Akshardham Temple History In Hindi Delhi

Akshardham Temple History In Hindi Delhi | स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

Akshardham Temple भारत की राजधानी दिल्ही में स्थित स्वामीनारायण भगवान का अक्षरधाम मंदिर प्रसिद्ध है दिल्ही का अक्षरधाम मंदिर साल 2005 में खोला गया था यह मंदिर भगवान स्वामीनारायण को समर्पित है दिल्ही का अक्षरधाम मंदिर यमुना नदी के तट पर स्थित है अक्षरधाम मंदिर प्राचीन हिन्दूधर्म की संस्कृति को दीखता है इस मंदिर की खास बात तो यह है की इस मंदिर विश्व के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इनको स्थान दिया गया है।

आज हम akshardham delhi के बारे में आपको बताएँगे। akshardham mandir में श्रदालुओको एक आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग पर ले जाता है ऐसा कहा जाता है की मंदिर में दर्शन करने के बाद श्रदालुओंको एक अदभुत आनंद की प्राप्ति होती है। इस के अलावा आप इस मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो हमारे यह आर्टिकल को पढ़िए। 

मंदिर का नाम अक्षरधाम मंदिर 
दूसरा नाम  स्वामीनारायण मंदिर 
स्थान  दिल्ही
वास्तुशैली  भारतीय वास्तुकला 
मंदिर का क्षेत्र  100 एकड़
मंदिर की कुल प्रतिमाये 20,000 प्रतिमाये 
मंदिर के गुंबद  9 गुंबद

Table of Contents

Akshardham Temple History In Hindi Delhi –

akshardham delhi को 6 नवंबर 2005 में खोला गया था मंदिर का निर्माण बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान ध्वारा निर्मित किया गया है। मंदिर का मुख्य आकर्षक स्थान अक्षरधाम मंदिर है जिसमे 141 फिट ऊँचे और 350 फुट लंबे, 315 फीट चौड़े स्मारक स्थित है। अक्षरधाम मंदिर में देवताये , संगीतकार ,नृत्यकला , वनस्पतिया और अन्य जीवो की सुन्दर और आकर्षित  प्रतिमाये निर्मित है। अक्षरदाम मंदिर में प्रतिमाये और भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक पहलुओंके के बारे में दर्शाता है। 

दिल्ही के akshardham temple की मुख्य प्रतिमा भगवान स्वामीनारायण की स्थापित है और इसके अलावा 20,000 भारत के महान महापुरुषों की प्रतिमाये स्थापित है ऐसा देखा जाता है की मंदिर के निर्माण में जटिल और नक्काशीदार संगेमरमर के बलुआ पथ्थर से बनाया गया है। यह मंदिर का निर्माण 100 एकड़ के क्षेत्र में किया गया है।

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Akshardham Temple History In Hindi
Akshardham Temple History In Hindi

अक्षरधाम मंदिर की वास्तुकला – 

दिल्ही के स्वामीनारायण akshardham mandir का निर्माण में भारतीय वास्तुकला की प्राचीन शैली में किया गया है अक्षरधाम मंदिर के निर्माण में महर्षि वास्तु की वास्तुकला के सिद्धांतो पर सफलता पूर्वक काम किया हुवा है akshardham temple के निर्माण में निर्माणकर्ताओने शिल्पशास्त्रो के मापदंड का सटीक पालन किया है। अक्षरधाम मंदिर विशाल क्षेत्र में फैला हुवा जीवनकाल को अधिकतम करने के लिए स्टील और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है।

akshardham मंदिर राजस्थानी गुलाबी बलुआ पथ्थरो से निर्मित किया गया है और इटालवी करारा संगेमरमर से मंदिर को निर्मित किया गया है मंदिर में भिन्न-भिन्न देवताओंकी प्रतिमाये और आचार्यो ,संत-साधु और भारत के महान महापुरुषोंकी प्रतिमाये करीबन 20,000 प्रतिमाये स्थित है। अक्षरधाम मंदिर में करीबन 9 बड़े गुंबद है। 

