Ambaji Temple Gujarat In Hindi - अंबाजी मंदिर का इतिहास गुजरात

Ambaji Temple Gujarat In Hindi – अंबाजी मंदिर का इतिहास गुजरात

भारत के 52 शक्तिपीठ में से एक Ambaji Temple Gujarat In Hindi की जानकारी आज बताने वाले है। गुजरात के बनासकांठा, जिले उपस्थित अंबाजी माता का प्रसिद्ध मंदिर है। राजस्थान – गुजरात सीमा पर उपस्थित अंबाजी टेम्पल ,भारत के प्राचीन मंदिरों में एक है।

मां भवानी शक्तिपीठों में से एक यह मंदिर में भक्तों की अपार श्रद्धा जुडी है। दक्ष प्रजापति के हवन कुंड में अपने प्राणो की आहुती देदी। उनके पार्थिव देह को लेके भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया। उनके 51 अलग अलग टुकड़े हुए। और पृथ्वी पे जहा जहा गिरे उसपे आज शक्ति के शक्ति पीठ मौजूद है। ऐसे ही अम्बाजी शक्तिपीठ में मां सती का ह्दय गिरा था।  उन्हें अम्बाजी के नाम से प्रसिद्धि मिली है। उसका उल्लेख तंत्र चूड़ामणि में  लिखा मिलता है। Ambaji Temple की बात करेतो उनके गर्भगृह में देवी की कोई भी मूर्ति नहीं दिखाई देती है।

Ambaji Mandir in Hindi में आपको बतादे की उस के गर्भगृह की फोटो लेने की परमिशन नहीं है। माताजी के मंदिर में पवित्र श्रीयंत्र की पूजा हुआ करती है। माताजी की पूजा आँखों पे पट्टी बांध के की जाती है। और अंबाजी का ओरिजनल मंदिर, उसके पास रही गब्बर नाम की पहाड़ी के ऊपर स्थित बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है। की दांता स्टेट के राजवी महाराज भावन सिंह के साथ उनके राज्य में आने वाले माताजी ने उनके पास आने से पहले ही गब्बर पर अपनी बैठक लेली थी। आज हम Ambaji mandir timing की जानकारी से भी सबको परिचित करवाने वाले है।

Ambaji Temple Gujarat In Hindi

माता रानी का Ambaji Mandir Gabbar पर देवी का एक नन्हा सा मंदिर है। Ambaji Gabbar na pagathiya 999 है। वह चढ़कर ऊपर जा सकते है। जहा माताजी के पद चिन्ह बने हुए है। अंबाजी मंदिर जाने और दर्शन करने वाले गब्बर जरूर जाना पसन्द करते है। अम्बाजी मंदिर से कई दंतकथाएं प्रचलित है। मंदिर तक़रीबन 1200 साल पुराण है। वर्तमान समय में माता का मंदिर सोने से जड़ा जाता है। और वह काम पुरा होते ही गोल्डन टेम्पल जैसा दिखने लगेगा आपको बतादे की उस मंदिर का जीर्णोधार सरकार ने 1975 की साल से शुरू किया था। आज यह मंदिर गुजरात के टूरिजम में शामिल है।

नवरात्री के दिनों में Gujarat Ambaji Mandir में नौ दिनों तक श्रद्धालु दर्शन के लिए बहुत आते है। उस वक्त मंदिर के प्रांगड़ में गरबा करके शक्ति की अराधना की जाती है। हम आज के हमारे लेख में अंबाजी मंदिर के अलावा उसके नजदीकी तीर्थस्थलों की भी जानकारी बताने वाले है। यहाँ रोपवे की सवारी, माताजी के झूले, गुफा और सूर्यास्त बिंदु का दृश्य बहुत सुन्दर आनंद दायक दृश्य है। तो चलिए आज हम अंबाजी मेला, अम्बाजी का मंदिर, अंबाजी मंदिर कब खुलेगा और Ambaji Temple history की सम्पूर्ण महिति से माहितगार कराने वाले है।

