँ राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान किया था। 7वीं शताब्दी में बोधि वृक्ष के पास एक छोटा मंदिर बनाया गया था। बोधि वृक्ष पर्यटकों द्वारा अक्सर देखा जाने वाला गंतव्य स्थान है। बुद्ध के समय से ही ऋषियों, ध्यानियों और योगियों को आकर्षित करता रहा है। बुद्धज्ञान, पद्मसंभव, विमलमित्र, नागार्जुन और अतिश जैसे आध्यात्मिक व्यक्ति बोधि वृक्ष के नीचे रहते और ध्यान करते रहे हैं। 

Thai Monastery Bodh Gaya

सोने की उत्कृष्ट टाइलों (Gold Tiles)से ढकी अपनी घुमावदार छत के लिए प्रसिद्ध, थाई मठ में बुद्ध की एक कांस्य प्रतिमा और बगीचे में हाल ही में 25 मीटर ऊंची एक दूसरी प्रतिमा स्थापित है।

Royal Bhutan Monastery

भूटान के राजा ने भगवान बुद्ध को समर्पित रॉयल भूटान मठ बनाया था। यह मठ की आंतरिक दीवारों पर मिट्टी की नक्काशी देखी जाती है। जो बौद्ध संस्कृति और धर्म के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। रॉयल भूटान मठ सुंदर रंग योजना के साथ मठ में तीन स्तर हैं। भगवान बुद्ध की 7 फीट ऊंची मूर्ति है। यहाँ बुद्ध की शिक्षाओं और ध्यान को आत्मसात करने आगंतुकों को 24 घंटे कक्ष सेवा और विश्राम गृह वह प्रवेश निःशुल्क है। आप भी यहाँ आराम कर सकते है।

बोध गया फोटोज
बोध गया फोटोज

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Falgu River Bodh Gaya

फल्गु नदी बोधगया पर्यटन का एक अनिवार्य हिस्सा है उसको पहले निरंजना नदी के नाम से जाना जाता था। दिवंगत आत्माओं को प्रसन्न करने के लिए अपने पूर्वजों का अंतिम संस्कार करने के लिए आमतौर पर यहां आने वाले लोगों के साथ नदी की अत्यधिक पूजा की जाती है। भगवान बुद्ध अक्सर फाल्गु नदी के तट पर ही ध्यान करते थे। 

Root Institute for Wisdom Culture

आध्यात्मिकता पर गहन ज्ञान विकसित करने और बौद्ध ध्यान का अभ्यास करने के हेतु बोधगया में रूट इंस्टीट्यूट फॉर विजडम कल्चर शुरू किया गया है। यहाँ हर साल अक्टूबर से मार्च में शुरुआती और मध्यवर्ती ध्यान पाठ्यक्रम प्रदान करता है। पाठ्यक्रम के लिए नामांकन के लिए आपको एक निश्चित राशि दान करने की आवश्यकता है। उसके अलावा स्थान किसी भी व्यक्ति के लिए खुले हैं।

Vishnupad Temple

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित बनाया गया था। उसमें भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लंबे पदचिह्न हैं जो चांदी की प्लेटों से बने बेसिन से घिरा हुआ है। यह पदचिह्न भगवान विष्णु द्वारा गयासुर की छाती पर अपने पैर रखकर गयासुर को वश में करने के कार्य को चिह्नित करता है। प्रांगण के भीतर दूसरे मंदिर भी स्थित हैं। एक भगवान नरसिम्हा को समर्पित है और दूसरा फाल्गविश्वर के रूप में भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पूजा स्थल के रूप में कार्य करता है।

Muchalinda Lake Bodh Gaya

बोधगया में एक लोकप्रिय स्थल मुचलिंडा झील मुख्य मंदिर के नजदीक ही स्थित है। यह एक पौराणिक कथा से जुड़ा है। जिसमें कहा गया है कि भगवान बुद्ध को नाग राजा मुचलिंडा ने तूफान से बचाया था। 