Akshardham Temple के मुख्य आकर्षक स्थान –

सहजनानंद दर्शन :

akshardham temple delhi में स्थित ” द हॉल ऑफ वैल्यूज़ ” मुख्य स्थान है जिस को दृढ़ता, अहिंसा, पारिवारिक सद्भाव, प्रार्थना और नैतिकता जैसे मूल्यों का गहराई से ज्ञान देने के लिए इस हॉल का निर्माण किया गया है। हिन्दू धर्म की संस्कृति के कालातीत संदेशो को ऑडियो-एनिमेट्रोनिक शो के माध्यम से बताया जाता है। इस हॉल में धनश्याम महाराज ,स्वामीनारायण के बाल रूप में विश्व में सबसे छोटा एनिमेट्रोनिक रोबोट बनाया गया है। 

संगीत फाउंटेन या वॉटर शो  :

अक्षरधाम मंदिर में लेजर वॉटर शो बहुत आकर्षक है और इसको देखे बिना अक्षरधाम मंदिर की यात्रा अधूरी कही जाती है। इस मंदिर में akshardham water show और akshardham light show फ़क्त 24 मिनट मिनिट का होता है इस शो में वॉटर के अलावा प्रोजेक्शन, म्यूजिक, फायर, लेजर, एनिमेशन और टेक्नोलॉजी की सहायता से इस तरह का शो तैयार किया गया है।

यह शो बहोत अनोखा अनुभव श्रदालुओंको देता है। अक्षरधाम मंदिर के ध्वारा इस शो को वॉटर शो नाम दिया गया है भारत के कई क्षेत्र से और विदेश के पर्यटक इस शो को देखने के लिए आते रहते है। यह मंदिर अपने मंदिर के यह वॉटर शो को सबसे भिन्न होने का दावा करता है। मंदिर में वॉटर शो 7 : 30 बजे के समय प्रारंभ होता है। 

बोट राइड (संस्कृत विहार) :

akshardham मंदिर के यात्रा के दौरान इसमें सांस्कृतिक नाव की सवारी करने की सुविधा उपलब्ध की गई है। इस नाव की यात्रा भारतीय संस्कृति और विरासत के प्राचीन पन्नो से परिचित करवाती है। इस में भारतीय महापुरुषों आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, कालिदास, चाणक्य जैसे अन्य महापुरुषों का योगदान रहा है। इसके अलावा यह सवारी दुनिया का प्रथम विश्वविध्यालय है जिसमे घुडसावरी और युद्ध का परिचय का सबक शामिल है और इसके वैदिक काल से कबीर ,मीरा ,रामानंद जैसी प्रमुख महान हस्तियो को दिखाते हुवे धीरे -धीरे मध्ययुग में चली जाती है। 

Akshardham Temple History
Akshardham Temple History

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नीलकंठ दर्शन :

मंदिर में एक विशालकाय थियेटर में नीलकंठ नाम का एक योगी की प्राचीन कथा

के माध्यम से प्राचीन भारत की जानकारी दी जाती है।

थियेटर में संस्कृति और आध्यात्मिकता के माध्यम से जीवन दर्शन के माध्यम से भक्तो को भगवान नीलकंठ के दर्शन करते है। 

नारायण सरोवर :

भारत की हिन्दू संस्कृति में हमेशा से जल निकायों का महिमा का वर्णन करके उनका सम्मान किया गया है जिस तरह भारत में गंगा ,यमुना ,कावेरी और कई अन्य नदियों का हिन्दू संस्कृति में महत्व दिया गया है। अक्षरधाम मंदिर नारायण सरोवर को केंद्रित रखकर इसके  नजदीकी मंदिर का निर्माण करवाया गया है नारायण सरोवर में करीबन 151 पवित्र नदियों और झीलों का जल शामिल है। 

अक्षरधाम मंदिर खुलने का समय –

  • akshardham timing  सुबह 9:30 बजे से 6:30 
  • अक्षरधाम मंदिर के प्रदर्शन का समय 10:30 बजे से शाम 6:00 
  • अक्षरधाम मंदिर का प्रवेश सोमवार के दिन बंध रहता है। 

वॉटर को देखने का शुल्क और समय – 

  • akshardham temple  वाटर शो का समय शाम के 7: 30 बजे
  • वरिष्ठ पर्यटकों का शुल्क – 80 रू
  • 4 साल से 21 साल के बिच के पर्यटकों का शुल्क – 50 रू
  • 4 साल से कम उम्र के पर्यटकों का प्रवेश शुल्क – फ्री