Ambaji Temple Gujarat In Hindi
Ambaji Temple Gujarat In Hindi

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अंबाजी मंदिर का निर्माण – 

आबू अंबाजी के मंदिर निर्माण के लिए कई दंतकथाएं प्रचलित है। लेकिन अम्बाजी मंदिर गुजरात का निर्मणा 1584 से 1594 का समय में करवाया गया है। और उसमे अहमदाबाद शहर के एक नागर भक्त श्री तपिशंकर का नाम लिया जाता है। और दूसरी तरफ वल्लभी के शासक, अरुण सेन जो की सूर्यवंश सम्राट कहे जाते थे। उन्होंने चौथी शताब्दी में बनवाया था।

Ambaji Temple Gujarat History In Hindi –

माता अम्बाजी की वर्षो से ज्योत प्रगट है यह थान हिन्दू धर्म के भक्तो के लिए आस्था का मुख्य केंद्र इतनाही नहीं धार्मिक पर्यटन का एक प्रसिद्ध स्थान है। मंदिर में पुरातनकाल से माता को अरासुर नी अम्बे माँ नाम से स्वीकार किया गया है। उसका कारन यह है। की tempale अरावली पहाड़ियों के बिच होने के की वजह से अरासुरी भी कहते है। मंदिर में ऐतिहासिक रूप कोई मूर्ति या फोटो नहीं है। लेकिन अंदर की दीवारी क्षेत्र में चित्रण अंकित किया गया है। वह माता की दीप्तिमान छवि निखरती नजर आती है।

उसके पास में एक दीवार में एक नार्मल सा गोख दिखाई देता है। वह प्रसिद्ध स्वर्ण शक्ति श्री यंत्र है। उसमे एक आकृति है। जिसमे 51 पवित्र बिज अक्षर अंकित है। यंत्र की बहुत बारीकी से पूजा और अर्चना की जाती है। लेकिन उसकी तस्वीर नहीं लेने देते उतना ही नहीं उसकी पूजा भी आंखों पे सफ़ेद पट्टी बांध के की जाती है। माता का मंदिर एक मजबूत तांत्रिक अतीत है। और प्रसिद्ध श्रद्धालु बटुक तांत्रिक उन tempale से जुड़े है। अगर आपको Ambaji Temple live darshan करने है तो भी कर सकते है।

अंबाजी मंदिर की पौराणिक कथा –

ऐसा कहा जाता है की इस जगह भगवन श्रो कृष्ण का मुंडन संस्कार हुआ था। दूसरी और भगवान श्री राम शक्ति उपासना के लिए यहाँ ठहरे थे। और जब रावण ने सीता माता का हरण करलिया तब माता की खोज में अम्बाजी और आबू के जंगलो में आये थे। तब श्रृंगी ने उन्हें अम्बाजी की पूजा अर्चना करने को कहा गया था। देवी ने उन्हें एक अजय तीर  दिया जिनसे भगवान राम ने रावणका वध किया था।महाभारत के लिए यह दंतकथा प्रचलित है। की पांडवों ने अपने वनवास के दौरान अंबाजी  माता की पूजा की ।

इसलिए माता ने भीमसेन को अजयमाला दी। जिनसे युद्ध में पांडवो को विजय दिलाने में बहुत मदद की थी ।दूसरी और अर्जुन को विराट के राज्य में छिपते हुए अज्ञातवास के वर्ष में बृहनाल के रूप में भेस के लिए दिव्य वेशभूषा दी थी । श्री कृष्णा की पत्नी रुक्मणि ने अपने पति भगवान कृष्णा को पाने के लिए माँ अम्बा की पूजा की थी। पुरे ब्रह्माण्ड में देवी शक्ति सर्वोच्च ब्रह्मांडीय शक्ति का उपनाम कहाजाता है। माता की शक्ति बुराई  पर हमेशा हावी हुआ करती है। ऐसा कहा जाता है। की यह मंदिर माता रानी के दिल का प्रतिक है।

