Badoli Temple History In Hindi Rajasthan

Badoli Temple History In Hindi Rajasthan | बाड़ौली मंदिर का इतिहास

Badoli temple राजस्थान के चितौडग़ढ़ जिले में स्थित रावतभाटा गांव से मात्र 2 किमी की दुरी पर बड़ौली मंदिर कोटा से करीबन 50 कि.मी की दुरी पर स्थित है। राजस्थान का यह स्थल यानि की बड़ौली मंदिर स्थापत्यकला की दृस्टि से प्रसिद्ध है।बड़ौली का यह मंदिर ब्रम्हाणी ओर चंबल नदियों के संगम पर इस मंदिरो का निर्माण करवाया गया है। बाड़ौली के यह मंदिर करीबन 9 वी शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य के दौरान निर्माण करवाया गया है।

बाड़ौली मंदिर का प्रमुख मंदिर घाटेश्वर महादेव का माना जाता है। जिस मंदिर में नक्काशीदार बड़े पथ्थरो के खम्भों का एक बड़ा हॉल और एक नृत्य करते हुवे भगवान शिव , विष्णु , और ब्रम्हा सहित अन्य कई भगवान की प्रतिमाए बारीकी से नक्काशीदार शिखर का निर्माण करवाया गया है। इसके बाद मंदिर के परिसर के अंदर और भी 9 मंदिर स्थित है। यह मंदिर के अंदरवाले 9 मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में है। बाड़ौली का यह मंदिर पर्यटक और तीर्थ स्थलों में से एक है जो पर्यटको का आकर्षण का केंद्र माना जाता है। 

आज हम इस आर्टिकल में आपको बताएँगे की बरौली मंदिर का संबंध किस वंश से है। और badoli temple history  के बारे में जानना चाहते है तो आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढियेगा। 

Badoli Temple History In Hindi –

राजस्थान के बड़ौली मंदिर का इतिहास करीबन 9 वी शताब्दी का माना जाता है बाड़ौली मंदिर का निर्माण गुर्जरप्रतिहार साम्राज्य के समय में इसका निर्माण करवाया गया है। राजस्थान के शुरुआती के निर्माणित मंदिरो में से बाड़ौली मंदिर एक माना जाता है। इस मंदिर में से भगवान नटराज की प्रतिमा 1998 में चोरी की गई थी। कहा जाता है की यह भगवान शिव की प्रतिमा इंग्लैंड के एक निजी कलेकटर के पास थी लेकिन कोई ठोस सबुत न मिलने के कारण इस भगवन शिव की प्रतिमा को वापस नहीं ला पाए। 

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बाड़ौली मंदिर की वास्तुकला –

राजस्थान के 9 वीं शताब्दी में निर्मित बड़ौली मंदिर गुर्जर प्रत्याहार वास्तुशैली में इसका निर्माण किया गया है। जिस का उत्कृष्ट रूप से इस मंदिर का निर्माण पथ्थरो से तराशा गया है। यह बाड़ौली मंदिर अर्ध खंडित हो चुके है लेकिन पर्यटकों का आकर्षण का बड़ा अत्तम उदाहरण स्थित है।

इसके अलावा बाड़ौली में अन्य 8 मुख्य मंदिर स्थित है। इसके अलावा करीबन 1 कि.मी की दुरी पर नौवा प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिरो में से चार मंदिर शिव को समर्पित है इस में दो badoli devi temple दुर्गा को समर्पित है बाकि के मंदिर एक शिव त्रिमूर्ति , विष्णु , और भगवान गणेश को समर्पित है। 

बाड़ौली मंदिर के प्रमुख मंदिर – Badoli Temple

  • घाटेश्वर महादेव मंदिर
  • मंदिर के टैंक में शिव मंदिर
  • वामनवतार मंदिर
  • गणेश मंदिर
  • त्रिमूर्ति मंदिर
  • अष्टमाता मंदिर
  • शेषशयन मंदिर 

बड़ौली मंदिर की वास्तुकला और अलंकरण के अध्ययन करते हुवे इन मंदिरों का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि इन मंदिरों को कुछ अलग-अलग तीन अवधियों में इसका निर्माण करवाया गया है। सबसे प्राचीन मंदिरो में प्रथम समूह में 1 और  4 दूसरे समूह में 7, 6 हैं और तीसरा समूह 2,3 और 4 शामिल है। यह सारे मंदिर क्रमश 8 वी शताब्दी से 11 शताब्दी से इसका निर्माण करवाया गया है इसका उल्लेख कीया गया है। 