Akshardham Temple दर्शन के लिए टिप्स –

  • पर्यटकों को अक्षरधाम मंदिर के परिसर में किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक चीज ले जाना प्रतिबंध है।
  • इसलिए पर्यटकों को मोबाईल फ़ोल ,कैमेरा ले जाना प्रतिबन्ध है। 
  • मंदिर के प्रवेश ध्वार पर सभी पर्यटकों को जाँच किया जाता है। 
  • akshardham temple सोमवार के दिन बंध रहता है। 
  • अक्षरधाम मंदिर के नजदीकी पर्याप्त पार्किंग स्थान उपलब्ध है। 
  • akshardham मंदिर के अंदर पर्यटकों को  मंदिर के अंदर खाना ले जाना मना है। 
  • मंदिर की प्राचीन संस्कृति और गरिमा का सम्मान करने के लिए उचित कपड़ो का पहनना आवश्यक है। 
Akshardham Temple
Akshardham Temple

Akshardham Temple घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –

  1. दिल्ही केakshardham temple जाने का सबसे अच्छा समय दोपहर 3 बजे का माना जाता है।
  2. इसलिए की जितना जल्दी प्रदर्शनियों के साथ मुक्त हो जाये इतना ठीक रहेगा।
  3. इसके बाद शाम के समय में सरलतासे फाउंडेशन शो में भाग ले सकते है।
  4. दिल्ही के अक्षरधाम मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु और फरवरी का है।
  5. दिल्ली में दिसंबर और जनवरी के महीने में तेज ठंड पड़ती है।
  6. इसलिए आप फरवरी और मार्च के महीने में अक्षरधाम मंदिर की यात्रा कर सकते है। 

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Akshardham Temple के नजदीकी पर्यटन स्थल – 

हुमायु का मकबरा

ताजमहल के 60 वर्षों से पहले निर्मित हुमायूँ का मकबरा मुगल सम्राट हुमायूं का अंतिम विश्राम स्थल है जो दिल्ली के निज़ामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में स्थित है और भारतीय उपमहाद्वीप में पहला उद्यान मकबरा है। हुमायूँ का मकबरा दिल्ली का एक प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जो भारी संख्या में इतिहास प्रेमियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। हुमायूँ का मकबरा अपने मृत पति के लिए पत्नी के प्यार को प्रदर्शित करता है।

फ़ारसी और मुग़ल स्थापत्य तत्वों को शामिल करते हुए इस उद्यान मकबरे का निर्माण 16 वीं शताब्दी के मध्य में मुगल सम्राट हुमायूँ की स्मृति में उनकी पहली पत्नी हाजी बेगम द्वारा बनाया गया था। हुमायूँ के मकबरे की सबसे खास बात यह है कि यह उस समय की उन संरचनाओं में से एक है जिसमें इतने बड़े पैमाने पर लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया था।अपने शानदार डिजाइन और शानदार इतिहास के कारण हुमायूँ का मकबरा को साल 1993 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।

हुमायूँ के मकबरे की वास्तुकला इतनी ज्यादा आकर्षित है कि कोई भी इसे देखे बिना नहीं रह पाता। यह शानदार मकबरा एक बड़े अलंकृत मुगल गार्डन के बीच में स्थित है और इसकी सुंदरटा सर्दियों के मौसम में काफी बढ़ जाती है।हुमायूँ का मकबरा यमुना नदी के तट पर स्थित है और यह अन्य मुगलों के अवशेषों का भी घर है, जिनमें उनकी पत्नियाँ, पुत्र और बाद के सम्राट शाहजहाँ के वंशज, साथ ही कई अन्य मुगल भी शामिल हैं।

लॉटस टैम्पल :