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मंदिर की वास्तुकला – 

मंदिर में आंगन शक्ति, द्वार शक्ति, गर्भ गृह और निज मंदिर मौजूद है। वह हमारी हिन्दू संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया करती है। मंदिर के शीर्ष पर 103 फीट की ऊँचाई पर राजसी कलश जिसका वजन 3 टन बताया जाता है। जो संगेमरमर से बनाया हुआ है। उस पर शुद सोना चढ़ाया गया है। उसके साथ माता रानी का पवित्र ध्वज और त्रिशूल भी जुड़ा है। दूसरी और गर्भगृह में माताजी के पवित्र गोख और मुख्य मंदिर एक विशाल मण्डप स्थित है। मंडप के सामने विशाल चहार चौक है। जिसमे माँ की पूजा अर्चना की जाती है। सूर्यवंशी राजा अरुण सेन ने अम्बाजी मंदिर की बनावट 14 वीं शताब्दी में करवाया था।

यह मंदिर में आध्यात्मिक और धार्मिक के साथ साथ वास्तु महत्व भी बहुत है। अंबे माता का मंदिर का इतिहास वेदपुराणो में भी लिखा है। की अंबाजी मंदिर के स्थान पर देवी सती का हृदय गिरा था। मंदिर की वास्तुकला अद्भुत और कलात्मक है। मूल मंदिर माध्यंम आकार का है। जिसमे माता की कोई तस्वीर या मूर्ति नहीं है। कहा जाता है। की माता रानी गर्भगृह की दीवार में बने छोटे से गोख में निवास करते है। पिछले 100 साल से अरसुरी माता अंबाजी मंदिर ट्रस्ट चलाया जाता है। उसके जरिये तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के रहने, साउंड शो और लाइट की व्यवस्था की जाती है। 

Ambaji Temple Timings – अंबाजी मंदिर दर्शन टाइम और आरती का समय –

Ambaji Temple Open or Close की बात करते है। तो अम्बाजी मंदिर गुजरात दर्शन टाइम इसके मुताबिक चलता है।

  • हररोज सुबह को माता का मंदिर (Ambaji Temple open) यंत्र के दर्शन के लिए खुलता है।
  • गर्मियों के सीजन में सवेरे 7 am से रात 9:15 pm तक मंदिर में दर्शन किये जाते है।
  • अगर बारिश का मौसम होता है। तो सवेरे 7 am से 9 pm का समय रहता है।
  • सर्दियों के मौसम में सुबह 7 am से शाम 8 ap तक मंदिर खुला रहता है।
  • माता रानी की आरती सवेरे 7 बजे से 8 बजे तक की जाती है।
  • दोपहर 12 बजे राजभोग आरती की जाती है। एव संध्या आरती 7 बजे से 7:30 बजे हुआ करती है।
  • Ambaji Temple gujarat contact number 02749 262 136 है।
अंबाजी मंदिर
अंबाजी मंदिर

अंबाजी मौसम – Ambaji Temple History in Hindi 

अम्बाजी गर्मियों में –

गर्मियों के मौसम में अंबाजी की यात्रा करने से बचें। इस का मुख्य कारन उस स्थान का तापमान 40 डिग्री हुआ करता है।

बारिश में अंबाजी –

मॉनसून के मौसम में अम्बाजी में बारिश मध्यम से मूसलाधार हुआ करती है। इसकी वजह से मानसून में अंबाजी जाने का प्लान करना थोड़ा मुश्किल होता है। हवा में नमी होती है। लेकिन समग्र मौसम बहुत आनंददायक और सुखद होता है। इसलिए बारिश में मंदिर की यात्रा लाभदायक भी है ।

सर्दियों में अंबाजी मंदिर – 

  • अंबाजी मंदिर में सर्दियां उतार-चढ़ाव रहा करती है।
  • उस वक्त तापमान आरामदायक हुआ करता है।
  • दूसरी और रात में डिग्री सेल्सियस बहुत गिर जाता है। हिन्दू धर्म के पवित्र त्यौहार नवरात्रि सर्दियों की शुरुआत में मनाया जाता है।
  • मंदिर की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय यह होता है।