मंदिर नंबर 1 : 

  • इस मंदिर का गर्भगृह और अंतराल का निर्माण किया गया है।
  • यह मंदिर का शिखर नष्ट हो हुचा है। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं बची है।
  • लेकिन गर्भगृह में एक शिवलिंग स्थापित है।

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मंदिर नंबर 2 :             

इस मंदिर नंबर 2 खंडहर में गर्भगृह , अंतराल और अर्धनंदपा स्थित है। तालचंद में गर्भगृह त्रिरथ है। इस मंदिर का प्रवेश द्वार शंख का बनाया गया है। इस मंदिर के पद्मासनका को छोड़कर सभी सीढिया है। इस मंदिर के शेषायय भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित थी लेकिन वर्तमान समय में यह भगवान विष्णु की प्रतिमा  संग्रहालय में संरक्षित है।

मंदिर नंबर 3 :     

3 नंबर मंदिर में पत्थर से निर्मित इस मंदिर में ईंटों का भी उपयोग किया गया है। यह मंदिर का निर्माण एक जलाशय के मध्यमे बनाया गया है। इस मंदिर के निर्माण में गर्भगृह और मुखारविंद समतल हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर के गर्भगृह की तीन दिशाओं में से प्रवेश द्वार और मंदिर की पीछे की दीवार जाली से बनवाई गई है। इस मंदिर का निर्माण गर्भगृह पंचरथ प्रकार जैसे करवाया गया है। मंदिर में चैत्यगक्शा और अमलक रूपांकनों का भी उल्लेख शिखर किया गया है। 

मंदिर संख्या 4 : 

यह मंदिर त्रिमूर्ति के नाम से पहचाना जाता है इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की महेश अवतार की प्रतिमा स्थित है। जिस प्रतिमा को त्रिमूर्ति के नाम से पहचाना जाता है। इस मंदिर का गर्भगृह पंचरथ प्रकार जैसे इसका निर्माण करवाया गया है। इस मंदिर के निर्माण में पीठ ,जांध और ऊपर का हिस्सा शीर्ष है। इस मंदिर की ललाट पर भगवान नटराज की प्रतिमा है इस मंदिर के द्वार के दोनों और गंगा और यमुना और प्रतिहारी की प्रतिमाये स्थापित है इस प्रतिमाओं के हाथो में नमस्कार करते समय कमल के पुष्प और पौधो के माध्यम नाग की मूर्ति को नक्काशीदार से अलंकृत किया गया है।

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Badoli Temple खुलने और बंद होने का समय –

Badoli Temple
Badoli Temple
  • राजस्थान में स्थित बाड़ौली मंदिर पर्यटकों के घूमने के लिए।
  • हरदिन सुबह 9.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक खुला रहता है।
  • इसके अलावा बड़ौली मंदिर की पूरी यात्रा करने के लिए करीबन 2 घंटे का समय लगता है। 

Badoli Temple का प्रवेश शुल्क –

बड़ौली मंदिर में यात्रा करने के लिए किसी भी प्रकार का कोई शुल्का अदा नहीं करना पड़ता।

पर्यटक बिना भुगतान किये इस बड़ौली मंदिर में घूम सकते है। 

बाड़ौली मंदिर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –

  • अगर आपने बड़ौली मंदिर घूमने जाने की योजन बना रहे।
  • तो आपको बता दे की बड़ौली मंदिर यात्रा करने का सबसे अच्छा समय
  • अक्टूबर से मार्च मास का समय बहोत अच्छा रहता है।
  • क्योकि इस समय दौरान इस मंदिर के क्षेत्र का मौसम यात्रा के लिए बेहद अच्छा रहता है। 

Badoli Temple कैसे पहुँचे –

Badoli Temple History In Hindi Rajasthan
Badoli Temple History In Hindi Rajasthan
  • अगर अपने राजस्थान के बड़ौली मंदिर घूमने जाने के लिए।
  • आपके सामने कई प्रकार के मार्ग है। 
  • इसमें से आप किसी भी प्रकार का चुनाव कर सकते है।
  • इसमें आप अपने अनुसार हवाई मार्ग , ट्रेन मार्ग और सड़क मार्ग का इस्तेमाल करके। 
  • आप बड़ौली मंदिर तक पहुँच सकते है। 

फ्लाइट से बाड़ौली मंदिर कैसे पहुँचे :