Brahmayoni Temple

ब्रह्मयोनी मंदिर की यात्रा करने पहाड़ी की चोटी तक 424 ऊंची पत्थर की सीढ़ियों की भीषण चढ़ाई से गुजरना होता है। अष्टभुजादेवी के एक प्राचीन मंदिर के साथ दो गुफाएं अर्थात् ब्रह्मयोनी और मैत्रेनी भी पहाड़ी पर स्थित हैं। ब्रह्मयोनी पहाड़ी वह स्थान था जहां बुद्ध ने एक हजार पूर्व अग्नि पूजा करने वाले तपस्वियों को अग्नि-प्रवचन का उपदेश दिया था।

बोधगया दर्शनीय स्थल की जानकारी
बोधगया दर्शनीय स्थल की जानकारी

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बोधगया के त्यौहार Festivals of Bodh gaya 

बोधगया मंदिर भगवान गौतम बुद्ध के जन्मदिन पर मनाई जाने वाली बुद्ध जयन्ती प्रसिद्ध त्यौहार है। बुद्ध जयंती हर वर्ष मई महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। बोधगया के त्यौहारों में तीन दिवसीय बुद्ध महोत्सव प्रमुख है। विश्व शांति के लिये कग्यू मोनलम चेन्मो और न्यिंग्मा मोनलम चेन्मो प्रार्थना त्यौहार जनवरी-फरवरी में होता हैं। नये साल दिनों में मठों को पवित्र करने महाकाली की पूजा होती है। 

Local Food in Bodh Gaya

बोधगया एक धार्मिक केंद्र होने के नाते यहाँ मांसाहारी भोजन या शराब का विकल्प प्रदान नहीं करता है। मगर शहर तिब्बती व्यंजनों, पास्ता, पिज्जा, इतालवी व्यंजनों, थाई व्यंजनों, कोरियाई व्यंजनों से लेकर बिहारी व्यंजनों को परोसता है। यहा मिठाइयों मुख्य रूप से  एनुर्सा, तिलकुट, खाजा, लाई और केसरिया पेड़ा, जो सभी बिहार के लिए विशिष्ट हैं। उसके अलावा बिहारी व्यंजन जैसे सत्तू की रोटी, लिट्टी-चोखा, पुआ, मरुआ की रोटी, चना भुजा, आलू कचलू भी यहाँ आसानी से उपलब्ध हैं।

Where To Stay In Bodh Gaya कहां रुकें

Hotels in bodhgaya – बोधगया में पर्यटकों ठहरने के लिए कई होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध है। मगर आपको पीक सीजन में पहले से बुक कराना सबसे अच्छा होता है। यहां यात्रिओ को एसी और नॉन एसी दोनों तरह होटल मिलते हैं। महाबोधि मंदिर से पार्क के सामने बहुत से होटल हैं जहां पर्यटकों के लिए ठहरने और भोजन की अच्छी सुविधा उपलब्ध है। पर्यटक अकेले रहना चाहता हैं। सिर्फ दो सौ रुपये में भी कमरा मिल सकता है। हम कुछ होटल और गेस्ट हाउस के नाम बताते है। आपको पसंद आए तो वहा जा सकते है।

  • भूटान मोनेस्ट्री
  • बर्मीज विहार
  • कुंदन बाजार गेस्ट हाउस
  • महाबोधि सोसायटी
  • रैन्बो गेस्टहाउस
  • साक्य मोनेस्ट्री गेस्टहाउस
  • राहुल गेस्टहाउस
  • सिद्धार्थ विहार टूरिस्ट कॉम्पलेक्स
  • होटल सुजाता

Tourist places in Bihar

  • BodhGaya
  • Patna
  • Nalanda
  • Vaishali
  • Madhubani
  • Muzaffarpur
  • Bhagalpur
  • Rajgir
  • Pawapuri
  • Hajipur
  • Sitamarhi
  • Lauriya Nandangarh
  • Valmiki National Park
  • Chhat Puja
  • Tomb of Sher Shah Suri
  • Navlakha Palace
  • Jal Mandir
  • Mundeshwari Temple