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भाद्रपद मेला – 

अम्बाजी मंदिर में भाद्रपद की पूर्णिमा के दिनों में (अगस्त-सितंबर के आसपास) मेला लगता है। वह मेले में तीर्थयात्रा बहुत संख्या में दर्शन किया करते है। भाद्रपद की पूर्णिमा के मेले में तक़रीबन 15 लाख श्रद्धालु हररोज दर्शन किया करते है।  उसमे हिन्दुओ के अलावा पारसी  और धर्मनिष्ठ जैन भी दर्शन के लिए आया करते है। दूर दूर के गाँवों से कई दर्शन के लिए आते है। उस मेले में सभी धर्मो के व्यापारी आया करते है। मंदिर में तीर्थयात्री अपना समय भक्ति और प्रार्थना  में बिताया करते है।

और आसपास की गुमने की जगह पर गुमने जाते है। तो कुछ सप्तशती के पाठ में शामिल हुआ करते है। मंदिर के आसपास दुकानों और स्टॉलों पर आपको बांस के लेख, ताबीज,मूर्तियां,चित्र,खिलौने, और खाने-पीने के सामान की बिक्री की जाती है। हर महीने की पूर्णिमा के दिन कोई ना कोई प्रोग्राम आयोजित किया जाता है। जैसे की गरबा ,भवाई लोकनाटक और लोकगीत भी गाए जाते हैं।

Ambaji Temple में खाना – 

आपको अगर खाने का शौख है। तो आपको गुज़रती थाली में सब्जी, रोटी, दाल चावल या दाल चावल मिल सकते है। आप खिचड़ी को दूध या छाछ के साथ भी खा सकते है। इसके अलावा खमन, खांडवी, सेव, फाफड़ा, खाखरा, चकरी और ढोकला भी मिल सकते है। लेकिन गुजरात में आपको शराब नहीं मिल सकती क्योकि यहाँ शराबबंधी है।

Navratri Festival In Ambaji Temple –

अम्बाजी की चौक में नवरात्री के दौरान भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है। जिसमे मंदिर परिसर गुजरात के श्रद्धालुओ ले द्वारा लोक नृत्य और गरबा लिए जाते है। रास डांडिया के प्रोग्राम में कई प्रसिद्ध कलाकारों को बुलाया जाता है। मंदिर में दूसरे और 6 मंदिर भी मौजूद है। उसमे हनुमानजी का मंदिर, अजया माता मंदिर, खोडियार माता मंदिर, गणपति मंदिर, अंबिकेश्वर महादेव मंदिर और वरही माता का मंदिर का मंदिर शामिल है। अगर आप Ambaji Temple Gujarat Live Darshan यानि ambaji mandir live darshan भी करना चाहते है। तो आपको Ambaji Temple official website पे हो सकते है। और अगर आप Ambaji Temple online Donation करना चाहते है ,तो भी आपको सभी सुविधाएं उपलब्ध कराइ जाती है।

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अंबाजी मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल –

Mansarovar –

अम्बाजी के मुख्य मंदिर के पीछे मानसरोवर नामक पवित्र सरोवर है। उसका निर्मणा श्री तपिशंकर नाम के एक भक्त ने बनवाया था। जो मूल अहमदाबाद के रहवासी हुआ करते थे। उस मन सरोवर का निर्मणा 1584 से 1594 के समय में किया गया है। सरोवर के दो किनारो पर एक तरफ महादेव का और दूसरी तरफ अजय देवी का मंदिर उपास्थि है। अजय देवी के बारे में ऐसा कहा जाता है। की वह माता रानी की बहन है। माई भक्त मानसरोवर में पवित्र स्नान किया करते है।  यह मंदिर में राजा मालदेव के समय का एक शिलालेख मौजूद है। जो संवत वर्ष 1415 की साल का बताया जाता है। वह लेखन और पुरानी लिपियों का प्राचीन स्मारक है।

Kumbharia – 

  • अंबाजी मंदिर से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पे कुंभारिया नाम की जगह स्थित है।
  • बनासकांठा जिले में कुम्भारिया धार्मिक महत्व का गाँव है।
  • यहाँ जैन मंदिर बने हुए और ऐतिहासिक स्थान है। उसकी पुरातत्व, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत देखने योग्य है।
  • उसमे भगवान श्री नेमिनाथ का जैन मंदिर 13वीं शताब्दी का मौजूद है।