लॉटस टैम्पल भारत की राजधानी दिल्ही में मौजूद बहुत सारे प्राचीन स्मारक और कई देखने लायक स्थान है इसमें से यह लोटस टेम्पल भी सुन्दर और दिल्ही का आकर्षक स्थान है।दिल्ही का लॉटस टैम्पल नहेरु नगर में बहापुर गांव में मौजूद है। लोट्स टैम्पल एक बहाई उपासना का मंदिर माना जाता है। यह लोट्स टैम्पल में न कोई भगवान की मूर्ति है न कोई भगवान की पूजा या फिर अर्चना इस मंदिर नहीं होती। lotus temple delhi में पर्यटक उनकी मन की शांति पाने के लिए आते है।यह मंदिर का आकर कमल जैसा लगता है इस कारण इस मंदिर को lotus temple या फिर लॉट्स टैम्पल से पहचाना जाता है। लोट्स टैम्पल को 20वी शताब्दी का ताजमहल भी कहा जाता है।

यह दिल्ही का लॉट्स टैम्पल ने कई वास्तुकार के कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। और यह टैम्पल को कई न्यूज, अखबारो और लेखो में भी इसकी चित्रित और चर्चित रहता है। यह दिल्ही का लोट्स टैम्पल को विश्व के 7 बहाई मंदिर में से लॉट्स टेम्पेल को कमल टैम्पल से पहचाना जाता है। यह लोटस टेम्पल को 2001 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की सबसे ज्यादा देखने वाले स्मारकों में से देखे जाने वाला स्मारक है। बाकि के बचे 6 स्मारक ऑस्ट्रेलिया ,सिडनी , पनामा सिटी ,युगीना समोआ ,युगांडा में कंपाला ,जर्मनी में फ्रैंकफर्ट और यु -एस -इ में विलेमेट में स्थित है।

लॉट्स टैम्पल  रिकॉर्ड –

साल 2001 का रिपोर्ट कहता है की लॉट्स टैम्पल को 70 मिलियन पर्यटकों द्वारा देखा गया है।

जिस यह लॉटस टैम्पल ने पेरिस के एफिल टावर और भारत का ताजमहल का भी रेकॉर्ड भी तोड़ दिया है।

लोट्स टैम्पल में आंकड़ों के अनुसार यहाँ हर साल 4 मिलियन से भी ज्यादा पर्यटक यात्रा के लिए आते है।

क़ुतुब मीनार दिल्ही :

भारत में दिल्ली शहर के महरौली में ईंट से बनी, विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। दिल्ली को भारत का दिल कहा जाता है, यहाँ पर कई प्राचीन इमारते और धरोहर स्थित है। इन पुरानी और खास इमारतों में से एक इमारत में स्थित है जिसका नाम है क़ुतुब मीनार, जो भारत और विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। क़ुतुब मीनार भारत का सबसे खास और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।क़ुतुब मीनार दिल्ली के दक्षिण इलाक़े में महरौली में है। यह इमारत हिंदू-मुग़ल इतिहास का एक बहुत खास हिस्सा है।

कुतुब मीनार को यूनेस्को द्वारा भारत के सबसे पुराने वैश्विक धरोहरों की सूचि में भी शामिल किया गया है। इस आर्टिकल में हम क़ुतुब मीनार की जानकारी और कुछ खास और दिलचस्प बातों पर पर नज़र डालेंगे। क़ुतुब मीनार दुनिया की सबसे बड़ी ईटों की दीवार है जिसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है।मोहाली की फतह बुर्ज के बाद भारत की सबसे बड़ी मीनार में क़ुतुब मीनार का नाम आता है। क़ुतुब मीनार के आस-पास परिसर क़ुतुब काम्प्लेक्स है जो कि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है।

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राट्रीय स्मारक इंडिया गेट :

दिल्ही के सभी प्रमुख आकर्षणों में से इंडिया गेट सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। इंडिया गेट के नाम से प्रसिद्ध अखिल भारतीय युद्ध स्मारक की भव्य संरचना विस्मयकारी है। और इसकी तुलना अक्सर फ्रांस में आर्क डी ट्रायम्फ, मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया और रोम में कॉन्सटेंटाइन के आर्क (मेहराब) से की जाती है। दिल्ली शहर के केंद्र में स्थित, इंडिया गेट देश के राष्ट्रीय स्मारकों में सबसे लंबा यानि 42 मीटर लंबा ऐतिहासिक स्टेकचर सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था और यह देश के सबसे बड़े युद्ध स्मारक में से एक है।इंडिया गेट हर साल गणतंत्र दिवस परेड की मेजबानी के लिए भी प्रसिद्ध है।