    बोधगया की फोटो गैलरी
    बोधगया की फोटो गैलरी

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How To Reach Bodhgaya

ट्रेन से बोधगया कैसे पहुंचे

How To Reach Bodh Gaya By Train – बोधगया का निकटतम रेल प्रमुख गया जंक्शन है। वह 13 कि.मी दूर है। वह भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गया रेलवे स्टेशन पर पहुँच ने के बाद पर्यटक किसी भी स्थानीय टैक्सी लेकर पवित्र शहर पहुँच सकते हैं। उसकी नियमित ट्रेनें सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस, हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और कोलकाता मेल हैं। आप ट्रेन से बहुत आसानी से यात्रा कर सकते है। 

सड़क मार्ग से बोधगया कैसे पहुंचे

How To Reach Bodh Gaya By road – बोध गया से मुख्य सड़क बोधगया शहर को गया शहर से जोड़ती है। बिहार राज्य पर्यटन निगम पटना से बोधगया के लिए प्रतिदिन दो बार बस सेवा चलाता है। पटना के अलावा नालंदा, राजगीर, वाराणसी और काठमांडू से भी बस सेवाएं उपलब्ध होती हैं। वर्तमान समय में लक्जरी वातानुकूलित वोल्वो बस लाइन शुरू की गई है जो बोधगया को आसपास के शहरों और शहरों से जोड़ती है। उसकी सहायता से पर्यटक आसानी से बोधि मंदिर जा सकते है। 

फ्लाइट से बोधगया कैसे जाये

How To Reach Bodh Gaya By Flight – बोधगया शहर से 17 कि.मी दूर गया निकटतम हवाई अड्डा है। मगर उसकी उड़ाने बहुत कम है। वह हवाईअड्डा उड़ानों से कोलकाता से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गया का दूसरा निकटतम हवाई अड्डा पटना में है। वह शहर से 135 कि.मी दूर है। पटना हवाई अड्डा कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, रांची, लखनऊ और अन्य भारतीय शहरों से इंडियन एयरलाइंस और अन्य घरेलू वाहक के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी बुक करके बोधगया शहर पहुंच सकते हैं।

Bodh Gaya Map बोधगया का लोकेशन

BodhGaya History and Story in Hindi Video

Interesting Facts About Bodh Gaya

  • बोधगया को ऐतिहासिक रूप से उरूवेला, समबोधि, वज्रासन या महाबोधि के नाम से जाना जाता था। 
  • गंगा की सहायक नदी फाल्गु नदी के किनारे पश्चिम दिशा में बोधगया स्थित है।
  • प्राचीन गया शहर और उसके पर्यटन स्थलों के साथ कई इतिहास और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
  • बौद्ध धर्म तथा धार्मिक आध्यात्म के परिपेक्ष्य में बोधगया का स्थान काफी ऊँचा है।
  • बोधगया पर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।
  • महाबोधि मंदिर को वर्ष 2002 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।
  • बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति की जगह पर उनके समर्थक जुटने लगे उस वजह से जगह का नाम बोधगया पड़ा है। 

FAQ

Q .बोधगया कहां है?

बोधगया बिहार राज्य के गया ज़िले में स्थित एक नगर है। 

Q .बोधगया में किसे ज्ञानप्राप्ति हुई थी?

बोधगया में बोधि वृक्ष के निचे 531 ईसा पूर्व में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

Q .बोधगया क्यों प्रसिद्ध है?

बोधगया अपने प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारन प्रसिद्ध है। 

Q .बोधगया का प्राचीन नाम क्या था?

बोधगया का प्राचीन नाम उरूबिल्व (उरूबेल) था।

Q .बोधगया किस राज्य में स्थित है?

बिहार राज्य

Q .बोधगया बिहार का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है?

हा बोधगया बिहार का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। 

Q .बोधगया किस नदी के किनारे है?

बिहार की फाल्गू नदी किनारे बोधगया स्थिति है।

Conclusion

आपको मेरा Bodh Gaya Mandir Ka Itihas In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये Bodhgaya temple, Bodh gaya tree

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अगर आपको किसी जगह के बारे में जानना है। तो हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।  

Note

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