Gabbar Hills – 

Gabbar Hills
Gabbar Hills

अंबाजी गब्बर हिल्स मंदिर की नजदीक ही मौजूद है। Gabbar hill जाने के लिए आपको 999 सीढ़ियां चढ़के जाना पड़ता है। यानि Ambaji to Gabbar Hill distance तक़रीबन डेड किलोमीटर है। इस पहाड़ी पर हमेशा Ambaji Gabbar jyot प्रज्जवलित रहता है। भारतीय संस्कृति के मत अनुसार मृत माता रानी का हृदय गिरा था। यह स्थान गुजरात की राजस्थान सीमा पर उपस्थित हैं। Gabbar Hill height की जानकारी बताये तो वह 400 m बताया जाता है।

Kamakshi Temple – 

  • माता अंबा के मंदिर से सिर्फ 1 किमी की दूरी पर कामाक्षी माता का मंदिर स्थित है।
  • जो हिन्दुओ के 51 शक्तिपीठों का प्रदर्शन करता आपको नजर आता है।

Koteshwar – 

  • अम्बाजी में नजदीक ही कोटेश्वर नाम का छोटा सा गाँव अपने धार्मिक महत्व से बहुत प्रसिद्ध है।
  • उसमे नारायण सरोवर और प्राचीन शिव मंदिर देखने लायक है।
  • हिन्दू संस्कृति में पौराणिक कथाओं के मतानुसार पांच पवित्र नदियों में से वह एक है।
  • यह स्थल सूर्यास्त और क्षेत्र समुद्र के दृश्य के लिए प्रचलित है।

Kailash Hill Sunset – 

अम्बाजी मंदिर से तक़रीबन डेड किलोमीटर की दुरी पर ही कैलाश पहाड़ी यानि कैलाश टेकरी मौजूद है।

जिस पर बहुत ही सुन्दर और नयनरम्य शिवालय उपास्थित है।

उन पहाड़ी पर शिवजी भगवान के मंदिर का कलात्मक गेट देखने को मिलता है।

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Ambaji Temple Golden Top –

हर हमेशा कई भक्त अम्बाजी मंदिर में अपना दान दिया करते है। उसमे कई लोग तो सोने और चाँदी का भी दान किया करते है। इसके उपयोग के हेतु ट्रस्ट ने अम्बाजी मंदिर को सोने से जड़ने का फैसला लिया और 25 जनवरी 2019 के दिन मुख्यमंत्री विजय रूपाणि ने अंबाजी के स्वर्ण गुंबद का उद्घाटन किया। उसके पहले सबसे पहले 140 किलोग्राम सोने का उपयोग किया गया है। गांधीनगर के मुकेश पटेल नाम के बिल्डर ने 2012 में 25 किलोग्राम सोना दिया था। और अब तक 1580 भक्त सोने का दान दे चुके है। अम्बाजी मंदिर को पूरा सोने से जड़ित किया जाने वाला है अभी तो आधा ही सोने से चकित किया गया है , लेकिन कुछ  में पूरा मंदिर गोल्ड दे चमकाया जाएंगा।

Ambaji Temple Location – Ambaji Temple Gujarat Address

Near, A-497, Khodiyar Chowk, Ambaji, Gujarat 385110

Ambaji Temple की मिस न करने वाली चीज़ – 

  • नवरात्रि के दौरान नौ दिनों के लिए चहार चौक में गरबा और हवन यज्ञ के दर्शन जरूर करे
  • भद्रवी पूर्णिमा के दिन लगता धार्मिक मेला देखना एक अवसर के बराबर है।
  • पोसूद पुणम के दिन माता का देवी अंबाजी का जन्मदिन का मेला
  • स्वादिष्ट प्रसाद “चक्की”
  • उदन खटोला (रोप वे) की सवारी करके गब्बर जाना और उतरना