अगर आप राजस्थान के बाड़ौली मंदिर जाने के लिए योजना बना रहे है तो आपको बता दे की चितौडग़ढ़ शहर का नजदीकी हवाई अड्डा डबोक हवाई अड्डा उदयपुर शहर में स्थित है। यह हवाई अड्डा बड़ौली मंदिर से करिबन 220 कि.मी की दुरी पर स्थित है। यह उदयपुर का हवाई अड्डा देश के प्रमुख हवाई मथको से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। और आप इस उदयपुर हवाई अड्डे पे उतर कर आप बड़ौली मंदिर तक पहुंचने के लिए आप टैक्सी , कैब या स्थानीय बस का इस्तेमाल करके पहुंचा जा सकता है। 

ट्रेन मार्ग से बाड़ौली मंदिर कैसे पहुँचे :

आपने अगर बड़ौली मंदिर की यात्रा करने के लिए ट्रेन मार्ग का चुनाव किया है तो आपको बता दे की बड़ौली मंदिर का नजदीकी रेल्वे जंक्शन badoli temple kota रेल्वे स्टेशन है और वह रेल्वे जंक्शन मंदिर से करीबन 51 कि.मी की दुरी पर स्थित है। यह कोटा का रेल्वे स्टेशन राजस्थान और देश के प्रमुख रेल्वे स्टेशनों से अच्ची तरह से जुड़ा हुवा है। और आप कोटा के रेल्वे स्टेशन से टैक्सी या कैब के इस्तेमाल से आप बड़ौली मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।  

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सड़क मार्ग से बाड़ौली मंदिर कैसे पहुँचे :

badoli temple जाने के लिए आपने सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना चाहते है तो आपको बता दे की बड़ौली मंदिर के नजदीकी राजस्थान के मुख्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है जैसे की चित्तौड़गढ़ , उदयपुर , जयपुर , जोधपुर जैसे मंदिर के पड़ोसी शहरो से अच्छी तरह से जुड़ा हुवा है। इस मार्ग के माध्यम से आप अपने अनुसार प्राइवेट वाहन , टैक्सी या फिर कैब और स्थानीय बस के माध्यम से बड़ौली मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। 

Badoli Temple Video –

बाड़ौली मंदिर के अन्य प्रश्न –

1 . बाड़ौली मंदिर कहा स्थित है ?

राजस्थान के चितौडग़ढ़ में स्थित रावतभाटा गांव से मात्र 2 किमी की दुरी पर बड़ौली मंदिर स्थित है।

2 . बड़ौली मंदिर का निर्माण किस शताब्दी में करवाया गया था ?

बाड़ौली मंदिर का निर्माण करीबन 9 शताब्दी से 10 शताब्दी के बिच निर्माण करवाया गया है। 

3 . बड़ौली मंदिर किस वास्तु शैली में निर्माण करवाया गया है ?

राजस्थान के 9 वीं शताब्दी में निर्मित बड़ौली मंदिर गुर्जर प्रत्याहार वास्तुशैली में इसका निर्माण किया गया है।

4 . बड़ौली के मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

बाड़ौली मंदिर का निर्माण गुर्जरप्रतिहार साम्राज्य के समय में निर्माण करवाया गया है। 

5 . बड़ौली के मंदिर किस भगवान को समर्पित है ?

बड़ौली यह मंदिरो में से चार मंदिर शिव को समर्पित है।

इस में दो मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है बाकि के मंदिर एक शिव त्रिमूर्ति , विष्णु , और भगवान गणेश को समर्पित है।6 . बड़ौली में कितने मंदिर स्थित है ?

बाड़ौली में अन्य 8 मुख्य मंदिर स्थित है।

7 . उदयपुर बड़ौली मंदिर की दुरी कितनी है ?

उदयपुर बड़ौली मंदिर से करिबन 220 कि.मी की दुरी पर स्थित है।

8 . बड़ौली मंदिर का सबसे नजदीकी रेल्वे जंक्शन कौनसा है ? 

कोटा रेल्वे स्टेशन मंदिर से करीबन 51 कि.मी की दुरी पर स्थित है।

9 . बाड़ौली के मंदिर किस मंदिर शैली से संबंधित है?

बाड़ौली के मंदिर नागर शैली और द्रविड़ शैली का मिश्रण देखने को मिलता है। 

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख badoli temple के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने badoli temple history और बरौली मंदिर का संबंध किस वंश से है इसकी जानकारी के हमारे इस आर्टिकल दी गई है आपको समज आ गया होगा। अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

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