 इस्कॉन मंदिर :

इस्कॉन मंदिर को दूसरे हरे राम हरे कृष्ण के नाम से पहचाना जाता है।

यह इस्कॉन मंदिर कृष्ण को समर्पित है।

इस्कॉन मंदिर की स्थापना ई.स 1998 में अच्युत कनविंडे ध्वारा निर्माणित किया गया है।

यह मंदिर नई दिल्ही के कैलास क्षेत्र के पूर्व दिशा में हरे कृष्णा पर्वत पर स्थित है।

यह स्थान सेंटर हॉल हरे राम और हरे कृष्ण की स्वर्गीय धुन का उल्लेख दर्शाता है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर
स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

दिल्ही का लाल किला :

दिल्ली का लाल किला भारत में दिल्ली शहर का एक ऐतिहासिक किला है। यह किले का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था। लाल किला भारत में पर्यटकों के लिए एक बहुत खास जगह है।दूसरे देशों से आने वाले पर्यटक भी भारत के इस किले को देखना बेहद पसंद करते हैं। इस किले के बारे में बात करें तो आपको बता दें कि 1856 तक इस किले पर लगभग 200 वर्षों तक मुगल वंश के सम्राटों का राज था।यह के केंद्र में स्थित है इसके साथ ही यहाँ कई संग्रहालय हैं यह किला बादशाहों और उनके घर के अलावा यह मुगल राज्य का औपचारिक और राजनीतिक केंद्र था और यह क्षेत्र खास तौर से होने वाली सभा के लिए स्थापित किया गया था।

जंतर मंतर दिल्ही :

जंतर मंतर दिल्ही में संसद मार्ग नई दिल्ही के दक्षिणी कनॉट सर्किल में मौजूद है। दिल्ही का जंतर मंतर विशाल वेधशाला है। यह स्थान जंतर मंतर को प्राचीन समय में समय और स्थान के अध्ययन की मदद में और मुर्हुत देखने के लिए इसका निर्माण करवाया गया था। यह दिल्ही के जंतर मंतर का निर्माण महाराजा जयसिंह ने करवाया था। महाराजा जयसिंह ने ई.स 1724 में जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। और यह जंतर मंतर जयपुर ,उज्जैन ,वाराणसी और मथुरा में मौजूद यह पांच ऐसी वेधशालाओ में से एक माना जाता है।

Akshardham Temple दिल्ली कैसे पहुंचे –

दिल्ही का स्वामीनारायण मंदिर प्रसिद्ध है आप इस मंदिर की यात्रा करना चाहते है।

तो आपको बता दे की ब्लू लाइन मेट्रो के सहायता से पहुँच सकते है।

यह मेट्रो नॉएडा की तरफ जाती है और बाद अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन स्थान पर जाती है।

इसके बाद आप रिक्शा या टैक्सी और कैब के इस्तेमाल से स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर तक पहुँच सकते है। 

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हवाई मार्ग से अक्षरधाम मंदिर दिल्ही कैसे पहुंचे :

दिल्ही के akshardham temple  हवाई मार्ग से जाने के लिए दिल्ही में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित है यह हवाई अड्डा दुनियाके बड़े हवाई अड्डों में से एक है। इंदिरा हवाई अड्डे में तीन ऑपरेशन टर्मिनल है। टर्मिनल 1 C / 1 D यह टर्मिनल गरेलु टर्मिनल है जिसका उपयोग इंडिगो ,स्पाइसजेट और गोएयर का इस्तेमाल किया जाता है। 

टर्मिनल 3  ध्वारा आंतरराट्रीय उड़ानों और घरेलु प्राइवेट और एयर इंडिया और टर्मिनल 2 के इस्तेमाल से किये जाने वाले टर्मिनल 3 के दौरान किया जाता है। हवाई अड्डे से प्रमुख शहर की यात्रा करने के लिए पर्यटक टर्मिनल 3 से दौड़ने वाली दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस  इस्तेमाल कर सकते है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी या कैब के इस्तेमाल से आप अक्षरधाम मंदिर तक पहुँच सकते है। 

ट्रेन मार्ग से Akshardham Temple दिल्ही कैसे पहुंचे :