अंबाजी मंदिर पहुंचने का रास्ता – 

ट्रेन से अंबाजी कैसे पहुंचे –

रेलवे स्टेशन की बात करे तो अंबाजी मंदिर का नजदी की स्टेशन पालनपुर है। वह तक़रीबन 41 किलोमीटर की दुरी पर उपस्थित है। उससे आबू रोड रेलवे स्टेशन 21 किलोमीटर है। पालन पुर उतरके के आप बस या टेक्सी में जिसके है। दूसरे रेलवे स्टेशंन की बात बताये तो मेहसाणा से आप तरंगा उतरके वहा से भी जा सकते है लेकिन यह रेलवे पटरी का काम अभी पूर्ण नहीं हुआ है। पूर्ण होते ही वह पटरी को अम्बाजी मंदिर से जोड़ने का फैसला लिया गया है।

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 फ्लाइट से अंबाजी कैसे पहुंचे –

अम्बाजी माता मंदिर से नजदीकी हवाई अड्डा सरदार वल्लभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जो अहमदाबाद में उपस्थित है। वह स्थान से एयरपोर्ट की दुरी तक़रीबन 187 किमी बताई जाती है। वहा उतरके आपको बस या टेक्सी की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। जिससे आप माता के मंदिर में पहुंच सकते है।

सड़क मार्ग से अंबाजी कैसे पहुंचे –

अगर आप सड़क मार्ग से अम्बाजी मंदिर जाना चाहते है। तो आपको कोई भी मुख्य शहर से gsrtc की बस प्राप्त हो सकती है। क्यूकी गुजरात के सभी प्रमुख शहरो से हररोज बस सेवा संचालित जाती है। जिसमे गांधीनगर, पालनपुर, वडोदरा और अहमदाबाद मुख्य है। इसके अलावा आपको टेक्सी की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।

जलमार्ग से अंबाजी कैसे पहुंचे –

  • माता के मंदिर पहुंचने के लिए नजदीकी बंदर कंडला बंदर है।
  • जो हमारे गुजरात राज्य की दरियाई सिमा पर स्थित है।
  • आपको एक बात और भी बतादे की भारत के कुल दरियाई किनारे में से
  • 1600 किलो मीटर का दरिया सिर्फ गुजरात को मिला हुआ है।
  • इन्ही कारन ही उसका इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से किया जाता है।

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Ambaji 10 Hotel –

  • SHREE HOTEL
  • HOTEL RAJMANDIR
  • OYO 45122 HOTEL ASOPALAV
  • HOTEL OMKAR
  • ROYAL INN HOTEL
  • HOTEL SUNRISE PALACE
  • HOTEL AMBAJI INTERNATIONAL
  • DEV VILLA
  • HOTEL KRISHA PALACE
  • HOTEL MADHAV INN

Ambaji Mandir Video –

Ambaji Mandir के प्रश्न – 

1 .अंबाजी मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय क्या है ?

नवरात्री और भाद्रपद के मेले के दिनो मे अंबाजी मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय है।

2 .अम्बाजी माता मंदिर कहा है ?

माता अम्बाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा जिले में दांता और आबू के बिच स्थित है।

3 .अहमदाबाद से अंबाजी कितना किलोमीटर है ?

अंबाजी से अहमदाबाद173 किलोमीटर है।

4 .अंबाजी मंदिर कब खुलेगा ?

सुबह 7:00 AM को अंबाजी मंदिर खुलता है।

5 .ambaji temple dungar name

अंबाजी टेम्पल का डूंगर गब्बर के नाम से जाना जाता है।

6 .ambaji temple ke band hone ka time kya hai ?

अंबाजी टेम्पल के बांध होने का समय शाम को 9 बजे का है।

7 .How many far Balaram temple from Ambaji ?

बलराम टेम्पल से अम्बाजी 44 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।

8 .When Ambaji temple golden top was inauguration held ?

25 जनवरी 2019 के दिन मुख्यमंत्री विजय रूपाणि ने अंबाजी के स्वर्ण गुंबद का उद्घाटन किया था।

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Conclusion –

आपको मेरा Ambaji Temple Gujarat In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा।

लेख के जरिये Ambaji direction, Ambaji Temple online booking और Ambaji Temple history in gujarati से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य जगह या तीर्थ स्थान के बारे में जानना है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

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