अक्षरधाम मंदिर जाने के लिए आपने akshardham metro station का चुनाव किया हैं।

तो हम आपको बता दें कि दिल्ली रेलवे जंक्शन पुरानी दिल्ली में स्थित हैं।

इसके अलावा हज़रत निज़ामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशन दिल्ली के अन्य रेलवे स्टेशन हैं।

आप इनमे से किसी भी स्टेशन का चुनाव कर सकते हैं।

दिल्ली में चलने वाले स्थानीय साधनों की मदद से अक्षरधाम मंदिर तक पहुँच सकते हैं। 

सड़क मार्ग से अक्षरधाम मंदिर दिल्ही कैसे पहुंचे :

akshardham temple जाने के लिए आपने सड़क मार्ग की योजना बनाई हैं तो बता दें कि दिल्ली अपने आसपास के सभी शहरो से सड़क मार्ग के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ। आप बस या अन्य किसी साधन से अक्षरधाम  मंदिर तक आसानी से पहुँच जाएंगे।  दिल्ही में कई बस टर्मिनल परिवहन निगम है जिसमे कश्मीरी गेट जिसको आईएसबीटी जिसेको “आईएसबीटी के नाम से भी पहचाना जाता है और यह दिल्ही का सबसे बड़ा टर्मिनल है। 

इसके अलावा दिल्ही में सराय काले खान आईएसबीटी जो हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के नजदीकी है।

आनंद विहार आईएसबीटी, बीकानेर हाउस और इंडिया गेट के नजदीकी है।

मंडी हाउस , बाराखंभा रोड के नजदीकी मजनू दी टीला स्थित है।

यहा से आप टैक्सी या कैब के इस्तेमाल करके अक्षरधाम मंदिर तक पहुँच सकते है। 

Akshardham Temple Delhi Map –

Akshardham Temple Video –

अक्षरधाम मंदिर के अन्य प्रश्न – 

1 . अक्षरधाम मंदिर कहा स्थित है ?

akshardham temple भारत की राजधानी दिल्ही में स्थित है। 

2 . अक्षरधाम मंदिर का निर्माण किस वास्तुशैली में किया गया है ?

दिल्ही के स्वामीनारायण akshardham mandir का निर्माण में भारतीय वास्तुकला की प्राचीन शैली में किया गया है।

अक्षरधाम मंदिर के निर्माण में महर्षि वास्तु की वास्तुकला के सिद्धांतो पर सफलता पूर्वक काम किया है। 

3 . akshardham temple  कितने क्षेत्र में फैला हुवा है ?

अक्षरधाम मंदिर का निर्माण 100 एकड़ के क्षेत्र में किया गया है।

4 . दिल्ही के अक्षरधाम मंदिर में किसकी और कितनी प्रतिमाये स्थापित है ?

मंदिर में भिन्न-भिन्न देवताओंकी प्रतिमाये और आचार्यो ,संत-साधु और भारत के महान महापुरुषोंकी प्रतिमाये करीबन 20,000 प्रतिमाये स्थापित है। 

5 . अक्षरधाम मंदिर में कितने बड़े गुंबद है ?

अक्षरधाम मंदिर में करीबन 9 बड़े गुंबद है। 

6 . अक्षरधाम मंदिर में कौनसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है ?

akshardham मंदिर में स्टील और कंक्रीट के अलावा राजस्थानी गुलाबी बलुआ पथ्थरो से

और इटालवी करारा संगेमरमर से मंदिर को निर्मित किया गया है। 

7 . अक्षरधाम मंदिर के आकर्षक स्थान ?

संगीत फाउंटेन या वॉटर शो , बोट राइड , नीलकंठ दर्शन , नारायण सरोवर मंदिर के आकर्षक स्थान है। 

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Conclusion –

दोस्तों उम्मीद करता हु आपको मेरा ये लेख akshardham temple delhi history के बारे में पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के द्वारा हमने akshardham temple के बारे में जानकारी दी अगर आपको इस तरह के अन्य ऐतिहासिक स्थल और प्राचीन स्मारकों की जानकरी पाना चाहते है तो आप हमें कमेंट करे। आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा बताइयेगा और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

3 thoughts on “Akshardham Temple History In Hindi Delhi | स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर”

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